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                <title>spent - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>मुंबई में बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा वॉटर मेट्रो नेटवर्क, खर्च होंगे 6066 करोड़, क्या-क्या होगा खास?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अगर आप भी मुंबई के रहने वाले है, तोयह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. दरअसल मुंबई और उसके आसपास के शहरों में बढ़ते ट्रैफिक से राहत दिलाने के लिए महाराष्ट्र सरकार एक खास योजना की तैयारी कर रही है. सरकार दुनिया का सबसे बड़ा वॉटर मेट्रो नेटवर्क तैयार करेगी, जिसकी लागत करीब 6,066 करोड़ रुपये है.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50691/the-worlds-largest-water-metro-network-will-be-built-in"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-12t100152.377.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>अगर आप भी मुंबई के रहने वाले है, तोयह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. दरअसल मुंबई और उसके आसपास के शहरों में बढ़ते ट्रैफिक से राहत दिलाने के लिए महाराष्ट्र सरकार एक खास योजना की तैयारी कर रही है. सरकार दुनिया का सबसे बड़ा वॉटर मेट्रो नेटवर्क तैयार करेगी, जिसकी लागत करीब 6,066 करोड़ रुपये है. इसका खास मकसद सड़कों और रेलवे पर बढ़ते दबाव को कम करना है. इसके साथ ही यात्रा को तेज बनाने और पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना है. </p>
<p> </p>
<p>इस योजना के तहत सैकड़ों किलोमीटर लंबा जलमार्ग नेटवर्क बनाया किया जाएगा. इसके अलावा इलेक्ट्रिक-हाइब्रिड नौकाएं चलाई जाएगी और सिंधुदुर्ग में आधुनिक बोट बनाने का केंद्र भी स्थापित की जाएगी. सरकार का कहना है कि इस योजना के तहत आने वाले सालों में करोड़ों यात्रियों को इसका सीधा फायदा मिलेगा. </p>
<p><strong>क्या-क्या होगा खास? </strong><br />6,066 करोड़ रुपये की लागत से परियोजना विकसित की जाएगी.<br />340 किलोमीटर लंबा वॉटर मेट्रो नेटवर्क तैयार होगा.<br />कुल 33 जलमार्ग और 44 आधुनिक टर्मिनल बनाए जाएंगे.<br />यात्रियों के लिए 203 इलेक्ट्रिक-हाइब्रिड नौकाएं चलाई जाएंगी.<br />पूरा होने पर यह दुनिया का सबसे बड़ा वॉटर मेट्रो नेटवर्क होगा. </p>
<p><strong>2031 तक करोड़ों यात्रियों को मिलेगा फायदा </strong><br />महाराष्ट्र का मकसद है कि साल 2031 तक करीब 7.5 करोड़ यात्रियों को इस सेवा का फायदा मिल सकें. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मुताबिक, मुंबई की ट्रैफिक परेशानी का हल सिर्फ सड़क और रेल नेटवर्क बढ़ाने से मुमकिन नहीं है. यही वजह है कि परिवहन को भी शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है. इसके अलावा बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में पॉड टैक्सी सेवा भी शुरू करने की उम्मीद है. <br />कहां बनेगा आधुनिक बोट निर्माण केंद्र? <br />मुंबई वॉटर मेट्रो परियोजना के लिए महाराष्ट्र समुद्री बोर्ड और ज़ोया मरीन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के बीच एक समझौता किया गया है. जिसके तहत सिंधुदुर्ग जिले के सावंतवाड़ी तालुका में करीब 22 एकड़ जमीन पर करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से इलेक्ट्रिक बोट निर्माण केंद्र बनाया जाएगा. यहां वॉटर मेट्रो के लिए इलेक्ट्रिक और पर्यावरण अनुकूल नौकाएं तैयार की जाएंगी.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 10:03:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : 26 km लंबे रेल कॉरिडोर के लिए मेगा प्लान तैयार, स्टेशन-पटरियों पर खर्च होंगे 2184 करोड़</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों के सफर को और अधिक सुगम बनाने के लिए पश्चिमी रेलवे ने कमर कस ली है। कांदिवली से बोरीवली के बीच 5वीं और 6वीं लाइन का काम पूरा करने के बाद अब रेलवे का ध्यान बोरीवली-विरार लाइन पर है। इस 26 किमी लंबे कॉरिडोर के लिए स्टेशनों के स्थानांतरण और नए प्लेटफॉर्म के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। </p><p><br /></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47273/mumbai-mega-plan-ready-for-26-km-long-rail-corridor"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-01/download---2026-01-27t111550.169.