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                <title>set - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>मुंबई में कचरा फेंकने वाली जगहों पर बने 'सीसीटीवी निगरानी बूथ'</title>
                                    <description><![CDATA[<p>जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस आरती साठे की बेंच ने फैसले में शहर को साफ सुथरा रखने में प्रशासन के साथ साथ यहां के नागरिकों को भी उनकी जिम्मेदारी भी याद दिलाई है। कोर्ट ने कहा कि नागरिकों के अनुशासन के बिना सड़कों और फुटपाथ को साफ सुथरा रख पाना संभव नहीं है। बीएमसी कमिश्नर यह सुनिश्चित करें कि हर वार्ड की सड़कों, गलियों, फुटपाथों और सार्वजनिक उपयोग की अन्य जगहों पर कूड़ा-कचरा न हो।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50951/cctv-monitoring-booths-built-at-garbage-dumping-sites-in-mumbai"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/trash-collage-1606283913.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस आरती साठे की बेंच ने फैसले में शहर को साफ सुथरा रखने में प्रशासन के साथ साथ यहां के नागरिकों को भी उनकी जिम्मेदारी भी याद दिलाई है। कोर्ट ने कहा कि नागरिकों के अनुशासन के बिना सड़कों और फुटपाथ को साफ सुथरा रख पाना संभव नहीं है। बीएमसी कमिश्नर यह सुनिश्चित करें कि हर वार्ड की सड़कों, गलियों, फुटपाथों और सार्वजनिक उपयोग की अन्य जगहों पर कूड़ा-कचरा न हो। सभी वार्डों में कूड़े को व्यवस्थित ढंग से जमा करने और उसे उठाने की व्यवस्था तुरंत लागू हो।</p>
<ul>
<li><strong>फैसले की महत्वपूर्ण बातें</strong></li>
<li>देश के इतने महत्वपूर्ण शहर के निवासियों द्वारा सार्वजनिक जगहों पर गैर जिम्मेदाराना ढंग से कचरा फेकना बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।</li>
<li>खतरनाक कचरे को कहीं पर भी फेकने से होने वाले बूरे प्रभाव के बारे में नागरिकों को शिक्षित और जागरूक किया जाए।</li>
<li>कचरा फेकने में लापरवाही दिखाने वाले लोगों के खिलाफ वॉर्ड अधिकारी ही नहीं नगसेवक भी सख्त कानूनी कार्रवाई करें।</li>
<li>नियमित रूप से सफाई और निगरानी की व्यवस्था हो।</li>
<li>सार्वजनिक स्थानों और संवेदनशील क्षेत्रों में CCTV कैमरे लगे।</li>
<li>सभी कैमरे हमेशा सक्रिय रहें, इसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।</li>
<li>अनियंत्रित तरीके से कचरा फेंकने और अवैध डंपिंग पर रोक लगे।</li>
<li>डंपिंग ग्राउंड की वजह से आसपास के क्षेत्रों में स्वास्थ्य और पर्यावरण को नुकसान न हो।</li>
<li>नियमित सफाई और निगरानी की व्यवस्था हो।</li>
<li>अवैध डंपिंग पर तुरंत कार्रवाई हो</li>
<li>झुग्गी क्षेत्रों के आसपास CCTV कैमरे लगाने और निगरानी बढ़े</li>
<li>प्लास्टिक समुद्र में न पहुंचे इसका भी ध्यान रखा जाए। यह ड्रेनेज ब्लॉक करता है और समुद्री जीवों को नुकसान पहुंचता है।</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/50951/cctv-monitoring-booths-built-at-garbage-dumping-sites-in-mumbai</link>
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                <pubDate>Sun, 26 Jul 2026 10:59:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई: जिला स्तर पर आजीविका लक्ष्य तय, भिवंडी में 125 दिन रोजगार की गारंटी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>ग्रामीण इलाकों में हर परिवार को आत्मनिर्भरता हेतू रोजगार तथा, लगातार रोजी-रोटी और हर तरह के विकास के मौके देने के मकसद से, केंद्र सरकार के विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका (लाइवलीहुड )ग्रामीण मुहिम का जिला स्तरीय लॉन्च आज पंचायत समिति, भिवंडी में जोश के साथ हुआ। भौगोलिक संदर्भ भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत लागू की गई यह बड़ी योजना 1 जुलाई, 2026 से पूरे देश में लागू की गई है ।इस नए कानून ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार आजीविका गारंटी अधिनियम, 2005 को फिर से लागू किया है और हर वित्तीय वर्ष में ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई है।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50544/livelihood-target-set-at-mumbai-district-level-125-days-employment"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/13mgnrega.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>ग्रामीण इलाकों में हर परिवार को आत्मनिर्भरता हेतू रोजगार तथा, लगातार रोजी-रोटी और हर तरह के विकास के मौके देने के मकसद से, केंद्र सरकार के विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका (लाइवलीहुड )ग्रामीण मुहिम का जिला स्तरीय लॉन्च आज पंचायत समिति, भिवंडी में जोश के साथ हुआ। भौगोलिक संदर्भ भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत लागू की गई यह बड़ी योजना 1 जुलाई, 2026 से पूरे देश में लागू की गई है ।इस नए कानून ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार आजीविका गारंटी अधिनियम, 2005 को फिर से लागू किया है और हर वित्तीय वर्ष में ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई है।</p>
