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                <title>Owaisi - Rokthok Lekhani</title>
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                <description>Owaisi RSS Feed</description>
                
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                <title>नई दिल्ली : लोकसभा में नक्सलवाद पर बहस, ओवैसी बोले- विचारधारा अभी जिंदा; 'हथियार डालना हार नहीं, विचारधारा अभी जिंदा', नक्सलवाद पर बोले ओवैसी</title>
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                        <![CDATA[<p>लोकसभा में नक्सलवाद और लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म पर चर्चा के दौरान एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिर्फ हथियार डालने से समस्या खत्म नहीं होती, क्योंकि विचारधारा अभी भी जिंदा है। उन्होंने कहा कि जो लोग आज सरेंडर कर रहे हैं, उन्होंने कहीं भी अपनी विचारधारा को त्यागने की बात नहीं कही है। </p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48835/debate-on-naxalism-in-new-delhi-lok-sabha-owaisi-said"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-30t184234.046.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>लोकसभा में नक्सलवाद और लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म पर चर्चा के दौरान एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिर्फ हथियार डालने से समस्या खत्म नहीं होती, क्योंकि विचारधारा अभी भी जिंदा है। उन्होंने कहा कि जो लोग आज सरेंडर कर रहे हैं, उन्होंने कहीं भी अपनी विचारधारा को त्यागने की बात नहीं कही है। </p>
<p> </p>
<p>ओवैसी ने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि 1977 में भी सीपीआई (एमएल) ने कुछ समय के लिए अपने सशस्त्र संघर्ष को रोका था, लेकिन बाद में फिर हथियार उठा लिए। उन्होंने कहा कि यह समझना जरूरी है कि यह स्थायी समाधान नहीं बल्कि एक टैक्टिकल रिट्रीट हो सकता है। उन्होंने चारू मजूमदार का जिक्र करते हुए कहा कि नक्सल आंदोलन की जड़ें गहरी हैं और इसे केवल सैन्य कार्रवाई से खत्म नहीं किया जा सकता। ओवैसी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने जेल में नक्सल नेताओं से बातचीत की है और उनकी सोच आज भी वैसी ही बनी हुई है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार सिर्फ यह मान ले कि नक्सलवाद खत्म हो गया है, तो यह एक बड़ी भूल होगी।</p>
<p>ओवैसी ने आगे कहा कि देश के कई इलाकों में जहां नक्सलवाद कम हुआ है, वहां अब न तो नक्सल हैं और न ही सही गवर्नेंस पहुंची है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर प्रशासन और विकास वहां नहीं पहुंचे, तो हालात फिर बिगड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह समस्या सिर्फ कानून-व्यवस्था की नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक असमानता से जुड़ी है। आदिवासी इलाकों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि खनिज संपदा से भरे इलाकों में रहने वाले लोगों को उसका फायदा नहीं मिलता, जिससे असंतोष बढ़ता है। ओवैसी ने चेतावनी दी कि अगर गवर्नेंस, राहत और पुनर्वास पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में फिर से हिंसा बढ़ सकती है।</p>
<p>उन्होंने नेपाल और बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां युवाओं ने सरकार नहीं, बल्कि गवर्नेंस बदलने के लिए आंदोलन किया। उन्होंने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि फर्जी मुठभेड़, घरों को तोड़ना और समाज में डर का माहौल बनाना कट्टरता को बढ़ावा देता है। ओवैसी ने कहा कि किसी भी तरह का उग्रवाद, चाहे वह वामपंथी हो या दक्षिणपंथी, देश के लिए खतरा है और इसे रोकने के लिए संतुलित और संवेदनशील नीति जरूरी है।</p>]]>
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                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 18:44:21 +0530</pubDate>
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                <title>मुंबई : क्या सरकार एटीएस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी? - असदुद्दीन ओवैसी</title>
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                        <![CDATA[<p>बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2006 के मुंबई ट्रेन विस्फोट मामले में 12 दोषियों को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष को मामले के सबूत पेश करने में फेल बताया। दोषियों के निर्दोष निकलने और बरी होने पर AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र सरकार से सवाल किया है। इसके साथ ही ओवैसी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे सिस्टम का फेलियर करार दिया।</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/42352/mumbai--will-the-government-take-action-against-ats-officials----asaduddin-owaisi"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-07/download---2025-07-22t114239.877.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2006 के मुंबई ट्रेन विस्फोट मामले में 12 दोषियों को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष को मामले के सबूत पेश करने में फेल बताया। दोषियों के निर्दोष निकलने और बरी होने पर AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र सरकार से सवाल किया है। इसके साथ ही ओवैसी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे सिस्टम का फेलियर करार दिया। ओवैसी ने सरकार से पूछा है कि क्या वह ट्रेन विस्फोट मामले की जांच करने वाले महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी? इसके साथ ही, ओवैसी ने कहा कि उन लोगों ने अपने जीवन के 18 साल उस गुनाह की सजा काटते हुए निकाल दिए, जो उन्होंने कभी किया ही नहीं था।</p>
