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                <title>half - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>इंदौर : चाय आधी, छोटे हुए समोसे और तवा रोटी गायब… गैस किल्लत में सिकुड़ा ‘स्वाद’ का शहर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कमर्शियल गैस टंकी की किल्लत का असर अब स्वाद पर नजर आने लगा है। खाने-पीने के लिए मशहूर इंदौर के मैन्यू कम हो चले हैं। कहीं ग्लास में चाय कम हो गई, समोसे-आलूबड़े के आकार छोटे कर दिए गए हैं तो कहीं दाम ज्यादा हो चुके हैं। वैकल्पिक डीजल भट्टी गैस के मुकाबले महंगी पड़ रही है। कई दुकानों और स्टॉल पर तो ताले डल गए हैं। दुकानदार आइटम भी कम बना रहे हैं। गैस के कारण स्वाद से लेकर आर्थिक तौर पर भी प्रभाव पड़ रहा है। हालात कब सामान्य होंगे इस बारे में जिम्मेदार कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48851/indore-tea-reduced-to-half-samosas-and-tawa-rotis-missing%E2%80%A6"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-31t133415.664.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>इंदौर : </strong>कमर्शियल गैस टंकी की किल्लत का असर अब स्वाद पर नजर आने लगा है। खाने-पीने के लिए मशहूर इंदौर के मैन्यू कम हो चले हैं। कहीं ग्लास में चाय कम हो गई, समोसे-आलूबड़े के आकार छोटे कर दिए गए हैं तो कहीं दाम ज्यादा हो चुके हैं। वैकल्पिक डीजल भट्टी गैस के मुकाबले महंगी पड़ रही है। कई दुकानों और स्टॉल पर तो ताले डल गए हैं। दुकानदार आइटम भी कम बना रहे हैं। गैस के कारण स्वाद से लेकर आर्थिक तौर पर भी प्रभाव पड़ रहा है। हालात कब सामान्य होंगे इस बारे में जिम्मेदार कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है। </p>
<p> </p>
<p><strong>कई रेस्टोरेंट, चाय-नाश्ते स्टॉल पर लगा ताला</strong><br />एमजी रोड प्रेस क्लब के पास स्थित एक रेस्टोरेंट करीब 15 दिन से बंद है। राजा प्रजापत ने बताया, गैस टंकी नहीं मिलने से रेस्टोरेंट बंद करना पड़ा। राजा का पाटनीपुरा में एक रेस्टोरेंट और है। कुछ दिन पहले तक यहां टंकी मिली, लेकिन अब बंद हो गई। यहां डीजल भट्टी से जैसे-तैसे काम किया जा रहा है। कृष्णपुरा छत्री पर पोहे, आलूबड़ा, जलेबी का स्टॉल लगाने वाले अनिल राजपाल ने भी अपना काम 15 दिन से बंद कर रखा है। अनिल का कहना है कि मेरे पास कमर्शियल गैस कनेक्शन है, उसके बाद भी टंकी नहीं मिल रही है। चंदननगर डी सेक्टर में सूरज ने अपनी चाय-नाश्ते की दुकान बंद कर रखी है।</p>
<p><strong>किसी ने बढ़ाए दाम तो किसी ने की चाय कम</strong><br />कमर्शियल गैस टंकी से सबसे ज्यादा प्रभावित छोटे दुकानदार और चाय नाश्ते की दुकानें हो रहे हैं। सिरपुर के गणेश त्रिवेेदी ने बताया, हमने चाय, समोसा, कचोरी के रेट तो नहीं बढ़ाए हैं, लेकिन चाय की मात्रा कम कर दी है। समोसा-कचोरी को थोड़ा छोटा किया है। नृसिंह बाजार के एक दुकानदार ने समोसा, कचोरी और पोहा के दाम बढ़ा दिए हैं। </p>