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों के सफर को और अधिक सुगम बनाने के लिए पश्चिमी रेलवे ने कमर कस ली है। कांदिवली से बोरीवली के बीच 5वीं और 6वीं लाइन का काम पूरा करने के बाद अब रेलवे का ध्यान बोरीवली-विरार लाइन पर है। इस 26 किमी लंबे कॉरिडोर के लिए स्टेशनों के स्थानांतरण और नए प्लेटफॉर्म के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। <br /><strong></strong></p><p><strong><br /></strong></p><p><strong>क्यों हो रहा है यह बदलाव? </strong><br />पहले चरण में पश्चिमी उपनगर के कांदिवली से बोरीवली के बीच पांचवीं और छठी लाइन का काम पूरा किया गया था, जिसके लिए करीब एक महीने का ब्लॉक लिया गया था। अब इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अगले चरण में कई स्टेशनों पर बड़े बदलाव किए जाएंगे। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य लंबी दूरी की एक्सप्रेस/मेल ट्रेनों को उपनगरीय लोकल ट्रेनों से अलग करना है। वर्तमान में दोनों एक ही ट्रैक पर चलती हैं, जिससे लोकल ट्रेनें लेट होने से भीड़ की समस्या बढ़ जाती है। साथ ही नई लोकल सेवाएं भी शुरू करने में दिक्कतें आती हैं। लेकिन नई पटरियों के बनने से एक्सप्रेस ट्रेनें उससे चलाई जाएंगी और लोकल ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी बढ़ाई जा सकेगी।<br /></p><p><strong>इन स्टेशनों पर होगा बड़ा बदलाव </strong><br />परियोजना के तहत कई स्टेशनों के प्लेटफॉर्म को शिफ्ट किया जाएगा ताकि नए ट्रैक के लिए जगह बनाई जा सके। दहिसर स्टेशन के प्लेटफॉर्म को उत्तर की दिशा में शिफ्ट किया जाएगा। वहीँ, भायंदर स्टेशन के प्लेटफॉर्म को पश्चिम की तरफ सरकाया जाएगा। विरार स्टेशन के प्लेटफॉर्म को भी दक्षिण की ओर स्थानांतरित करने की योजना है। इसके अलावा मीरा रोड, नायगांव और नालासोपारा में भी नए प्लेटफॉर्म और यात्री सुविधाओं का विस्तार होगा। <br /></p><p><strong>दो नई पटरियां बिछाई जाएंगी</strong><br />इस परियोजना के तहत बोरीवली से विरार के पूरे हिस्से में मौजूदा मुख्य लाइनों के पश्चिमी हिस्से में दो नई रेलवे लाइनों का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही तीन बड़े पुल, 16 छोटे पुल, एक अंडरपास और दो अहम रेलवे पुल बनाए जाएंगे।  वहीँ, वसई खाड़ी पर स्थित महत्वपूर्ण पुल क्रमांक 73 और 74 का विकास किया जा रहा है। पुल 73 के फाउंडेशन का काम पहले ही शुरू हो चुका है। जबकि भायंदर के पास एक पुराने ऐतिहासिक पुल को हटाकर आधुनिक बुनियादी ढांचे के लिए रास्ता साफ किया जा रहा है। <br /></p><p><strong>2184 करोड़ खर्च, 2028 में पूरा होगा काम </strong><br />इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 2,184 करोड़ रुपये है और इसे 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना पूरा होने के बाद बोरीवली से विरार के बीच का सफर तेज होगा और पीक आवर्स के दौरान होने वाली भारी भीड़ से राहत मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jan 2026 11:16:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्ली:  ग्रामीण विकास योजनाओं की सुस्त चाल, खर्च न हुआ 34.82 प्रतिशत बजट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>ग्रामीण विकास योजनाओं के लिए हर वर्ष बजट चाहे भरपूर दिया जा रहा है, लेकिन धरातल पर योजनाएं अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रही हैं। ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज से संबंधित संसद की स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ग्रामीण विकास की केंद्रीय वित्त पोषित योजनाओं के लिए वर्ष 2024-25 में बजट का जो संशोधित अनुमान रखा गया था, उसमें से 34.82 प्रतिशत पैसा खर्च ही नहीं हो सका है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/39327/new-delhi--slow-pace-of-rural-development-schemes--34-82-percent-budget-not-spent"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-03/images---2025-03-27t170339.032.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली:  </strong>ग्रामीण विकास योजनाओं के लिए हर वर्ष बजट चाहे भरपूर दिया जा रहा है, लेकिन धरातल पर योजनाएं अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रही हैं। ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज से संबंधित संसद की स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ग्रामीण विकास की केंद्रीय वित्त पोषित योजनाओं के लिए वर्ष 2024-25 में बजट का जो संशोधित अनुमान रखा गया था, उसमें से 34.82 प्रतिशत पैसा खर्च ही नहीं हो सका है।</p>
<p> </p>
<p>मंत्रालय के इसके कई कारण बताए हैं, लेकिन समिति ने चिंता जताते हुए सरकार को धरातल पर सक्रिय क्रियान्वयन और सतत निगरानी की नसीहत दी है। संसदीय समिति ने पाया है कि 2024-25 के संशोधित बजट में आवंटित 1,73,804.01 करोड़ रुपये के मुकाबले वास्तविक व्यय केवल 1,13,284.55 करोड़ रुपये रहा, जो संशोधित अनुमान चरण में आवंटित राशि से 34.82 प्रतिशत कम है।</p>
