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                <title>Redevelopment - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Redevelopment RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई : पुनर्निर्माण की महाक्रांति! मोतीलाल नगर में म्हाडा का पहला मेगा टाउनशिप प्रोजेक्ट धमाका...</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">म्हाडा की पहचान मुख्य रूप से किफायती आवास योजनाओं और छोटे स्तर के पुनर्विकास प्रोजेक्ट्स तक सीमित रही है। लेकिन बदलते समय और मुंबई की बढ़ती आबादी की जरूरतों को देखते हुए संस्था ने अपनी कार्यशैली में बड़ा बदलाव किया है। यह नया टाउनशिप प्रोजेक्ट इस परिवर्तन का प्रतीक है, जिसमें एक ही स्थान पर हजारों परिवारों के लिए आधुनिक और व्यवस्थित आवास तैयार किए जाएंगे। इस तरह के बड़े प्रोजेक्ट से न केवल निर्माण कार्य में तेजी आएगी, बल्कि शहर के अव्यवस्थित और पुराने इलाकों को व्यवस्थित रूप में विकसित करने में भी मदद मिलेगी। यह मॉडल भविष्य में मुंबई के अन्य पुराने आवासीय क्षेत्रों के लिए भी मार्गदर्शक साबित हो सकता है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49251/mhadas-first-mega-township-project-blast-in-motilal-nagar-the"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/err.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई : </strong>तेजी से बढ़ते शहरीकरण और आवास संकट के बीच महाराष्ट्र गृहनिर्माण क्षेत्र विकास प्राधिकरण ने एक ऐतिहासिक पहल करते हुए अपने पहले बड़े टाउनशिप प्रोजेक्ट का मास्टर प्लान तैयार कर लिया है। यह महत्वाकांक्षी योजना मोतीलाल नगर, गोरेगांव में 143 एकड़ के विशाल क्षेत्र में विकसित की जाएगी। यह परियोजना केवल इमारतों के पुनर्निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे इलाके को एक आधुनिक, सुव्यवस्थित और आत्मनिर्भर शहरी केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखती है। अधिकारियों के अनुसार, आगामी 2 से 4 दिनों के भीतर इस प्रोजेक्ट का विस्तृत खाका आम जनता के सामने प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और जनभागीदारी सुनिश्चित की जा सके।<br /><br />अब तक म्हाडा की पहचान मुख्य रूप से किफायती आवास योजनाओं और छोटे स्तर के पुनर्विकास प्रोजेक्ट्स तक सीमित रही है। लेकिन बदलते समय और मुंबई की बढ़ती आबादी की जरूरतों को देखते हुए संस्था ने अपनी कार्यशैली में बड़ा बदलाव किया है। यह नया टाउनशिप प्रोजेक्ट इस परिवर्तन का प्रतीक है, जिसमें एक ही स्थान पर हजारों परिवारों के लिए आधुनिक और व्यवस्थित आवास तैयार किए जाएंगे। इस तरह के बड़े प्रोजेक्ट से न केवल निर्माण कार्य में तेजी आएगी, बल्कि शहर के अव्यवस्थित और पुराने इलाकों को व्यवस्थित रूप में विकसित करने में भी मदद मिलेगी। यह मॉडल भविष्य में मुंबई के अन्य पुराने आवासीय क्षेत्रों के लिए भी मार्गदर्शक साबित हो सकता है।<br /><br />इस परियोजना का सबसे आकर्षक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वर्तमान में छोटे और सीमित जगह में रहने वाले परिवारों को बड़े और आधुनिक फ्लैट उपलब्ध कराए जाएंगे। अभी मोतीलाल नगर में कई परिवार लगभग 230 वर्ग फुट के छोटे घरों में रहते हैं, जहां जगह की कमी, खराब वेंटिलेशन और सीमित सुविधाएं आम समस्या हैं। रीडेवलपमेंट के बाद इन्हीं परिवारों को लगभग 1600 वर्ग फुट तक के विशाल फ्लैट मिलेंगे, जिसमें बेहतर वेंटिलेशन, प्राकृतिक रोशनी, अलग-अलग कमरे, आधुनिक रसोई और सुरक्षित संरचना जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इससे न केवल उनके रहने का स्तर सुधरेगा, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक जीवन पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।