<p> </p>
<p>बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा, "12  मुस्लिम पुरुष 18 साल तक उस अपराध के लिए जेल में रहे, जो उन्होंने किया ही नहीं था। उनकी ज़िंदगी के सुनहरे दिन बीत गए। 180 परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया। कई घायल हुए। उनके लिए कोई राहत नहीं है। क्या सरकार इस मामले की जांच करने वाले महाराष्ट्र एटीएस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी?</p>
<p>ओवैसी ने आरोप लगाया कि, 2006 में महाराष्ट्र में सत्ता में रही पार्टियां भी यातना की शिकायतों की अनदेखी के लिए जिम्मेदार थीं। उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों को अक्सर जेल में डाल दिया जाता है। जब वर्षों बाद उन्हें बरी किया जाता है, तो उनके पास अपना जीवन फिर से शुरू करने का कोई रास्ता नहीं बचता। उन्होंने आगे कहा कि गिरफ्तारी के बाद से 17 वर्षों में आरोपी एक बार भी जेल से बाहर नहीं आए। अक्सर सार्वजनिक गुस्सा पैदा करने वाले हाई-प्रोफाइल मामलों में पुलिस दोष मानकर जांच शुरू करती है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे मामलों में पुलिस अधिकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं और मीडिया जिस तरह से मामले की रिपोर्टिंग करता है, उससे अक्सर ऐसी कहानी गढ़ी जाती है जिसमें आरोपी को दोषी घोषित कर दिया जाता है। ओवैसी ने आरोप लगाया कि ऐसे कई आतंकी मामलों में जांच एजेंसियां हमें बुरी तरह से विफल कर चुकी हैं।</p>]]>
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                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Jul 2025 11:43:06 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Online Desk]]>
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            <item>
                <title>मुंबई: असदुद्दीन ओवैसी ने वक्फ संशोधन विधेयक प्रति फाड़कर किया विरोध; एआईएमआईएम के नेता वारिस पठान ने किया बचाव</title>
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                        <![CDATA[<p>ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ( एआईएमआईएम ) के नेता वारिस पठान ने गुरुवार को पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का बचाव किया, जिन्होंने लोकसभा में विरोध में नाटकीय ढंग से इसकी प्रति फाड़कर वक्फ संशोधन विधेयक का कड़ा विरोध किया था । एएनआई से बात करते हुए, पठान ने जोर देकर कहा कि किसी भी मुस्लिम की अंतरात्मा इस तरह के कानून को स्वीकार नहीं करेगी, उन्होंने इसे समुदाय पर सीधा हमला करार दिया। "उन्होंने (ओवैसी) महात्मा गांधी का उदाहरण दिया कि जब वे दुखी थे तो उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के एक कानून को फाड़ दिया। उनकी अंतरात्मा ने भी कहा कि यह विधेयक असंवैधानिक है;</p>]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/39517/mumbai--asaduddin-owaisi-protested-by-tearing-the-copy-of-waqf-amendment-bill--aimim-leader-waris-pathan-defended-it"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-04/160317073408_waris_pathan_mla_.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ( एआईएमआईएम ) के नेता वारिस पठान ने गुरुवार को पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का बचाव किया, जिन्होंने लोकसभा में विरोध में नाटकीय ढंग से इसकी प्रति फाड़कर वक्फ संशोधन विधेयक का कड़ा विरोध किया था । एएनआई से बात करते हुए, पठान ने जोर देकर कहा कि किसी भी मुस्लिम की अंतरात्मा इस तरह के कानून को स्वीकार नहीं करेगी, उन्होंने इसे समुदाय पर सीधा हमला करार दिया। "उन्होंने (ओवैसी) महात्मा गांधी का उदाहरण दिया कि जब वे दुखी थे तो उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के एक कानून को फाड़ दिया। उनकी अंतरात्मा ने भी कहा कि यह विधेयक असंवैधानिक है; भाजपा धर्म के नाम पर देश को बांटने की कोशिश कर रही है,</p>
<p> </p>
<p>इसलिए विरोध में उन्होंने विधेयक को फाड़ दिया। इसमें क्या गलत है? अगर मैं उनकी जगह होता तो मैं भी यही करता। किसी भी मुसलमान की अंतरात्मा ऐसे कानूनों को पारित होने की अनुमति नहीं देती। वास्तव में, मैं इसे फाड़कर हवा में फेंक देता। यह हमारे समुदाय पर सीधा हमला है," वारिस पठान ने कहा। एआईएमआईएम नेता ने यह भी उल्लेख किया कि लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक का पारित होना "देश के मुसलमानों के लिए एक और काला दिन है ।"</p>
