मुंबई : गोली की रफ्तार से दौड़ेगी रेल, जानिए कहां तक पहुंचा बुलेट ट्रेन का काम

Mumbai: Trains will run at the speed of a bullet, know how far the work on the bullet train has reached

मुंबई : गोली की रफ्तार से दौड़ेगी रेल, जानिए कहां तक पहुंचा बुलेट ट्रेन का काम

भारत में वो दिन दूर नहीं जब गोली की रफ्तार से ट्रेनें दौड़ेगी. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर काम तेजी से चल रहा है, जिसके तहत 13 नदियों और कई राजमार्गों पर पुल बनाए जा रहे हैं. इसमें कई रेलवे लाइनों को सात स्टील और प्रीस्ट्रेस्ड कंक्रीट पुलों के माध्यम से पार किया जाएगा.

मुंबई : भारत में वो दिन दूर नहीं जब गोली की रफ्तार से ट्रेनें दौड़ेगी. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर काम तेजी से चल रहा है, जिसके तहत 13 नदियों और कई राजमार्गों पर पुल बनाए जा रहे हैं. इसमें कई रेलवे लाइनों को सात स्टील और प्रीस्ट्रेस्ड कंक्रीट पुलों के माध्यम से पार किया जाएगा. यह जानकारी भारतीय रेलवे द्वारा वार्षिक समीक्षा में दी गई.   

कहां तक हो चुका है काम   
रेलवे द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, प्रोजेक्ट के अंतर्गत 243 किलोमीटर से अधिक पुल निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है, साथ ही 352 किलोमीटर पियर कार्य और 362 किलोमीटर पियर नींव का कार्य भी पूरा हो चुका है. गुजरात में ट्रैक निर्माण का काम तेजी से चल रहा है, आनंद, वडोदरा, सूरत और नवसारी जिलों में आरसी ट्रैक बेड का निर्माण कार्य हो रहा है.  लगभग 71 किलोमीटर आरसी ट्रैक बेड का निर्माण पूरा हो चुका है और वायडक्ट पर रेल की वेल्डिंग शुरू हो गई है.   

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महाराष्ट्र में मुंबई बुलेट ट्रेन स्टेशन के लिए पहला कंक्रीट बेस स्लैब 32 मीटर की गहराई पर सफलतापूर्वक डाला जा चुका है, जो 10 मंजिला इमारत के बराबर है. बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) और शिल्पाता के बीच 21 किलोमीटर लंबी सुरंग पर काम चल रहा है, जिसमें मुख्य सुरंग निर्माण की सुविधा के लिए 394 मीटर की इंटरमीडिएट सुरंग (एडीआईटी) पूरी हो चुकी है.   

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पालघर जिले में न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) का उपयोग करके सात पर्वतीय सुरंगों का निर्माण कार्य प्रगति पर है.  गुजरात में एकमात्र पर्वतीय सुरंग पहले ही सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है. समीक्षा में कहा गया है कि इस कॉरिडोर पर 12 स्टेशन हैं, जिन्हें थीम आधारित एलीमेंट्स और ऊर्जा-कुशल सुविधाओं के साथ डिजाइन किया गया है और इनका निर्माण चल रहा है.  ये यूजर फ्रेंडली और ऊर्जा-सकारात्मक स्टेशन विश्व स्तरीय यात्री अनुभव प्रदान करने के लिए डिजाइन किए गए हैं, साथ ही इनमें सस्टेनेबिलिटी को प्राथमिकता भी दी गई है.

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