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                <title>less - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title> मुंबई : मानसून पर ब्रेक! अगले 10 दिन कम बारिश के आसार, अगस्त में बढ़ेगी बारिश की कमी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>जुलाई 2026 के दौरान सामान्य से काफी ज्यादा बारिश हुई थी। पूरे महीने शहर में 1485 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि जुलाई की सामान्य बारिश 919.9 मिमी है। यानी मुंबई में सामान्य से करीब 60% अधिक बारिश हुई। लेकिन अगस्त की शुरुआत इसके बिल्कुल विपरीत रही है। अगस्त के पहले सप्ताह में सांताक्रूज स्थित एयरपोर्ट मौसम केंद्र पर सिर्फ 85 मिमी बारिश दर्ज हुई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश करीब 150 मिमी होती है। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51212/break-on-mumbai-monsoon-chances-of-less-rain-in-next"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/132104183.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> जुलाई 2026 के दौरान सामान्य से काफी ज्यादा बारिश हुई थी। पूरे महीने शहर में 1485 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि जुलाई की सामान्य बारिश 919.9 मिमी है। यानी मुंबई में सामान्य से करीब 60% अधिक बारिश हुई। लेकिन अगस्त की शुरुआत इसके बिल्कुल विपरीत रही है। अगस्त के पहले सप्ताह में सांताक्रूज स्थित एयरपोर्ट मौसम केंद्र पर सिर्फ 85 मिमी बारिश दर्ज हुई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश करीब 150 मिमी होती है। </p>
<p> </p>
<p>अगस्त मुंबई के लिए जुलाई के बाद दूसरा सबसे ज्यादा बारिश वाला महीना है और पूरे महीने की सामान्य बारिश 560.8 मिमी है। ऐसे में महीने की शुरुआत में ही बारिश की कमी चिंता बढ़ा रही है। मौजूदा मौसम परिस्थितियों को देखते हुए अगले 10 दिनों में बारिश की कमी और बढ़ सकती है और यह कमजोर बारिश का दौर अगस्त के मध्य के बाद भी आगे बढ़ सकता है।</p>
<p><strong>मध्य प्रदेश-यूपी का सिस्टम दे रहा है अरब सागर की नमी</strong><br />फिलहाल उत्तर-पश्चिमी मध्य प्रदेश और दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। यह सिस्टम अभी भी अरब सागर से पश्चिमी हवाओं को खींचकर कोंकण तट तक पहुंचा रहा है। इसके बावजूद मुंबई में पिछले चार दिनों से ज्यादातर जगहों पर एक अंक यानी 10 मिमी से कम बारिश ही हुई है। अगले 48 घंटों में यह मौसम प्रणाली कमजोर होकर खत्म होने की संभावना है।</p>
<p>इसके बाद करीब 11-12 अगस्त के आसपास मानसून ट्रफ के हिमालय की तलहटी के पास पहुंचने और कम से कम एक सप्ताह तक वहीं बने रहने के आसार हैं। इसका सीधा असर पश्चिमी तट पर मानसूनी गतिविधियों पर पड़ेगा। पश्चिमी तट और खासकर कोंकण क्षेत्र में मानसून की सक्रियता कमजोर पड़ सकती है, जिससे मुंबई में अच्छी बारिश के लिए जरूरी नमी और सिस्टम दोनों कमजोर हो जाएंगे।</p>
<p><strong>बंगाल की खाड़ी के सिस्टम और ऑफशोर ट्रफ नहीं होंगे सक्रिय </strong><br />मुंबई में अच्छी मानसूनी बारिश के लिए बंगाल की खाड़ी में बनने वाले मानसूनी सिस्टम और समुद्र के किनारे बनने वाली ऑफशोर ट्रफ महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फिलहाल दोनों ही सक्रिय नहीं हैं। यही वजह है कि आने वाले दिनों में मुंबई में बारिश की गतिविधि काफी कमजोर रहने की संभावना है। शुरुआत में यह कमजोर और सुस्त मौसम कम से कम अगले 10 दिनों तक जारी रह सकता है और अगस्त के मध्य के बाद भी इसके आगे बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 11:08:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई में बढ़ी गर्मी, स्काईमेट ने इस बार के मॉनसून में औसत से कम बारिश का लगाया अनुमान, बढ़ी किसानों की टेंशन</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र में बेमौसम बारिश के दौर के बाद अब फिर से भीषण गर्मी लौट