‘गोकुल’ मिल्क यूनियन एडमिनिस्ट्रेटर अपॉइंटमेंट केस पर कल सुनवाई, कोल्हापुर कोर्ट के फैसले पर फोकस

Kolhapur Awaits Key Court Verdict As High Court To Hear Plea Challenging Administrator Appointment In Gokul Milk Union

‘गोकुल’ मिल्क यूनियन एडमिनिस्ट्रेटर अपॉइंटमेंट केस पर कल सुनवाई, कोल्हापुर कोर्ट के फैसले पर फोकस

गोकुळ दूध संघ में प्रशासक नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को हाईकोर्ट की कोल्हापुर सर्किट बेंच में सुनवाई होगी।

कोल्हापुर के चर्चित Gokul Milk Union में प्रशासक नियुक्ति मामले पर मंगलवार को मुंबई हाईकोर्ट की कोल्हापुर सर्किट बेंच में अहम सुनवाई होने जा रही है। इस सुनवाई पर पूरे कोल्हापुर जिले की नजरें टिकी हुई हैं। 

मामला उस प्रशासनिक मंडल की नियुक्ति से जुड़ा है जिसे राज्य सरकार ने ‘गोकुळ’ दूध संघ के निदेशक मंडल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नियुक्त किया था। पूर्व निदेशकों ने आरोप लगाया है कि उन्हें बिना उचित सूचना दिए कानून का सहारा लेकर प्रशासक नियुक्त कर दिया गया। इसके खिलाफ उन्होंने अदालत में याचिका दायर की है। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘गोकुळ’ दूध संघ के निदेशकों का कार्यकाल 3 मई 2026 को समाप्त हुआ था। इसके बाद राज्य सरकार ने तत्काल प्रशासकीय मंडल नियुक्त किया। इस फैसले को राष्ट्रवादी कांग्रेस, शिंदे गुट और अन्य समूहों से जुड़े पूर्व निदेशकों ने पहले सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें हाईकोर्ट में जाने की सलाह दी। 

इसके बाद पूर्व निदेशकों और पुगांव स्थित स्वामी समर्थ सहकारी दूध संस्था की ओर से कोल्हापुर सर्किट बेंच में याचिका दाखिल की गई। पिछली सुनवाई में अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को सोमवार तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। अब मंगलवार को होने वाली सुनवाई में अदालत का फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 
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यह विवाद केवल प्रशासनिक नियुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘गोकुळ’ दूध संघ की आगामी चुनाव प्रक्रिया से भी जुड़ा हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सहकारी चुनाव प्रक्रिया और सदस्य संस्थाओं की सूची को लेकर भी विवाद बना हुआ है। इसी कारण चुनाव प्रक्रिया में देरी होने की संभावना जताई जा रही है। 

राजनीतिक हलकों में भी यह मुद्दा काफी गर्म है। राज्य के मंत्री Hasan Mushrif ने हाल ही में दावा किया था कि प्रशासक मंडल आने के बाद दूध संकलन में करीब 60 हजार लीटर की कमी आई है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी और चारे की कमी भी इसका कारण हो सकती है। 


‘गोकुळ’ दूध संघ के 63 साल के इतिहास में पहली बार प्रशासक नियुक्त किया गया है। इस वजह से मामला सहकार और राजनीति दोनों दृष्टि से संवेदनशील बन गया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अदालत प्रशासक नियुक्ति को वैध मानती है या उस पर रोक लगाती है। अदालत का फैसला आने वाले दिनों में ‘गोकुळ’ दूध संघ की राजनीति और चुनावी समीकरणों पर बड़ा असर डाल सकता है।

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