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                <title>pollution - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>pollution RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई : महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल पर सवाल, वालधुनी नदी सफाई के लिए न फंड, न योजना</title>
                                    <description><![CDATA[<p>वालधुनी नदी की स्थिति को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी) के कल्याण उप-प्रादेशिक कार्यालय से सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में नदी से जुड़ी गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। वालधुनी नदी स्वच्छता सेवाभावी संस्था के अध्यक्ष सुनील उतेकर द्वारा पिछले 5 वर्षों की जानकारी मांगे जाने पर पता चला कि इस अवधि में नदी के मुद्दे पर सामाजिक और राजनीतिक जनप्रतिनिधियों द्वारा बेहद कम पत्राचार किया गया। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48769/question-on-mumbai-maharashtra-pollution-control-board-neither-fund-nor"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-28t105307.980.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>वालधुनी नदी की स्थिति को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी) के कल्याण उप-प्रादेशिक कार्यालय से सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में नदी से जुड़ी गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। वालधुनी नदी स्वच्छता सेवाभावी संस्था के अध्यक्ष सुनील उतेकर द्वारा पिछले 5 वर्षों की जानकारी मांगे जाने पर पता चला कि इस अवधि में नदी के मुद्दे पर सामाजिक और राजनीतिक जनप्रतिनिधियों द्वारा बेहद कम पत्राचार किया गया। </p>
<p> </p>
<p>उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार केवल सुनील उतेकर और निशांत कांबले के दो पत्र ही दर्ज पाए गए हैं। सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने भी वालधुनी नदी के संबंध में शासन को कोई पत्र नहीं भेजा। यानी इस मुद्दे पर विभाग की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई।</p>
<p><strong>नहीं खोला खर्च का खाता, न ही अलग बजट की व्यवस्था</strong><br />आरटीआई में यह भी खुलासा हुआ कि वालधुनी नदी की सफाई के लिए पिछले पांच वर्षों में कोई निधि (फंड) उपलब्ध नहीं कराया गया। इतना ही नहीं, नदी से संबंधित कार्यों के लिए कोई अलग अकाउंट हेड या खर्च का खाता भी नहीं खोला गया है। </p>
<p><strong>विभाग की निष्क्रियता पर उठे सवाल</strong><br />इन तथ्यों के सामने आने के बाद संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए है। वालधुनी नदी स्वच्छता सेवाभावी संस्था ने आरोप लगाया है कि अधिकारी केवल दफ्तरों तक सीमित हैं और जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। मामले को लेकर संस्था ने कड़ा रुख अपनाते हुए जल्द ही तीव्र आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 10:54:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई :  वायु प्रदूषण नियमों के उल्लंघन को लेकर 1,073 निर्माण स्थलों को काम रोकने के नोटिस जारी किए </title>
                                    <description><![CDATA[<p>अक्टूबर 2025 से फरवरी 2026 तक, बीएमसी ने पूरे मुंबई में कुल 1073 कंस्ट्रक्शन साइट्स को 'काम रोकने का नोटिस' जारी किया है, जो वायु प्रदूषण कम करने के दिशानिर्देशों का उल्लंघन कर रही थीं। इनमें प्राइवेट कंस्ट्रक्शन साइट्स, म्युनिसिपल कंस्ट्रक्शन साइट्स और दूसरी डेवलपमेंट अथॉरिटीज़ शामिल हैं। कुल जारी किए गए 'काम रोकने के नोटिस' में से, नियमों का पालन करने के बाद सिर्फ़ 117 नोटिस वापस लिए गए हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48706/mumbai-issues-stop-work-notices-to-1073-construction-sites-for"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-25t173328.160.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>अक्टूबर 2025 से फरवरी 2026 तक, बीएमसी ने पूरे मुंबई में कुल 1073 कंस्ट्रक्शन साइट्स को 'काम रोकने का नोटिस' जारी किया है, जो वायु प्रदूषण कम करने के दिशानिर्देशों का उल्लंघन कर रही थीं। इनमें प्राइवेट कंस्ट्रक्शन साइट्स, म्युनिसिपल कंस्ट्रक्शन साइट्स और दूसरी डेवलपमेंट अथॉरिटीज़ शामिल हैं। कुल जारी किए गए 'काम रोकने के नोटिस' में से, नियमों का पालन करने के बाद सिर्फ़ 117 नोटिस वापस लिए गए हैं।</p>
<p> </p>
