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                <title>future - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>future RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title> मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026: पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन, वित्तीय भविष्य पर होगी चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>देश में डिजिटल भुगतान और वित्तीय प्रौद्योगिकी के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच दुनिया भर के फिनटेक विशेषज्ञों का सबसे बड़ा जमावड़ा मुंबई में होने जा रहा है। ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (जीएफएफ), 2026 का आयोजन आठ से 11 सितंबर तक जियो वर्ल्ड सेंटर और ट्राइडेंट, मुंबई में किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सम्मेलन में शामिल होंगे। वह लगातार तीसरे वर्ष इस वैश्विक फिनटेक सम्मेलन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51480/pm-modi-will-inaugurate-global-fintech-fest-2026-in-mumbai"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/134317123900456845.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>देश में डिजिटल भुगतान और वित्तीय प्रौद्योगिकी के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच दुनिया भर के फिनटेक विशेषज्ञों का सबसे बड़ा जमावड़ा मुंबई में होने जा रहा है। ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (जीएफएफ), 2026 का आयोजन आठ से 11 सितंबर तक जियो वर्ल्ड सेंटर और ट्राइडेंट, मुंबई में किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सम्मेलन में शामिल होंगे। वह लगातार तीसरे वर्ष इस वैश्विक फिनटेक सम्मेलन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। </p>
<p> </p>
<p>ग्लोबल फिनटेक फेस्ट का आयोजन पेमेंट्स काउंसिल आफ इंडिया (पीसीआई), नेशनल पेमेंट्स कारपोरेशन आफ इंडिया (एनपीसीआई) और फिनटेक कन्वर्जेंस काउंसिल (एफसीसी) संयुक्त रूप से कर रहे हैं। सम्मेलन में 70 से अधिक देशों के प्रतिनिधि, नीति निर्माता, केंद्रीय बैंकर, नियामक, वित्तीय संस्थानों के प्रमुख, स्टार्टअप और तकनीकी विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। सम्मेलन में एजेंटिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टोकनाइजेशन और क्वांटम तकनीक के वित्तीय क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव तथा इनके माध्यम से सुरक्षित, भरोसेमंद और समावेशी वित्तीय व्यवस्था विकसित करने पर चर्चा होगी। </p>
<p>भारत से केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा, सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय, वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और वित्तीय सेवा विभाग के सचिव संजय लोहिया सहित कई प्रमुख हस्तियां सम्मेलन को संबोधित करेंगी।<br />विदेशों से सेशेल्स की केंद्रीय बैंक गवर्नर कैरोलिन एबेल, बैंक फार इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के महाप्रबंधक पाब्लो हर्नांडेज डी. कोस, अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग की मुख्य एआई अधिकारी वैलेरी शेजेपैनिक, बैंक आफ इंग्लैंड के कार्यकारी निदेशक टाम डेविड मटन और जेपी मॉर्गन की क्रिस्टीन टैन समेत कई दिग्गज हिस्सा लेंगे।</p>
<p>जीएफएफ 2026 में अनेक सत्रों के दौरान नीतिगत संवाद, नियामकीय चर्चा, उद्योग परिचर्चा और बिजनेस राउंडटेबल होंगे। इसके साथ ही फिनटेक नवाचारों की प्रदर्शनी, स्टार्टअप शोकेस, कार्यशालाएं और हैकाथन भी आयोजित किए जाएंगे। सम्मेलन में उद्योग से जुड़े कई महत्वपूर्ण शोध एवं रिपोर्ट भी जारी की जाएंगी। जीएफएफ 2026 के चेयर क्रिस गोपालकृष्णन ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य प्रधानमंत्री के 'विकसित भारत 2047' के विजन में सार्थक योगदान देना है।</p>