आई है। मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई जैसे शहरों में पूरे दिन आसमान में बादल छाए रहते हैं और अधिकतम तापमान बढ़ने की संभावना है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि इस बार महाराष्ट्र में मॉनसून कैसा रहेगा। इसको लेकर एक प्राइवेट मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट की ओर से एक रिपोर्ट जारी की गई है। जिसने किसानों और आम जनता दोनों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। स्काईमेट ने अनुमान लगाया है कि इस साल बारिश औसत से कम होने की संभावना है। क्या सूखे जैसी स्थिति पैदा होगी?</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49063/heat-increased-in-mumbai-skymet-predicted-less-than-average-rainfall"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download-(94).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> महाराष्ट्र में बेमौसम बारिश के दौर के बाद अब फिर से भीषण गर्मी लौट आई है। मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई जैसे शहरों में पूरे दिन आसमान में बादल छाए रहते हैं और अधिकतम तापमान बढ़ने की संभावना है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि इस बार महाराष्ट्र में मॉनसून कैसा रहेगा। इसको लेकर एक प्राइवेट मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट की ओर से एक रिपोर्ट जारी की गई है। जिसने किसानों और आम जनता दोनों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। स्काईमेट ने अनुमान लगाया है कि इस साल बारिश औसत से कम होने की संभावना है। क्या सूखे जैसी स्थिति पैदा होगी?</p>
<p> </p>
<p>पिछले साल राज्य भर में अत्यधिक बारिश के कारण किसान परेशान हो गए थे। इस साल उन्हें कुछ राहत मिलने की उम्मीद थी। हालांकि स्काईमेट की ताजा रिपोर्ट के बाद चिंताएं और बढ़ गई हैं। इस बात की संभावना है कि मॉनसून के मौसम की शुरुआत में ही 'अल नीनो' की घटना सक्रिय हो सकती है। स्काईमेट की स्टडी से पता चलता है कि इससे जलवायु में बड़े बदलाव आएंगे। इसके परिणामस्वरूप जून और सितंबर के महीनों के बीच बारिश औसत से कम होगी। इसके अलावा एजेंसी ने अनुमान लगाया है कि इसके परिणामस्वरूप देश भर में सूखे जैसी स्थिति पैदा होने की 30 प्रतिशत संभावना है। </p>
<p><strong>अल नीनो मॉनसून के लिए बनेगा विलेन</strong><br />प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी क्षेत्रों में सतह का तापमान बढ़ रहा है। इससे अल नीनो की घटना बनने की संभावना बढ़ जाती है। स्काईमेट ने अनुमान लगाया है कि इस घटना का भारत के मॉनसून पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। साथ ही स्काईमेट ने यह भी कहा कि अल नीनो के प्रभाव की तीव्रता को हिंद महासागर में 'इंडियन ओशन डाइपोल' द्वारा कुछ हद तक कम किया जा सकता है। उम्मीद है कि IOD जून की शुरुआत में मॉनसून के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाएगा। </p>
<p><strong>अगस्त और सितंबर में कब बारिश</strong><br />हालांकि इसके परिणामस्वरूप देश के कई हिस्सों में अगस्त और सितंबर के बीच बारिश का स्तर कम रहने की संभावना है। महाराष्ट्र में आमतौर पर जुलाई और अगस्त के दौरान सबसे अधिक बारिश होती है। इसलिए जलवायु में यह बदलाव किसानों के लिए भारी नुकसान का जोखिम पैदा करता है। इन बदलावों का प्रभाव मध्य और पश्चिमी भारत में सबसे ज्यादा महसूस होने की संभावना है। </p>