<p>वित्तीय समीक्षा के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का 15,825.35 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का 3,545.77 करोड़ रुपये, नेशनल सोशल असिस्टेंस प्रोग्राम का 1,813.34 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का 2,583.16 करोड़ रुपये, मनरेगा का 1,627.65 करोड़ और दीनदयाल उपाध्याय- ग्रामीण कौशल्य योजना का 1,313.43 करोड़ रुपया वर्ष 2024-25 में खर्च नहीं हो सक।</p>
<p>इसके साथ ही सिफारिश की गई है कि सभी हितधारकों के परामर्श से त्रैमासिक और मासिक व्यय योजनाएं पहले ही तैयार कर लें और सुनिश्चित कर लिया जाए कि योजना कार्यान्वयन के प्रत्येक चरण में पर्याप्त धन उपलब्ध रहे।समिति ने यह भी कहा है कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ग्रामीण विकास विभाग के कुल बजटीय आवंटन में 2.27 प्रतिशत की मामूली वृद्धि हुई है, जो कि 1,88,754.53 करोड़ रुपये है, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 1,84,566.19 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।</p>
<p>यह मामूली वृद्धि ग्रामीण प्रगति की सतत गति के लिए पर्याप्त नहीं है। यह भी देखा गया है कि डीएवाइ-एनआरएलएम को छोड़कर, मनरेगा, पीएमजीएसवाइ, पीएमएवाइ-जी और एनएसएपी जैसी प्रमुख योजनाओं के लिए धन को लगभग स्थिर रखा गया है। ऐसे में सरकार को ध्यान रखना होगा कि ग्रामीण विकास की कोई भी योजना धन की कमी या लक्षित योजनाओं के कार्यान्वयन की धीमी गति के कारण बाधित न हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Mar 2025 17:04:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने बीते दस वर्षों के दौरान अदालती मामलों पर 400 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए</title>
                                    <description><![CDATA[<p>केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में मुकदमों पर 66 करोड़ रुपये खर्च किए, जो पिछले वित्तीय वर्ष से नौ करोड़ रुपये अधिक थे। आंकड़ों के मुताबिक 2014-15 के बाद से मुकदमों पर खर्च लगातार बढ़ा है, सिवाय उन दो वर्षों के जब कोरोना महामारी अपने चरम पर थी। वित्तीय वर्ष 2014-15 में मुकदमों पर खर्च 26.64 करोड़ रुपये था, जबकि 2015-16 में यह बढ़कर 37.43 करोड़ रुपये हो गया था। 2014-15 से लेकर 2023-24 तक सरकार ने मुकदमों पर 409 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/38488/new-delhi--the-central-government-spent-more-than-rs-400-crore-on-court-cases-in-the-last-ten-years"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-02/supreme-court-pro-tem-spea.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में मुकदमों पर 66 करोड़ रुपये खर्च किए, जो पिछले वित्तीय वर्ष से नौ करोड़ रुपये अधिक थे। आंकड़ों के मुताबिक 2014-15 के बाद से मुकदमों पर खर्च लगातार बढ़ा है, सिवाय उन दो वर्षों के जब कोरोना महामारी अपने चरम पर थी। वित्तीय वर्ष 2014-15 में मुकदमों पर खर्च 26.64 करोड़ रुपये था, जबकि 2015-16 में यह बढ़कर 37.43 करोड़ रुपये हो गया था। 2014-15 से लेकर 2023-24 तक सरकार ने मुकदमों पर 409 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं। </p>
<p><strong>सात लाख मामलों में केंद्र सरकार पक्षकार</strong><br />इसके अलावा, कानून मंत्रालय ने इस महीने की शुरुआत में राज्यसभा में बताया कि केंद्र सरकार करीब सात लाख मामलों में पक्षकार है, जिसमें से वित्त मंत्रालय अकेले करीबी दो लाख मामलों में पक्षकार है। कानूनी सूचना प्रबंधन एवं वार्ता प्रणाली (एलआईएमबीएस) के आंकड़ों का हवाला देते हुए काननून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा, करीब सात लाख मामलों में भारत सरकार पक्षकार है। इनमें 1.9 लाख मामलों में वित्त मंत्रालय पक्षकार है। </p>
<p><strong>राष्ट्रीय मुकदमेबाजी नीति पर काम कर रही सरकार</strong><br />सरकार एक राष्ट्रीय मुकदमेबाजी नीति पर काम कर रही है, जिसका मकसद लंबित मामलों का शीघ्र समाधान करना है। प्रस्तावित नीति का मसौदा केंद्रीय कैबिनेट के पास अंतिम निर्णय के लिए जाएगा। यह नीति कई वर्षों से से तैयार की जा रही है, जिसमें विभिन्न सरकारें इसके ढांचे पर चर्चा कर चुकी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/38488/new-delhi--the-central-government-spent-more-than-rs-400-crore-on-court-cases-in-the-last-ten-years</link>
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                <pubDate>Wed, 26 Feb 2025 21:20:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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