<br /><br />म्हाडा इस प्रोजेक्ट को केवल आवासीय इमारतों तक सीमित नहीं रख रही है, बल्कि इसे एक पूर्ण विकसित टाउनशिप के रूप में तैयार किया जाएगा। इस योजना में चौड़ी और सुव्यवस्थित सड़कें, ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, हरित क्षेत्र और पार्क, बच्चों के खेलने के लिए स्थान, वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष सुविधाएं, पर्याप्त पार्किंग और आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था शामिल होगी। इसके अलावा, टाउनशिप के भीतर ही स्कूल, अस्पताल, शॉपिंग सेंटर, कम्युनिटी हॉल और मनोरंजन के साधन विकसित किए जाएंगे, जिससे निवासियों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। यह प्रोजेक्ट ‘वॉक-टू-वर्क’ और ‘वॉक-टू-लाइफ’ की अवधारणा को भी बढ़ावा देगा, जिससे ट्रैफिक और प्रदूषण में कमी आने की संभावना है।<br /><br />म्हाडा के उपाध्यक्ष संजीव जयस्वाल ने इस प्रोजेक्ट को संस्था के लिए एक नया अध्याय बताया है। उनके अनुसार, म्हाडा अब केवल सस्ते घर उपलब्ध कराने वाली संस्था नहीं रह गई है, बल्कि यह आधुनिक तकनीक, बेहतर डिजाइन और उच्च गुणवत्ता वाले निर्माण के साथ आवास क्षेत्र में नई पहचान बना रही है। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रोजेक्ट के माध्यम से म्हाडा यह दिखाना चाहती है कि सरकारी एजेंसियां भी निजी डेवलपर्स की तरह उच्च स्तर के और आकर्षक प्रोजेक्ट विकसित कर सकती हैं। इससे लोगों का विश्वास भी बढ़ेगा और भविष्य में ऐसे और प्रोजेक्ट्स को प्रोत्साहन मिलेगा।<br /><br />विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बड़े पैमाने पर रीडिवेलपमेंट प्रोजेक्ट्स से मुंबई के रियल एस्टेट सेक्टर में सकारात्मक बदलाव आएगा। जहां एक ओर पुराने और जर्जर भवनों की जगह सुरक्षित और आधुनिक इमारतें बनेंगी, वहीं दूसरी ओर शहर के बुनियादी ढांचे पर भी दबाव कम होगा। इसके अलावा, इस प्रोजेक्ट से रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे, क्योंकि निर्माण कार्य में बड़ी संख्या में श्रमिकों, इंजीनियरों और अन्य पेशेवरों की आवश्यकता होगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।<br /><br />हालांकि यह प्रोजेक्ट काफी महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसके सफल क्रियान्वयन के लिए कई चरणों से गुजरना होगा। सबसे पहले निवासियों की सहमति लेना आवश्यक होगा, क्योंकि रीडिवेलपमेंट में उनकी भागीदारी महत्वपूर्ण होती है। इसके बाद पर्यावरणीय मंजूरी, कानूनी प्रक्रियाएं और वित्तीय व्यवस्थाएं पूरी करनी होंगी। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद भी समयबद्ध तरीके से प्रोजेक्ट पूरा करना एक बड़ी चुनौती होगी। हालांकि, यदि सभी चरण सही तरीके से पूरे किए जाते हैं, तो यह प्रोजेक्ट आने वाले वर्षों में मुंबई के सबसे सफल और आदर्श टाउनशिप प्रोजेक्ट्स में शामिल हो सकता है।