<p>वहीं, एनपीसीआई की कार्यकारी निदेशक सोहिनी राजोला ने कहा कि एजेंटिक एआई, टोकनाइजेशन और क्वांटम तकनीक मिलकर वित्तीय सेवाओं का नया ढांचा तैयार कर सकती हैं। सम्मेलन इसी बदलाव को दिशा देने के लिए वैश्विक विशेषज्ञों को एक मंच पर लाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Aug 2026 11:15:16 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मुंबई: युवा ही देश का भविष्य, लोकतंत्र को नई ऊर्जा देने का काम युवाओं ने किया: उद्धव ठाकरे</title>
                                    <description><![CDATA[<p>शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने युवाओं को देश का भविष्य बताते हुए कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं की आवाज और उनकी आकांक्षाओं की अनदेखी की गई तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि उन्हें देश के युवाओं पर गर्व है।  </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51053/mumbai-youth-are-the-future-of-the-country-youth-did"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/20231024513l_qli8bwa.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने युवाओं को देश का भविष्य बताते हुए कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं की आवाज और उनकी आकांक्षाओं की अनदेखी की गई तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि उन्हें देश के युवाओं पर गर्व है। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा महसूस होने लगा था कि लोकतंत्र कमजोर पड़ गया है और लोगों की उम्मीदें टूट रही हैं। लेकिन देश के युवाओं ने अपने जोश, जागरूकता और भागीदारी से यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र कभी झुका नहीं, बल्कि नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ा है। </p>
<p> </p>
<p>उद्धव ठाकरे ने कहा कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी ही किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत होती है। उन्होंने कहा कि जब युवा अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहते हैं, तब लोकतंत्र और अधिक मजबूत होता है। उन्होंने युवाओं से देश के विकास, सामाजिक बदलाव और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। </p>
<p>शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख ने कहा कि देश की प्रगति के लिए युवाओं को शिक्षा, रोजगार और समान अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा और क्षमता का सही दिशा में उपयोग किया जाए तो भारत दुनिया के अग्रणी देशों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और जागरूकता से मजबूत होता है। युवाओं ने यह साबित किया है कि वे देश के भविष्य को नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं और यही भारत की सबसे बड़ी शक्ति है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 12:19:37 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मुंबई में 164 स्कूल बिना इजाज़त के; हज़ारों स्टूडेंट्स का भविष्य अधर में</title>
                                    <description><![CDATA[<p>एक चौंकाने वाली बात सामने आई है कि मुंबई में 164 स्कूल बिना इजाज़त के हैं। इन स्कूलों में स्टूडेंट्स का भविष्य अधर में लटका हुआ है और म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन 48 स्कूलों को मंज़ूरी दिलाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, यह प्रपोज़ल अक्टूबर 2025 से राज्य सरकार के पास पेंडिंग होने की वजह से स्टूडेंट्स और पेरेंट्स में चिंता बढ़ गई है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49283/164-schools-in-mumbai-open-without-permission-future-of-thousands"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-18t130923.658.