मुंबई : उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली तीन पार्षदों एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना में शामिल हो गए
Mumbai: Three councillors from the Uddhav Thackeray-led party joined the Eknath Shinde-led Shiv Sena.
महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिका के चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद अब असली पॉलिटिक्स शुरू हो गई है। मुंबई बीएमसी के नए मेयर को लेकर जहां अभी सस्पेंस बना हुआ तो वहीं मुंबई मेट्राेपॉलिटन रीजन में आने वाली कल्याण डोंबिवली महानगरपालिका में खेला शुरू हो गया है। उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली तीन पार्षदों एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं।
मुंबई : महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिका के चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद अब असली पॉलिटिक्स शुरू हो गई है। मुंबई बीएमसी के नए मेयर को लेकर जहां अभी सस्पेंस बना हुआ तो वहीं मुंबई मेट्राेपॉलिटन रीजन में आने वाली कल्याण डोंबिवली महानगरपालिका में खेला शुरू हो गया है। उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली तीन पार्षदों एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। यह घटनाक्रम ऐसे वक्त पर सामने आया है जब कल्याण डोंबिवली में मेयर को लेकर घमसान चल रहा है। महानगरपालिका के चुनावों में 21 वार्ड वाली कल्याण डोंबिवली नगर निगम की 122 सीटों में शिंदे की शिवसेना को 53 और बीजेपी को 50 सीटें मिली थीं।
शिंदे सेना की बढ़ी ताकत
चुनाव नतीजों में कांग्रेस को 2 और मनसे को 5 सीटों पर जीत मिली थी। उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना यूबीटी के 11 पार्षद जीते थे। एक सीट शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी को मिली थी। अब उद्धव सेना के तीन कॉर्पोरेटरों के कथित तौर पर पाला बदलने से शिंदे गुट के पक्ष में पलड़ा और भारी होने की उम्मीद है। 122 सदस्यीय नगर निकाय में मेयर का पद हासिल करने के लिए पार्टियां होड़ कर रही हैं, जहां जादुई आंकड़ा 62 है। शिंदे की शिवसेना के पास अब पार्षदों की संख्या बढ़कर 56 हो गई है।
श्रीकांत शिंदे बनाम रवींद्र चव्हाण
बीजेपी और शिवसेना दोनों ही महायुति के घटक हैं लेकिन कल्याण डोबिंवली में दोनों के बीच शक्ति प्रदर्शन चुनावों से पहले शुरू हो गया था। तब एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे और रवींद्र चव्हाण के बीच टकराव सामने आया था। इसकी वजह थी कि श्रीकांत शिंदे इस इलाके से सांसद हैं तो वहीं डोबिंवली से रवींद्र चव्हाण खुद विधायक हैं। ऐसे में यहां पर मेयर किसका बनेगा? इस जोरआजमाइश शुरू हो गई है। किसी भी पार्टी के अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा पार नहीं करने की स्थिति शिंदे की सेना अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटी है।