<br /><br />गोरेगांव का मोतीलाल नगर रीडिवेलपमेंट प्रोजेक्ट केवल एक निर्माण योजना नहीं, बल्कि मुंबई के शहरी विकास की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। यह प्रोजेक्ट न केवल हजारों परिवारों के जीवन को बेहतर बनाएगा, बल्कि शहर के समग्र विकास को भी नई गति देगा। यदि यह मॉडल सफल होता है, तो भविष्य में मुंबई के अन्य पुराने और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में भी इसी तरह के बड़े और सुव्यवस्थित टाउनशिप प्रोजेक्ट्स लागू किए जा सकते हैं, जिससे शहर को एक नया और आधुनिक स्वरूप मिलेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:45:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : एलआईसी बिल्डिंग के रिडेवलपमेंट का रास्ता होगा साफ, मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने की केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकात</title>
                                    <description><![CDATA[<p>दक्षिण मुंबई स्थित एलआईसी और देना बैंक की सालों पुरानी जर्जर इमारतें के पुनर्विकास का रास्ता साफ हो गया है। राज्य के कौशल विकास मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के बाद दावा किया कि अगले तीन महीने में वित्त मंत्री इस बाबत सकारात्मक निर्णय लेगी।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48949/the-way-for-redevelopment-of-mumbai-lic-building-will-be"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download-(6).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>दक्षिण मुंबई स्थित एलआईसी और देना बैंक की सालों पुरानी जर्जर इमारतें के पुनर्विकास का रास्ता साफ हो गया है। राज्य के कौशल विकास मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के बाद दावा किया कि अगले तीन महीने में वित्त मंत्री इस बाबत सकारात्मक निर्णय लेगी। मंत्री लोढ़ा ने नई दिल्ली में एलआईसी टेनेंट्स एंड ऑक्युपेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन का निवेदन पत्र लेकर वित्त मंत्री से मुलाकात की और उन्हें स्थिति से अवगत कराया।</p>
<p> </p>
<p><strong>90 साल से भी ज्यादा पुरानी हैं इमारत</strong><br />दरअसल, दक्षिण मुंबई के विभिन्न क्षेत्रों में एलआईसी और देना बैंक की कई सारी इमारतें हैं जो 90 साल से भी ज्यादा पुरानी हैं। आज वह जर्जर अवस्था में पहुंच गई है। फिर भी इन इमारतों में आज भी लोग रह रहे हैं, जबकि म्हाडा ने ऐसी पुरानी खतरनाक इमारतों में रहने वाले कई सारे किराएदारों को हटा, लेकिन केंद्र सरकार की पुरानी इमारतों में आज भी लोग जान हथेली पर लेकर रह रहे हैं। इन लोगों की अवाज को केंद्र सरकार तक पहुंचाने के लिए कैबिनेट मंत्री लगातार प्रयास कर रहे हैं। खतरनाक इमारतों में रहने वाले के किरायेदार संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि पुनर्विकास प्रक्रिया में काफी देरी हो रही है और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (पीएमसी) की नियुक्ति नहीं हुई है। दूसरी ओर, मॉनसून नजदीक आने के कारण किरायेदारों में डर और असुरक्षा का माहौल है।</p>
<p><strong>वित्त मंत्री को दिए पत्र में क्या?</strong><br />मंत्री लोढ़ा द्वारा वित्त मंत्री को दिए पत्र में किराएदारों ने मांग की है कि जिनमें पीएमसी की नियुक्ति प्रक्रिया जल्द पूरी करना, म्हाडा के नियमों के अनुसार किरायेदारों को अंतरिम वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराना, पुनर्विकास के लिए अनुभवी डेवलपर के चयन में किरायेदारों की भागीदारी सुनिश्चित करना, खाली कराई गई इमारतों का किराया अस्थायी रूप से स्थगित करना और किरायेदारों पर कोई अतिरिक्त आर्थिक या कानूनी बोझ न डालना शामिल है।</p>
