मुंबई के आजाद मैदान में दूसरे दिन भी नर्सों का प्रदर्शन, ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ आंदोलन तेज
Maharashtra Government Nurses Continue Protest At Mumbai’s Azad Maidan Against Administrative Transfer Policy, Warn Of Work Stoppage
महाराष्ट्र की सरकारी नर्सें प्रशासनिक ट्रांसफर पॉलिसी के विरोध में मुंबई के आजाद मैदान में दूसरे दिन भी प्रदर्शन कर रही हैं।
महाराष्ट्र की सरकारी नर्सों का मुंबई के आजाद मैदान में प्रशासनिक ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ आंदोलन दूसरे दिन भी जारी रहा। राज्यभर से बड़ी संख्या में नर्सें इस प्रदर्शन में शामिल हुईं और सरकार से ट्रांसफर नीति वापस लेने की मांग की।
महाराष्ट्र स्टेट नर्सेस एसोसिएशन (MSNA) के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा लागू की जा रही प्रशासनिक ट्रांसफर नीति के कारण हजारों नर्सों और उनके परिवारों पर मानसिक और सामाजिक दबाव बढ़ रहा है। संगठन का कहना है कि नर्सिंग स्टाफ का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं का है, जिन्हें नौकरी के साथ परिवार, बच्चों और बुजुर्गों की जिम्मेदारी भी संभालनी पड़ती है।
प्रदर्शनकारी नर्सों ने कहा कि फिलहाल सभी नर्सें नियमित रूप से अस्पतालों में अपनी ड्यूटी कर रही हैं, लेकिन अगर सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो 22 मई के बाद राज्यव्यापी ‘काम बंद आंदोलन’ शुरू किया जा सकता है।
MSNA की महासचिव सुमित्रा टोटे ने कहा कि नर्सिंग कर्मचारियों के लिए पहले से ही विभागीय स्तर पर हर तीन साल में ट्रांसफर की व्यवस्था मौजूद है, ऐसे में अतिरिक्त प्रशासनिक ट्रांसफर की जरूरत नहीं है। उन्होंने दावा किया कि बार-बार ट्रांसफर होने से नर्सों के पारिवारिक जीवन, बच्चों की पढ़ाई और सामाजिक स्थिरता पर असर पड़ता है।
नर्सिंग संगठनों ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों से उनकी विभिन्न मांगें लंबित हैं। इनमें रिक्त पदों पर भर्ती, पदोन्नति, भत्तों में बढ़ोतरी, संविदा भर्ती बंद करना और सेवा शर्तों में सुधार शामिल हैं। संगठन का कहना है कि सरकार हर बार केवल आश्वासन देती है लेकिन ठोस फैसला नहीं लिया जाता।
प्रदर्शनकारी नर्सों ने कोविड-19 महामारी के दौरान अपनी सेवाओं का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि महामारी के कठिन समय में नर्सों ने जान जोखिम में डालकर मरीजों की सेवा की थी, लेकिन आज भी उनकी मूल मांगें अधूरी हैं।
आजाद मैदान में यह आंदोलन 20 मई तक जारी रहने की संभावना है। यदि सरकार और नर्सिंग संगठनों के बीच बातचीत सफल नहीं हुई तो आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका असर पड़ सकता है।