<p><strong>वैकल्पिक ईंधन महंगा, कई आइटम बंद किए</strong><br />कोठारी मार्केट के कचोरी दुकानदार दीपक भोजावत ने बताया, उनकी दुकान पर कई तरह के नाश्ते के आइटम मिलते हैं। कचोरी के लिए डीजल भट्टी लगाई है जो गैस से महंगी पड़ रही है। हर दिन 1700 रुपए की दो टंकी से काम चल जाता था, अब डीजल भट्टी में 5 से 7 हजार रुपए तक रोज डीजल का खर्च आ रहा हैं। इस वजह से चाय, भजिए, खमण जैसे आइटम बंद कर दिए हैं। प्रकाश राठौर ने बताया, हम भट्टी, इंडक्शन, तंदूर का उपयोग कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/48851/indore-tea-reduced-to-half-samosas-and-tawa-rotis-missing%E2%80%A6</link>
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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 13:35:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई में प्रेमिका के लिए पति बना कातिल, पत्नी को उतारा मौत के घाट, डेढ़ साल बाद खुला राज</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई के साकीनाका इलाके से सामने आई एक दिल दहला देने वाली वारदात ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है. यह मामला सिर्फ एक हत्या का नहीं, बल्कि भरोसे और रिश्तों के टूटने की ऐसी कहानी है, जिसने इंसानियत पर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक पति ने अपनी प्रेमिका के साथ नई जिंदगी शुरू करने के लिए अपनी पत्नी की हत्या करवा दी और उसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की. चौंकाने वाली बात यह रही कि करीब डेढ़ साल तक यह मामला आत्महत्या समझकर बंद होने की कगार पर था.</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48717/in-mumbai-husband-became-a-murderer-for-his-girlfriend-killed"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-26t123556.877.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> मुंबई के साकीनाका इलाके से सामने आई एक दिल दहला देने वाली वारदात ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है. यह मामला सिर्फ एक हत्या का नहीं, बल्कि भरोसे और रिश्तों के टूटने की ऐसी कहानी है, जिसने इंसानियत पर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक पति ने अपनी प्रेमिका के साथ नई जिंदगी शुरू करने के लिए अपनी पत्नी की हत्या करवा दी और उसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की. चौंकाने वाली बात यह रही कि करीब डेढ़ साल तक यह मामला आत्महत्या समझकर बंद होने की कगार पर था.</p>
<p> </p>
<p><strong>पुलिस को कैसे हुआ शक?</strong><br />शुरुआत में जब यह घटना सामने आई थी, तो मौके की स्थिति देखकर इसे सामान्य मौत का मामला मान लिया गया. घर के अंदर शव पंखे से लटका मिला था, जिससे पहली नजर में यह आत्महत्या जैसा ही लग रहा था. शुरुआती जांच में भी कुछ ऐसा सामने नहीं आया जिससे हत्या का शक हो. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. मृतका के पिता को अपनी बेटी की मौत पर शुरू से ही शक था. उनका कहना था कि उनकी बेटी ऐसा कदम कभी नहीं उठा सकती. पिता की इसी जिद ने इस पूरे मामले की दिशा बदल दी.</p>
<p><strong>पिता की जिद बनी सच सामने आने की वजह</strong><br />मृतका के पिता ने हार नहीं मानी और बार-बार जांच की मांग करते रहे. आखिरकार उनकी जिद के आगे प्रशासन को झुकना पड़ा और शव को कब्र से निकालकर दोबारा जांच कराई गई. दूसरी बार की जांच में जो सच सामने आया, उसने सभी को हैरान कर दिया. रिपोर्ट में साफ लिखा था कि महिला की मौत फांसी से नहीं, बल्कि गला दबाने से हुई थी. यानी यह साफ तौर पर हत्या का मामला था. इसके बाद केस ने नया मोड़ लिया और इसे हत्या के रूप में दर्ज किया गया.</p>
