वकील होने का दावा करने वाली एक महिला अपने ही बुने जाल में फंसी
A woman claiming to be a lawyer got caught in her own web
वकील होने का दावा करने वाली एक महिला अपने ही बुने जाल में फंस गई है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कथित महिला वकील की मालाड पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई धोखाधड़ी और मारपीट की शिकायत में महिला आरोपी को अंतरिम जमानत दे दी। साथ ही अदालत ने पुलिस को शिकातककर्ता वकील के एलएलबी (बैचलर ऑफ लॉ) डिग्री की जांच करने का निर्देश दिया है।
मुंबई : वकील होने का दावा करने वाली एक महिला अपने ही बुने जाल में फंस गई है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कथित महिला वकील की मालाड पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई धोखाधड़ी और मारपीट की शिकायत में महिला आरोपी को अंतरिम जमानत दे दी। साथ ही अदालत ने पुलिस को शिकातककर्ता वकील के एलएलबी (बैचलर ऑफ लॉ) डिग्री की जांच करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति आर.एन. लड्ढा की एकलपीठ के समक्ष जाहिरा हसमत मियां की ओर से वकील आशीष दुबे की दायर अग्रिम याचिका पर सुनवाई हुई।
याचिकाकर्ता के वकील आशीष दुबे ने दलील दी कि मालाड पुलिस ने याचिकाकर्ता के खिलाफ धोखाधड़ी और मारपीट का मामला दर्ज किया है। उस पर आरोप लगाया गया है कि एक महिला वकील ने एलएलएम (मास्टर ऑफ लॉ) में एडमीशन कराने के लिए याचिकाकर्ता को 70 हजार रुपए दिया था। जब वह उससे (याचिकाकर्ता) अपने एडमीशन के विषय में पूछने उसके मालाड स्थित स्पा सैलून में गई, तो उसने उसके (शिकायतकर्ता) साथ मारपीट की।
अवैध याचिकाकर्ता ने कथित महिला वकील से एडमीशन कराने का पैसा लिया था, लेकिन जब वह उसका एडमीशन कराने गई, तो उसे पता चला कि महिला वकील का एलएलबी का डिग्री ही फर्जी है। जब उसने उसे इस विषय में बताया, तो वह उसके साथ गाली-गलौज कर उसके स्पा सैलून में आकर हंगामा करने लगी। उसने याचिकाकर्ता के खिलाफ मालाड पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी और मारपीट की शिकायत दर्ज करा दी। याचिकाकर्ता के वकील दुबे ने अदालत से कहा कि जब शिकायतकर्ता की एलएलबी की डिग्री ही फर्जी है, तो उसे एलएलएम में कैसे एडमिशन दिलाया जा सकता है? इसे देखते हुए याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत दी जानी चाहिए। पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील की दलील को स्वीकार करते हुए उसे 8 जनवरी 2015 तक अंतरिम जमानत दी और मालाड पुलिस को शिकायतकर्ता की एलएलबी की डिग्री की जांच करने का निर्देश दिया है।