<p>वार्ड-वार ब्योरा 24 वार्डों में जारी किए गए कुल 'काम रोकने के नोटिस' में से, सबसे ज़्यादा 131 नोटिस 'N' वार्ड (घाटकोपर, विक्रोली) में दिए गए हैं; इसके बाद 125 नोटिस 'पी-उत्तर' (मलाड) में और 106 नोटिस 'S' वार्ड (कांजुरमार्ग, भांडुप) में दिए गए हैं। कुछ दूसरे वार्ड जहाँ तुलनात्मक रूप से ज़्यादा संख्या में 'काम रोकने के नोटिस' जारी किए गए हैं, उनमें 'के-वेस्ट' (अंधेरी, जोगेश्वरी, विले पार्ले पश्चिम) में 84, 'एच-पश्चिम' (बांद्रा, खार, सांताक्रूज़ पश्चिम) में 83 और 'आर-सेंट्रल' (बोरीवली) में 64 नोटिस शामिल हैं।</p>
<p>जिन वार्डों में सबसे कम 'काम रोकने के नोटिस' जारी किए गए हैं, उनमें 'एफ-उत्तर' (सायन, माटुंगा) में दो, 'ई' वार्ड (बायकुला) तीन, एल' वार्ड (कुर्ला) सात और ए वार्ड (फोर्ट, कोलाबा) में नौ नोटिस शामिल हैं। इस बीच, इन्हीं चार महीनों की अवधि में, BMC की टीम ने साइट का दौरा करते समय कुल 2119 'कारण बताओ नोटिस' जारी किए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 17:36:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : सरकार ने ट्रैफिक और प्रदूषण का हवाला देते हुए नए ऑटो रिक्शा परमिट जारी करना बंद कर दिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सरकार ने बड़े शहरों में बढ़ते ट्रैफिक जाम और पर्यावरण की चिंताओं का हवाला देते हुए, राज्य भर में नए ऑटोरिक्शा परमिट जारी करने पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी है। ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर प्रताप सरनाइक ने इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि राज्य में चलने वाले ऑटोरिक्शा की संख्या पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ गई है, जिससे पहले से ही जाम वाली सड़कों पर और दबाव बढ़ गया है। आज तक के मुताबिक, ऑफिशियल डेटा से पता चलता है कि अब तक पूरे महाराष्ट्र में लगभग 1.4 मिलियन ऑटोरिक्शा परमिट जारी किए जा चुके हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48309/mumbai-government-stops-issuing-new-auto-rickshaw-permits-citing-traffic"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-09t170917.311.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>सरकार ने बड़े शहरों में बढ़ते ट्रैफिक जाम और पर्यावरण की चिंताओं का हवाला देते हुए, राज्य भर में नए ऑटोरिक्शा परमिट जारी करने पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी है। ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर प्रताप सरनाइक ने इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि राज्य में चलने वाले ऑटोरिक्शा की संख्या पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ गई है, जिससे पहले से ही जाम वाली सड़कों पर और दबाव बढ़ गया है। आज तक के मुताबिक, ऑफिशियल डेटा से पता चलता है कि अब तक पूरे महाराष्ट्र में लगभग 1.4 मिलियन ऑटोरिक्शा परमिट जारी किए जा चुके हैं। अधिकारियों ने कहा कि ऑटोरिक्शा की बढ़ती संख्या ने मुंबई, पुणे और नागपुर समेत कई शहरी इलाकों में ट्रैफिक की हालत और खराब कर दी है। सड़कों पर ज़्यादा गाड़ियों के होने से, कई इलाकों में ट्रैफिक धीमा हो गया है, जिससे यात्रा का समय बढ़ गया है। </p>
<p> </p>
<p>जाम की वजह से फ्यूल की खपत भी ज़्यादा हुई है क्योंकि गाड़ियां ज़्यादा देर तक ट्रैफिक में फंसी रहती हैं। अधिकारियों का मानना ​​है कि इससे शहरों के घनी आबादी वाले हिस्सों में एयर पॉल्यूशन का लेवल और बढ़ गया है। सरकार ने कहा कि नए परमिट पर रोक लगाने का फैसला सड़क ट्रैफिक को मैनेज करने और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव कम करने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है। ड्राइवरों ने इनकम को लेकर चिंता जताई मौजूदा ऑटोरिक्शा परमिट होल्डर्स ने भी सिस्टम में आने वाली गाड़ियों की बढ़ती संख्या को लेकर राज्य सरकार से चिंता जताई है। ड्राइवरों ने कहा है कि बढ़ते कॉम्पिटिशन की वजह से वे हर दिन जितने पैसेंजर ले सकते हैं, उनकी संख्या कम हो गई है।</p>