<p><strong>प्रेम संबंध बना हत्या की वजह</strong><br />जांच में सामने आया कि आरोपी पति सकाराम चौधरी का डिंपल चौधरी नाम की महिला से प्रेम संबंध था. उसकी पत्नी नारंगी उर्फ गीता (34) इस रिश्ते में सबसे बड़ी बाधा बन रही थी. पुलिस के मुताबिक, आरोपी लंबे समय से अपनी पत्नी को रास्ते से हटाने की योजना बना रहा था. उसने पहले भी दो बार हत्या की कोशिश की थी. एक बार चलती ट्रेन से धक्का देकर और दूसरी बार चाकू से हमला कर. लेकिन दोनों बार महिला बच गई.</p>
<p><strong>सुपारी देकर करवाई हत्या</strong><br />जब आरोपी अपनी कोशिशों में बार-बार असफल हुआ, तो उसने एक खौफनाक फैसला लिया. उसने अपने दोस्त की मदद से सुपारी देकर हत्या की योजना बनाई. करीब साढ़े छह लाख रुपये में यह सौदा तय हुआ. घटना वाली रात आरोपी ने अपने साथियों को घर बुलाया. जब उसकी पत्नी घर में अकेली थी, तब उसने खुद उसके पैर पकड़ लिए और बाकी लोगों ने रस्सी से उसका गला घोंट दिया. यह पूरी घटना बेहद ठंडे दिमाग से अंजाम दी गई.</p>
<p><strong>हत्या को आत्महत्या दिखाने की चाल</strong><br />हत्या के बाद आरोपी ने चालाकी दिखाते हुए शव को पंखे से लटका दिया ताकि मामला आत्महत्या जैसा लगे. शुरुआती जांच में पुलिस भी इसी भ्रम में आ गई और केस को सामान्य मौत मान लिया गया. यही वजह थी कि मामला लंबे समय तक दबा रहा और आरोपी खुला घूमता रहा. अगर पिता ने आवाज न उठाई होती, तो शायद यह सच कभी सामने नहीं आता.</p>
<p><strong>दोबारा जांच में खुली परतें</strong><br />जब मामला हत्या के रूप में दर्ज हुआ, तो पुलिस ने नए सिरे से जांच शुरू की. आरोपी से कई बार पूछताछ की गई, लेकिन वह हर बार खुद को निर्दोष बताता रहा. करीब तीन बार वह पुलिस को गुमराह करने में सफल भी रहा. लेकिन चौथी बार जब पुलिस ने ठोस सबूतों के साथ सख्ती दिखाई, तो वह टूट गया और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया. इस पूरे मामले में पुलिस ने पति समेत कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें उसका दोस्त और दो सुपारी किलर भी शामिल हैं. सभी आरोपी अब जेल में हैं और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है.  पकड़े गए आरोपियों का नाम मुख्य साजिशकर्ता पति सकाराम चौधरी (36), उसके दोस्त शंकर डांगी (36) और दो अन्य कॉन्ट्रैक्ट किलर बाबू उर्फ राघव उर्फ अमरचंद गायरी (22) व दिनेश गायरी (20) है.</p>
<p><strong>रिश्तों पर उठे सवाल</strong><br />यह मामला सिर्फ एक अपराध नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि किस तरह लालच और अवैध संबंध इंसान को हैवान बना सकते हैं. जिस व्यक्ति के साथ जीवन बिताने की कसम खाई, उसी की जान लेने की साजिश रच देना समाज के लिए एक बड़ा सवाल है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 12:38:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : देश का सबसे ऊंचा केबल स्टे ब्रिज बनकर तैयार, 1 मई से खुल जाएगा मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक, आधे घंटे घटेगी दूरी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई से पुणे के बीच सफर करने वाले यात्री 1 मई से अपने गंतव्य स्थान तक 25 मिनट पहले पहुंच सकेंगे। यात्रियों का सफर कम समय में पूरा कराने के लिए सह्याद्रि के दो पर्वत के बीच देश का सबसे ऊंचा केबल स्टे ब्रिज तैयार करने का काम 99.9 फीसदी तक पूरा कर लिया गया है। