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                <title>recognition - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>recognition RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई : 1252 में से 827 स्कूल अयोग्य पाए गए; मान्यता खतरे में, टीचरों का भविष्य अनिश्चित  </title>
                                    <description><![CDATA[<p>राज्य के 1252 स्कूल जिन्हें साल 2000 में परमानेंट अनएडेड बेसिस पर मंज़ूरी मिली थी, लेकिन इवैल्यूएशन में बार-बार अयोग्य पाए गए। सरकार ने ऐसे 827 बैच को परमानेंट तौर पर अयोग्य घोषित कर दिया है और उनकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी। सरकार के इस फ़ैसले से टीचरों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। राज्य में करीब 6,000 प्राइमरी, सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी स्कूल हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49005/mumbai-827-schools-out-of-1252-found-ineligible-recognition-in"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download-(47).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> राज्य के 1252 स्कूल जिन्हें साल 2000 में परमानेंट अनएडेड बेसिस पर मंज़ूरी मिली थी, लेकिन इवैल्यूएशन में बार-बार अयोग्य पाए गए। सरकार ने ऐसे 827 बैच को परमानेंट तौर पर अयोग्य घोषित कर दिया है और उनकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी। सरकार के इस फ़ैसले से टीचरों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। राज्य में करीब 6,000 प्राइमरी, सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी स्कूल हैं। स्कूलों को साल 2000 में परमानेंट अनएडेड बेसिस पर मान्यता दी गई थी। हालांकि, कई स्कूल, जिनका परमानेंट शब्द हटा दिया गया था, उन्हें इवैल्यूएशन के बाद धीरे-धीरे ग्रांट मिल रही है। हालांकि, सरकार ने उन स्कूलों को परमानेंट तौर पर अयोग्य घोषित कर दिया है जो बार-बार मौका देने के बावजूद अयोग्य हो गए हैं और कहा है कि ये स्कूल एक महीने के अंदर सेल्फ-फाइनेंसिंग बेसिस पर मान्यता ले लें वरना स्कूल को हमेशा के लिए बंद कर दिया जाएगा। साथ ही, इन स्कूलों के स्टूडेंट्स को पास के स्कूल में एडजस्ट करने का फ़ैसला लिया जाएगा।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p>सरकार ने 1 अप्रैल, 2026 तक एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया पूरा न करने वाले स्कूलों के खिलाफ एक्शन लेने का फैसला किया है। अगर कोई स्कूल लगातार 3 साल तक असेसमेंट में अयोग्य पाया जाता है, तो उसकी मान्यता या परमिशन कैंसल कर दी जाएगी। इन स्कूलों को अब सेल्फ-फाइनेंस्ड एक्ट के प्रोविजन के अनुसार सरकारी मान्यता के लिए अप्लाई करने के लिए 30 अप्रैल, 2026 तक की डेडलाइन दी गई है।</p>
<p>टीचरों के लिए बेरोजगारी का समय इस फैसले ने उन हजारों टीचरों का भविष्य बर्बाद कर दिया है जो बीस साल से ज्यादा समय से बिना सैलरी के इस बेकार उम्मीद के साथ काम कर रहे हैं कि उन्हें कभी न कभी सैलरी मिल जाएगी। इंसानियत के नजरिए से, यह मांग है कि इन लोगों को एडेड स्कूलों में एडजस्ट किया जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 13:52:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्ली : जेएनयू में छात्रों ने चेहरे की पहचान करने वाले उपकरण ‘फेस रिकॉग्निशन सिस्टम’ को उखाड़कर फेंक दिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के डॉ. बीआर आंबेडकर केंद्रीय पुस्तकालय में उस समय हंगामेदार स्थिति पैदा हो गयी जब जेएनयू छात्र संघ के नेतृत्व में छात्रों ने चेहरे की पहचान करने वाले उपकरण ‘फेस रिकॉग्निशन सिस्टम’ को उखाड़कर फेंक दिया. छात्रों का आरोप है कि यह उनकी निजता का उल्लंघन है. जेएनयू प्रशासन की ओर से इस संबंध में फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली. </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/45682/new-delhi-students-in-jnu-uprooted-the-facial-recognition-device"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-11/download---2025-11-22t180521.568.