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मुंबई : परिवार की मनाही के बावजूद प्रेमी के साथ शादी की जिद पर अड़ी युवती ने गुस्से में दे दी जान 

 मुंबई : परिवार की मनाही के बावजूद प्रेमी के साथ शादी की जिद पर अड़ी युवती ने गुस्से में दे दी जान  एक खौफनाक घटना सामने आई है, जिसमें परिवार की मनाही के बावजूद प्रेमी के साथ शादी की जिद पर अड़ी एक युवती ने गुस्से में अपनी जान दे दी। फिलहाल, मुंबई पुलिस इस घटना की जांच में जुटी हुई है। जानकारी सामने आई है कि यह घटना मुंबई के वडाला टीटी इलाके की है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि युवती का एक लड़के के साथ प्रेम प्रसंग था और वह उससे शादी करना चाहती थी। 
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मुंबई : इलेक्शन कैंडिडेट्स की गाड़ियों पर ई-चालान; जमा करना होगा नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट

मुंबई : इलेक्शन कैंडिडेट्स की गाड़ियों पर ई-चालान; जमा करना होगा नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट म्युनिसिपल चुनावों के लिए नॉमिनेशन फॉर्म भरने का प्रोसेस शुरू इलेक्शन कमीशन के निर्देशों के मुताबिक, म्युनिसिपल चुनाव लड़ने वाले कैंडिडेट्स को यह सर्टिफिकेट जमा करना होगा कि उन पर कोई सरकारी बकाया नहीं है, जिसमें बिना इजाज़त कंस्ट्रक्शन, टैक्स और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन से जुड़ी पेनल्टी शामिल हैं। इलेक्शन ऑफिसर यह वेरिफाई करेंगे कि कैंडिडेट्स की गाड़ियों पर ई-चालान का फाइन भरा गया है या नहीं।   
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ठाणे नगर निगम के वार्ड परिसीमन पर विधायक जीतेंद्र आव्हाड ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई

ठाणे नगर निगम के वार्ड परिसीमन पर विधायक जीतेंद्र आव्हाड ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई ठाणे महा नगर पालिका द्वारा हाल ही में प्रत्येक वार्ड रचना सार्वजनिक रूप से घोषित करने के बाद अब शरद पवार एनसीपी गुट के विधायक जीतेंद्र आव्हाड ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।उनका कहना है कि यह अपेक्षित है कि वार्डों की संरचना व्यावहारिक तरीके से की जाए ताकि नागरिकों को नागरिक सुविधाएँ प्रदान करने और विकास कार्यों को करने में कोई बाधा न आए।
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महाराष्ट्र में स्कूलों में हिंदी पहली कक्षा से नहीं, पांचवीं से पढ़ाई जाए... डिप्टी सीएम अजित पवार ने जताई आपत्ति

महाराष्ट्र में स्कूलों में हिंदी पहली कक्षा से नहीं, पांचवीं से पढ़ाई जाए... डिप्टी सीएम अजित पवार ने जताई आपत्ति अजित पवार के अलावा, अभिनेता सयाजी शिंदे ने भी इस फैसले का विरोध किया। उन्होंने कहा, "छात्रों को मराठी सीखने की अनुमति दी जानी चाहिए, जो एक बहुत समृद्ध भाषा है। उन्हें कम उम्र में ही मराठी में पारंगत होना चाहिए और उन्हें किसी अन्य भाषा का बोझ नहीं डालना चाहिए। अगर इसे अनिवार्य बनाया ही जाना है, तो इसे कक्षा 5 के बाद ही बनाया जाना चाहिए।"
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