<p><strong>भारत मौसम विज्ञान विभाग की रिपोर्ट का इंतजार</strong><br />इस बीच देश के पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में अल नीनो का प्रभाव कम होने की उम्मीद है। नतीजतन इन क्षेत्रों में पूरे मॉनसून के मौसम के दौरान अच्छी बारिश होने का अनुमान है। हालांकि भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अभी तक इस संबंध में कोई जानकारी जारी नहीं की है। फिर भी आईएमडी के इस सप्ताह तक अपनी रिपोर्ट सौंपने की संभावना है। स्काईमेट के पूर्वानुमान के अनुसार, औसत से कम बारिश होने की 40 प्रतिशत संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 11:58:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आईटीआर फाइलिंग में कम आय दिखाई या गलत जानकारी दी तो टूट सकती है आफत! मिल सकता है नोटिस, जानिए पूरी डिटेल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करना हर टैक्सपेयर की जिम्मेदारी है. लेकिन कई बार लापरवाही या जानकारी की कमी की वजह से लोग अपनी आय कम दिखा देते हैं या फिर गलत जानकारी भर देते हैं  ऐसा करना टैक्स चोरी के दायरे में आ सकता है और इसके गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं. टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह सिर्फ़ कानूनी मसला नहीं बल्कि आपकी आर्थिक और सामाजिक साख पर भी असर डाल सकता है.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/43894/if-you-file-itr-with-less-information-or-wrong-information--you-may-get-into-trouble--you-have-received-a-notice--know-the-complete-details"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-09/download---2025-09-14t191341.511.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>नई दिल्ली :</strong> इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करना हर टैक्सपेयर की जिम्मेदारी है. लेकिन कई बार लापरवाही या जानकारी की कमी की वजह से लोग अपनी आय कम दिखा देते हैं या फिर गलत जानकारी भर देते हैं  ऐसा करना टैक्स चोरी के दायरे में आ सकता है और इसके गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं. टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह सिर्फ़ कानूनी मसला नहीं बल्कि आपकी आर्थिक और सामाजिक साख पर भी असर डाल सकता है.</div>
<div> </div>
<div> </div>
<div><strong>अंडर रिपोर्टिंग और मिस रिपोर्टिंग क्या है?</strong></div>
<div>अंडर रिपोर्टिंग का मतलब है असल आय से कम आय दिखाना. यानी आपकी टैक्स योग्य आय का कुछ हिस्सा रिटर्न में शामिल ही नहीं किया गया. दूसरी ओर, मिस रिपोर्टिंग का मतलब है आय के स्रोत, प्रकार या आंकड़ों के बारे में गलत या भ्रामक जानकारी देना. इसमें फर्जी इनवॉइस दिखाना, गलत कैटेगरी में इनकम दिखाना या ऐसी छूट का दावा करना शामिल है, जिसका आपको हक नहीं है.</div>
<div> </div>
<div><strong>कानून और पेनाल्टी</strong></div>
<div>इनकम टैक्स एक्ट की धारा 270ए में इसके लिए साफ प्रावधान दिए गए हैं. अगर असेसिंग ऑफिसर पाता है कि आपकी आय कम दिखाई गई है, तो उस पर टैक्स का 50% जुर्माना लगेगा. वहीं, जानबूझकर गलत जानकारी देने या फर्जीवाड़े के मामलों में यह पेनाल्टी टैक्स की 200% तक हो सकती है. इसके अलावा, धारा 234ए, 234बी और 234सी के तहत टैक्स और पेनाल्टी पर ब्याज भी लगता है. इतना ही नहीं, अगर आपके रिटर्न और बैंक डिटेल्स या फॉर्म 26 एएस में गलतफहमी पाई जाती है, तो टैक्स विभाग नोटिस भेज सकता है और जांच भी शुरू कर सकता है.</div>
<div> </div>
<div><strong>अंडर रिपोर्टिंग और मिस रिपोर्टिंग क्या है?</strong></div>
<div>अंडर रिपोर्टिंग का मतलब है असल आय से कम आय दिखाना. यानी आपकी टैक्स योग्य आय का कुछ हिस्सा रिटर्न में शामिल ही नहीं किया गया. दूसरी ओर, मिस रिपोर्टिंग का मतलब है आय के स्रोत, प्रकार या आंकड़ों के बारे में गलत या भ्रामक जानकारी देना. इसमें फर्जी इनवॉइस दिखाना, गलत कैटेगरी में इनकम दिखाना या ऐसी छूट का दावा करना शामिल है, जिसका आपको हक नहीं है.</div>
<div> </div>
<div><strong>भारी नुकसान और सजा का खतरा</strong></div>
