Ramdas Athawale
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महाराष्ट्र : साहिल वाकोड़े की आत्महत्या की स्वतंत्र जांच की जाए - केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले 

महाराष्ट्र : साहिल वाकोड़े की आत्महत्या की स्वतंत्र जांच की जाए - केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले  आठवले ने आईआईटी बॉम्बे के निदेशक और वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर कई मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि पिछले दो-तीन वर्षों में संस्थान में कम से कम चार छात्रों ने आत्महत्या की है, जिनमें तीन अनुसूचित जाति समुदाय से थे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या एससी छात्रों के साथ भेदभाव या उन्हें अपमानित करने की कोशिश हो रही है।
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मुंबई : सरकार को भाषा विवाद पर ठाकरे के दबाव में नहीं झुके - केंद्रीय मंत्री रामदासअठावले

मुंबई : सरकार को भाषा विवाद पर ठाकरे के दबाव में नहीं झुके - केंद्रीय मंत्री रामदासअठावले रामदास अठावले ने भाषा के मुद्दे का राजनीतिकरण करने के लिए अलग हुए चचेरे भाइयों को दोषी ठहराया। उन्होंने हिंदी के प्रति उनके विरोध को असंवैधानिक करार दिया और महाराष्ट्र सरकार से राजनीतिक दबाव के आगे न झुकने का आग्रह किया। मंत्री ने कहा कि किसी और की तरह ठाकरे परिवार को भी लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार है। 'लेकिन हिंदी हमारी राष्ट्रीय भाषा है। हिंदी का विरोध करना संविधान का विरोध करने जैसा है'।
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अगर उद्धव ठाकरे  और देवेंद्र फडणवीस के बीच विवाद नहीं सुलझा तो महाराष्ट्र का अगला CM मैं बनूंगा - रामदास अठावले

अगर उद्धव ठाकरे  और देवेंद्र फडणवीस के बीच विवाद नहीं सुलझा तो महाराष्ट्र का अगला CM मैं बनूंगा - रामदास अठावले उद्धव ठाकरे के बयान पर बीजेपी की भी प्रतिक्रिया आई है. बीजेपी नेता प्रवीण दरेकर ने कहा, ''उद्धव ठाकरे ने फडणवीस जी को निजी धमकी दी है. बीजेपी धमकियों से नहीं डरती. इससे पता चलता है कि बाला साहेब ने अपनी क्या विरासत छोड़ी है. उद्धव ठाकरे ने ऐसा बयान दिया जो महाराष्ट्र की परंपरा के अनुकूल नहीं था.'' दरेकर ने कहा कि मराठवाड़ा में 20 हजार करोड़ का निवेश हुआ है. यह जनता का ध्यान इससे भटकाने के लिए दिया गया बयान है. फडणवीस बार-बार सबसे लोकप्रिय नेता साबित हुए हैं. 
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केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा, 12 साल पुरानी सहयोगी पार्टी आरपीआई को किया जा रहा है नजरअंदाज...

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा, 12 साल पुरानी सहयोगी पार्टी आरपीआई  को किया जा रहा है नजरअंदाज... साल 2012 के बीएमसी चुनावों में आरपीआई द्वारा बीजेपी-शिवसेना को समर्थन देने के बाद महायुति (सत्तारूढ़ गठबंधन) का गठन किया गया था. एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और अजित पवार के शामिल हो जाने के कारण इस बार महायुति का गठन नहीं हो सका. आरपीआई कार्यकर्ताओं की शिकायत है कि उन्हें गठबंधन में सम्मान नहीं मिल रहा है.
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