मुंबई से बंगाल तक जुड़ रहे तार, एनसीआर के दो सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों पर भी संदेह
Links from Mumbai to Bengal, suspicion also looms over two super-specialty hospitals in the NCR.
उत्तर प्रदेश के कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट करने वाले गिरोह का खुलासा होने और जांच के दायरे के विस्तार के साथ एक चौंकाने वाला गठजोड़ सामने आया है, जिसमें अपात्र लोग, निजी अस्पताल और बहुराज्यीय और संभवतः अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क शामिल होने की आशंका है. पुलिस ने शुक्रवार को इस बारे में जानकारी दी है.
कानपुर : उत्तर प्रदेश के कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट करने वाले गिरोह का खुलासा होने और जांच के दायरे के विस्तार के साथ एक चौंकाने वाला गठजोड़ सामने आया है, जिसमें अपात्र लोग, निजी अस्पताल और बहुराज्यीय और संभवतः अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क शामिल होने की आशंका है. पुलिस ने शुक्रवार को इस बारे में जानकारी दी है.
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि शुरू में जिन चार मुख्य आरोपियों को क्वालिफाइड डॉक्टर समझा जा रहा था, वे अयोग्य चिकित्सक निकले. इनमें रोहित तिवारी उर्फ राहुल (तकनीशियन), अमित उर्फ अनुराग (फिजियोथेरेपिस्ट), अफजल (फार्मेसी ऑपरेटर) और वैभव (डेंटिस्ट) शामिल हैं. उन्होंने बताया कि चारों फिलहाल फरार हैं.
जांच में छह अवैध किडनी ट्रांसप्लांट की पुष्टि
जांच में अब तक कम से कम छह अवैध किडनी ट्रांसप्लांट की पुष्टि हुई है, जिनमें से पांच आहूजा अस्पताल में और एक मेडलाइफ फेसिलिटी से जुड़ा पाया गया है. हालांकि अधिकारियों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है.
एक चिंताजनक खुलासे में, करीब एक साल पहले अवैध ट्रांसप्लांट कराने वाली एक महिला की बाद में मौत हो गई. पुलिस के अनुसार, ट्रांसप्लांट को छिपाने के लिए उसे गॉलब्लैडर के इलाज के बहाने एक बड़े अस्पताल में शिफ्ट किया गया था.
एनसीआर के दो अस्पतालों पर भी संदेह
जांच के दौरान राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के दो सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल भी संदेह के घेरे में आए हैं, जहां कथित रूप से फर्जी मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर मरीजों को भेजा जाता था. अधिकारियों के मुताबिक, प्रत्यारोपण के मामलों को अक्सर गॉलब्लैडर के इलाज के रूप में दिखाया जाता था.
पुलिस ने कानपुर के एक बिचौलिए साहिल की पहचान इस गिरोह की अहम कड़ी के रूप में की है, जो कथित तौर पर बाजार दर से करीब आधी कीमत पर गुर्दे के ट्रांसप्लांट का प्रबंध कर दाता और मरीज को जोड़ता था.
संगठित तरीके से काम करता था गिरोह
अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह अत्यंत संगठित तरीके से संचालित हो रहा था, जिसमें अलग-अलग टीमें दाता, मरीज, लॉजिस्टिक्स और सर्जरी का काम संभालती थीं. बताया जाता है कि चिकित्सा कर्मी अन्य शहरों से आकर कुछ घंटों में ऑपरेशन कर वापस लौट जाते थे.
जांच में दिल्ली, मुंबई, पश्चिम बंगाल और हरियाणा सहित कई राज्यों से जुड़े तार सामने आए हैं. साथ ही यह भी संकेत मिले हैं कि कुछ विदेशी नागरिकों ने भी इस अवैध नेटवर्क के माध्यम से ट्रांसप्लांट कराया हो सकता है.
अब तक इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें दो ऑपरेशन थिएटर तकनीशियन भी शामिल हैं, जिन्हें पहले सर्जरी में सहयोग और उपकरण उपलब्ध कराने के आरोप में पकड़ा गया था.


