मुंबई कोर्ट की अहम टिप्पणी, बाहर ही नहीं घर के भीतर भी लड़कियों की सुरक्षा जरूरी...
Important comment of Mumbai court, security of girls is necessary not only outside but also inside the house...
नाबालिग बेटी के साथ यौन उत्पीड़न को लेकर स्पेशल कोर्ट ने दोषी पिता को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए अहम टिप्पणी की है। स्पेशल पॉस्को कोर्ट ने कहा कि ऐसे समय में जहां महिलाओं या लड़कियों को उनके घर के बाहर सुरक्षा की आवश्यकता होती है, ऐसे में यह मामला चेताता है कि घर के भीतर भी लड़कियों की सुरक्षा जरूरी है।स्पेशल कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि अपरिपक्व आयु की लड़कियों के साथ यौन गतिविधियों का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
मुंबई: नाबालिग बेटी के साथ यौन उत्पीड़न को लेकर स्पेशल कोर्ट ने दोषी पिता को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए अहम टिप्पणी की है। स्पेशल पॉस्को कोर्ट ने कहा कि ऐसे समय में जहां महिलाओं या लड़कियों को उनके घर के बाहर सुरक्षा की आवश्यकता होती है, ऐसे में यह मामला चेताता है कि घर के भीतर भी लड़कियों की सुरक्षा जरूरी है।स्पेशल कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि अपरिपक्व आयु की लड़कियों के साथ यौन गतिविधियों का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
किसी भरोसे वाले व्यक्ति द्वारा ऐसा अपराध करने से बच्चे के जीवन को सकारात्मक रूप से देखने की धारणा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कोर्ट ने दोषी व्यक्ति को यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम 6, 12 और आईपीसी की अन्य धाराओं के तहत दोषी ठहराया। स्पेशल कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, 'वह पहला व्यक्ति था जिस पर बच्ची भरोसा कर सकती थी। एक मां की तरह उस पर बच्चे के भविष्य को संवारने की बड़ी जिम्मेदारी थी।
लेकिन, दोषी व्यक्ति ने भरोसे के साथ विश्वासघात करते हुए पीड़िता के मन पर जीवन भर के लिए एक स्थायी निशान छोड़ दिया।' अभियोजन पक्ष के अनुसार, व्यक्ति 2013 और 2017 के बीच लड़की का तब यौन उत्पीड़न करता था, जब उसकी मां काम के लिए बाहर जाती थी। उसने लड़की को इस बारे में किसी को बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी थी। इस मामले में सांताक्रुज पुलिस स्टेशन में पॉस्को ऐक्ट की धारा 6 व 12 और आईपीसी की धारा 354, 354A, 509, 323, 506 के तहत केस दर्ज किया गया था।
स्पेशल कोर्ट ने फैसले की शुरुआत नोबल शांति पुरस्कार विजेता कोफी अन्नान के एक उद्धरण से की। कोर्ट ने कहा, 'महिलाओं के खिलाफ हिंसा शायद सबसे शर्मनाक मानवाधिकार का उल्लंघन है और यह शायद सबसे व्यापक है। इसकी कोई भौगोलिक, सांस्कृतिक या आर्थिक सीमा नहीं है। यह जब तक जारी रहेगा, हम समानता, विकास और शांति की दिशा में वास्तविक प्रगति करने का दावा नहीं कर सकते हैं।'