<p> </p>
<p>प्रोग्राम को गाइड करते हुए, डिप्टी कलेक्टर शशिकांत गायकवाड़ ने कहा कि महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट ने ग्रामीण भारत में रोजगार पैदा करने, पानी बचाने, मिट्टी बचाने, पेड़ लगाने, ग्रामीण सड़कें, सिंचाई और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन जैसे कई टिकाऊ कामों को बढ़ावा दिया है। इस सफल सफर को आगे बढ़ाते हुए, वीबी - जीआरएएमजी कैंपेन रोजगार के साथ-साथ टिकाऊ आजीविका, स्किल डेवलपमेंट, स्थानीय संसाधनों का सही इस्तेमाल, महिला सशक्तिकरण और स्व-रोजगार को बढ़ावा देगा।</p>
<p>इस स्कीम के तहत पानी की सुरक्षा, रोज़ी-रोटी से जुड़े काम, प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के काम और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर के डेवलपमेंट को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही, बेनिफिशियरी चुनने की प्रोसेस में अनुसूचित जाति और जनजाति, गरीबी रेखा से नीचे के परिवार, महिला मुखिया वाले परिवार, दिव्यांग, छोटे ज़मीन वाले और मामूली किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी।</p>
<p>इस स्कीम को पारदरी तरीके से लागू करने के लिए, सभी जॉब कार्ड होल्डर्स का e-KYC, फेस ऑथेंटिकेशन से अटेंडेंस, जियो-टैगिंग, सोशल ऑडिट, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जाएगा। बताया जाता है कि इस प्रोग्राम में अलग-अलग विभाग के अधिकारी, ग्राम पंचायत प्रतिनिधि एम्प्लॉयमेंट वर्कर, महिला सेल्फ-हेल्प ग्रुप के प्रतिनिधि शामिल होंगे और 100 दिन से ज़्यादा का रोजगार दिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/50544/livelihood-target-set-at-mumbai-district-level-125-days-employment</link>
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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 11:33:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्‍ली : 60 साल बाद बदलने जा रहा गन्‍ने से जुड़ा कानून, किसानों को फायदा होगा या नुकसान, एथनॉल उत्‍पादन पर भी असर</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong> </strong>यूपी सहित देश के तमाम गन्‍ना उत्‍पादक राज्‍यों के किसानों के लिए बड़ी खबर है. केंद्र सरकार 60 साल बाद गन्‍ने से जुड़े कानून में बदलाव करने जा रही है. इसका फायदा सीधे तौर पर किसानों को होगा. मामले से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार ने साल 1966 के गन्ना नियंत्रण आदेश को एक व्यापक और नए नियामक ढांचे से बदलने का प्रस्ताव किया है.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49398/new-delhi-the-law-related-to-sugarcane-is-going-to"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-22t184642.138.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्‍ली : </strong>यूपी सहित देश के तमाम गन्‍ना उत्‍पादक राज्‍यों के किसानों के लिए बड़ी खबर है. केंद्र सरकार 60 साल बाद गन्‍ने से जुड़े कानून में बदलाव करने जा रही है. इसका फायदा सीधे तौर पर किसानों को होगा. मामले से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार ने साल 1966 के गन्ना नियंत्रण आदेश को एक व्यापक और नए नियामक ढांचे से बदलने का प्रस्ताव किया है. इसमें पहली बार एथनॉल उत्पादन, डिजिटल नियमों के पालन और कारखानों की मंजूरी के लिए एक औपचारिक व्यवस्था को साथ लाया गया है. सरकार ने इस मसौदे पर 20 मई तक सुझाव मांगे हैं.</p>
<p> </p>
<p>केंद्रीय खाद्य मंत्रालय के गन्ना (नियंत्रण) आदेश 2026 के मसौदे में पुराने कानून की बुनियादी संरचना को बरकरार रखा गया है. इसमें उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) के नियम, गन्ने की आवाजाही पर नियंत्रण, 14 दिनों के भीतर भुगतान की समय सीमा और देरी से भुगतान पर 15 फीसदी सालाना ब्याज शामिल है. हालांकि, इसमें पूरी तरह बदल चुके उद्योग के अनुरूप एक नया ढांचा तैयार किया गया है. इन नियमों का ज्‍यादातर लाभ किसानों को होगा, क्‍योंकि अभी मिलों के पास उनके हजारों करोड़ के बकाए पड़े हुए हैं.</p>