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (एमएसआरडीसी) 1 मई को मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे पर बने 13.3 किमी लंबे मिसिंग लिंक प्रॉजेक्ट को आम गाड़ियों के लिए खोलने की योजना पर काम कर रहा है। इस प्रॉजेक्ट के तहत दो पहाड़ों के बीच मार्ग तैयार करने के लिए 182 मीटर ऊंचा केबल ब्रिज तैयार किया गया है। 182 ऊंचे ब्रिज पर गाड़ियां 132 मीटर की ऊंचाई से गुजरेगी। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48639/mumbai-countrys-highest-cable-stay-bridge-will-be-ready-and"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-23t130932.896.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई से पुणे के बीच सफर करने वाले यात्री 1 मई से अपने गंतव्य स्थान तक 25 मिनट पहले पहुंच सकेंगे। यात्रियों का सफर कम समय में पूरा कराने के लिए सह्याद्रि के दो पर्वत के बीच देश का सबसे ऊंचा केबल स्टे ब्रिज तैयार करने का काम 99.9 फीसदी तक पूरा कर लिया गया है। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (एमएसआरडीसी) 1 मई को मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे पर बने 13.3 किमी लंबे मिसिंग लिंक प्रॉजेक्ट को आम गाड़ियों के लिए खोलने की योजना पर काम कर रहा है। इस प्रॉजेक्ट के तहत दो पहाड़ों के बीच मार्ग तैयार करने के लिए 182 मीटर ऊंचा केबल ब्रिज तैयार किया गया है। 182 ऊंचे ब्रिज पर गाड़ियां 132 मीटर की ऊंचाई से गुजरेगी। </p>
<p> </p>
<p>मिसिंग लिंक प्रॉजेक्ट के माध्यम से पहाड़ के बीच रास्ता तैयार किया जा रहा है। ऐसा कर एमएसआरडीसी ने मुंबई- पुणे एक्सप्रेस वे की दूरी 6 किमी घटा दी है। नया रास्ता तैयार होने से वाहन चालकों को पहाड़ का चक्कर लगाते हुए आगे नहीं बढ़ना नहीं पड़ेगा। सीधी सड़क होने से गाड़ियां तेजी से आगे बढ़ पाएगी।</p>
<p><strong>99.9 फीसदी काम पूरा</strong><br />देश का सबसे ऊंचा केबल स्टे ब्रिज तैयार करने वाली अॅफकॉन्स कंपनी के अनुसार, ब्रिज 99.9 फीसदी तक बन कर तैयार हो चुका है। अब केवल अंतिम फिनिशिंग का काम चल रहा है। सरकार 1 मई तक ब्रिज को वाहनों की आवाजाही के लिए खोल सकती है। </p>
<p><strong>क्या है मिसिंग लिंक प्रॉजेक्ट?</strong><br />गौजूदा समय में एक्सप्रेस वे पर खोपोली एक्जिट से सिंहगढ़ इंस्टीट्यूट के बीच की दूरी 19 किगी है। मिसिंग लिक के बन जने से 19 किमी की दूरी घट कर 13.3 किमी में सिमट जाएगी। पॉजेक्ट के तहत दो टनल और दो केबल ब्रिज बनाए गए है। 13.33 किमी के कुल मार्ग में से 11 किमी लबी टनल और करीब 2 किमी का केबल ब्रिज है। करीब 850 नीटर लंबे और 26 मीटर चौड़े दो केवल ब्रिज का निर्माण दो चरण में किया गया है। </p>
