मुंबई : टोरेस कंपनी घोटाले का मामला 1000 करोड़ रुपए से अधिक; 

Mumbai: Torres company scam case worth more than Rs 1000 crore;

मुंबई : टोरेस कंपनी घोटाले का मामला 1000 करोड़ रुपए से अधिक; 

1000 करोड़ रुपए से अधिक के दादर टोरेस कंपनी घोटाले का मामला बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंच गया है। कंपनी से कथित रूप से जुड़े अभिषेक महेंद्र गुप्ता नामक व्यक्ति ने याचिका में अदालत से अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई है और पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी के गठन का अनुरोध किया है। याचिकाकर्ता ने टोरेस कंपनी के करोड़ों रुपए के घोटाले को उसके द्वारा उजागर करने का दावा किया है।

मुंबई : 1000 करोड़ रुपए से अधिक के दादर टोरेस कंपनी घोटाले का मामला बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंच गया है। कंपनी से कथित रूप से जुड़े अभिषेक महेंद्र गुप्ता नामक व्यक्ति ने याचिका में अदालत से अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई है और पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी के गठन का अनुरोध किया है। याचिकाकर्ता ने टोरेस कंपनी के करोड़ों रुपए के घोटाले को उसके द्वारा उजागर करने का दावा किया है।

न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति नीता केदार गोखले की पीठ के समक्ष अभिषेक महेंद्र गुप्ता की ओर से वकील विवेक तिवारी और वकील प्रियांशु मिश्रा की दायर याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता के वकील विवेक तिवारी ने दलील दी कि याचिकाकर्ता पेशे से चार्टर्ड एकाउंटेंट है। दादर के टोरेस विदेशी कंपनी ने पिछले साल 26 दिसंबर को याचिकाकर्ता को 2023-2024 के आर्थिक ऑडिट रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपा। इस दौरान उसे कंपनी के करोड़ों रुपए के घोटाले की जानकारी हुई। उसने 29 दिसंबर को एन.एम.जोशी मार्ग पुलिस स्टेशन में कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उसकी शिकायत को दर्ज नहीं किया।

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इस मामले में वह मुख्य गवाह है और मुख्य आरोपियों तक पहुंचने में जांच एजेंसियों को मदद कर सकता है। ऐसे में उसकी जान को खतरा है। उसे पुलिस सुरक्षा दी जानी चाहिए। इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया जाना चाहिए। पीठ ने याचिकाकर्ता को मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को याचिका में पार्टी बनाने के निर्देश दिया है। 13 जनवरी को मामले की सुनवाई रखी गई है। निवेशकों की शिकायत पर दादर पुलिस स्टेशन में टोरेस कंपनी के निदेशकों के खिलाफ मामला दर्ज किया। बाद में मामले की जांच को ईओडब्ल्यू को सौंपी गई। ईओडब्ल्यू ने याचिकाकर्ता समेत निवेशकों के बयान दर्ज किए हैं।
 

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