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>एक चौंकाने वाली बात सामने आई है कि मुंबई में 164 स्कूल बिना इजाज़त के हैं। इन स्कूलों में स्टूडेंट्स का भविष्य अधर में लटका हुआ है और म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन 48 स्कूलों को मंज़ूरी दिलाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, यह प्रपोज़ल अक्टूबर 2025 से राज्य सरकार के पास पेंडिंग होने की वजह से स्टूडेंट्स और पेरेंट्स में चिंता बढ़ गई है। म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के एक सर्वे में शुरू में 2022-23 एकेडमिक ईयर में 269 बिना इजाज़त वाले स्कूल मिले थे। उसके बाद, कुछ स्कूलों ने डॉक्यूमेंट्स पूरे किए, कुछ के खिलाफ एक्शन लिया गया, जबकि कुछ स्कूलों को बंद कर दिया गया। फिर भी, यह साफ़ है कि 164 स्कूल अभी भी बिना इजाज़त के हैं।</p>
<p> </p>
<p>मुंबई में 164 स्कूल बिना इजाज़त के हैं। खास बात यह है कि बाकी 48 स्कूलों को मंज़ूरी देने का मामला अभी भी पेंडिंग है। अगर इन स्कूलों को मंज़ूरी मिल जाती है तो हज़ारों स्टूडेंट्स को राहत मिल सकती है। लेकिन सरकार के फ़ैसले के इंतज़ार में स्टूडेंट्स का पढ़ाई का भविष्य पक्का नहीं है। म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने इन स्टूडेंट्स को दूसरे मंज़ूर स्कूलों में एडमिशन देने का ऑप्शन भी सोच-समझकर रखा है।</p>
<p>हालांकि, शिक्षा के अधिकार का मुद्दा उठाते हुए पेरेंट्स तुरंत फ़ैसले की मांग कर रहे हैं। स्कूल तो अनऑथराइज़्ड है, लेकिन स्टूडेंट्स का क्या कसूर है? ऐसा सवाल अब उठ रहा है, और आलोचना हो रही है कि एडमिनिस्ट्रेटिव देरी का सीधा असर स्टूडेंट्स पर पड़ रहा है। राज्य सरकार को एजुकेशन सिस्टम के इस गंभीर मुद्दे पर तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 13:10:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नई दिल्ली : आयुध कारखानों के 59000 रक्षा कर्मियों पर लटकी तलवार, कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी पर नजर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आयुध कारखानों के सभी मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के संयुक्त मंच, यूनाइटेड फोरम ऑफ ऑर्डनेंस एम्प्लॉइज (यूएफओई) ने कैबिनेट सचिव और प्रमुख मंत्रालयों के वरिष्ठ सचिवों से औपचारिक रूप से संपर्क करके सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। यूएफओई ने आयुध कारखानों के सात रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) में निगमीकरण के बाद लगभग 59,000 रक्षा नागरिक कर्मचारियों के सेवा दर्जे की सुरक्षा की मांग की है। यूएफओई, जो नवगठित डीपीएसयू में अनिवार्य समायोजन का विरोध कर रहा है, ने मांग की है कि कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में गठित सचिवों की प्रस्तावित समिति एक सरकारी अधिसूचना जारी करने की सिफारिश करे। इसमें कर्मचारियों को उनकी सेवानिवृत्ति तक प्रतिनियुक्ति पर केंद्रीय सरकारी कर्मचारी के रूप में बने रहने की अनुमति दी जाए। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/46442/the-sword-hanging-over-59000-defense-personnel-of-new-delhi"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-12/download---2025-12-24t183545.595.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>आयुध कारखानों के सभी मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के संयुक्त मंच, यूनाइटेड फोरम ऑफ ऑर्डनेंस एम्प्लॉइज (यूएफओई) ने कैबिनेट सचिव और प्रमुख मंत्रालयों के वरिष्ठ सचिवों से औपचारिक रूप से संपर्क करके सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। यूएफओई ने आयुध कारखानों के सात रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) में निगमीकरण के बाद लगभग 59,000 रक्षा नागरिक कर्मचारियों के सेवा दर्जे की सुरक्षा की मांग की है। यूएफओई, जो नवगठित डीपीएसयू में अनिवार्य समायोजन का विरोध कर रहा है, ने मांग की है कि कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में गठित सचिवों की प्रस्तावित समिति एक सरकारी अधिसूचना जारी करने की सिफारिश करे। इसमें कर्मचारियों को उनकी सेवानिवृत्ति तक प्रतिनियुक्ति पर केंद्रीय सरकारी कर्मचारी के रूप में बने रहने की अनुमति दी जाए। </p>