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : ज</strong>वाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के डॉ. बीआर आंबेडकर केंद्रीय पुस्तकालय में उस समय हंगामेदार स्थिति पैदा हो गयी जब जेएनयू छात्र संघ के नेतृत्व में छात्रों ने चेहरे की पहचान करने वाले उपकरण ‘फेस रिकॉग्निशन सिस्टम’ को उखाड़कर फेंक दिया. छात्रों का आरोप है कि यह उनकी निजता का उल्लंघन है. जेएनयू प्रशासन की ओर से इस संबंध में फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली. </p>
<p> </p>
<p>सोशल मीडिया पर शेयर वीडियो में छात्रों को ‘लाल सलाम’ का नारा लगाते हुए और उपकरणों को तोड़ते हुए देखा जा सकता है. सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन छात्रों ने उपकरणों को तोड़ दिया. जेएनयू छात्र संघ के महासचिव सुनील यादव ने आरोप लगाया कि छात्र संघ चुनाव के दौरान ये उपकरण ‘चुपके से लगाए गए’ थे,</p>
<p>जबकि इस मुद्दे की जांच के लिए गठित समिति ने अभी तक अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है. जेएनयू के एक अधिकारी के अनुसार, प्रशासन ने सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान को गंभीरता से लिया है और घटना पर रिपोर्ट मांगी है. रिपोर्ट मिलने के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Nov 2025 18:06:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : 23 अंग्रेजी माध्यम आवासीय विद्यालयों की मान्यता रद्द</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र सरकार ने धनगर समुदाय के छात्रों के लिए चलाए जा रहे 23 अंग्रेजी माध्यम आवासीय विद्यालयों की मान्यता रद्द कर दी है। यह कदम कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद उठाया गया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इनमें से 20 विद्यालय जालना जिले में, दो बीड में और एक छत्रपति संभाजीनगर जिले में स्थित हैं। इन स्कूलों की शुरुआत वर्ष 2024 में राजे यशवंतराव होल्कर अंग्रेजी माध्यम आवासीय शिक्षा योजना के तहत हुई थी।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/43730/mumbai--recognition-of-23-english-medium-residential-schools-cancelled"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-09/images---2025-09-08t115417.805.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र सरकार ने धनगर समुदाय के छात्रों के लिए चलाए जा रहे 23 अंग्रेजी माध्यम आवासीय विद्यालयों की मान्यता रद्द कर दी है। यह कदम कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद उठाया गया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इनमें से 20 विद्यालय जालना जिले में, दो बीड में और एक छत्रपति संभाजीनगर जिले में स्थित हैं। इन स्कूलों की शुरुआत वर्ष 2024 में राजे यशवंतराव होल्कर अंग्रेजी माध्यम आवासीय शिक्षा योजना के तहत हुई थी। योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को निशुल्क आवास, भोजन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना था। शुरुआत में 5,500 छात्रों को इसमें दाखिला दिया गया था और लक्ष्य हर साल 10,000 नए छात्रों को जोड़ने का रखा गया था।</p>
<p> </p>
<p>लेकिन विभागीय कर्मचारियों द्वारा 11 से 14 जुलाई के बीच किए गए निरीक्षण में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। अधिकारी ने बताया कि कई विद्यालयों ने सरकारी अनुदान लेने के बावजूद छात्रों को न तो उचित आवास दिया और न ही भोजन जैसी बुनियादी सुविधाएं। यह मामला तब उजागर हुआ जब अंबड के सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश काले और सोमनाथ काले ने विभाग के समक्ष शिकायत दर्ज कराई।</p>
