माहिम वार्ड 182: भाजपा बनाम शिवसेना (उद्धव गुट), बदले समीकरणों में सीधा मुकाबला
Mahim Ward 182: BJP vs Shiv Sena (Uddhav faction), direct contest in changed equations
मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका के वार्ड क्रमांक 182 में इस बार चुनावी मुकाबला भले ही सिर्फ चार उम्मीदवारों तक सीमित है, लेकिन इसके राजनीतिक मायने गहरे हैं। AIMIM इस बार चुनाव मैदान में नहीं है, जबकि 2017 में उसकी मौजूदगी ने नतीजों को सीधे तौर पर प्रभावित किया था।
2017 के बीएमसी चुनाव में इस वार्ड से शिवसेना के मिलिंद दत्ताराम वैद्य ने 6899 वोट (32.06%) हासिल कर जीत दर्ज की थी। दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के राजन सुरेश पार्कर रहे थे, जिन्हें 5476 वोट (25.45%) मिले थे। कांग्रेस को 3214 वोट (14.93%), भाजपा को 2685 वोट (12.47%) और AIMIM के रऊफ उस्मान मिठाईवाला को 1804 वोट (8.38%) प्राप्त हुए थे।
राजनीतिक विश्लेषण के अनुसार, AIMIM को मिले 1804 वोटों ने निर्णायक भूमिका निभाई थी। माना जाता है कि अगर AIMIM मैदान में न होती, तो इन वोटों का बड़ा हिस्सा मनसे और कांग्रेस की ओर जा सकता था। यही कारण रहा कि मजबूत वोट शेयर के बावजूद मनसे के राजन पार्कर जीत से 1423 वोट पीछे रह गए।
अब 2026 के चुनावी परिदृश्य में स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। शिवसेना विभाजन के बाद इस वार्ड में उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट ही शिवसेना का प्रतिनिधित्व कर रहा है, और उसे मनसे का समर्थन प्राप्त है। इससे 2017 में बंटे हुए मराठी वोटों के एकजुट होने की संभावना जताई जा रही है।
सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ यह है कि 2017 में मनसे उम्मीदवार रहे राजन सुरेश पार्कर इस बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा को उम्मीद है कि पार्कर की स्थानीय पकड़ और 2017 में मिले मनसे वोटों का एक हिस्सा इस बार उसके खाते में आएगा।
वहीं, AIMIM के मैदान में न होने से लगभग 1800 वोटों का सवाल खड़ा हो गया है। यह वोट बैंक किस ओर झुकेगा, यही इस सीट का नतीजा तय करने वाला अहम फैक्टर माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, वार्ड 182 का यह चुनाव सिर्फ उम्मीदवारों की लड़ाई नहीं, बल्कि 2017 में कटे वोटों के पुनर्संयोजन की परीक्षा है। बदले गठबंधन, पुराने आंकड़े और नए राजनीतिक समीकरण इस सीट को एक बार फिर कांटे की टक्कर में बदलते दिख रहे हैं।