<p><strong>600 लीटर एथनॉल बराबर एक टन चीनी</strong><br />साल 1966 के कानून में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव एथनॉल को गन्ना नियामक ढांचे में स्पष्ट रूप से शामिल करना है और मसौदे में चीनी कारखाने की परिभाषा का विस्तार कर इसमें गन्ने के रस, सिरप, चीनी और मोलासेस से एथनॉल उत्पादन को भी शामिल किया गया है. इसके लिए एक ठोस रूपांतरण सूत्र पेश किया गया है, जिसके तहत उत्पादन गणना करते समय 600 लीटर एथनॉल को एक टन चीनी के बराबर माना जाएगा.</p>
<p><strong>कुछ कंपनियों को बैंक गारंटी से छूट</strong><br />मसौदे में कहा गया है कि केवल एथनॉल बनाने वाली इकाइयां, जो अपने परिसर में गन्ना नहीं पेरती हैं. उन्हें प्रदर्शन बैंक गारंटी की आवश्यकता से छूट दी गई है. यह एकीकृत चीनी-सह-एथनॉल मिलों पर नियंत्रण हल्का किए बिना एकल एथनॉल क्षमता बढ़ाने के लिए एक सोची-समझी नीतिगत पहल है. मसौदे की धारा 6ए से 6जी में ऐसे प्रावधान शामिल किए गए हैं, जो पुराने आदेश में नहीं थे. इसमें नए कारखानों के लिए औपचारिक आईईएम-आधारित मंजूरी प्रक्रिया, न्यूनतम दूरी के नियम, प्रदर्शन बैंक गारंटी को बढ़ाकर दो करोड़ रुपये करना और प्रभावी कदम तथा व्यावसायिक उत्पादन के लिए समय सीमा तय करना शामिल है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/49398/new-delhi-the-law-related-to-sugarcane-is-going-to</link>
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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 18:48:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : बढ़ती गर्मी के साथ मुंबई में बढ़ी बिजली की डिमांड, 15 से अब तक बने खपत के नए रिकॉर्ड देखें</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong> </strong>शहर में बढ़ती गर्मी के साथ बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। हाल के दिनों में मुंबई में बिजली खपत के नए रिकॉर्ड सामने आए हैं। 17 मार्च को शहर की पीक बिजली मांग 3,751 मेगावॉट तक पहुंच गई थी , जो दोपहर 2:50 बजे दर्ज की गई। यह इस सीजन की अब तक की सबसे ज्यादा मांग में से एक मानी जा रही है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48680/demand-for-electricity-increased-in-mumbai-with-increasing-heat-see"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-24t191737.089.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>शहर में बढ़ती गर्मी के साथ बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। हाल के दिनों में मुंबई में बिजली खपत के नए रिकॉर्ड सामने आए हैं। 17 मार्च को शहर की पीक बिजली मांग 3,751 मेगावॉट तक पहुंच गई थी , जो दोपहर 2:50 बजे दर्ज की गई। यह इस सीजन की अब तक की सबसे ज्यादा मांग में से एक मानी जा रही है। बिजली वितरण कंपनियों का कहना है कि उन्होंने पर्याप्त बिजली खरीद समझौते किए हैं, जिससे उपभोक्ताओं को बिना किसी बाधा के बिजली मिलती रहे। मुंबई और उपनगरों में करीब 50 लाख उपभोक्ता हैं। यहां बिजली सप्लाई की जिम्मेदारी मुख्य रूप से अडानी इलेक्ट्रिसिटी, बेस्ट और टाटा पावर के पास है। हालांकि एमएमआर के अधिकांश इलाके महावितरण के पास है।</p>
<p> </p>
<p><strong>बिजली मांग में देखा जा रहा उतार-चढ़ाव</strong><br />अगर पिछले कुछ दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो 15 से 22 मार्च के बीच बिजली मांग में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 16 और 17 मार्च को मांग सबसे ज्यादा रही, जबकि 21 और 22 मार्च को इसमें थोड़ी गिरावट आई। उदाहरण के तौर पर, टाटा पावर की मांग 16 मार्च को 1,018 मेगावॉट तक पहुंची, जो 22 मार्च को घटकर 844 मेगावॉट रह गई।</p>
<p>इसी तरह बेस्ट की मांग 786 मेगावॉट से घटकर 523 मेगावॉट और अडानी की मांग 1,723 मेगावॉट से घटकर 1,379 मेगावॉट तक आ गई। इससे साफ है कि जैसे-जैसे तापमान बढ़ा, बिजली की खपत भी बढ़ी, लेकिन बीच-बीच में मौसम में हल्के बदलाव या छुट्टियों के कारण मांग में थोड़ी कमी भी देखी गई।<br />इसी तरह बेस्ट की मांग 786 मेगावॉट से घटकर 523 मेगावॉट और अडानी की मांग 1,723 मेगावॉट से घटकर 1,379 मेगावॉट तक आ गई। इससे साफ है कि जैसे-जैसे तापमान बढ़ा, बिजली की खपत भी बढ़ी, लेकिन बीच-बीच में मौसम में हल्के बदलाव या छुट्टियों के कारण मांग में थोड़ी कमी भी देखी गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/48680/demand-for-electricity-increased-in-mumbai-with-increasing-heat-see</link>
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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 19:18:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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