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मुंबई : दिल्ली के बाद मुंबई में भयंकर स्मॉग! धुंध में गुम नजर आईं गगनचुंबी इमारतें, इतना पहुंच गया एक्यूआई

मुंबई : दिल्ली के बाद मुंबई में भयंकर स्मॉग! धुंध में गुम नजर आईं गगनचुंबी इमारतें, इतना पहुंच गया एक्यूआई दिल्ली के बाद मुंबई की हवा की हालत भी स्मॉग ने खराब कर दी है। न्यूज एजेंसी की तरफ से आज (गुरुवार) सुबह का एक वीडियो जारी किया गया है, जिसमें मुंबई की गगनचुंबी इमारतें, स्मॉग के बीच गुम होती नजर आ रही हैं। इससे साफ पता चलता है कि मुंबई की हवा भी अच्छी नहीं रही है। दिल्लीवासियों के बाद अब मुंबईकरों के फेफड़ों को भी अब स्वच्छ हवा नसीब नहीं है।  
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वाशी स्थित फर्स्ट रेफरल अस्पताल ने रक्त की गंभीर कमी पर चिंता जताई 

वाशी स्थित फर्स्ट रेफरल अस्पताल ने रक्त की गंभीर कमी पर चिंता जताई  नवी मुंबई नगर निगम (एनएमएमसी) के वाशी स्थित फर्स्ट रेफरल अस्पताल ने रक्त की गंभीर कमी पर चिंता जताई है। अधिकारियों ने बताया कि यह कमी केवल दुर्लभ रक्त समूहों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सभी प्रमुख रक्त समूहों में फैली हुई है। त्योहारों के कारण नवी मुंबई में रक्त संकट mशहर के सबसे बड़े नागरिक अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्त की कमी का असर मरीजों पर पड़ना शुरू हो गया है और उनके परिवारों से इलाज या सर्जरी शुरू करने से पहले रक्तदाताओं का इंतजाम करने को कहा जा रहा है।
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मुंबई : मलाड के एक रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स से रोड रेज; सात साल के लड़के के पैर में गंभीर फ्रैक्चर

मुंबई : मलाड के एक रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स से रोड रेज; सात साल के लड़के के पैर में गंभीर फ्रैक्चर मलाड के एक रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स से रोड रेज और पर्सनल बदले की भावना का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें सोसायटी के अंदर सात साल के एक लड़के के पैर में गंभीर फ्रैक्चर हो गया। यह घटना 19 अक्टूबर को शाम करीब 5:30 बजे इंटरफेस हाइट्स में हुई, जिसके बाद बांगुर नगर पुलिस ने ड्राइवर श्वेता शेट्टी-राठौड़ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। 
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मुंबई : बीएमसी द्वारा संचालित अस्पतालों में डॉक्टरों से लेकर नर्सों, एक्स-रे और लैब तकनीशियनों और हाउसकीपिंग स्टाफ की भारी कमी; बुनियादी जाँच भी नहीं करवा पा रहे मरीज़ 

मुंबई : बीएमसी द्वारा संचालित अस्पतालों में डॉक्टरों से लेकर नर्सों, एक्स-रे और लैब तकनीशियनों और हाउसकीपिंग स्टाफ की भारी कमी; बुनियादी जाँच भी नहीं करवा पा रहे मरीज़  गोवंडी के शताब्दी अस्पताल में भर्ती शबनम का कहना है कि वह अब कभी भी किसी सरकारी अस्पताल पर भरोसा नहीं करेंगी। कलाई की फ्रैक्चर के लिए उसे बस नियमित सर्जरी की ज़रूरत है, लेकिन शबनम पहले ही 12 दिन अस्पताल में बिता चुकी हैं। शबनम के बेटे जावेद ने बताया, "जब हम पहली बार अस्पताल आए थे, तब कोई लैब टेक्नीशियन नहीं था, फिर एक्स-रे मशीन काम नहीं कर रही थी। लेकिन यह वाकई बेतुका हो गया जब सर्जरी के लिए उनके पास कोई एनेस्थेसियोलॉजिस्ट नहीं था। डॉक्टर सायन अस्पताल से किसी एनेस्थेसियोलॉजिस्ट के आने का इंतज़ार कर रहे थे, लेकिन वे कभी नहीं आए।"
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