महाराष्‍ट्र में 11 महीने में ही 2,498 किसानों ने कर ली आत्‍महत्‍या

महाराष्‍ट्र में 11 महीने में ही 2,498 किसानों ने कर ली आत्‍महत्‍या

मुंबई: महाराष्‍ट्र में जनवरी से नवंबर 2021 के बीच कुल 2,498 किसानों ने आत्‍महत्‍या कर ली । इसके पिछले साल यानी वर्ष 2020 में कर्ज में डूबे 2,547 किसानों ने आत्‍महत्‍या की थी। राज्य के राजस्व विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि सरकार की कर्ज माफी योजनाओं के बावजूद किसान कर्ज नहीं चुका पा रहे हैं जिस वजह से आत्‍महत्‍या के मामले नहीं रुक रहे हैं।

आंकड़ों पर नजर डालें तो आत्महत्‍या करने वाले सबसे ज्‍यादा किसान औरंगाबाद रीजन के हैं। 2021 में 11 महीने की अवधि में 804 किसानों ने मौत को गले लगा लिया। नागपुर संभाग में ऐसे 309 मामले दर्ज किए गए। पिछले दो वर्षों में कोंकण संभाग में एक भी आत्महत्या नहीं हुई। आरटीआई कार्यकर्ता जीतेंद्र घाडगे ने राज्‍य सरकार से आरटीआई के माध्‍यम से ये जानकारी मांगी थी। वे कहते हैं, ‘कई कर्जमाफी और योजनाओं के बाद भी किसानों की आत्महत्या के मामलों में कमी नहीं आ रही है। 2020 में 2,547 किसानों ने आत्महत्या की, जबकि 2,498 किसानाें ने नवंबर 2021 तक 11 महीनों में अपना जीवन समाप्त कर लिया।’

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राज्य में लगभग 50% आत्महत्याओं के साथ विदर्भ हमेशा सबसे बुरी तरह प्रभावित रहा है। 2020 की अपेक्षा आत्‍महत्‍याओं के मामले में अमरावती जिला ने यवतमाल को पीछे छोड़ दिया है।’द यंग व्हिसलब्लोअर्स फाउंडेशन’ के घाडगे ने कहा, ‘किसानों के मानसिक स्वास्थ्य पहलू की अनदेखी करना और सभी को सिर्फ कर्जमाफी दे देने से इस समस्‍या का समाधान नहीं होगा। संकटग्रस्त किसानों को छांटना महत्वपूर्ण है ताकि उन लोगों तक मदद पहुंचाई जा सके जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।’

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शिवाजी विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग के प्रमुख ज्ञानदेव तालुले ने कहा कि मराठवाड़ा और विदर्भ की जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए अनाज, दलहन, तिलहन और सब्जियों की खेती को बढ़ावा देने की जरूरत है। अपने दिसंबर 2021 के शोध पत्र ‘द साइन ऑफ़ परसिस्टेंट एग्रेरियन डिस्ट्रेस; सुसाइड बाय महाराष्‍ट्र फार्मर्स में उन्होंने कहा है, ‘अतीत में सरकारी राहत पैकेजों के प्रभाव अल्पकालिक थे और लंबे समय में समस्याओं का समाधान नहीं कर सके। इन पैकेजों के क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार भी हुआ।’ राज्य की 1 लाख रुपए की राहत के तहत औसतन केवल 50% किसानों के परिजन ही मुआवजे के लिए पात्र पाए गए। घडगे ने कहा कि 15 साल पहले तैयार किए गए पुराने नियम केवल उन्‍हीं परिजनों को वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं जिन्‍होंने राष्ट्रीयकृत बैंक से कर्ज लिया है।

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महाविकास अघाड़ी सरकार ने सत्ता में आने के बाद 2 लाख रुपए तक की पूरी कर्ज माफी का वादा किया था। अगर दो लाख रुपये से ज्यादा के कर्ज वाला किसान अतिरिक्त राशि का पुनर्भुगतान करता है, तो उसे दो लाख रुपए की छूट मिलेगी। जबकि जो किसान नियमित तौर पर अपने बकाया को चुकाते हैं, उन्हें 50,000 रुपए का मुआवजा दिया जाएगा।

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महाराष्‍ट्र में जनवरी 2020 से नवंबर 2020 के बीच कुल 2]270 किसानों ने आत्‍महत्‍या की थी। साल 2019 में 2,566 किसानों ने आत्महत्या की थी। जिन 2270 किसानों ने आत्महत्या की, उनमें से 40% से ज्यादा यानी 920 किसान मुआवजे के हकदार थे। इनमें आधे से ज्‍यादा किसान विदर्भ क्षेत्र के थे जिसे महाराष्ट्र के कॉटन बेल्ट के रूप में भी जाना जाता है। इस इलाके से तकरीबन 1,230 किसानों ने आत्महत्या कर ली थी। मराठवाड़ा के सूखे इलाके वाली जगहों पर 693 किसानों ने जबकि उत्तर महाराष्ट्र में यह आंकड़ा 322 किसानों का था।

अक्‍टूबर 2021 में आई 2020 की एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार किसानों और कृषि मजदूरों की आत्महत्या रुकने की बजाय बढ़ रही है। कुल मिलाकर देश में 2020 के दौरान कृषि क्षेत्र में 10,677 लोगों की आत्महत्या की जो देश में कुल आत्महत्याओं (1,53,052) का 7% है। इसमें 5,579 किसान और 5,098 खेतिहर मजदूरों की आत्महत्याएं शामिल हैं। 4,006 आत्महत्याओं के साथ महाराष्ट्र सबसे आगे रहा। इसके बाद कर्नाटक (2,016), आंध्र प्रदेश (889), मध्य प्रदेश (735) और छत्तीसगढ़ (537) में कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों ने आत्महत्या की। ये राज्य 2019 में भी इस मामले में दूसरे राज्यों से आगे थे।

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