<p><strong>डेडलाइन मिस कर बना मिसिंग लिंक</strong><br />मिसिंग लिक प्रॉजेक्ट के तहत टनल तैयार करने का काम कई महीने पहले पूरा किया जा चुका था। लेकिन 182 मीटर ऊंचा ब्रिज तैयार करने में आ रही चुनौतियों की वजह से 2024 में बन कर तैयार होने वाला ब्रिज अब बन पाया है। पहले इसकी डेडलाइन मार्च 2024, फिर जनवरी 2025, फिर मर्च 2025 रखी गई थी। अफकॉन्स के अनुसर, ब्रिज का निर्माण ऐसा स्थान पर किया गया है, जहां सब कुछ मौसम पर निर्भर होता था। हवा की रफ्तार अधिक होने, कोहरा होने पर काम रोकना पड़ता था। वहीं मानसून के दौरान परिसर में खूब बारिश होने की वजह से चार महीने काम बंद करना पड़ता था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 13:13:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई :बीएमसी स्कूलों के आधे से ज़्यादा छात्र बीच में स्कूल छोड़ देते हैं?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई के म्युनिसिपल स्कूलों में हज़ारों बच्चों के लिए, पहली क्लास में एक भीड़-भाड़ वाली क्लासरूम से शुरू होने वाला सफ़र अक्सर मंज़िल तक पहुंचने से पहले ही खत्म हो जाता है. एक नई रिपोर्ट में पता चला है कि बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन स्कूलों में अपनी पढ़ाई शुरू करने वाले आधे से भी कम छात्र 10वीं क्लास तक इस सिस्टम में बने रहते हैं—जिससे शहर की पब्लिक शिक्षा में कमियों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48436/more-than-half-of-students-in-mumbai-bmc-schools-drop"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-15t085358.639.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई के म्युनिसिपल स्कूलों में हज़ारों बच्चों के लिए, पहली क्लास में एक भीड़-भाड़ वाली क्लासरूम से शुरू होने वाला सफ़र अक्सर मंज़िल तक पहुंचने से पहले ही खत्म हो जाता है. एक नई रिपोर्ट में पता चला है कि बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन स्कूलों में अपनी पढ़ाई शुरू करने वाले आधे से भी कम छात्र 10वीं क्लास तक इस सिस्टम में बने रहते हैं—जिससे शहर की पब्लिक शिक्षा में कमियों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. </p>
<p> </p>
<p>‘मुंबई में म्युनिसिपल शिक्षा की स्थिति 2026’ नाम की यह रिपोर्ट प्रजा फाउंडेशन ने जारी की है. अपनी वेबसाइट के अनुसार, यह एक “गैर-पक्षपातपूर्ण संगठन है जो जवाबदेह शासन को संभव बनाने की दिशा में काम करता है.” रिपोर्ट में कहा गया है कि 2015-16 में बीएमसी स्कूलों में पहली क्लास में दाखिला लेने वाले छात्रों में से सिर्फ़ 48 प्रतिशत ही 2024-25 तक 10वीं क्लास तक इस सिस्टम में बने रहे.</p>
<p>रिपोर्ट में पहली से 10वीं क्लास तक छात्रों के स्कूल में बने रहने की दर (रिटेंशन रेट) के विश्लेषण से पता चलता है कि जहां ज़्यादातर छात्र शुरुआती सालों में स्कूल में बने रहते हैं, वहीं 7वीं क्लास के बाद यह दर लगातार घटने लगती है. रिपोर्ट के अनुसार, इस रुझान की एक वजह उन म्युनिसिपल स्कूलों की कम संख्या है जो सेकेंडरी शिक्षा देते हैं. </p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है, “पहली से 10वीं क्लास तक के रिटेंशन रेट दिखाते हैं कि 7वीं क्लास के बाद लगातार गिरावट आती है, जिसकी वजह शायद सेकेंडरी शिक्षा (8वीं क्लास से आगे) के लिए बीएमसी स्कूलों की कमी हो सकती है.”</p>
