ठाणे : बीएमसी चुनाव में क्यों चर्चा में आया ठाणे का म्हात्रे परिवार 

Thane: Thane's Mhatre Parivar appeared in BMC elections

ठाणे : बीएमसी चुनाव में क्यों चर्चा में आया ठाणे का म्हात्रे परिवार 

महाराष्ट्र में जैसा राजनीती का हिसाब किताब है, नतीजे हमेशा चौंकाने वाले आते हैं. बावजूद इसके कोई गफलत में आकर सवाल कर सकता है कि कैसे? तो ऐसे लोगों को एक बार ठाणे का रुख करना चाहिए, जहां एक हैरान करने वाला कारनामा हुआ है.  ठाणे नगर निगम चुनावों में एक ही परिवार ने  तीन विरोधी पार्टियों के टिकट पर चुनाव लड़कर तीन वार्ड जीते हैं. जी हां सही सुना आपने. ठाणे के जिस परिवार का जिक्र यहां हो रहा है, वो क्षेत्र का म्हात्रे परिवार है जिसने सिर्फ आज नहीं, काफी लंबे समय से महाराष्ट्र में वंशवादी राजनीती के चलते चर्चाओं का बाजार गर्म किया हुआ है.  

ठाणे : महाराष्ट्र में जैसा राजनीती का हिसाब किताब है, नतीजे हमेशा चौंकाने वाले आते हैं. बावजूद इसके कोई गफलत में आकर सवाल कर सकता है कि कैसे? तो ऐसे लोगों को एक बार ठाणे का रुख करना चाहिए, जहां एक हैरान करने वाला कारनामा हुआ है.  ठाणे नगर निगम चुनावों में एक ही परिवार ने  तीन विरोधी पार्टियों के टिकट पर चुनाव लड़कर तीन वार्ड जीते हैं. जी हां सही सुना आपने. ठाणे के जिस परिवार का जिक्र यहां हो रहा है, वो क्षेत्र का म्हात्रे परिवार है जिसने सिर्फ आज नहीं, काफी लंबे समय से महाराष्ट्र में वंशवादी राजनीती के चलते चर्चाओं का बाजार गर्म किया हुआ है.  

 

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जिक्र वंशवादी राजनीती का हुआ है.  तो आगे बढ़ने से पहले हमारे लिए ये बताना बहुत जरूरी है कि ये एक ऐसा फैक्टर है जिसकी जड़ें भारत में हर एक चुनावी मौसम में उभरकर सामने आती हैं. बता दें कि ठाणे में प्रह्लाद म्हात्रे महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के उम्मीदवार के तौर पर जीते, वहीं रेखा म्हात्रे ने शिवसेना के टिकट पर जीत हासिल की.  ​​

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परिवार के एक और सदस्य, रवीण म्हात्रे ने बीएमसी के लिए एक वार्ड जीता.  हालांकि, कुल नतीजे प्रह्लाद के लिए दिल तोड़ने वाले रहे, क्योंकि बीएमसी-सेना गठबंधन ने ठाणे नगर निगम चुनावों में दबदबा बनाया. ध्यान रहे कि ठाणे अविभाजित शिवसेना का गढ़ और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का गृह क्षेत्र है.  जहां बीएमसी और शिंदे ने हाथ मिलाया।  जबकि महायुति के एक और सदस्य, अजीत पवार की राकांपा ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया.

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131 सीटों वाली ठाणे नगर निकाय में, शिंदे सेना ने 87 सीटों पर और बीएमसी ने 40 सीटों पर चुनाव लड़ा. दूसरी ओर, कभी अलग हुए ठाकरे बंधु , उद्धव और राज, 20 साल बाद महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव एक साथ लड़ने के लिए फिर से एक साथ आए. उन्होंने ठाणे में भी अपना गठबंधन जारी रखा और शरद पवार की राकांपा के साथ भी हाथ मिलाया. हालांकि, वे बीएमसी-सेना की लहर में हार गए. बात अगर कांग्रेस की हो तो कांग्रेस ने यहां अकेले 96 सीटों पर चुनाव लड़ा.

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2017 में, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली अविभाजित शिवसेना ने 131 सीटों में से 67 सीटें जीतकर खुद ही परिषद बनाई. राकांपा 34 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही और बीएमसी ने 23 सीटें हासिल कीं. हालांकि, एकनाथ शिंदे का ठाणे में पहले से ही दबदबा था, 2017 में चुने गए 67 शिवसेना पार्षदों में से 66 ने उपमुख्यमंत्री का समर्थन किया था. 1987-1993 को छोड़कर, अविभाजित शिवसेना ने ठाणे पर अपना दबदबा बनाए रखा है, जिसका मुख्य कारण पार्टी के दिग्गजों - बालासाहेब ठाकरे और आनंद दिघे की विरासत है.