<p><strong>वित्त मंत्री ने दिया भरोसा</strong><br />मंत्री लोढ़ा ने कहा कि इन किराएदारों की पूरी तस्वीर उन्होंने वित्त मंत्री के सामने रखी। वित्त मंत्री ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए आश्वासन दिया कि अगले तीन महीने वे इस बारे में सकारात्मक निर्णय लेगी, ताकि निवासियों की समस्याओं को हल किया जा सके। मंत्री लोढ़ा ने विश्वास जताया कि जल्द ही एलआईसी और बैंक इमारतों के किरायेदारों को न्याय मिलेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Apr 2026 13:31:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : रिहैब हाउसिंग के लिए धारावी रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट को मलाड की 118 एकड़ ज़मीन सौंपी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को मलाड-मालवानी के मुक्तेश्वर में 118 एकड़ ज़मीन का कब्ज़ा धारावी रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट को सौंप दिया, जिससे स्पेशल पर्पस व्हीकल -- नवभारत मेगा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड  -- के लिए रिहैबिलिटेशन बिल्डिंग की प्लानिंग और कंस्ट्रक्शन शुरू करने का रास्ता साफ़ हो गया। नवभारत मेगा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, धारावी रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए महाराष्ट्र सरकार और अडानी ग्रुप के बीच एक SPV है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47858/118-acres-of-malad-land-handed-over-to-dharavi-redevelopment"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-19t181515.047.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को मलाड-मालवानी के मुक्तेश्वर में 118 एकड़ ज़मीन का कब्ज़ा धारावी रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट को सौंप दिया, जिससे स्पेशल पर्पस व्हीकल -- नवभारत मेगा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड  -- के लिए रिहैबिलिटेशन बिल्डिंग की प्लानिंग और कंस्ट्रक्शन शुरू करने का रास्ता साफ़ हो गया। नवभारत मेगा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, धारावी रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए महाराष्ट्र सरकार और अडानी ग्रुप के बीच एक SPV है।</p>
<p> </p>
<p> इस साइट का इस्तेमाल धारावी के उन निवासियों को घर देने के लिए किया जाएगा जो धारावी के अंदर इन-सीटू रिहैबिलिटेशन के लिए एलिजिबल नहीं हैं। अधिकारियों ने कहा कि मलाड की ज़मीन DRP के कब्ज़े में आने वाली तीसरी बड़ी ज़मीन है, इससे पहले कुर्ला में मदर डेयरी लैंड और मुलुंड में जामास साल्टपैन लैंड आ चुकी है। इस साइट पर ज़्यादातर ऊपरी मंज़िल पर रहने वाले लोग और वे लोग रहेंगे जो 1 जनवरी, 2011 के बाद और 15 नवंबर, 2022 से पहले धारावी में बस गए थे।</p>
<p>प्रोजेक्ट की शर्तों के मुताबिक, इन लोगों को मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन के अंदर मॉडर्न, प्लान्ड टाउनशिप में बसाया जाएगा। अधिकारी ने कहा कि प्रोजेक्ट के लिए दिए गए दूसरे पार्सल की तरह, मलाड की ज़मीन का मालिकाना हक भी DRP/SRA के पास रहेगा, जबकि SPV के पास डेवलपमेंट के अधिकार होंगे। 118 एकड़ ज़मीन की कुल कीमत लगभग 540 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें से 135 करोड़ रुपये नवभारत मेगा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड ने डेवलपमेंट के अधिकारों के प्रीमियम के तौर पर पहले ही दे दिए हैं।</p>
