पिंपरी-चिंचवड महापालिका के ₹60 करोड़ घोटाले में ‘सेटिंग’ के आरोप, प्रशासन और सत्ताधारियों पर उठे सवाल

Questions Raised Over Alleged Nexus Between Administration And Political Leaders In ₹60 Crore Pimpri-Chinchwad Municipal Scam

पिंपरी-चिंचवड महापालिका के ₹60 करोड़ घोटाले में ‘सेटिंग’ के आरोप, प्रशासन और सत्ताधारियों पर उठे सवाल
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पिंपरी-चिंचवड महापालिका के कथित ₹60 करोड़ घोटाले में प्रशासन और सत्ताधारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। फर्जी उपसूचनाओं के जरिए ठेकेदारों को भुगतान का आरोप है।

 महाराष्ट्र के Pimpri Chinchwad Municipal Corporation में सामने आए कथित ₹60 करोड़ के वित्तीय घोटाले ने अब बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद खड़ा कर दिया है। जांच में फर्जी उपसूचनाओं (Bogus Sub-Notices) के जरिए ठेकेदारों को करोड़ों रुपये के भुगतान का मामला सामने आने के बावजूद अब तक किसी पर ठोस आपराधिक कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन और सत्ताधारी नेताओं की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। 

रिपोर्ट्स के अनुसार, जांच समिति की 243 पन्नों की रिपोर्ट में 14 फर्जी उपसूचनाओं के माध्यम से करीब ₹60.18 करोड़ के भुगतान का उल्लेख किया गया है। इस मामले में मुख्य लेखा एवं वित्त अधिकारी Praveen Jain का नाम लगातार चर्चा में है। 

मामले ने नया मोड़ तब लिया जब प्रवीण जैन को जबरन अवकाश (Compulsory Leave) पर भेजने के आदेश को उन्होंने प्रशासनिक न्यायाधिकरण (MAT) में चुनौती देकर रद्द करा लिया। इसके बाद महापालिका प्रशासन की कार्रवाई और उसकी कानूनी तैयारी पर सवाल खड़े हो गए। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि कार्रवाई जानबूझकर कमजोर रखी गई ताकि बड़े अधिकारियों और राजनीतिक लोगों को बचाया जा सके। 


महापालिका की सामान्य सभा में भी यह मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। कई नगरसेवकों ने जांच रिपोर्ट सदन में पेश करने की मांग की, लेकिन आयुक्त डॉ. विजय सूर्यवंशी ने यह कहते हुए रिपोर्ट पेश करने से इनकार कर दिया कि मामला सरकार को भेजा जा चुका है और आगे का फैसला राज्य सरकार करेगी। 

विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि फर्जी दस्तावेजों और उपसूचनाओं के जरिए ठेकेदारों को भुगतान किया गया और इस पूरे नेटवर्क में कुछ अधिकारी, ठेकेदार तथा सत्ताधारी और विपक्षी गुटों के नगरसेवक भी शामिल हो सकते हैं। 

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रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि कई नगरसेवकों के हस्ताक्षर इन कथित फर्जी उपसूचनाओं पर पाए गए हैं। इससे पूरे मामले को दबाने और “सेटलमेंट” करने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। 

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भाजपा और अन्य राजनीतिक दलों के भीतर भी इस मामले को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। कुछ नेताओं ने इसे प्रशासनिक भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण बताया है, जबकि कुछ नेताओं का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष आपराधिक जांच होनी चाहिए। 

फिलहाल राज्य सरकार की अगली कार्रवाई और संभावित आपराधिक जांच पर सबकी नजर बनी हुई है। शहर में यह चर्चा तेज है कि क्या यह मामला केवल विभागीय जांच तक सीमित रहेगा या फिर इसमें बड़े स्तर पर FIR और गिरफ्तारी भी होगी।

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