मुंबई के मध्य और हार्बर लाइनों के स्टेशनों पर लगेंगे डिजिटल सेंसर

Digital sensors will be installed at stations on Mumbai's Central and Harbor lines

मुंबई के मध्य और हार्बर लाइनों के स्टेशनों पर लगेंगे डिजिटल सेंसर

मध्य रेलवे ने मुख्य और हार्बर लाइनों पर सभी एस्केलेटर में डिजिटल सेंसर लगाने का फैसला किया है, ताकि बार-बार रुकने की समस्या को दूर किया जा सके। मध्य रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फरवरी 2025 तक मेनलाइन और हार्बर लाइन के रूट्स पर सभी 164 एस्केलेटर में ऐसे सेंसर लगाए जाएंगे, जो एस्केलेटर को रिमोट से फिर से चालू कर सकेंगे।

मुंबई: मध्य रेलवे ने मुख्य और हार्बर लाइनों पर सभी एस्केलेटर में डिजिटल सेंसर लगाने का फैसला किया है, ताकि बार-बार रुकने की समस्या को दूर किया जा सके। मध्य रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फरवरी 2025 तक मेनलाइन और हार्बर लाइन के रूट्स पर सभी 164 एस्केलेटर में ऐसे सेंसर लगाए जाएंगे, जो एस्केलेटर को रिमोट से फिर से चालू कर सकेंगे। इससे एस्केलेटर को दोबारा शुरू करने में लगने वाला समय 25-30 मिनट से घटकर केवल 2-5 मिनट रह जाएगा।

स्टडी के बाद लिया गया फैसला
यह फैसला मध्य रेलवे द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से कर्जत/कसारा और CSMT से पनवेल तक के एस्केलेटर पर की गई एक इंटरनल स्टडी के बाद लिया गया। स्टडी में पाया गया कि प्रत्येक एस्केलेटर औसतन 128 बार प्रति माह रुकता है, जिसमें से 110 बार इसे हैंडल पर लगे लाल बटन को दबाकर मैन्युअल रूप से बंद किया जाता है। इससे यात्रियों, खासकर बुजुर्गों और दिव्यांग व्यक्तियों को असुविधा होती है।

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टर्मिनस स्टेशनों पर होती है गड़बड़ी
मध्य रेलवे के अधिकारी के अनुसार, एस्केलेटर रुकने की अधिकांश घटनाएं उन प्लैटफॉर्मों पर होती हैं, जहां लंबी दूरी की ट्रेनें रुकती हैं। उन्होंने बताया, ‘सबसे ज्यादा मामले बुजुर्गों, महिलाओं, उपद्रवियों और कुलियों द्वारा जानबूझकर या अनजाने में लाल बटन दबाने के होते हैं। कभी-कभी एस्केलेटर के पास लगे सीसीटीवी फुटेज से दोषियों की पहचान हो जाती है, लेकिन रेलवे अधिनियम के तहत उन पर जुर्माना लगाने का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए हम उनके खिलाफ कुछ नहीं कर सकते।’

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क्या है वर्तमान प्रक्रिया
अभी हर बार जब एस्केलेटर रुकता है, तो यह रेलवे स्टाफ या सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से संबंधित स्टेशन मास्टर को सूचित किया जाता है। स्टेशन मास्टर फिर इसे दोबारा चालू करने का कार्य संबंधित व्यक्ति को सौंपते हैं। यदि तकनीकी समस्या होती है, तो इसे निजी ठेकेदारों की मदद से ठीक कराया जाता है। इस प्रक्रिया में 25-30 मिनट का समय लगता है। नई व्यवस्था के बाद प्रत्येक एस्केलेटर में एक सेंसर लगाया जाएगा, जिसे ऑनलाइन नियंत्रित किया जा सकेगा। जब एस्केलेटर किसी अनुचित कारण से बंद होता है, तो इसे कंट्रोल ऑफिस से केवल एक क्लिक के जरिए फिर से शुरू किया जा सकेगा। नई प्रणाली से यह प्रक्रिया मात्र 2-5 मिनट में पूरी हो जाएगी।

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क्यों एस्केलेटर्स से हो रही है परेशानी?
मुंबई के सबर्बन स्टेशनों पर जहां प्लैटफॉर्म पर सीमित जगह होती है, वहां एस्केलेटर्स लगाने के लिए ज्यादा जगह की आवश्यकता होती है। इन एस्केलेटर्स को नए 12 मीटर चौड़े एफओबी से जोड़ा गया है लेकिन कई बार बंद मिलने पर यात्रियों को परेशानी होती है। स्टेशनों पर एस्केलेटर्स की संख्या तो बढ़ रही है लेकिन उसी अनुपात में इसे संभालने वाले लोग नहीं है। मौजूदा प्रक्रिया में एस्केलेटर दोबारा शुरू करने में करीब आधा घंटा तो लगता है लेकिन सीमित स्टाफ होने के कारण इंतजार और बढ़ जाता है। एेसे में तकनीकी अपग्रेड करके इन परेशानी को दूर दूर करने की कवायद हो रही है

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