<p>इसके बाद अन्य पिछड़ा बहुजन कल्याण विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए एक सितंबर को 23 स्कूलों की मान्यता रद्द करने का आदेश जारी किया। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रभावित विद्यार्थियों को शिक्षा से वंचित नहीं किया जाएगा। उन्हें नजदीकी अन्य मान्यता प्राप्त स्कूलों में समायोजित किया जाएगा ताकि उनकी पढ़ाई बाधित न हो। यह फैसला जहां शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अहम माना जा रहा है, वहीं हजारों छात्रों और उनके अभिभावकों में इसे लेकर चिंता भी बढ़ गई है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार प्रभावित बच्चों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था कब और कैसे करती है। </p>
<p>इस योजना का उद्देश्य छात्रों को निशुल्क आवास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना था, लेकिन हकीकत में कई जगह केवल कागज़ों पर स्कूल और छात्र दिखाकर सरकारी धन की बंदरबांट की जा रही थी। इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Sep 2025 11:55:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>समलैंगिक विवाहों को मिलेगी कानूनी मान्यता... सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को होगी सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[ सुप्रीम कोर्ट समलैंगिक विवाहों को कानूनी मान्यता देने की मांग वाली याचिकाओं पर सोमवार को करेगा सुनवाई। शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर सोमवार के लिए अपलोड की गई वाद सूची के अनुसार, याचिकाएं पर मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और जेबी पारदीवाला की पीठ सुनवाई करेगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/18907/gay-marriages-will-get-legal-recognition%E2%80%A6-supreme-court-will-hear-on-monday"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-03/download-(2)10.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली :</strong> सुप्रीम कोर्ट समलैंगिक विवाहों को कानूनी मान्यता देने की मांग वाली याचिकाओं पर सोमवार को करेगा सुनवाई। शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर सोमवार के लिए अपलोड की गई वाद सूची के अनुसार, याचिकाएं पर मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और जेबी पारदीवाला की पीठ सुनवाई करेगी। शीर्ष अदालत ने 6 जनवरी को, दिल्ली उच्च न्यायालय सहित विभिन्न उच्च न्यायालयों के समक्ष लंबित ऐसी सभी याचिकाओं को क्लब और अपने पास स्थानांतरित कर लिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने कहा था कि केंद्र की ओर से पेश होने वाले वकील और याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाली वकील अरुंधति काटजू एक साथ लिखित सबमिशन, दस्तावेजों का एक सामान्य संकलन तैयार करेंगे, जिस पर सुनवाई होगी। पीठ ने अपने 6 जनवरी के आदेश में कहा था कि संकलन किए गए दस्तावेजों की सॉफ्ट कॉपी का आदान-प्रदान पक्षों के बीच किया जाएगा और अदालत को उपलब्ध कराया जाएगा। संबंधित याचिकाओं और हस्तांतरित मामलों के साथ याचिका को 13 मार्च को सुना जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">कई याचिकाकर्ताओं के वकील ने पीठ से कहा था कि वे चाहते हैं कि शीर्ष अदालत इस मुद्दे पर एक आधिकारिक फैसले के लिए सभी मामलों को अपने पास स्थानांतरित करे और केंद्र शीर्ष अदालत में अपना जवाब दाखिल कर सकता है पिछले साल 14 दिसंबर को, शीर्ष अदालत ने दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित याचिकाओं को स्थानांतरित करने की मांग करने वाली दो याचिकाओं पर केंद्र की प्रतिक्रिया मांगी थी ताकि समलैंगिक विवाह को मान्यता देने के निर्देश दिए जा सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले, पिछले साल 25 नवंबर को शीर्ष अदालत ने दो समलैंगिक जोड़ों द्वारा शादी के अपने अधिकार को लागू करने और विशेष विवाह अधिनियम के तहत अपने विवाह को पंजीकृत करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने की मांग करने वाली अलग-अलग याचिकाओं पर केंद्र से जवाब मांगा था।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Sat, 11 Mar 2023 21:16:21 +0530</pubDate>
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