<p>कई ड्राइवरों ने शिकायत की है कि एक ही रूट पर चलने वाले ऑटोरिक्शा की बढ़ती संख्या की वजह से उनकी रोज़ की कमाई पर असर पड़ा है। अधिकारियों ने कहा कि सरकार ने नए परमिट जारी करने पर रोक लगाने का फैसला लेने से पहले इन चिंताओं पर विचार किया। परमिट में गड़बड़ियों की जांच राज्य सरकार ने यह भी बताया कि परमिट बांटने के प्रोसेस की जांच में कुछ मामलों में गड़बड़ियां सामने आई हैं। अधिकारियों ने पाया कि कुछ ऑटोरिक्शा परमिट कथित तौर पर गैर-कानूनी बांग्लादेशी नागरिकों को जारी किए गए थे। अधिकारियों ने कहा कि मामले की अभी जांच चल रही है और लागू नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार ने साफ किया कि केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद नए ऑटोरिक्शा परमिट जारी करने पर रोक लगा दी गई है। पूरी स्थिति का रिव्यू करने के बाद आगे के फैसले लिए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 17:10:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : आईएएस एम देवेंद्र सिंह सस्पेंड, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचिव पद थे तैनात, क्यों हुई कार्रवाई?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>विधानसभा के तालिका अध्यक्ष दिलीप लांडे ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एम.देवेंद्र सिंह को निलंबित कर दिया है। वे महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण महामंडल के सचिव पद तैनात थे। पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे ने वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाई थी। मंत्री के निर्देश के बाद भी आईएएस अधिकारी एम. देवेंद्र सिंह ब्रीफिंग के लिए नहीं आए।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48064/mumbai-ias-m-devendra-singh-suspended-he-was-posted-as"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-28t111919.828.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> विधानसभा के तालिका अध्यक्ष दिलीप लांडे ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एम.देवेंद्र सिंह को निलंबित कर दिया है। वे महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण महामंडल के सचिव पद तैनात थे। पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे ने वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाई थी। मंत्री के निर्देश के बाद भी आईएएस अधिकारी एम. देवेंद्र सिंह ब्रीफिंग के लिए नहीं आए। इसे लेकर विधानसभा के तालिका अध्यक्ष दिलीप लांडे ने निलंबन के आदेश जारी किए, जिसके आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग ने कार्रवाई की। </p>
<p> </p>
<p><strong>कौन हैं आईएएस देवेंद्र सिंह</strong><br />एम. देवेंद्र सिंह वर्ष 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सदस्य सचिव के पद पर कार्यरत थे। उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित थी, जिसके तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई अतिरिक्त सचिव वी. राधा के हस्ताक्षर से जारी आदेश के माध्यम से की गई। यह कार्रवाई यूपीएससी ( अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के नियम 3 के उपनियम (1) के खंड (क) के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए महाराष्ट्र सरकार ने यह निलंबन आदेश जारी किया है। </p>
<p><strong>निलंबन के दौरान क्या होगा?</strong><br />निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय मुंबई ही रहेगा और वे कोकण विभाग, मुंबई के विभागीय आयुक्त की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। साथ ही, निलंबन अवधि में वे कोई निजी नौकरी या व्यापार/व्यवसाय नहीं कर सकेंगे। एम देवेंद्र सिंह को निलंबन अवधि में उन्हें निर्वाह भत्ता, महंगाई भत्ता तथा अन्य अनुमन्य भत्ते दिए जाएंगे। इसके लिए उन्हें यह प्रमाणित करना होगा कि वे किसी अन्य नौकरी, व्यवसाय या पेशे में संलग्न नहीं हैं। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि उपरोक्त शर्तों का उल्लंघन किया जाता है तो इसे कदाचार माना जाएगा और आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>ऐसे अधिकारी पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए- मुनगंटीवार</strong><br />इस मसले पर पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि एक आईएएस अधिकारी द्वारा मंत्री को ब्रीफिंग देने से इनकार करना संविधान का अपमान है। उन्होंने बताया कि अध्यक्ष द्वारा निलंबन के आदेश दिए जाने के 24 घंटे के भीतर कार्रवाई की गई। मुनगंटीवार ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे अधिकारी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कुछ अधिकारियों पर अहंकार का आरोप लगाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों का सम्मान किया जाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Feb 2026 11:20:39 +0530</pubDate>
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