महाराष्ट्र में सिर्फ चार दिन बचे हैं राज्यसभा चुनाव…होटलों के बाहर की जा रही है विधायकों की रखवाली

महाराष्ट्र में सिर्फ चार दिन बचे हैं राज्यसभा चुनाव…होटलों के बाहर की जा रही है विधायकों की रखवाली

Rokthok Lekhani

मुंबई:राज्यसभा चुनाव में अब सिर्फ चार दिन बचे हैं, ऐसे में सभी राजनीतिक पार्टियां अपने विधायकों को खरीद-फरोख्त से बचाने और सुरक्षित स्थानों पर ले जाने में जुट गई है। शिवसेना ने अपने विधायकों को सोमवार की रात की मढ आईलैंड के होटल रिट्रीट में भेज दिया है। विधायकों पर नजर रखने के लिए शिवसेना ने होटल के अंदर और बाहर शिवसैनिकों की टुकड़ियां तैनात की हैं। वहीं, खबर है कि कांग्रेस अपने विधायकों को रेनेसां होटल में रखने जा रही है।

कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों को मुंबई पहुंचने और मुंबई में ही रुकने के निर्देश जारी किए हैं। इसी तरह खबर है कि बीजेपी भी अपने विधायकों को ताज होटल में रखने वाली है। खबर यह भी है कि जल्द ही महा विकास आघाडी में शामिल तीनों पार्टियों के विधायकों को एक साथ रखा जा सकता है। राज्यसभा के इन चुनावों को महा विकास आघाडी सरकार की एकजुटता और उसके बहुमत का लिटमस टेस्ट भी माना जा रहा है।

बता दें कि महाराष्ट्र से खाली हो रही है राज्यसभा की 6 सीटों के लिए 10 जून को मतदान होना है और 7 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें दो उम्मीदवार शिवसेना के हैं। एक उम्मीदवार एनसीपी का है। एक कांग्रेस का है और बीजेपी ने अपने तीन उम्मीदवार उतारकर चुनाव को रोचक बना दिया है। हर उम्मीदवार को 42 विधायकों के वोट पाना जरूरी है।

विधानसभा में पार्टियों की सदस्य संख्या को देखते हुए यह तय माना जा रहा है कि अगर खरीद फरोख्त नहीं हुई तो शिवसेना का एक, एनसीपी का एक, कांग्रेस का एक और बीजेपी के दो उम्मीदवार आसानी से चुनाव जीत सकते हैं। लेकिन छठवीं सीट के लिए शिवसेना के संजय पवार और बीजेपी के धनंजय महाडिक के बीच मुकाबला होना है। इसलिए विधायकों को सहेजने-संभालने की यह कवायद 10 जून को मतदान होने तक जारी रहेगी।

राज्यसभा के चुनाव का अब पूरा दारोमदार निर्दलीय और छोटी पार्टियों के विधायकों पर टिका हुआ है। शिवसेना और बीजेपी दोनों ही पार्टियां निर्दलीय और अन्य छोटे दलों के विधायकों को अपने पाले में करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं। राज्यसभा चुनाव के मौके पर छोटी पार्टियों के विधायक और निर्दलीय विधायकों के तेवर भी बदल रहे हैं।

हालांकि सरकार के चुनाव प्रबंधकों को उम्मीद है कि वे विधायकों को मना लेंगे। सरकार के साथ शामिल प्रहार जनशक्ति पार्टी के विधायक बच्चू कडू ने तो साफ-साफ कह दिया है कि यदि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत करके धान और चने की खरीदी तत्काल शुरू नहीं कराई, तो वह अंतिम पांच मिनट में अपना फैसला लेंगे कि किसे वोट डालना है और किसे नहीं। बच्चू कडू कि पार्टी के दो विधायक हैं।

वही विदर्भ के निर्दलीय विधायक आशीष जायसवाल ने भी आरोप लगाया है कि उनके चुनाव क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए निधि देने के मामले में उनसे कमीशन की मांग की गई है। इसके बाद उन्होंने सोमवार को मुख्यमंत्री उद्ध‌व ठाकरे से मुलाकत की। इधर दो विधायकों वाली समाजवादी पार्टी के नेता अबू आसिम आजमी ने भी सरकार पर दबाव बनाते हुए मुसलमानों को शिक्षा में 5% आरक्षण लागू किए जाने की मांग कर दी है। उनका कहना है कि अगर मुख्यमंत्री ने उन्हें उनकी मांग का जवाब नहीं दिया तो वह अपना फैसला लेने के लिए स्वतंत्र हैं।

इधर तीन विधायकों वाली बहुजन विकास आघाडी के नेता हितेंद्र ठाकुर फिलहाल खामोश हैं, लेकिन उनकी पार्टी के तीन विधायक होने की वजह से उनका महत्व अचानक बढ़ गया है। बता दें कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाडी सरकार को 8 निर्दलीय विधायक तथा आठ अन्य छोटी पार्टियों के विधायक समर्थन दे रहे हैं अगर राज्यसभा चुनाव में इन 16 विधायकों ने महा विकास आघाडी सरकार का साथ छोड़ा तो शिवसेना के उम्मीदवार संजय पवार की हार हो सकती है। इधर विधानसभा में नेता विपक्ष देवेंद्र फडणवीस के कोरोना ग्रस्त होने के बावजूद वे लगातार निर्दलीय विधायकों से फोन पर संपर्क कर रहे हैं। उनके करीबी लोगों का दावा है कि सारी तैयारी हो चुकी है और बीजेपी अपने उम्मीदवार की जीत निश्चित मानकर चल रही हैं।


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