1942 में ग्वालियर में प्रथम आजादी के संघर्ष के रूप में फहराया गया तिरंगा।
The tricolor was hoisted in Gwalior in 1942 as the first freedom struggle.
ग्वालियर मध्य प्रदेश,
ग्वालियर विभिन्न कलाओं का शहर है विशेषकर गायन के क्षेत्र में। ग्वालियर के इतिहास में एक ऐसे महान क्रांतिकारी ग्वालियर में जन्मे जिनका नाम में रामचंद्र मोरेश्वर करकेरी जी (उपाख्य वकील साहब) था। करकरे जी के चरित्र पर अनेकों डॉक्यूमेंट्री बनी है करकरे जी आज के युग के लिए प्रेरणा का स्रोत है करकेरी जी को "शिरोमणि अधिवक्ता" शीर्षक से नवाजा गया था,आपने चंद्र शेखर आजाद से गुप्त भैंट की थी, एवं बाद में बम भी बनाएं।
ग्वालियर राष्ट्रोत्थान न्यास के विवेकानंद सभागार में शहर के गणमान्य व्यक्तियों ने सुविख्यात स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गवासी रामचंद्र मोरेश्वर करकरे जी की को नमन किया एवं उनकी इस 115 वी जयंती का कार्यक्रम आयोजित किया गया।
विचारधारा बड़ी है,उम्र नहीं :
चंद्र शेखर आजाद के पोत्रो अमित आजाद ने कहा हम यहां जयंती क्यों मना रहे हैं इसके पीछे क्या कारण है इसके पीछे वही कारण है जो भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद के मन में था "स्वतंत्रता"। आज यह स्वतंत्रता अरबों लोगों के बलिदान का परिणाम है भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसकी संस्कृति अरबों साल पुरानी संस्कृति है चंद्र शेखर आजाद ने अंग्रेजों से कह दिया था कि यह मैं फांसी पर लटकोग और वहां मेरी विचारधारा अमर हो जाएगी।
इस आयोजन में गणमान्य अतिथियों के रूप में मेजर ध्यान चंद्र के पुत्र "अशोक ध्यान चंद्र", चंद्रशेखर आजाद के पोत्र अमित आजाद तिवारी, सहारा हॉस्पिटल के संचालक डॉ ए.एस. भल्ला, रेडियन विद्यालय के संचालक श्री विजय गुप्ता, संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री राकेश कुशवाह, दैनिक समाचार पत्र नईदुनिया के संपादक श्री वीरेंद्र तिवारी, गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय के पूर्व अधिष्ठाता डॉ.भारत जैन, एल.एन.आई. पी. के वित्त अधिकारी श्री उमाशंकर कुलश्रेष्ठ, महात्मा गांधी कॉलेज ऑफ लॉ के चेयरमैन श्री यशपाल सिंह तोमर विशिष्ट अतिथि के रुप में उपस्थित हुए। कार्यक्रम में रामचंद्र करकरे जी के पुत्र डॉ ईश्वर चंद्र करकरे एवं पोत्र नीलेश करकरे,आयोजन में भारत तिब्बत सहयोग मंच की प्रांत अध्यक्ष मोनिका जैन एडवोकेट , एवं प्रदेश महामंत्री अर्जुन अग्रवाल सम्मिलित हुई।
रामचंद्र करकरे संगीत सम्मान 2023:
वरिष्ठ शास्त्रीय गायकद्वय पंडित मार्तण्डबुआ जोशी ।
पंडित प्रभाकर गोहदकर।
विजय परांडि(सहयोग सम्मान)
मोहन योगी (सहयोग सम्मान)
झलकियां:
पंडित गोहदकर जी ने अपने गायन में राग देश, राग खम्बावती, रागनी नारायणी, राग विजय नगरी में पुरानी बन्दिशें प्रस्तुत की।
श्री हेमंत कोल्हाटकर एवं नवोदिता गायक कलाकार ने प्रस्तुति दी।
रामचरित रामचंद्र मोरेश्वर करकरे की कृत देशभक्ति पूर्ण हिंदी कविता "जननी" का सस्वर काव्य पाठ प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम का संचालन श्री चंद्र प्रताप सिकरवार एवं श्री कृष्ण कुमार पांडेय ने किया आभार मंजू लता आर्य ने किया।
"एक पुरानी कहावत है:
"एक नहीं बीस करो समझौते,
पर स्वतंत्र भारत का मस्तिक नहीं झुकेगा।
माटी हमारी पूजा,माटी हमारा वंदन।