<p> </p>
<p>सात डीपीएसयू के सीएमडी द्वारा आयोजित अवशोषण पैकेज पर बैठकों का संयुक्त मंच द्वारा सामूहिक बहिष्कार करने के फैसले से हितधारक परामर्श प्रक्रिया कथित तौर पर बाधित हो गई। यूएफओई के अनुसार, आईओएफएस अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संघों सहित सभी संघों द्वारा पूर्ण बहिष्कार के कारण रक्षा मंत्रालय को शेष तीन परामर्श बैठकें रद्द करनी पड़ीं। यूएफओई का कहना है कि यह अस्वीकृति डीपीएसयू में अवशोषण के खिलाफ कर्मचारियों के स्पष्ट जनादेश को दर्शाती है। कैबिनेट सचिव और संबंधित सचिवों को लिखे अपने पत्र में यूएफओई ने चार प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला है। </p>
<p>रक्षा नागरिक कर्मचारियों से संबंधित सेवा मामलों पर कैबिनेट का निर्णय। उच्च न्यायालय के समक्ष रक्षा मंत्रालय द्वारा लिखित प्रतिबद्धता, जिसमें कहा गया है कि कर्मचारी चाहें तो सेवानिवृत्ति तक केंद्रीय सरकारी कर्मचारी के रूप में प्रतिनियुक्ति पर बने रह सकते हैं। यह प्रतिबद्धता न्यायालय के निर्णय में दर्ज है। सेवानिवृत्ति तक केंद्रीय सेवा में बने रहने का विकल्प चुनने वाले कर्मचारियों द्वारा अग्रिम विकल्पों का प्रयोग। सामूहिक रूप से विलय बैठकों का बहिष्कार, जो कर्मचारियों द्वारा डीपीएसयू विलय की अस्वीकृति को दर्शाता है। </p>
<p>क्या कैबिनेट सचिव से संपर्क करना जल्दबाजी थी, जबकि सचिवों की समिति का औपचारिक गठन अभी बाकी है। उसके कार्यक्षेत्र की अधिसूचना भी जारी नहीं हुई है, एआईडीईएफ के महासचिव सी. श्रीकुमार ने इस सवाल के जवाब में कहा, यह जल्दबाजी नहीं, बल्कि समय पर उठाया गया कदम है। हितधारकों से परामर्श विफल होने और कर्मचारियों द्वारा सरकारी सेवा में बने रहने का विकल्प चुनने के बाद, यह मामला अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले अधिकार प्राप्त मंत्रियों के समूह (ईजीओएम) के पास जाएगा। इससे पहले, यह आवश्यक है कि सभी संबंधित सचिवों को कर्मचारियों की स्थिति से पूरी तरह अवगत कराया जाए।</p>
<p>उन्होंने कहा, यूएफओई को आशंका है कि रक्षा उत्पादन विभाग (डीडीपी) सचिवों की समिति के समक्ष बहिष्कार का औचित्य या उच्च न्यायालय के समक्ष सरकार द्वारा किए गए वादे ठीक से प्रस्तुत नहीं कर पाएगा। यही वजह है कि हमने 22 दिसंबर, 2025 को अपना पत्र अग्रिम रूप से प्रस्तुत किया था। उसमें संवैधानिक सुरक्षा उपायों का हवाला दिया गया। यूएफओई ने तर्क दिया है कि रक्षा क्षेत्र के नागरिक कर्मचारियों को संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत संरक्षण प्राप्त है, जो उन्हें केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के रूप में सेवानिवृत्त होने का अधिकार देता है।</p>
<p>मंच ने सवाल उठाया है कि इन सुरक्षा उपायों से अवगत होने के बावजूद सरकार इस मामले को 'अनावश्यक रूप से लंबा और जटिल' क्यों बना रही है। श्रीकुमार ने कहा, 'हमें विश्वास है कि सचिवों की समिति, हमारी याचिका की जांच करने के बाद सकारात्मक रुख अपनाएगी। ईजीओएम को सभी 59,000 रक्षा नागरिक कर्मचारियों के केंद्रीय सरकार के दर्जे को बरकरार रखने वाली अधिसूचना जारी करने की सिफारिश करेगी। इससे पहले सरकार ने उच्च न्यायालय के समक्ष यह प्रतिबद्धता जताई थी। अब यह मामला कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली समिति के औपचारिक गठन और उसकी विचार-विमर्श प्रक्रिया का इंतजार कर रहा है, जो रक्षा मंत्रालय के अधीन सबसे बड़े संगठित नागरिक कार्यबलों में से एक के भविष्य की सेवा शर्तों के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Dec 2025 18:36:28 +0530</pubDate>
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