कोलकाता : फर्जी मतदाता विवाद में एफआईआर दर्ज करने के आदेश को वापस लेने की मांग
Kolkata: Demand to withdraw order to register FIR in fake voter controversy
पश्चिम बंगाल सरकार ने फर्जी (घोस्ट) मतदाता विवाद में निर्वाचन अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने के आदेश को वापस लेने की मांग की है। राज्य सरकार ने चुनाव आयोग से कहा है कि मामूली प्रक्रियागत चूक पर आपराधिक कार्रवाई करना अनुचित और अत्यधिक सख्त कदम होगा।
कोलकाता : पश्चिम बंगाल सरकार ने फर्जी (घोस्ट) मतदाता विवाद में निर्वाचन अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने के आदेश को वापस लेने की मांग की है। राज्य सरकार ने चुनाव आयोग से कहा है कि मामूली प्रक्रियागत चूक पर आपराधिक कार्रवाई करना अनुचित और अत्यधिक सख्त कदम होगा।
यह निर्देश राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के जरिये भेजा गया था, लेकिन राज्य के गृह विभाग ने सीईओ कार्यालय को पत्र लिखकर इसे निरस्त करने का अनुरोध किया है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पहले ही की जा चुकी है और उन्हें निलंबित भी किया गया है, ऐसे में पुलिस मामला दर्ज करना असंगत है। यह विवाद मोयना (पूर्व मेदिनीपुर) और बरुईपुर पूर्व में मतदाता सूची में कथित फर्जी नाम शामिल होने से जुड़ा है, जो विशेष सघन पुनरीक्षण प्रक्रिया से पहले सामने आया था।
निर्वाचन आयोग ने इन क्षेत्रों के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के खिलाफ निलंबन, विभागीय कार्रवाई और प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए थे। बरुईपुर पूर्व में एक संविदा डाटा प्रविष्टि संचालक के खिलाफ भी प्राथमिकी का आदेश दिया गया था, जिसने बाद में इस्तीफा दे दिया। राज्य सरकार का कहना है कि महाधिवक्ता की कानूनी सलाह के अनुसार यह मामला प्रशासनिक स्तर पर सुलझाया जा सकता है। सीईओ कार्यालय ने राज्य की आपत्ति आयोग को भेज दी है। फिलहाल प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है और अंतिम फैसला आयोग को लेना है।


