नई दिल्ली : लोकपाल ने विवादों के बीच सात बीएमडब्ल्यू लग्जरी कारों का टेंडर किया रद्द, जानें फैसले की वजह
New Delhi: Lokpal cancels tender for seven BMW luxury cars amid controversy; know the reason behind the decision
देश की भ्रष्टाचार-रोधी संस्था लोकपाल ने सात लग्जरी BMW (बीएमडब्ल्यू) कारों की खरीद से जुड़ा विवादित टेंडर आखिरकार वापस ले लिया है। इस फैसले के पीछे विपक्षी दलों और सिविल सोसाइटी से लगातार उठती आलोचनाओं को अहम वजह माना जा रहा है, जिनमें सार्वजनिक धन के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े किए गए थे। अधिकारियों के मुताबिक, यह निर्णय लोकपाल की पूर्ण पीठ ने लिया और 16 दिसंबर 2025 को एक आधिकारिक संशोधन (कॉरिजेंडम) के जरिए इसे औपचारिक रूप दिया गया।
नई दिल्ली : देश की भ्रष्टाचार-रोधी संस्था लोकपाल ने सात लग्जरी BMW (बीएमडब्ल्यू) कारों की खरीद से जुड़ा विवादित टेंडर आखिरकार वापस ले लिया है। इस फैसले के पीछे विपक्षी दलों और सिविल सोसाइटी से लगातार उठती आलोचनाओं को अहम वजह माना जा रहा है, जिनमें सार्वजनिक धन के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े किए गए थे। अधिकारियों के मुताबिक, यह निर्णय लोकपाल की पूर्ण पीठ ने लिया और 16 दिसंबर 2025 को एक आधिकारिक संशोधन (कॉरिजेंडम) के जरिए इसे औपचारिक रूप दिया गया।
अक्तूबर में जारी हुआ था टेंडर, तुरंत शुरू हुआ विरोध
लोकपाल ने 16 अक्तूबर 2025 को एक रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल जारी करते हुए सात BMW 3 Series 330Li कारों की आपूर्ति के लिए प्रतिष्ठित एजेंसियों से बोली मांगी थी। इन कारों को संस्था के अध्यक्ष और छह सदस्यों को व्यक्तिगत रूप से आवंटित किया जाना था। टेंडर सामने आते ही इसके औचित्य पर सवाल उठने लगे और आलोचकों ने इसे लोकपाल की भूमिका और मूल भावना के विपरीत बताया।
विपक्ष और सिविल सोसाइटी की तीखी प्रतिक्रिया
इस प्रस्ताव को लेकर विपक्षी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लोकपाल को "शौकपाल" तक कह दिया। वहीं, अमिताभ कांत ने सार्वजनिक रूप से आग्रह किया कि लोकपाल को यह टेंडर रद्द कर देना चाहिए। और इसके बजाय भारत में बनी इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर विचार करना चाहिए। आलोचकों का कहना था कि भ्रष्टाचार से लड़ने वाली संस्था द्वारा लग्जरी वाहनों की खरीद उसकी नैतिक साख को कमजोर करती है।
करीब ₹5 करोड़ की थी प्रस्तावित खरीद
टेंडर दस्तावेजों के अनुसार, लोकपाल ने BMW 330Li M Sport मॉडल की मांग की थी, जिनका रंग सफेद और व्हीलबेस लंबा होना तय किया गया था। नई दिल्ली में इन सात कारों की अनुमानित ऑन-रोड कीमत करीब 5 करोड़ रुपये बताई गई थी। इन वाहनों का उपयोग लोकपाल के अध्यक्ष, सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस ए एम खानविलकर, और संस्था के छह सदस्यों के लिए किया जाना था। कानून के तहत लोकपाल में अधिकतम आठ सदस्य हो सकते हैं।
ड्राइवर ट्रेनिंग तक की थी पूरी योजना
टेंडर में सिर्फ कारों की आपूर्ति ही नहीं, बल्कि ड्राइवरों के लिए विशेष प्रशिक्षण की भी शर्तें रखी गई थीं। चयनित वेंडर को ड्राइवरों और नामित कर्मचारियों के लिए सैद्धांतिक और व्यावहारिक ट्रेनिंग आयोजित करनी थी। इसमें BMW कारों के कंट्रोल, सेफ्टी फीचर्स, इमरजेंसी हैंडलिंग, पार्किंग तकनीक और फ्यूल एफिशिएंसी मोड्स की जानकारी देना शामिल था।
साख बचाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा फैसला
हालांकि लोकपाल ने टेंडर रद्द करने के पीछे आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत कारण नहीं बताया है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक यह निर्णय संस्था के शीर्ष स्तर पर हुई चर्चाओं के बाद लिया गया। इस कदम को बढ़ते विवाद को शांत करने और जनता के बीच लोकपाल की विश्वसनीयता और संयम की छवि को बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।


