गर्मी के मौसम में महिलाओं में यूटीआई... बढ़ रही मरीजों की संख्या

UTI in women in summer season increasing number of patients

गर्मी के मौसम में महिलाओं में यूटीआई... बढ़ रही मरीजों की संख्या

अर्थात गर्मी के दिनों में कामकाज के सिलसिले में घर से बाहर निकलनेवाली ज्यादातर महिलाएं यूटीआई इंफेक्शन की चपेट में आ जाती हैं। गर्म और आर्द्र मौसम इस दर्दनाक समस्या के जोखिम को बढ़ा देता है। इस बीमारी के लक्षणों में पेशाब करते समय जलन, बार-बार पेशाब आना, पेशाब में खून आना, पेशाब से दुर्गंध आना, पेट में दर्द, जी मिचलाना और उल्टी होना शामिल है। मुंबई के अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल में यूरोलॉजिस्ट डॉ. जितेंद्र सखरानी ने कहा, ‘गर्मियों में बाहर घूमने जाना या पानी में तैरने जैसे कारक सभी उम्र के लोगों में यूटीआई के मामलों को बढ़ा सकते हैं।

मुंबई : गर्मी के मौसम में चिलचिलाती धूप और उमस की वजह से यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) की समस्या तेजी से बढ़ रही है। मूत्र पथ में संक्रमण की यह समस्या पुरुषों के मुकाबले महिलाओं व बच्चों में ज्यादा पाई जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि हर महीने करीब १५ से २० मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। तनावपूर्ण जीवनशैली के चलते महिलाओं में यूटीआई () एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आ रहा है। खासकर कामकाजी महिलाओं में यह समस्या बड़े स्तर पर देखी जा रही है।

अर्थात गर्मी के दिनों में कामकाज के सिलसिले में घर से बाहर निकलनेवाली ज्यादातर महिलाएं यूटीआई इंफेक्शन की चपेट में आ जाती हैं। गर्म और आर्द्र मौसम इस दर्दनाक समस्या के जोखिम को बढ़ा देता है। इस बीमारी के लक्षणों में पेशाब करते समय जलन, बार-बार पेशाब आना, पेशाब में खून आना, पेशाब से दुर्गंध आना, पेट में दर्द, जी मिचलाना और उल्टी होना शामिल है। मुंबई के अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल में यूरोलॉजिस्ट डॉ. जितेंद्र सखरानी ने कहा, ‘गर्मियों में बाहर घूमने जाना या पानी में तैरने जैसे कारक सभी उम्र के लोगों में यूटीआई के मामलों को बढ़ा सकते हैं।

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तापमान और यूटीआई के मामलों के बीच संबंध निर्जलीकरण के कारण हो सकता है। क्‍योंकि जब लोग डिहाइड्रेट हो जाते हैं तो यूरिन कम हो जाता है। इसलिए मूत्रमार्ग से कम पेशाब निकलता है। इसका मतलब है कि बैक्टीरिया लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं और संक्रमित हो सकते हैं। काम पर जाते समय पेशाब रोक लेने से यूटीआई हो सकता है। इसके अलावा गर्मियों में पर्याप्त पानी नहीं पीने, मासिक धर्म और व्यक्तिगत स्वच्छता पर ध्यान न देने से भी यूटीआई हो सकता है। गर्मी के दिनों में यह समस्या महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती है। बाह्यरूग्ण विभाग में हर महीने १५ से २० महिलाएं इन शिकायतों को लेकर इलाज के लिए आ रही हैं।’

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