रेपो रेट में एक और इजाफे की संभावना... लोन की ईएमआई में फिर इजाफा?
Possibility of another increase in repo rate... Loan EMI increase again?
महंगाई में एक बार फिर उछाल देखा जा रहा है। मगर आरबीआई को इसे नियंत्रण में लाने के लिए कोई फॉर्मूला नजर नहीं आ रहा है। आरबीआई के पास एक ही काम रह गया है रेपो रेट बढ़ाने का। खबर है कि आरबीआई एक बार फिर से रेपो रेट बढ़ा सकता है। ऐसे में आम आदमी को फिर से झटका लग सकता है।
मुंबई : महंगाई में एक बार फिर उछाल देखा जा रहा है। मगर आरबीआई को इसे नियंत्रण में लाने के लिए कोई फॉर्मूला नजर नहीं आ रहा है। आरबीआई के पास एक ही काम रह गया है रेपो रेट बढ़ाने का। खबर है कि आरबीआई एक बार फिर से रेपो रेट बढ़ा सकता है। ऐसे में आम आदमी को फिर से झटका लग सकता है।
देश में खुदरा महंगाई दर बीते महीने फिर बढ़कर ६.५२ फीसदी पर पहुंच गई है। सूत्र बताते हैं कि इसके चलते रेपो रेट में एक और इजाफे की संभावना भी बढ़ गई है। आरबीआई ने भी संकेत दिया है कि मुद्रास्फीति को लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई है। अगर केंद्रीय बैंक एक और सख्त कदम उठाता है, तो लोन की ईएमआई में फिर इजाफा हो जाएगा। आरबीआई फिर एक बार अपनी नीतिगत रेपो दर में बढ़ोतरी कर सकता है।
हाल ही में आरबीआई ने ८ फरवरी, २०२३ को रेपो दर में २५ बेसिस प्वाइंट की वृद्धि की थी। अभी बैंक से कर्ज पर ब्याज का बोझ और बढ़ सकता है। यह खबर होम लोन लेनेवालों के लिए परेशानी बढ़ा सकती है। क्योंकि अगर आरबीआई से रेपो रेट में फिर से कोई इजाफा हुआ तो, इससे घर खरीदने के लोन की किस्त में बढ़ोतरी हो जाएगी। आरबीआई से अभी रेपो दर ६.५ प्रतिशत पर है, जो कि अभी फरवरी महीने में आरबीआई से बढ़ाने के बाद पहुंची है।
आरबीआई की रेपो दर जब ४ प्रतिशत पर चल रही थी, तब अधिकांश बैंक लगभग ६.५ प्रतिशत या उसके आसपास उधार दे रहे थे। इसलिए ६.५ प्रतिशत की ब्याज दर और ३०० महीने की अवधि वाले लोन के लिए, प्रति १ लाख रुपए के कर्ज पर ईएमआई ६७५ रुपए (ईएमआई) जितनी कम थी, लेकिन अब कई बैंकों में ब्याज दर ८.८५ फीसदी हो गई है। प्रति लाख ईएमआई बढ़कर ८२५ रुपए पर हो गई है। ईएमआई में २०-२५ प्रतिशत की वृद्धि देखी जा रही है, जो मौजूदा होम लोन लेनेवालों के लिए एक बड़ा झटका है।
अगर आपका वेतन ‘एक्स’ है और आप ५० लाख रुपए के लोन के पात्र थे, तो अब आप केवल ३७-३८ लाख रुपए के होम लोन के पात्र रह गए हैं। आपकी क्रय शक्ति पहले से कम हो गई है। अब लोगों के पास नकदी प्रवाह कम हो गया है। जो लोग वास्तव में घर खरीदना चाहते हैं, उन्हें आवश्यक धन जुटाने के लिए और अतिरिक्त प्रयास करने होंगे। यानि डाउन पेमेंट ज्यादा देना होगा। जो लोग नया घर खरीदने की योजना बना रहे हैं, उन्हें अपने फैसले अब टालने भी पड़ सकते हैं। अगर वे केवल ब्याज दरों को देख रहे हैं, तो वे अभी से १५-१८ महीने में नीचे आने लगेंगे।


