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                <title>ends - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>मुंबई : आदिवासी छात्रों की मांगों पर महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला खत्म हुआ अनशन </title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र में आदिवासी छात्रों के लंबे आंदोलन के बाद आखिरकार राज्य सरकार ने उनकी मांगों को स्वीकार कर लिया है। मुख्यमंत्री **देवेंद्र फडणवीस** के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के बाद उनकी सभी प्रमुख मांगों को मानने का फैसला किया। इसके बाद छात्रों का अनशन खत्म होने की उम्मीद जताई जा रही है। आदिवासी छात्रों का यह आंदोलन केवल छात्रावास और शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के उम्मीदवारों की भर्ती और आदिवासी बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी शामिल थे।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51605/big-decision-of-maharashtra-government-on-the-demands-of-mumbai"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/images---2026-08-30t120701.209.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र में आदिवासी छात्रों के लंबे आंदोलन के बाद आखिरकार राज्य सरकार ने उनकी मांगों को स्वीकार कर लिया है। मुख्यमंत्री **देवेंद्र फडणवीस** के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के बाद उनकी सभी प्रमुख मांगों को मानने का फैसला किया। इसके बाद छात्रों का अनशन खत्म होने की उम्मीद जताई जा रही है। आदिवासी छात्रों का यह आंदोलन केवल छात्रावास और शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के उम्मीदवारों की भर्ती और आदिवासी बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी शामिल थे।</p>
<p> </p>
<p><strong>क्यों आंदोलन कर रहे थे एसटी छात्र?</strong><br /> महाराष्ट्र के आदिवासी छात्रों ने पुणे, नागपुर और नासिक समेत कई शहरों में अनशन शुरू किया था। इस आंदोलन की बड़ी वजह गढ़चिरौली जिले के एक आदिवासी आवासीय स्कूल में हुई दर्दनाक घटना थी, जहां सांप के काटने से तीन आदिवासी छात्राओं की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद छात्रों ने आदिवासी आश्रम स्कूलों और छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। छात्रों का आरोप था कि आदिवासी बच्चों के लिए बनाए गए आवासीय स्कूलों और छात्रावासों में मूलभूत सुविधाओं की कमी है। सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होने के कारण बच्चों की जान खतरे में पड़ रही है।</p>
<p><strong>छात्रों की प्रमुख मांगें क्या थीं? </strong><br />आंदोलन कर रहे एसटी छात्रों की कई मांगें थीं। इनमें सबसे अहम मांगें थीं— * आदिवासी छात्रों के लिए सुरक्षित और बेहतर छात्रावास व्यवस्था * आश्रम स्कूलों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम * सरकारी सेवाओं में एसटी उम्मीदवारों की भर्ती प्रक्रिया को तेज करना * छात्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना * शिक्षा संस्थानों में जरूरी संसाधन मुहैया कराना छात्रों का कहना था कि सरकार आदिवासी बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा को प्राथमिकता दे।</p>
<p><strong>सरकार ने कैसे किया समाधान? </strong><br />आदिवासी विकास मंत्री **अशोक उइके** ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आंदोलन कर रहे छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद उनकी मांगों को स्वीकार कर लिया है। सरकार ने भरोसा दिया कि छात्रों की समस्याओं पर गंभीरता से काम किया जाएगा। मंत्री ने बताया कि सरकार तीन महीने बाद दोबारा समीक्षा बैठक करेगी, जिसमें यह देखा जाएगा कि लिए गए फैसलों को जमीन पर कितना लागू किया गया है और कहीं कोई समस्या तो नहीं आ रही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/51605/big-decision-of-maharashtra-government-on-the-demands-of-mumbai</link>
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                <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 12:08:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई: एल एंड टी से छिना मुंबई के पाली हिल्स का आलीशान हाई ट्रीज बंगला, सुप्रीम कोर्ट ने खत्म की 25 साल पुरानी लड़ाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट ने एलएंडटी की एक स्पेशल लीव पिटीशन खारिज कर दी है। इसके साथ ही बांद्रा के पाली हिल रोड पर एक प्राइम रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी को लेकर चल रही लंबी कानूनी लड़ाई खत्म हो गई है। इस प्रॉपर्टी में कंपनी के पूर्व चेयरमैन और मौजूदा चेयरमैन एमेरिटस एएम नाइक पिछले 20 साल से ज़्यादा समय से रह रहे हैं। कंपनी ने दावा किया था कि वह इस प्रॉपर्टी की करीब 30% मालिक है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49595/mumbais-luxurious-high-trees-bungalow-in-pali-hills-snatched-from"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-30t113154.763.