उद्धव ठाकरे की ओर से नागपुर का कलंक बताए जाने पर अब देवेंद्र फडणवीस ने पलटवार किया

Devendra Fadnavis retaliated after Uddhav Thackeray told the stigma of Nagpur

उद्धव ठाकरे की ओर से नागपुर का कलंक बताए जाने पर अब देवेंद्र फडणवीस ने पलटवार किया

मुंबई. महाराष्ट्र में बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस (BJP leader Devendra Fadnavis) और बालासाहेब ठाकरे (Balasaheb Thackeray) शिवसेना गुट के नेता उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के बीच वॉक युद्ध छिड़ गया है. उद्धव ठाकरे की ओर से नागपुर का कलंक बताए जाने पर अब देवेंद्र फडणवीस ने पलटवार किया है. फडणवीस ने कहा है कि उद्धव ठाकरे ने जिनपर गोबर खाने (eating cow dung) का आरोप लगाया था उन्हीं के साथ बैठकर खाना खाते नजर आए थे, ये कलंक नहीं है तो फिर क्या है.

देवेंद्र फडणवीस ने ट्वीट करते हुए उद्धव ठाकरे पर आठ बड़े आरोप लगाते हुए उनके लिए कलंक बताया है. उन्होंने कोरोना काल से लेकर वीर सावरकर तक का जिक्र किया है और बताया है कि उनकी नजर में उद्धव ठाकरे के लिए कलंक क्या-क्या हैं. राज्य के डिप्टी सीएम ने कहा है कि कोरोना की वजह से जब लोग मर रहे थे तब महाराष्ट्र की तत्कालीन सरकार में शवों के ले जाने के लिए खरीदे गए बैग में घोटाला हुआ था.

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दरअसल, विदर्भ दौरे के दूसरे दिन सोमवार को उद्धव ठाकरे नागपुर पहुंचे हुए थे. जहां, उन्होंने कार्यकर्ताओं के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए देवेंद्र फडणवीस पर जोरदार हमला बोला था और उन्हें नागपुर का कलंक बताया था. इसके साथ-साथ उन्होंने भाजपा पर हिंदुत्व के साथ गद्दारी करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि बीजेपी ने प्रभु राम के साथ, छत्रपति शिवजी के भगवा झंडे के साथ भी गद्दारी की है.

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देवेंद्र फडणवीस ने गिनाए कुल 8 कलंक जिन पर गोबर खाने का आरोप लगाया, उन्हीं के साथ बैठक खाना खा रहो. हमारे हिन्दू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे को जनाब के रूप में संबोधन सहन करना पड़ा. सुबह, दोपहर और शाम सावरकर का अपमान करने वालों के बगल में बैठना. वीर सावरकर का अपमान करने वालों के साथ उसी दिन रात को गले मिलना. जिसके ऊपर राज्य की सुरक्षा की जिम्मेदारी है वही पुलिस के जरिए वसूली करने लगे. पुलिस में मौजूद अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ता के जरिए देश के उद्योगपति के घर के बाहर विस्फोटक रखवाना और उसका बचाव करना कि क्या वो लादेन है. कोरोना काल मे लोग मर रहे थे और मृत शरीर के लिए लाए जा रहे बैग में घोटाला करना. लोकतंत्र के मंदिर में न बैठकर घर से ही राज्य चलाना और लोकतंत्र की खोखली बाते करना.

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