शिवसेना नेता संजय राउत के बाद अब ED के रडार पर एनसीपी नेता अजित पवार?
After Shiv Sena leader Sanjay Raut, now NCP leader Ajit Pawar on ED's radar?
महाराष्ट्र में जिस तरफ से राजनीति चल रही है, ऐसे में कब किस पर क्या मुसीबत आ जाए कोई बता नहीं सकता। इसी बीच खबर मिली है कि, शिवसेना नेता संजय राउत के बाद अब ED के रडार पर एनसीपी नेता अजित पवार मुश्किलें में फंस सकते है।
मुंबई: महाराष्ट्र में जिस तरफ से राजनीति चल रही है, ऐसे में कब किस पर क्या मुसीबत आ जाए कोई बता नहीं सकता। इसी बीच खबर मिली है कि, शिवसेना नेता संजय राउत के बाद अब ED के रडार पर एनसीपी नेता अजित पवार मुश्किलें में फंस सकते है।
महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक घोटाला मामले में ईडी द्वारा जांच होने की संभावना जताई जा रही है। मीडिया खबर के अनुसार, महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक (शिखर बैंक) घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा अजीत पवार और 76 अन्य निदेशकों की फिर से जांच किए जाने की संभावना है।
आर्थिक अपराध शाखा ने कहा था कि, पवार और 76 अन्य के खिलाफ आगे की कार्रवाई के लिए कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। ऐसे में ईओडब्ल्यू ने रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी थी। वहीं, ईओडब्ल्यू बताया कि, मूल शिकायतकर्ता द्वारा दायर विरोध याचिका और ईडी की रिपोर्ट के आधार पर अब इस मामले की आगे की जांच शुरू की गई। बता दें कि, शिखर बैंक घोटाला मामले में सुरिंदर अरोड़ा ने शिकायत दर्ज कराई है।
इसी के तहत पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के साथ विजयसिंह मोहिते-पाटील, आनंदराव अडसुल, शिवाजीराव नलावडे और कई अन्य बड़े नेताओं के खिलाफ एमआरए थाने में मामला दर्ज किया गया था। सुरिंदर अरोड़ा ने कोर्ट में याचिका दायर की है। जिसमें उन्होंने कहा कि, इस मामले में करीब 25 हजार करोड़ का घोटाला हुआ है।
महाविकार अघाड़ी सरकार के दौरान महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक का इस्तेमाल किया गया था। आरोप है कि इस बैंक द्वारा 25 हजार करोड़ का कर्ज बांट दिया गया। इसके बारे में जानकारी मिलने के बाद 2011 में रिज़र्व बैंक ने राज्य सहकारी बैंक के निदेशक मंडल को बर्खास्त कर दिया था और इस मामले में जांच के आदेश दिए थे। घोटाले के समय मौजूद सभी मंत्रियों और बैंक अधिकारियों के नाम प्राथमिकी में दर्ज किए गए हैं।
हालांकि, महाविकास अघाड़ी सरकार बनने के बाद अजित पवार और अन्य लोगों के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिलने का दावा करते हुए पुलिस ने अदालत में एक रिपोर्ट दायर कर मामले को बंद करने की मांग की। इसके बाद अरोड़ा ने इस रिपोर्ट के खिलाफ कोर्ट में विरोध याचिका दायर की और बयान पर सुनवाई की मांग की। वहीं, दूसरी तरफ ईडी ने एक रिपोर्ट पेश करते हुए इस मामले में सबूत होने का दावा किया। उस वक्त पुलिस ने याचिका और रिपोर्ट का विरोध किया था।