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>सुप्रीम कोर्ट ने एलएंडटी की एक स्पेशल लीव पिटीशन खारिज कर दी है। इसके साथ ही बांद्रा के पाली हिल रोड पर एक प्राइम रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी को लेकर चल रही लंबी कानूनी लड़ाई खत्म हो गई है। इस प्रॉपर्टी में कंपनी के पूर्व चेयरमैन और मौजूदा चेयरमैन एमेरिटस एएम नाइक पिछले 20 साल से ज़्यादा समय से रह रहे हैं। कंपनी ने दावा किया था कि वह इस प्रॉपर्टी की करीब 30% मालिक है। अब उसे 'हाई ट्रीज़' नाम का बंगला खाली करके उसका शांतिपूर्ण कब्ज़ा सौंपना होगा।  यह बंगला पाली हिल के पॉश रेजिडेंशियल इलाके में बची हुई कुछ हेरिटेज प्रॉपर्टीज़ में से एक है। इस पिटीशन के खारिज होने से बॉम्बे हाई कोर्ट ने पहले दिए गए बेदखली के आदेश की पुष्टि हो गई है।</p>
<p> </p>
<p><strong>1970 में खत्म हो गया था प्रॉपर्टी का पट्टा</strong><br />यह विवाद 1961 में शुरू हुई एक किरायेदारी से जुड़ा है। इस प्रॉपर्टी का औपचारिक पट्टा 1970 में खत्म हो गया था। मकान मालिकों के ग्रुप में केसी कोठारी परिवार के सदस्य और अन्य सह-मालिक शामिल थे। किरायेदारी खत्म होने के बाद, उन्होंने 2001 में बांद्रा की स्मॉल कॉज़ेज़ कोर्ट में बेदखली की कार्यवाही शुरू की थी। <br />प्रॉपर्टी का 7 पर्सेंट एल एंड टी ने खरीदा था<br />बांद्रा के पाली हिल रोड पर एक प्राइम रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी को लेकर चल रहे लंबे कानूनी विवाद को खत्म करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने एल एंड टी द्वारा दायर स्पेशल लीव पिटीशन को खारिज कर दिया। मुकदमे के दौरान 2001 में एलएंडटी ने प्रॉपर्टी में 7% अविभाजित हिस्सा अमर मुनोट (जो अब दिवंगत हैं) से खरीदा था। अमर मुनोट प्रॉपर्टी के सह-मालिकों में से एक थे।<br />बाद में, कंपनी की हिस्सेदारी बढ़कर 29.5% हो गई। इसी आधार पर, 2017 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले ('मंगल बिल्डर्स') का हवाला देते हुए, कंपनी ने तर्क दिया कि वह अब प्रॉपर्टी की सह-मालिक बन गई है और इसलिए उसके खिलाफ बेदखली की कार्यवाही जारी नहीं रह सकती। इसके अलावा, कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि एलएंडटी सहित सभी सह-मालिकों के बीच प्रॉपर्टी के बंटवारे  का एक मुकदमा अभी भी लंबित है। </p>
<p><strong>बॉम्बे हाई कोर्ट ने क्या कहा</strong><br />27 मार्च, 2026 को दिए अपने फैसले में, बॉम्बे हाई कोर्ट के जज एम.एम. सथाये ने इस तर्क को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि बेदखली का मुकदमा चलने के दौरान, एक सह-मालिक द्वारा एल एंड टी को 7% हिस्सा बेचने पर की गई आपत्तियां किसी अन्य मकसद से प्रेरित लगती हैं और इसलिए वे मुकदमे की वैधता पर कोई बुरा असर नहीं डाल सकतीं।</p>
<p>हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि 2010 में स्मॉल कॉज़ेज़ कोर्ट की अपीलीय बेंच द्वारा एल एंड टी को बेदखल करने का जो आदेश दिया गया था, उसमें कोई गलती नहीं है। इसमें यह माना गया कि किसी एक सह-मालिक का विरोध, खास तौर पर तब, जब उसका मकसद किसी किरायेदार को फ़ायदा पहुंचाना हो, बाकी सह-मालिकों के बेदखली के अधिकारों को खत्म नहीं कर सकता।</p>
<p>हाई कोर्ट ने कहा कि उसके सामने सवाल यह था कि क्या कोई सह-मालिक किसी किरायेदार को बेदखल करने के लिए मुक़दमा दायर कर सकता है, अगर कोई दूसरा सह-मालिक इस पर आपत्ति जताता है, और वह आपत्ति इसलिए है क्योंकि प्रॉपर्टी के शेयर किरायेदार के पक्ष में बेच दिए गए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 12:27:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नई दिल्ली : रेलवे ने खत्म की 20 साल पुरानी परंपरा, रिटायरमेंट पर नहीं मिलेगा गोल्ड प्लेटेड चांदी का मेडल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारतीय रेलवे में सामने आए चांदी के नकली सिक्के (मेडल) घोटाले के बाद बड़ा असर देखने को मिला है। रेलवे बोर्ड ने इस मामले में एक अहम फैसला लेते हुए सेवानिवृत्त कर्मचारियों को चांदी के सिक्के देने की 20 साल पुरानी परंपरा को तत्काल प्रभाव से खत्म कर दिया है। रेलवे की ओर से अब रिटायर होने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को विदाई उपहार के रूप में गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल नहीं दिया जाएगा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47336/new-delhi-railways-ends-20-year-old-tradition-will-not"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-01/download---2026-01-29t200434.127.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली :</strong> भारतीय रेलवे में सामने आए चांदी के नकली सिक्के (मेडल) घोटाले के बाद बड़ा असर देखने को मिला है। रेलवे बोर्ड ने इस मामले में एक अहम फैसला लेते हुए सेवानिवृत्त कर्मचारियों को चांदी के सिक्के देने की 20 साल पुरानी परंपरा को तत्काल प्रभाव से खत्म कर दिया है। रेलवे की ओर से अब रिटायर होने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को विदाई उपहार के रूप में गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल नहीं दिया जाएगा।</p>