<p>उन्होंने आगे कहा, "मुक्तेश्वर में तय 140 एकड़ में से 118 एकड़ अब सौंप दी गई है, जबकि 22 एकड़ पर अभी भी केस चल रहा है।" कुल मिलाकर, राज्य ने धारावी रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत अच्छे और सस्ते घरों के मकसद से MMR में करीब 540 एकड़ ज़मीन के टुकड़े पहचाने और दिए हैं। इसमें कुर्ला की ज़मीन, कंजूर, भांडुप और मुलुंड की नमक की ज़मीनें, और देवनार डंपिंग ग्राउंड के कुछ हिस्से शामिल हैं, ताकि बड़े पैमाने पर पुनर्वास हो सके। इस हैंडओवर से पुनर्वास घरों के कंस्ट्रक्शन में तेज़ी आने और फेज़ में रीडेवलपमेंट को रफ़्तार मिलने की उम्मीद है, ताकि धारावीकर सात साल के समय में एलिजिबिलिटी के हिसाब से अपने नए घरों में जा सकें। अनुमान है कि करीब 10 लाख लोगों के पुनर्वास के लिए करीब 1.25-1.5 लाख नए घर बनाए जाएंगे।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/47858/118-acres-of-malad-land-handed-over-to-dharavi-redevelopment</link>
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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 18:16:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : कोर्ट ने ₹55 करोड़ के रीडेवलपमेंट फ्रॉड केस में बिल्डर अमरजीत शुक्ला की दूसरी जमानत याचिका खारिज की</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मिड-सिटी हाइट्स के मालिक अमरजीत शुक्ला की दूसरी ज़मानत याचिका खारिज कर दी है, जिन्हें 21 अगस्त को एक बिल्डिंग के रीडेवलपमेंट के नाम पर निवासियों से कथित तौर पर 55 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। ज़मानत देने से इनकार करते हुए, कोर्ट ने कहा: “मामले की मेरिट के आधार पर, रिकॉर्ड में कुछ गंभीर परिस्थितियाँ हैं, जो इस आरोपी को ज़मानत पर रिहा होने का हकदार नहीं बनाती हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47334/mumbai-court-rejects-builder-amarjeet-shuklas-second-bail-plea-in"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-01/download---2026-01-29t200151.407.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मिड-सिटी हाइट्स के मालिक अमरजीत शुक्ला की दूसरी ज़मानत याचिका खारिज कर दी है, जिन्हें 21 अगस्त को एक बिल्डिंग के रीडेवलपमेंट के नाम पर निवासियों से कथित तौर पर 55 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। ज़मानत देने से इनकार करते हुए, कोर्ट ने कहा: “मामले की मेरिट के आधार पर, रिकॉर्ड में कुछ गंभीर परिस्थितियाँ हैं, जो इस आरोपी को ज़मानत पर रिहा होने का हकदार नहीं बनाती हैं। जिस मेडिकल कंडीशन पर ज़ोर दिया गया है, वह भी उसे ज़मानत पर रिहा करने का आधार नहीं हो सकती। प्रॉसिक्यूशन की तरफ से कुछ मज़बूत आशंकाएँ हैं — और वे सही भी हैं — जो दिखाती हैं कि यह आरोपी ज़मानत पर रिहा होने का गलत फायदा उठाएगा।”</p>
<p> </p>
<p>कोर्ट ने सितंबर में उनकी पिछली ज़मानत याचिका भी खारिज कर दी थी। नई याचिका में, शुक्ला ने दलील दी कि पूरा विवाद सिविल नेचर का है, और बताया कि पीड़ित पक्षों ने पहले ही आर्बिट्रेशन की कार्यवाही शुरू कर दी है और एक सिविल मुकदमा दायर किया है।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि रीढ़ की हड्डी की समस्याओं के कारण उनकी सेहत बिगड़ रही है और उन्हें खास देखभाल और ध्यान की ज़रूरत है, जो हिरासत में उपलब्ध नहीं होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/47334/mumbai-court-rejects-builder-amarjeet-shuklas-second-bail-plea-in</link>
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                <pubDate>Thu, 29 Jan 2026 20:02:38 +0530</pubDate>
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