नेरुल में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का बिना अनुमति अनावरण करने पर अमित ठाकरे और 70 MNS कार्यकर्ताओं पर केस।

Case filed against Amit Thackeray and 70 MNS workers for unveiling the statue of Chhatrapati Shivaji Maharaj in Nerul without permission.

नेरुल में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का बिना अनुमति अनावरण करने पर अमित ठाकरे और 70 MNS कार्यकर्ताओं पर केस।
Case filed against Amit Thackeray and 70 MNS workers for unveiling the statue of Chhatrapati Shivaji Maharaj in Nerul without permission.

नेरुल में शिवाजी महाराज की प्रतिमा का बिना अनुमति अनावरण करने पर अमित ठाकरे और 70 MNS कार्यकर्ताओं पर केस। माहौल गरम, राजनीति तेज।

नवी मुंबई में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेता अमित ठाकरे और लगभग 70 पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस ने पहली FIR दर्ज कर ली है। मामला नेरुल सेक्टर-1 में स्थित राजीव गांधी उड्डयनपुल के पास छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के अनधिकृत रूप से अनावरण से जुड़ा है। यह प्रतिमा पिछले चार महीनों से कपड़े से ढंकी हुई थी और स्थानीय प्रशासन द्वारा इसके अनावरण की अनुमति नहीं दी जा रही थी। इसी देरी के बीच अमित ठाकरे ने समर्थकों के साथ प्रतिमा का जबरन अनावरण किया।

पुलिस के अनुसार, यह कार्यक्रम बिना किसी सरकारी अनुमति के आयोजित किया गया और इसे “गैरकानूनी जमावड़ा” माना गया। FIR में यह भी दर्ज किया गया है कि MNS कार्यकर्ताओं ने पुलिस अधिकारियों के निर्देशों का पालन नहीं किया और घर लौटने के आदेश को नज़रअंदाज़ किया। मामले में सरकारी काम में बाधा डालने और कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने जैसी धाराएँ जोड़ी गई हैं। एक सहायक पुलिस निरीक्षक निलेश चव्हाण से दुर्व्यवहार और धक्का-मुक्की का आरोप भी FIR में शामिल है।

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उधर, अमित ठाकरे ने इस पूरे मामले को राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताया है। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा को महीनों तक ढंका रखा गया था, जो उचित नहीं था। अमित ठाकरे के अनुसार, उन्हें महाराज का अपमान सहन नहीं हुआ और इसी कारण उन्होंने स्वयं प्रतिमा का अनावरण करने का निर्णय लिया। उन्होंने यह भी कहा कि यह FIR उनके लिए सम्मान की बात है और अगर महाराज के नाम पर भविष्य में और भी मामले दर्ज हों, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

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इस घटना ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। MNS समर्थक इसे मराठी अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव का मुद्दा बता रहे हैं। वहीं विरोधी दल इसे कानून का उल्लंघन और राजनीतिक स्टंट करार दे रहे हैं। प्रशासन की देरी और MNS की आक्रामक प्रतिक्रिया के बीच यह मामला आने वाले दिनों में और गरमा सकता है। प्रतिमा अनावरण को लेकर बनी यह स्थिति नवी मुंबई में राजनीतिक ध्रुवीकरण को भी तेज कर रही है।

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