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                <title>lighting - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>lighting RSS Feed</description>
                
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                <title>दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर नही रुक रही चोरियां, निर्माण स्ट्रक्चर तोड़े, लाइटिंग और सोलर प्लेटें तक हुईं गायब</title>
                                    <description><![CDATA[<p>दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर निर्माण हो चुके स्ट्रक्चर में चोरियों का सिलसिला लगातार जारी है. चोर एक्सप्रेसवे के निर्माणाधीन स्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा रहे हैं. इसके अलावा लाइटिंग और मॉनिटरिंग सिस्टम पर भी हमला बोल रहे हैं. ये चोरियां लगातार हो रही हैं. पैकेज नंबर 11 का निर्माण करने वाली कंपनी लार्सन एंड टुर्ब्रो है.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48841/thefts-are-not-stopping-on-delhi-mumbai-expressway-construction-structures-were"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/images---2026-03-31t120409.410.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोटा : </strong>दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर निर्माण हो चुके स्ट्रक्चर में चोरियों का सिलसिला लगातार जारी है. चोर एक्सप्रेसवे के निर्माणाधीन स्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा रहे हैं. इसके अलावा लाइटिंग और मॉनिटरिंग सिस्टम पर भी हमला बोल रहे हैं. ये चोरियां लगातार हो रही हैं. पैकेज नंबर 11 का निर्माण करने वाली कंपनी लार्सन एंड टुर्ब्रो है.</p>
<p> </p>
<p>कंपनी के मेंटेनेंस मैनेजर चिराग शर्मा का कहना है कि लाखों रुपये की चोरियां उनके द्वारा बनाए गए स्ट्रक्चर में हो चुकी हैं. उन्होंने दो दर्जन से ज्यादा लोगों को सिक्योरिटी के लिए तैनात कर रखा है, लेकिन क्षेत्र बहुत बड़ा है और यहां ट्रैफिक अभी चालू नहीं है. इसका फायदा उठाकर चोर आसानी से प्रवेश कर रहे हैं. ये लोग निर्माण की गई ऊंची दीवारों को भी तोड़कर अंदर घुस जाते हैं. उन्होंने बताया कि यहां नाबालिग बच्चों के जरिए भी चोरियां करवाई जा रही हैं.</p>
<p>अकेले गार्ड या कर्मचारी के साथ मारपीट: कंपनी में सिक्योरिटी मैनेजर की ड्यूटी कर रहे वंशराज सिंह का कहना है कि लंबे स्ट्रेच में चोर लगातार प्रवेश कर जाते हैं. हमने काफी संख्या में सिक्योरिटी कर्मी लगा रखे हैं, लेकिन इसके बावजूद रात के समय चोर पहुंच जाते हैं. दिन के समय ये लोग अकेले गार्ड या कर्मचारी के साथ मारपीट भी कर देते हैं. कई बार चोर गैंग पीछे खड़ी रहती है और नाबालिग बच्चों को आगे भेज देती है. बच्चों को कुछ कहा भी नहीं जा सकता, वे भी गार्ड पर हमला कर देते हैं. हमने कई बार नाबालिग बच्चों को एलईडी लाइट और वायरिंग तोड़कर ले जाते हुए देखा है. एक बार वायरिंग टूट जाने पर पूरे स्ट्रेच की लाइटिंग बंद हो जाती है.</p>
<p><strong>ट्रांसफार्मर व सोलर प्लेट तक भी चोरी: </strong>सिक्योरिटी मैनेजर वंशराज सिंह ने बताया कि फरवरी महीने में चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, जिसमें तीन ट्रांसफार्मर चोरी हो गए थे. चोर ट्रांसफॉर्मर का तेल और कॉपर वायर निकालकर ले गए थे. यह चोरी पिछले साल हुई थी, जिसका मुकदमा पुलिस ने फरवरी में दर्ज किया. इसके अलावा दो दर्जन से ज्यादा सोलर प्लेटें एक साथ चोरी हो चुकी हैं. उन्होंने कहा कि लाखों रुपये का माल चोरी हो गया है. अभी भी एक्सप्रेसवे के बिल्कुल नजदीक लगी सोलर प्लेटें चोर चुराकर ले जा रहे हैं, जिससे सिक्योरिटी और मॉनिटरिंग सिस्टम प्रभावित हो रहा है. कैमरे मोशन सेंसर वाले लगे हुए हैं, जो आने वाले व्यक्ति की आहट से अलार्म बजा देते हैं, लेकिन इसके बावजूद चोरियां हो रही हैं. उनकी फोटो और वीडियो कैद हो जाते हैं, फिर भी ये लोग नहीं डरते. सिक्योरिटी टीम पहुंचने पर वे हमला करने की कोशिश भी करते हैं.</p>
<p><strong>सीसीटीवी कैमरे और कॉल बॉक्स में तोड़फोड़: </strong>चिराग शर्मा ने बताया कि चोर बने हुए स्ट्रक्चर को तोड़ देते हैं और जगह बनाकर अंदर प्रवेश कर जाते हैं. अधिकांश चोरियां आसपास के स्थानीय लोगों की शह पर हो रही हैं. हमने कई लोगों को पकड़ा और बाहर निकाला भी है, लेकिन फिर भी लोग अंदर घुस जाते हैं. पैकेज में बाउंड्री काफी ऊंची है, फिर भी चोर कूदकर या तोड़फोड़ करके अंदर प्रवेश करते हैं. सोलर प्लेट, सीसीटीवी कैमरे और इमरजेंसी कॉल बॉक्स तक को तोड़कर ले जाते हैं. हालांकि, ये उपकरण टूटने के बाद खराब हो जाते हैं और किसी काम के नहीं रहते, फिर भी चोरियां जारी हैं. </p>
