मुंबई महानगरपालिका चुनाव में पवार-ठाकरे सब छूटे पीछे, बीजेपी का परचम
Pawar-Thackere all left behind in Mumbai Municipal Corporation elections, BJP's victory
देश की सबसे अमीर नगर पालिका, बृहन्मुंबई नगर निगम के चुनावी नतीजों पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं. मुंबई के भविष्य का फैसला 227 वार्डों के चुनावी अखाड़े में होना है, जहां 1.24 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है. आज सुबह 10 बजे से मतगणना शुरु हो गई है.
मुंबई : देश की सबसे अमीर नगर पालिका, बृहन्मुंबई नगर निगम के चुनावी नतीजों पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं. मुंबई के भविष्य का फैसला 227 वार्डों के चुनावी अखाड़े में होना है, जहां 1.24 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है. आज सुबह 10 बजे से मतगणना शुरु हो गई है.
10 नगर निगमों में निर्विरोध चुने गए 65 उम्मीदवार
महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग ने एक बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि 10 नगर निगमों के 65 उम्मीदवारों को निर्विरोध चुना गया है, जिसका ऐलान 15 जनवरी को हुए मतदान से पहले ही हो गया था. इस जानकारी के अनुसार, भाजपा ने सबसे ज्यादा 43 उम्मीदवारों को निर्विरोध जिताया है, जबकि शिवसेना के 18, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 2, एक स्वतंत्र उम्मीदवार और इंडियन सेक्यूलर लार्जेस्ट असेंबली ऑफ महाराष्ट्र का एक उम्मीदवार शामिल है.
बीएमसी चुनाव नतीजों के बाद बीजेपी में जश्न
बीएमसी चुनाव में मिली बड़ी जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी में उत्साह का माहौल है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस जीत को संगठन की मेहनत और जनता के भरोसे का नतीजा बताया. उन्होंने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण से फोन पर बातचीत कर उन्हें बधाई दी और कहा कि यह जनादेश विकास की राजनीति के पक्ष में है.
एकनाथ शिंदे ने भी गठबंधन की जीत पर खुशी जताई
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी गठबंधन की जीत पर खुशी जताई. उन्होंने मुंबईकरों का धन्यवाद करते हुए कहा कि जनता ने विकास को प्राथमिकता दी है. शिंदे के मुताबिक, मतदाताओं ने भावनात्मक और गैर-जरूरी मुद्दों को नकारते हुए कामकाज और विकास के एजेंडे पर भरोसा जताया है. उन्होंने इसे महायुति सरकार की नीतियों पर जनता की मुहर बताया.
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
चुनावी नतीजों के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत के बयान पर पलटवार किया. उन्होंने कहा कि जो नेता अपने गठबंधन सहयोगियों को संभाल नहीं पाए, उन्हें दूसरों पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं है.
मुंबई महानगरपालिका चुनावों में क्यों रहा 4 साल का अंतराल?
बता दें कि इससे पहले मुंबई महानगरपालिका के चुनाव 2017 में हुए थे. अगले चुनाव 2022 में होने तय थे, लेकिन कई कारणों से वे समय पर नहीं हो सके. इनमें मुख्य रूप से कोविड-19 महामारी, बीएमसी सीटों के परिसीमन (वार्डों की सीमाओं) को लेकर विवाद और स्थानीय निकाय चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को लेकर चली कानूनी लड़ाई शामिल थी.