<p>रिपोर्ट यह भी बताती है कि शहर में बीएमसी द्वारा चलाए जा रहे कई स्कूलों में से 587 स्कूलों में पहली से 8वीं क्लास तक की पढ़ाई होती है, जबकि सिर्फ़ 75 स्कूलों में ही 9वीं और 10वीं क्लास की शिक्षा दी जाती है. इस ढाँचागत कमी का मतलब है कि म्युनिसिपल संस्थानों में प्राइमरी या अपर-प्राइमरी शिक्षा पूरी करने वाले बड़ी संख्या में छात्रों को अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए दूसरे स्कूलों में जाना पड़ता है, जिससे उनके बीच में ही पढ़ाई छोड़ने (ड्रॉपआउट) का खतरा बढ़ जाता है. </p>
<p>प्रजा फाउंडेशन द्वारा रिपोर्ट जारी करने के लिए आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर (शिक्षा), प्राची जांभेकर ने कहा, “मुझे लगता है कि छात्रों के स्कूल में टिके रहने की दर (रिटेंशन रेट) काफी चिंताजनक है. ऐसा लगता है कि कई छात्र उन सरकारी स्कूलों में चले जाते हैं, जहां 9वीं और 10वीं कक्षा की पढ़ाई होती है. हमारी सबसे पहली प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि हम छात्रों के स्कूल छोड़ने (ड्रॉपआउट) से रोकें. किसी भी हाल में, किसी भी बच्चे को समय से पहले स्कूल नहीं छोड़ना चाहिए; उन्हें कम से कम 10वीं कक्षा तक अपनी पढ़ाई पूरी करनी ही चाहिए.” </p>
<p>उन्होंने आगे कहा, “मैंने अनुरोध किया है कि अगली बार जब डेटा इकट्ठा किया जाए, तो उसमें खास तौर पर यह देखा जाए कि क्या छात्र सचमुच 9वीं और 10वीं कक्षा में अपनी पढ़ाई जारी रख रहे हैं. शायद बोर्ड इस बारे में कोई सर्टिफिकेशन दे सकता है, खासकर यह जानकारी कि 10वीं कक्षा की परीक्षाओं में कितने छात्र शामिल हुए.” </p>
<p>यह रिपोर्ट छात्रों के स्कूल छोड़ने के बारे में लगातार मिलने वाले आधिकारिक डेटा की कमी पर भी चिंता जताती है. रिपोर्ट में कहा गया है: “स्कूल छोड़ने वालों की संख्या कम करने के मकसद से चलाए गए राष्ट्रीय अभियानों, जैसे सर्व शिक्षा अभियान, आरटीई (2009), और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (2020) के बावजूद, बीएमसी के शिक्षा विभाग के पास वार्ड-वार, स्कूल-वार, कक्षा-वार या लिंग-वार बारीक डेटा रखने के लिए कोई सेंट्रलाइज्ड व्यवस्था नहीं है.” </p>
<p>“पिछले कुछ सालों से, प्रजा फाउंडेशन बीएमसी स्कूलों में स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की संख्या जानने के लिए आरटीआई फाइल करता आ रहा है. हालाँकि, साल 2019-2020 के लिए दी गई जानकारी अधूरी थी; जबकि साल 2022-23 और 2023-24 के लिए, स्कूल छोड़ने वालों के बारे में कोई जानकारी दी ही नहीं गई,” रिपोर्ट में आगे कहा गया है. <br />बीएमसी के अतिरिक्त म्युनिसिपल कमिश्नर, अविनाश धाकने ने ज़्यादा से ज़्यादा ओपन-सोर्स डेटा उपलब्ध कराने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया. “यह रिपोर्ट बुरी बातों से ज़्यादा अच्छी बातों को उजागर करती है, लेकिन रिटेंशन रेट और स्कूल छोड़ने वालों से जुड़े ये मुद्दे ऐसे हैं, जिन पर काम करना बहुत ज़रूरी है. हमारे लिए यह समझना बहुत अहम है कि छात्र आखिर कहां जा रहे हैं. इसे ट्रैक करना (पता लगाना) इतना मुश्किल भी नहीं है. डेटा को ट्रैक भी किया जाना चाहिए और आम लोगों के लिए उपलब्ध भी कराया जाना चाहिए.” <br />अंग्रेज़ी को प्राथमिकता<br />प्रजा फाउंडेशन की रिपोर्ट में म्युनिसिपल स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की भाषा की पसंद में आए एक बड़े बदलाव पर भी रोशनी डाली गई है. 