दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की खुल गई पोल, घटिया निर्माण, रिपेयरिंग-पैचिंग पर उठे सवाल; एनएचएआई ने दिया जवाब
The Delhi-Mumbai Expressway has been exposed, raising questions about poor construction, repairs, and patching; NHAI responds.
देश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे पूरी तरह खुलने से पहले ही सवालों के घेरे में है। निर्माण की गुणवत्ता और डिजाइन में गड़बड़ियां इसका संकेत दे रहे हैं कि मार्ग को विकसित करने के दौरान हाईस्पीड मानकों के आधार को तरजीह नहीं दी गई। जी, हां हम बात 1350 किलोमीटर लंबे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की बात कर रहे हैं, जो हरियाणा के सोहना से शुरू होकर सूरत तक बनाया गया है।
दिल्ली : देश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे पूरी तरह खुलने से पहले ही सवालों के घेरे में है। निर्माण की गुणवत्ता और डिजाइन में गड़बड़ियां इसका संकेत दे रहे हैं कि मार्ग को विकसित करने के दौरान हाईस्पीड मानकों के आधार को तरजीह नहीं दी गई। जी, हां हम बात 1350 किलोमीटर लंबे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की बात कर रहे हैं, जो हरियाणा के सोहना से शुरू होकर सूरत तक बनाया गया है। हालांकि, इसके कई हिस्से यातायात के लिए खोल दिए गए हैं और कई जगह निर्माण कार्य जारी है। जहां पर सड़क को ट्रैफिक के लिए खोला गया है, वहां से बेहतर रिव्यू नहीं मिले हैं। कई बार रोड धंसने और कंक्रीट के उखड़ने की खबरें सामने आ चुकी हैं। एक्सप्रेसवे अभी तक पूर्णतया खुला भी नहीं है और पैंचिग का कार्य शुरू कर दिया गया है, जिसको लेकर एक यूजर ने एक्स पर वीडियो साझा किया है।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसे मुख्य तौर पर 8 लेन का एक्सेस कंट्रोल ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है। भविष्य में इसे ट्रैफिक की जरूरतों का ख्याल रखते हुए 12 लेन तक बढ़ाया जा सकता है। एक्सेस कंट्रोल का मतलब है कि एक्सीडेंट से मुक्त सड़क! लेकिन अभी तक यातायात के दौरान कई बड़े हादसे सामने आए हैं। इसका कारण सड़क में कंक्रीट का उखड़ना और तेज रफ्तार गाड़ियों का उछलना है। क्योंकि निर्माण में इस्तेमाल की गई सामाग्री उभरी हुई है, जिससे सड़क की सतह बेहद खराब और गाड़ी चलाते समय गाड़ियों का बैलेंस बिगड़ता है।
एक्स यूजर ने दिखाई एक्सप्रेसवे की हकीकत
हाल ही में एक्सप्रेसवे के बड़ोदरा और सूरत खंड के बीच सफर कर रहे एक चालक ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर सड़क निर्माण और गुणवत्ता को स्पष्ट तौर पर दिखाया है। यूजर ने दावा कि हाईटेक एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्से बेहद खराब हैं और निर्माण की क्वालिटी निराश करने वाली है। पोस्ट में कहा कि सड़क को 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के तहत डिजाइन किया गया है, लेकिन 100 किमी. के ऊपर मीटर पहुंचने पर गाड़ी पर जोर के झटके महसूस किए जाते हैं और कई जगहों पर सीमेंट और कंक्रीट उखड़ गई है। यूजर मानक के विपरीत सड़क की हालत देख कुशल इंजीनियरिंग पर भी असहजता जताई और कहा कि इससे देश में बुनियादी ढांचे के प्रति उत्साही लोगों का मनोबल गिरता है। उसने बड़ी परियोजना में व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार का अंदेशा जताया।


