भिवंडी पावरलूम उद्योग 1 से 20 नवंबर तक मुकम्मल बंद रखने की घोषणा ।
Announcement of complete closure of Bhiwandi power loom industry from 1st to 20th November.
मुस्तकीम खान संवाददाता भिवंडी।
भिवंडी ।। भीषण मंदी व आर्थिक तंगी के संकट से जूझ रहा पावर लूम उद्योग बर्बादी के मुहाने पर खड़ा है। पावरलूम कारखाने में लगने वाले धागे की कीमतों में दर रोज उतार चढ़ाव की सट्टेबाजारी, और बढ़ती बिजली की कीमतें, तथा ग्रे क्लॉथ के लागत शुल्क में घाटे के बावजूद बाजार में कपड़े की मांग न होने से कपड़ा व्यापारी और पावरलूम मलिक बेहद परेशान है वहीं पावरलूम उद्योग को बचाने के लिए अब व्यापारी एकता ग्रुप ने 1 से 20 नवंबर तक शहर के सभी पावरलुम कारखाने पूरी तरह बंद रखने का ऐलान किया है ।
शहर के अंजुरफाटा इलाके के ओसवाल सागर हॉल (वाड़ी) में 'व्यापारी एकता ग्रुप' की ओर से पावरलूम संगठनों तथा पावरलूम उद्योग से जुड़े व्यापारियों की अहम बैठक का आयोजन पिछले दिनों किया गया था , इस बैठक में भिवंडी के प्रमुख पावरलूम संगठनों के पदाधिकारियों सहित 700 से अधिक पावरलूम मालिक और ग्रे कपड़ा व्यापारी उपस्थित थे। 3 घंटे से ज्यादा चली इस बैठक में पावरलूम से जुड़े अनेक लोगों ने अपने विचार रखे और सर्व सहमति भिवंडी के सभी पावरलूम कारखानों को आगामी 1 नंबर से 20 नवंबर 2023 तक पूर्ण रूप से बंद रखने का निर्णय लिया गया। व्यापारी एकता ग्रुप के जैन नरेश संचेती ने बताया कि भारत का सबसे बड़ा पावरलूम व कपड़ा उद्योग इन दिनों भयंकर मंदी से जूझ रहा है। लागत से कम दाम में कपड़ा बिक रहा है और भुगतान भी समय पर नहीं मिल रहा, जिसके कारण पावरलूम के मालिक अपने कारखाने बंद करने को मजबूर हैं। शांतिनगर पावरलुम एसोसिएशन के मन्नान सिद्दीकी ने कहा कि पिछले 6 वर्षो में भिवंडी पावर लूम की हालत सब से गंभीर है भंगार के भाव में लूम बेचे जा रहे है और हालात ऐसे ही रही तो भिवंडी खाली हो जाएगा । इस लिए 20 दिन के लिए लूम उद्योग बंद करने का ऐलान किया गया है क्योंकि कपड़ो का स्टॉक बहुत ज्यादा हो गया हैं जो विक्री नही हो रहा है । एक महीने के लिए भिवंडी बंद होने से कई करोड़ की जीएसटी का नुकसान सरकार को होगा । त्रिपति वांकटराजम सीरीपुरम ने बताया कि मंदी का सबसे बड़ा कारण कारखानों में लगने वाले धागों की कीमतों में प्रतिदिन उतार चढ़ाव सट्टा बाजारी,हर चीजों में मंहगाई की मार के साथ बिजली बिलों में इजाफा सबसे बड़ा कारण है। सरकार की उदासीनता से पावरलूम मालिकों को कोई भी आर्थिक मदद नहीं मिलती। जबकि देश में कृषि के बाद सबसे ज्यादा रोजगार पैदा देने वाला क्षेत्र पावरलूम उद्योग है । जबकि प्रवासी मजदूरों का कहना है कि पावरलूम बंद होने से कारीगरों की हालत ज्यादा खराब हो जाती है । खाने तक की समस्या बढ़ जाती है ।
शामसुंदर पेरीवाल ने बताया कि शहर के पावर लूम में मंदी की समस्या से सरकार को अवगत कराया गया लेकिन इस पर ध्यान न देने के कारण 20 दिनो की बंदी का ऐलान व्यापारी एकता ग्रुप की तरफ से पूरे शहर की संघटना से बात करने के बाद फैसला लिया गया है ।