2015-16 से 2024-25 के बीच, कुल स्कूल दाखिलों में बीएमसी स्कूलों का हिस्सा थोड़ा बढ़कर 41 प्रतिशत से 44 प्रतिशत हो गया, जिससे पता चलता है कि म्युनिसिपल स्कूल शहर के छात्रों के एक बड़े तबके को शिक्षा देना जारी रखे हुए हैं. <br />हालांकि, शिक्षा के माध्यम में एक साफ़ बदलाव आया है. <br />इसी दौरान, मराठी-माध्यम वाले बीएमसी स्कूलों में छात्रों के दाखिले में 34 प्रतिशत की गिरावट आई, हिंदी-माध्यम वाले स्कूलों में 39 प्रतिशत और उर्दू-माध्यम वाले स्कूलों में 30 प्रतिशत की गिरावट आई. इसके विपरीत, अंग्रेज़ी-माध्यम वाले म्युनिसिपल स्कूलों में दाखिलों में 54 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो यह दिखाता है कि अभिभावकों के बीच सरकारी शिक्षा व्यवस्था के तहत अंग्रेज़ी-भाषा में शिक्षा पाने की चाहत बढ़ रही है. </p>
<p>रिपोर्ट बताती है कि म्युनिसिपल स्कूलों में अंग्रेज़ी-माध्यम वाले सेक्शन के विस्तार का असर इस बदलाव पर पड़ सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है, “छात्रों की पसंद अब अंग्रेज़ी माध्यम और व्यवस्थित बोर्ड स्कूलों की ओर झुक रही है, जिससे इन श्रेणियों में औसत दाखिले बढ़ रहे हैं.” </p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई के सभी स्कूलों में कुल दाखिलों में बीएमसी स्कूलों का हिस्सा थोड़ा बढ़ने के बावजूद, पिछले एक दशक में मुंबई की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में छात्रों की कुल संख्या में तेज़ी से गिरावट आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, शहर के सभी स्कूलों में कुल दाखिले 2015-16 में 9,24,933 से घटकर 2024-25 में 7,08,763 रह गए, जो 23 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है. </p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है, “स्कूलों की कुल श्रेणियों में से, 83 प्रतिशत स्कूल ‘सेमी-इंग्लिश’ पैटर्न का पालन करते हैं, जिनमें कुल दाखिलों का 65 प्रतिशत हिस्सा आता है. इसकी तुलना में, अंग्रेज़ी-माध्यम वाले स्कूल कुल स्कूलों का 13 प्रतिशत हैं, लेकिन उनमें कुल छात्रों के दाखिलों का 35 प्रतिशत हिस्सा आता है.” प्रजा फाउंडेशन के सीईओ मिलिंद म्हस्के ने कहा, “अब जब चुने हुए प्रतिनिधि आ गए हैं, तो स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों को मज़बूत करने, स्कूल डेवलपमेंट प्लान बनाने और यह पक्का करने में पार्षदों की अहम भूमिका है कि वार्ड लेवल पर स्कूलों पर खास ध्यान दिया जाए. बीएमसी स्कूलों के कामकाज को बेहतर बनाने और म्युनिसिपल शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा फिर से कायम करने के लिए, लोकल संस्थागत ढांचों को मज़बूत करना ही सबसे ज़रूरी होगा.”</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sun, 15 Mar 2026 08:55:42 +0530</pubDate>
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