<p> </p>
<p>रेलवे बोर्ड की प्रधान कार्यकारी निदेशक रेनू शर्मा ने इस संबंध में बुधवार (28 जनवरी 2026) को औपचारिक आदेश जारी किया। आदेश में साफ तौर पर लिखा गया है कि रिटायर होने वाले रेलवे अधिकारियों को सोने की परत वाले चांदी के मेडल देने की प्रथा को बंद करना है। यानी, सेवानिवृत्त रेलवे अधिकारियों को गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल देने की प्रथा को समाप्त किया जाता है।</p>
<p>मामला सामने आने के बाद रेलवे ने संबंधित सप्लायर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है और उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। साथ ही, रेलवे के पास मौजूद मौजूदा मेडल स्टॉक का उपयोग अब रिटायरमेंट उपहार के तौर पर नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें अन्य प्रशासनिक या वैकल्पिक कार्यों में इस्तेमाल किया जाएगा।</p>
<p>रेलवे बोर्ड के आदेश के अनुसार, यह नया नियम 31 जनवरी 2026 को रिटायर होने वाले अधिकारियों पर भी लागू होगा। यानी अब जो कर्मचारी इस तारीख या इसके बाद सेवानिवृत्त होंगे, उन्हें यह गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल नहीं मिलेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Jan 2026 20:05:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई :  मराठा आंदोलन पर विराम; मनोज जरांगे पाटिल ने राज्य सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया </title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई में जारी मराठा आंदोलन पर जल्द ही विराम लगने वाला है। मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने राज्य सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। हालांकि, उन्होंने साफ कर दिया है कि एक बार GR यानी सरकारी प्रस्ताव जारी होने के बाद आजाद मैदान को खाली कर दिया जाएगा। खास बात है कि बंबई उच्च न्यायालय ने भी आंदोलन के लिए मुंबई की सड़कों को रोकने पर आपत्ति जताई थी।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/43605/mumbai--maratha-agitation-ends--manoj-jarange-patil-accepts-state-government-s-proposal"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-09/download---2025-09-03t101507.476.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>मुंबई में जारी मराठा आंदोलन पर जल्द ही विराम लगने वाला है। मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने राज्य सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। हालांकि, उन्होंने साफ कर दिया है कि एक बार GR यानी सरकारी प्रस्ताव जारी होने के बाद आजाद मैदान को खाली कर दिया जाएगा। खास बात है कि बंबई उच्च न्यायालय ने भी आंदोलन के लिए मुंबई की सड़कों को रोकने पर आपत्ति जताई थी। मंगलवार को ही महाराष्ट्र सरकार में मंत्री राधाकृष्ण विखे-पाटिल की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने जरांगे से मुलाकात की थी। उन्होंने सरकार के इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है कि मराठाओं को कुनबी प्रमाण पत्र देने के लिए हैदराबाद गजट लागू किया जाएगा, एक महीने के अंदर ही ऐसा ही फैसला सतारा रियासत को लेकर भी लिया जाएगा। साथ ही सितंबर के अंत तक मराठा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज केस वापस लिए जाएंगे। इसके अलावा प्रस्ताव में आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों के परिजनों को आर्थिक मुआवजा देने की बात भी शामिल है।</p>
<p> </p>
<p><br />जरांगे 29 अगस्त से दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में भूख हड़ताल कर रहे हैं और ओबीसी समूह के तहत सरकारी नौकरियों और शिक्षा में मराठा समुदाय के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रहे हैं। दरअसल, हैदराबाद गजट पर जरांगे इसलिए जोर दे रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि साबित करता है कि मराठवाड़ा क्षेत्र में रह रहे मराठाओं को आधिकारिक तौर पर कुनबी माना गया था।</p>
<p>महाराष्ट्र में कुनबी समुदाय को ओबीसी के तहत आरक्षण मिलता है। खास बात है कि मौजूदा मराठवाड़ा क्षेत्र पहले हैदराबाद राज्य का हिस्सा हुआ करता था। जरांगे ने समर्थकों से कहा, 'हम आपकी ताकत से जीत गए हैं। आज मैंने गरीब की ताकत को समझ लिया है।'</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Sep 2025 10:16:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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