<p>पठान ने कहा, "हमने देखा है कि जब से वे ( भाजपा ) सत्ता में आए हैं, उन्होंने केवल नफरत फैलाई है और यह कल उनके द्वारा दिखाए गए उदाहरणों में से एक है। यह पूरी तरह से असंवैधानिक विधेयक है। यह मुसलमानों पर सीधा हमला है और वे केवल हमारी वक्फ संपत्तियों को हड़पना चाहते हैं। हम अपने संविधान के अनुसार इस विधेयक के खिलाफ अपना विरोध जारी रखेंगे। हम सभी कानूनी रास्ते अपनाएंगे। उन्होंने दिखाया है कि उनके पास ताकत है और वे जो चाहें करेंगे। यह तानाशाही से कम नहीं है और उन्होंने यह दिखाया है। हम अपना विरोध तब तक जारी रखेंगे जब तक मोदी सरकार इसे वापस नहीं ले लेती।"</p>]]>
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                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Apr 2025 11:14:23 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Online Desk]]>
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                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई: जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण पर बैन हटाया जाए -  असदुद्दीन ओवैसी</title>
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                        <![CDATA[<p>महाराष्ट्र सरकार ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण को देर से जारी करने की छूट पर फिलहाल रोक लगा दी है. यह कदम बीजेपी नेता की शिकायतों के बाद उठाया गया है. उन्होंने जन्म प्रमाण पत्र जारी होने में धांधली की शिकायत की थी. वहीं, अब एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि सरकार ने 21 जनवरी से जन्म प्रमाणपत्र जारी करने पर रोक लगा दी है. उससे उन परिवारों को दिक्कत आ रही है जिनके घर में बच्चों का जन्म कोविड के वक्त हुआ था. </p>]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/38568/mumbai--ban-on-birth-and-death-registration-should-be-lifted---asaduddin-owaisi"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-03/images---2025-03-01t213511.109.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>मुंबई: </strong>महाराष्ट्र सरकार ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण को देर से जारी करने की छूट पर फिलहाल रोक लगा दी है. यह कदम बीजेपी नेता की शिकायतों के बाद उठाया गया है. उन्होंने जन्म प्रमाण पत्र जारी होने में धांधली की शिकायत की थी. वहीं, अब एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि सरकार ने 21 जनवरी से जन्म प्रमाणपत्र जारी करने पर रोक लगा दी है. उससे उन परिवारों को दिक्कत आ रही है जिनके घर में बच्चों का जन्म कोविड के वक्त हुआ था. </div>
<div> </div>
<div>दरअसल, सरकार ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 में संशोधन किया था जिसमें जिला मजिस्ट्रेट या उपमंडल अधिकारी को देर से (विलंबित) जन्म और मृत्यु पंजीकरण की शक्तियां दी गई थीं. लेकिन बीजेपी सांसद किरीट सोमैया ने आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र के कुछ जिले में जन्म प्रमाणपत्र को जारी करने से संबंधित स्कैम हुआ है.</div>
<div> </div>
<div><strong>क्या है महाराष्ट्र सरकार का नियम?</strong></div>
<div>किसी के जन्म के एक साल बाद जो प्रमाणपत्र जारी किए जाते हैं उसे विलंबित आवेदन कहा जाता है. किरीय सोमैया ने आरोप लगाया था कि जनवरी 2021 से दिसंबर 2023 के बीच अकोला शहर की अदालत ने 269 विलंबित जन्म प्रमाणपत्र जारी किए गए थे लेकिन तहसीलदार ने 4,849 विलंबित जन्म आवेदन को पंजीकृत करने के आदेश दिए थे.  उन्होंने दावा किया कि इसी तरह यवतमाल में 11,864 और नागपुर में  4,350 विलंबित आवेदन पंजीकृत किए गए.</div>
<div> </div>
<div><strong>ओवैसी ने उठाया मालेगांव का मुद्दा</strong></div>
<div>उधर, एआईएमआईएम चीफ और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी 'एक्स' पर लिखा, ''महाराष्ट्र सरकार ने 21 जनवरी के जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र को जारी करने पर रोक लगा दी है. इसकी वजह से कोविड के वक्त में या उसके बाद पैदा हुए हजारों बच्चों को दिक्कत आ रही है. गरीब परिवार के लोग विशेषकर कानूनी जानकारी ना होने, वित्तीय संकट और अज्ञानता के कारण मालेगांव के लोग रजिस्टर नहीं कर पाए. उनके बच्चों के स्कूल में एडमिशन नहीं हो पा रहे हैं. सीएम देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे से अपील करता हूं कि इस पर बैन हटाया जाए. प्राइमरी स्कूल में प्रवेश के लिए छूट दी जाए. शिक्षा का अधिकार मौलिक अधिकार है, मालेगांव के गरीब बच्चों को अधिकार से वंचित नहीं रखा जा सकता.''</div>]]>
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                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/38568/mumbai--ban-on-birth-and-death-registration-should-be-lifted---asaduddin-owaisi</link>
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                <pubDate>Sat, 01 Mar 2025 21:36:10 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Online Desk]]>
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