लालबाग के राजा के पास झलकाये "वाढवण बंदरगाह रद्द करो" के बैनर।

Banners of "Cancel Vadavan Port" were displayed near the Raja of Lalbagh.

लालबाग के राजा के पास झलकाये

डहाणू( संवाददाता):- पालघर जिले मे  डहाणू तालुका के वाढवण क्षेत्र के नियोजित वाढवण बन्दरगाह को रद्द करने की मांग को लेकर लालबाग सार्वजनिक उत्सव मंडल, गणेशगली, मुंबई के प्रसिद्ध "लालबाग का राजा" के दर्शन हेतु आये डहानु (वाढवण) क्षेत्र के भूमिपूत्रों ने गुरुवार को बप्पा के समीप मंडप मे पहुंचकर जब "एकच जिद्द्,वाढवण बंदर रद्द' का बैनर झलकाया और बप्पा से सरकार को इसे रद्द करने की प्रार्थना की तो वहाँ थोड़ी देर के लिए सन्नाटा छा गया और आनन फानन मे पुलिस तथा लालबाग का राजा सार्वजानिक गणेशोत्सव मण्डल के पदाधिकारी आगये और इन बंदरगाह विरोधी भूमिपूत्रों को समझाकर बुझाकर शांत किया।

 

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प्राप्त जानकारी के मुताबिक  बाप्पा से इस प्रकार की प्रार्थना करने वाले यह सब लोग गावड भंडारी समाज(वाढवण)के भूमिपुत्र थे ।इस अनोखे व भक्तिपूर्ण  आंदोलन को मराठी सेना अध्यक्ष मोहनिश राऊल ने भी अपना समर्थन दिया। इस दौरान श्री राऊल ने बताया कि डहाणु के वाढ़वण मे इस विनाशकारी  विशाल व्यापारी बंदरगाह के बनने  से यहाँ के लोगो का खेती, मत्स्य व्यवसाय तथा अन्य व्यवसाय खत्म होने के साथ ही यहां का प्रसिद्ध व पवित्र  तीर्थक्षेत्र शंखोदर भी नही बच पायेगा इसलिए इसे रद्द किया जाना चाहिए।

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इन भक्तिपूर्ण आंदोलन करने वाले वाढवन के भूमिपूत्रों ने बताया कि इस विनाशकारी व्यापारी बंदरगाह के आने से बड़ी बड़ी पहाडिया काटकर समुद्र मे हजारो एकड़ जमीन मे भराव किया जायेगा जिससे यहां के 47 गांव तथा भगवान श्री राम के चरण कमलो से पवित्र हुए एंव राजा दशरथ का पिंडदान जहां किया गया ऐसा तीर्थ  क्षेत्र  शन्खोदर भी उद्ध्वस्त हो जायेगा और देशभर से यहाँ अपने प्रियजनों की चिर शांति के लिए पिंड दान करने हेतु आने वालों पर भी इस का बुरा असर पड़ेगा।

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इन सभी भूमिपूत्रों ने लालबाग के राजा के चरणों मे इस बंदरगाह को विनाशकारी व जनविरोधी बताते एंव उसे रद्द करने हेतु सरकार को सद्बुद्धि प्रदान करने की बप्पा से प्रार्थना की और  बैनर झलकाते हुए "एकच जिद्द,वाढवण बंदर रद्द" की घोषणाबाजी भी की।

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