मुंबई का पहला डिटेंशन सेंटर शुरू होते ही हुआ फुल, भोईवाडा केंद्र में बढ़ा दबाव

Maharashtra’s First Detention Centre In Mumbai Faces Space Crunch Within Weeks As Deportation Delays And Crackdowns Intensify

मुंबई का पहला डिटेंशन सेंटर शुरू होते ही हुआ फुल, भोईवाडा केंद्र में बढ़ा दबाव

मुंबई के भोईवाडा में शुरू हुआ महाराष्ट्र का पहला डिटेंशन सेंटर कुछ ही हफ्तों में लगभग भर गया है। डिपोर्टेशन में देरी और कार्रवाई तेज होने से दबाव बढ़ा है।

मुंबई के Bhoiwada इलाके में शुरू किया गया महाराष्ट्र का पहला डिटेंशन सेंटर शुरू होने के कुछ ही हफ्तों के भीतर क्षमता के दबाव का सामना करने लगा है। अधिकारियों के मुताबिक, अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ तेज कार्रवाई और डिपोर्टेशन प्रक्रिया में देरी के कारण सेंटर तेजी से भर गया है। 

यह डिटेंशन सेंटर मार्च 2026 में चालू किया गया था। दो मंजिला इस सुविधा में करीब 40 कमरे हैं और लगभग 80 लोगों को रखने की क्षमता है। इसे उन विदेशी नागरिकों के लिए बनाया गया है जो डिपोर्टेशन प्रक्रिया पूरी होने तक अस्थायी रूप से रखे जाते हैं। 

पुलिस सूत्रों के अनुसार, केंद्र खुलने के कुछ ही दिनों में यहां बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया। अधिकारियों का कहना है कि डिपोर्टेशन प्रक्रिया लंबी होने के कारण नए लोगों के लिए जगह की समस्या पैदा हो रही है। नागरिकता सत्यापन, दूतावास समन्वय, यात्रा दस्तावेज और सीमा हस्तांतरण जैसी प्रक्रियाओं में कई सप्ताह या महीने लग जाते हैं। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुंबई पुलिस ने 2025 में 1000 से अधिक बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लेकर डिपोर्ट किया था, जबकि 2026 में भी कई सौ लोगों को पकड़ा जा चुका है। मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई में झुग्गी बस्तियों, निर्माण स्थलों, लेबर हब और किराये के मकानों में बड़े स्तर पर सत्यापन अभियान चलाए जा रहे हैं। 

अधिकारियों का कहना है कि इस सेंटर के शुरू होने से पहले विदेशी नागरिकों को लंबे समय तक पुलिस स्टेशनों या लॉकअप में रखना पड़ता था। कई मामलों में लोगों को पुलिस स्टेशन की सीमा में रहने और नियमित रिपोर्टिंग करने के निर्देश दिए जाते थे। नई सुविधा का उद्देश्य पुलिस स्टेशनों पर बढ़ते दबाव को कम करना था। 

डिटेंशन सेंटर में रहने वालों के लिए भोजन, बंक बेड, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। सुरक्षा की जिम्मेदारी महाराष्ट्र स्टेट सिक्योरिटी फोर्स और मुंबई पुलिस के पास है। 

हालांकि मानवाधिकार संगठनों और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ऐसे डिटेंशन सेंटरों को लेकर चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि डिपोर्टेशन और हिरासत की प्रक्रिया में पारदर्शिता और कानूनी सहायता सुनिश्चित की जानी चाहिए। 

राज्य सरकार ने पहले ही नवी मुंबई में 213 क्षमता वाले स्थायी डिटेंशन सेंटर की मंजूरी दी है। अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा दबाव को देखते हुए भविष्य में और बड़ी सुविधाओं की जरूरत पड़ सकती है। 

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