<p><strong>कैमरा फीडिंग हो जाती है बंद: </strong>दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर राजस्थान के कुछ पैकेज का कंट्रोल सेंटर दौसा में बनाया गया है, जहां इंटरनेट प्रोटोकॉल के जरिए मॉनिटरिंग कैमरों की फीड भेजी जाती है. यह सब ओएफसी केबल के माध्यम से किया जा रहा है, लेकिन चोर ओएफसी केबल को भी चुरा ले जाते हैं. इससे कैमरा रिकॉर्डिंग भेजने का पूरा सिस्टम ठप हो जाता है. इसके अलावा स्टील के पाइप, लोहे की रॉड और पेड़-पौधों को पानी देने वाले पाइप भी चोरी हो रहे हैं.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 12:05:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>मुंबई में चमकेंगे स्काईवॉक...लाइटिंग और सजावट करेगी बीएमसी </title>
                                    <description><![CDATA[ मुंबई में स्टेशनों के आसपास जिस उद्देश्य से स्काईवॉक बनाए गए थे उस हिसाब से इसका उपयोग नहीं हो रहा है। कई स्काईवॉक खराब हो गए हैं तो कई पर लाइट की व्यवस्था न होने के कारण असामाजिक तत्वों का कब्ज़ा रहता है। बीएमसी ने मुंबई के सौंदर्यीकरण के लिए बीएमसी ने 1700 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/15710/skywalk-will-shine-in-mumbai%E2%80%A6-bmc-will-do-lighting-and-decoration"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2022-11/images-(1)8.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई : </strong>मुंबई में स्टेशनों के आसपास जिस उद्देश्य से स्काईवॉक बनाए गए थे उस हिसाब से इसका उपयोग नहीं हो रहा है। कई स्काईवॉक खराब हो गए हैं तो कई पर लाइट की व्यवस्था न होने के कारण असामाजिक तत्वों का कब्ज़ा रहता है। बीएमसी ने मुंबई के सौंदर्यीकरण के लिए बीएमसी ने 1700 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसी योजना के तहत स्काईवॉक को बेहतर बनाने की योजना बनाई है।</p>
<p style="text-align:justify;">बीएमसी की योजना के अनुसार स्काईवॉक की लाइटिंग की जाएगी और उसकी सजावट होगी।  जिससे लोग दिन हो या रात आसानी से स्काईवॉक का इस्तेमाल कर सके। इसके लिए बीएमसी 65 करोड़ रुपये खर्च करेगी। बीएमसी के एक अधिकारी ने बताया कि मुंबई में स्काईवॉक का उपयोग आम नागरिकों द्वारा किया जाना चाहिए, विशेष रूप से रात में इसके लिए स्काईवॉक पर सफाई, पेंटिंग और लाइटिंग का काम किया जाएगा। आनेवाले दिनों में स्काईवॉक लाइटिंग से जगमगाएंगे। </p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि मुंबई में स्टेशन के आसपास 36 स्काईवॉक बनाए गए हैं। इसमें से 28 एमएमआरडीए ने और 8 एमएसआरडीसी ने बनाए हैं। इन स्काईवॉक के निर्माण पर करीब 700 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। बाद में इसकी देखभाल की जिम्मेदारी बीएमसी को सौंप दिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">ज्यादातर स्काईवॉक की स्थिति खराब है। वहीं उचित व्यवस्था न होने के कारण ज्यादातर का बहुत काम उपयोग होता है। असामाजिक  तत्वों और हॉकर्स का कब्ज़ा रहता है। रात में कई जगह लाइट की व्यवस्था नहीं रहती इसके वजह से लोग आने-जाने से बचते हैं। स्काईवॉक के काब्स और पवार ब्लॉक उखड़े रहते हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">बीएमसी में नगरसेवकों ने कई बार स्काईवॉक की दुर्दशा का मुद्दा उठाया था। नगरसेवकों ने इसे बीएमसी के लिए सफ़ेद हाथी कहा था। क्योंकि इस पर बीएमसी का खर्च होते है, लेकिन उससे मिलता कुछ नहीं है। नगरसेवकों का कहना था कि लोग सड़क से कम सफर करें और आसानी से स्टेशन पहुंच जाए इसके लिए स्काईवॉक बनाया गया था ।</p>
<p style="text-align:justify;">स्काईवॉक का उपयोग आम नागरिक नही कर रहे हैं। जबकि करोड़ो रुपया मरम्म्त पर खर्च किया जा रहा है। कुछ नगरसेवकों ने आरोप लगाया था कि स्काईवॉक लोगों के घरों की प्राइवेसी खत्म कर रहा है। राहगीर स्काईवॉक से जाते समय  आसपास के घरों में नजर गड़ा कर देखते रहते हैं। नियमतः लोग भूमिगत सबवे का उपयोग कर लेते है क्योंकि उसमें सीढ़ी पर चढ़ना नही होता ह। बुजुर्ग तो स्काईवॉक का उपयोग भी नही करते। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 27 Nov 2022 18:47:02 +0530</pubDate>
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