सांसद गजानन किर्तीकर का इस्तीफा लेकर ही चुप बैठेंगे : निरुपम
Will keep silent only after taking resignation of MP Gajanan Kirtikar: Nirupam
सांसद गजानन किर्तीकर ने हालही में बालासाहब की शिवसेना गुट में प्रवेश किया है। किर्तीकर ने यह पक्षप्रवेश करके मुंबई के उत्तर-पश्चिम लोकसभा के मतदाताओं का विश्वासघात किया है।इसलिए उन्हें पहले अपना इस्तीफा दे देना चाहिए. रविवार को आयोजित पत्रकार परिषद को सम्बोधित करते हुए पूर्व सांसद संजय निरुपम ने यह मांग की है।
मुंबई : सांसद गजानन किर्तीकर ने हालही में बालासाहब की शिवसेना गुट में प्रवेश किया है। किर्तीकर ने यह पक्षप्रवेश करके मुंबई के उत्तर-पश्चिम लोकसभा के मतदाताओं का विश्वासघात किया है।इसलिए उन्हें पहले अपना इस्तीफा दे देना चाहिए. रविवार को आयोजित पत्रकार परिषद को सम्बोधित करते हुए पूर्व सांसद संजय निरुपम ने यह मांग की है।
निरुपम ने कहा कि जब तक किर्तीकर इस्तीफा नहीं देंगे तब तक हम चुप नहीं बैठेंगे. कांग्रेस नेता ने कहा कि उत्तर पश्चिम मुंबई के सांसद गजानन किर्तीकर ने शिंदे गुट में प्रवेश किया।
पार्टी छोड़ने का फैसला उनका था, मैं इसके बारे में कुछ नहीं कहना चाहता। मैं यह भी नहीं जानना चाहता कि उन्होंने पार्टी क्यों और किस लालच में छोड़ी। लेकिन मेरा यह मानना है कि गजानन कीर्तिकर ने शिवसेना-भाजपा गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। वह धनुष और तीर के निशान पर चुने गए थे।
अब जब उन्होंने पार्टी छोड़ दी है, तो उन्होंने संसद सदस्य के रूप में भी अपना इस्तीफा दे देना चाहिए। यह गद्दारी है। जिस पार्टी ने आपको सब कुछ दिया, पार्टी कार्यकर्ता, मतदाता जिन्होंने आपको अधिकतम वोटों से चुना, उन सब के साथ किया गया यह विश्वासघात है। किर्तीकर चुनकर आए क्योंकि उनको अधिक वोट मिले और मैं हार गया क्योंकि मुझे कम वोट मिले। इसलिए उन्हें इस्तीफा देना होगा, ऐसी मांग संजय निरुपम ने की।
निरुपम ने आगे कहा की, गजानन किर्तीकर अपने पिछले साढ़े तीन साल के कार्यकाल में उत्तर-पश्चिम मतदार संघ में कभी दिखाई नहीं दिए। बिलकुल नहीं। जहां तक मैं बता सकता हूं, वह देश के सबसे निष्क्रिय सांसद होंगे। मै चुनाव में हारा हुआ प्रत्याशी होते हुए भी उनसे ज्यादा मतदार क्षेत्र में घुमा हूँ।
मतदार संघ में लोगो से मिलता रहा हूँ। उनके बीच जाकर काम करता आया हूँ। मैंने एक बार उनके बारे में जानकारी निकालने की कोशिश की, उसमे पता चला की, उनकी तबियत ठीक नहीं हैं। वह
मुंबई में भी नहीं थे। उन्होंने अपने कार्यकाल का सबसे ज्यादा समय पुणे में गुजारा। अब वह पुणे में क्यों थे, क्या करते थे, किस के साथ होते थे? इस पर मै अधिक बात नहीं करना चाहता।लेकिन उन्होंने मुंबई के मतदाताओं का विश्वासघात किया है। इसलिए जब तक कीर्तिकर इस्तीफा नहीं देते तब तक हम उनके खिलाफ आंदोलन करेंगे।
बाईक रैली से इस आंदोलन की शुरुआत होगी। उसके बाद अलग अलग रूप में यह आंदोलन होगा। अगर गजानन किर्तीकर के पास इतनी सी भी नैतिकता बची है, तो उन्हें इस आंदोलन को शुरू करने से पहले इस्तीफा दे देना चाहिए और अपना शेष जीवन आराम से पुणे में बिताना चाहिए,