<div>विशेषज्ञों का कहना है कि गलत रिपोर्टिंग से आपको मिलने वाले वैध टैक्स छूट और एक्सेम्पशन भी रद्द हो सकते हैं. गंभीर मामलों में यह टैक्स चोरी की श्रेणी में आता है, जिससे न सिर्फ भारी जुर्माना बल्कि जेल तक हो सकती है. यही वजह है कि आईटीआर दाखिल करते समय पारदर्शिता और सटीकता ज़रूरी है. सही समय पर, सही जानकारी देने से आप कानूनी परेशानियों, आर्थिक नुकसान और बदनाम होने से बच सकते हैं.</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/43894/if-you-file-itr-with-less-information-or-wrong-information--you-may-get-into-trouble--you-have-received-a-notice--know-the-complete-details</link>
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                <pubDate>Sun, 14 Sep 2025 19:14:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्ली : मानसून के पैटर्न में बदलाव; मेघालय में 48% कम बारिश वहीं राजस्थान में 81 फीसदी ज्यादा बारिश </title>
                                    <description><![CDATA[<p>जलवायु परिवर्तन के चलते मानसून के पैटर्न में बदलाव आया है। इस साल भी मानसून का रुख बिलकुल बदला हुआ है। जहां बरसों से बादलों के साये में जीने वाले मेघालय जैसे इलाके में अब तक 48% तक कम बारिश हुई है, वहीं राजस्थान जैसे सूखे इलाके में सामान्य से 81 फीसदी तक ज्यादा बारिश दर्ज की गई हैं। बारिश के इस उलटफेर ने खेती से लेकर जल सुरक्षा और जैव विविधता तक, हर मोर्चे पर खतरे की घंटी बजा दी है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/42800/new-delhi--change-in-monsoon-pattern--48--less-rain-in-meghalaya-while-81--more-rain-in-rajasthan"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-08/images---2025-08-06t182441.563.jpg" alt=""></a><br /><p><br /><strong>नई दिल्ली : </strong>जलवायु परिवर्तन के चलते मानसून के पैटर्न में बदलाव आया है। इस साल भी मानसून का रुख बिलकुल बदला हुआ है। जहां बरसों से बादलों के साये में जीने वाले मेघालय जैसे इलाके में अब तक 48% तक कम बारिश हुई है, वहीं राजस्थान जैसे सूखे इलाके में सामान्य से 81 फीसदी तक ज्यादा बारिश दर्ज की गई हैं। बारिश के इस उलटफेर ने खेती से लेकर जल सुरक्षा और जैव विविधता तक, हर मोर्चे पर खतरे की घंटी बजा दी है। और साफ बता दिया है कि जलवायु परिवर्तन अब दूर की चेतावनी नहीं, हमारे दरवाज़े पर खड़ा सच है।</p>
<p> </p>
<p>मौसम विभाग की ओर से किए गए एक अध्ययन के मुताबिक पिछले 3 दशकों में भारी बारिश दर्ज करने वाले राज्य जैसे मेघालय, नागालैंड, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश में बारिश में काफी गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बंगाल में बारिश में कमी आई है। वहीं मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के अध्ययन के मुताबिक आने वाले समय में मानसून के पैटर्न में ये बदलाव और अधिक दिखाई देगा। राजस्थान में 2020-2049 के बीच मानसूनी बारिश में 35 फीसदी तक बढ़ोतरी का अनुमान है।</p>
<p>पूर्वोत्तर भारत में स्थित मेघालय जिसका अर्थ ही है ‘बादलों का घर’, में अब बादल बरसना कम कर चुके हैं। यह राज्य दुनिया के सबसे ज्यादा बारिश वाली दो जगहों मासिनराम और चेरापूंजी के लिए जाना जाता रहा है। यहां की 83 प्रतिशत आबादी खेती के लिए बारिश पर निर्भर है। लेकिन यहां लगातार घटती बारिश ने चिंता बढ़ा दी है। 1 जून से 4 अगस्त तक के अब तक के मानसून सीजन में यहां सामान्य से 48 फीसदी कम बारिश हुई है। वहीं अरुणाचल प्रदेश में 42 फीसदी और असम में 39 फीसदी तक कम बारिश दर्ज हुई है। इसकी तुलना में इसी मानसूनी सीजन के दौरान तुलनात्मक तौर पर सूखे राज्य झारखंड में 46 फीसदी और राजस्थान में सामान्य से 81 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की जा चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/42800/new-delhi--change-in-monsoon-pattern--48--less-rain-in-meghalaya-while-81--more-rain-in-rajasthan</link>
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                <pubDate>Wed, 06 Aug 2025 18:25:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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