भाजपा में गए ४०-५० विधायक... मूल पार्टी में प्रवेश कर सकते हैं
40-50 MLAs who went to BJP...can enter original party
भाजपा के कई विधायकों की आनेवाले दिनों में घर वापसी देखने को मिल सकती है, ऐसा संकेत अजीत पवार ने दिया। राकांपा के कई विधायक २०१४ में पार्टी छोड़कर भाजपा में चले गए, कई ने २०१९ में पार्टी बदली, २०१४ में ऐसी तस्वीर पेश की गई कि नरेंद्र मोदी का करिश्मा पूरे देश में है और सत्ता में भारी परिवर्तन होगा, ऐसा भ्रम निर्माण किया गया। जिसे देखकर कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक लोगों ने वोट देकर उन्हें स्पष्ट बहुमत दिया।
मुंबई : पिछले २८ वर्षों से भाजपा के गढ़ कसबा निर्वाचन क्षेत्र को उपचुनाव में महाविकास आघाड़ी के उम्मीदवार ने अपने कब्जे में लेकर दिखा दिया। जिस प्रभाग में भाजपा के तीन-तीन नगरसेवक हैं, ऐसे प्रभाग में आघाड़ी उम्मीदवार को मतदान हुआ है। जिस पेठ में भाजपा के अधिकार के मत थे, उस क्षेत्र में भी भाजपा को झटका लगा है। महाविकास आघाड़ी की एकता ने भाजपा के गढ़ को ध्वस्त कर दिया है। कसबा उपचुनाव ने एक प्रकार से आघाड़ी को बड़ा आत्मविश्वास दिया है। अब आने वाले मनपा और विधानसभा चुनाव की दृष्टि से महाविकास आघाड़ी ने कदम उठाने की शुरुआत की है, ऐसा संकेत नेता प्रतिपक्ष अजीत पवार ने देते हुए कहा कि भाजपा में गए ४०-५० नेता कांग्रेस-राकांपा के हैं।
आनेवाले दिनों में पार्टी नेतृत्व को बोलकर कई विधायक मूल पार्टी में प्रवेश कर सकते हैं। आखिर इंसान हैं तो गलती हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्मे, उनके अधिकार के कुछ वोटों और कुछ पार्टी के वोटों के दम पर उस समय संबंधित नेताओं के लिए निर्वाचित होना आसान हो गया था। आखिरकार, एक विधायक क्षेत्र का विकास करना चाहता है। वह लोगों को काम दिखाना चाहता है। पहले की तरह नहीं है कि एक विचारधारा को माननेवाला व्यक्ति विपक्ष में रहेगा, लेकिन पार्टी नहीं छोड़ेगा। अब यह मानसिकता लोगों में नहीं है, यह कटु सत्य है। इसलिए पिछले दिनों में हुई गलती लोग सुधार सकते हैं।
भाजपा के कई विधायकों की आनेवाले दिनों में घर वापसी देखने को मिल सकती है, ऐसा संकेत अजीत पवार ने दिया। राकांपा के कई विधायक २०१४ में पार्टी छोड़कर भाजपा में चले गए, कई ने २०१९ में पार्टी बदली, २०१४ में ऐसी तस्वीर पेश की गई कि नरेंद्र मोदी का करिश्मा पूरे देश में है और सत्ता में भारी परिवर्तन होगा, ऐसा भ्रम निर्माण किया गया। जिसे देखकर कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक लोगों ने वोट देकर उन्हें स्पष्ट बहुमत दिया। राजीव गांधी के बाद देश में किसी को इतना बहुमत नहीं मिला था इसलिए जो लोग राजनीति करना चाहते हैं लेकिन वे अपने निर्वाचन क्षेत्र को सुरक्षित और विकास करना चाहते थे, वे लोग उस समय भाजपा में शामिल हो गए। अब परिस्थितियां बदल रही हैं, लोग भाजपा को छोड़कर मूल पार्टी में आ सकते हैं, ऐसा अजीत पवार ने कहा।


