मुंबई में पेट्रोल-डीजल ₹3 महंगा, ईरान युद्ध और वैश्विक तेल संकट का असर; जानिए नए रेट
Mumbai Fuel Prices Surge As India Raises Petrol And Diesel Rates Amid Escalating Iran War And Global Oil Supply Crisis
ईरान युद्ध और वैश्विक तेल संकट के कारण मुंबई समेत देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी। जानिए नए रेट और असर।
मध्य पूर्व में जारी ईरान युद्ध और वैश्विक कच्चे तेल संकट के बीच देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ा इजाफा किया गया है। शुक्रवार से मुंबई समेत देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल लगभग ₹3 प्रति लीटर महंगे हो गए हैं। यह बढ़ोतरी पिछले चार वर्षों में पहली बड़ी ईंधन मूल्य वृद्धि मानी जा रही है।
नई दरों के अनुसार मुंबई में पेट्रोल की कीमत बढ़कर लगभग ₹106.68 प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल करीब ₹94 प्रति लीटर के आसपास पहुंच गया है। दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई में भी कीमतों में समान बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान युद्ध के कारण Strait of Hormuz क्षेत्र में तेल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है। सप्लाई बाधित होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जिसके बाद भारतीय तेल कंपनियों पर भारी दबाव बढ़ गया।
Indian Oil, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum जैसी सरकारी तेल कंपनियों ने लंबे समय तक कीमतें स्थिर रखीं, लेकिन बढ़ते नुकसान के कारण अब रेट बढ़ाने का फैसला लिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व संकट जल्द खत्म नहीं हुआ तो आने वाले समय में और भी मूल्य वृद्धि देखने को मिल सकती है।
ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ने वाला है। ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स, सब्जियां, दूध और अन्य रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं। अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि इससे महंगाई दर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
सरकार ने लोगों से ईंधन बचत और अनावश्यक यात्रा कम करने की अपील की है। कुछ राज्यों और सरकारी विभागों में Work From Home और यात्रा नियंत्रण जैसे विकल्पों पर भी चर्चा शुरू हो गई है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक संकट का असर घरेलू बाजार पर तेजी से दिखाई देता है। फिलहाल तेल बाजार की स्थिति पर सरकार और तेल कंपनियां लगातार नजर बनाए हुए हैं।


