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                <title>मुंबई कोर्ट का फर्जी आदेश बनाकर दुबई की अदालत में पेश किया, यूएई के दो नागरिकों समेत छह पर केस</title>
                                    <description><![CDATA[<p>फर्जीवाड़ा करने वालों के हौंसले कितने बुलंद हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक मामले में आरोपियों ने मुंबई कोर्ट का ही एक फर्जी आदेश तैयार कर उसे दुबई की अदालत में पेश कर दिया। आइए जानते हैं कि क्या है ये सनसनीखेज मामला और कैसे इसका भंडाफोड़ हुआ... </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50811/case-against-six-including-two-uae-nationals-presented-in-dubai"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-18t113649.513.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>फर्जीवाड़ा करने वालों के हौंसले कितने बुलंद हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक मामले में आरोपियों ने मुंबई कोर्ट का ही एक फर्जी आदेश तैयार कर उसे दुबई की अदालत में पेश कर दिया। आइए जानते हैं कि क्या है ये सनसनीखेज मामला और कैसे इसका भंडाफोड़ हुआ... <br />करोड़ों रुपये की पैतृक संपत्ति के विवाद में बढ़त हासिल करने और एक भारतीय कारोबारी को अपराधी साबित करने के लिए मुंबई की अदालत का फर्जी आदेश तैयार कर उसे दुबई की अदालत में पेश करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश पर मुंबई की कुर्ला पुलिस ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दो नागरिकों समेत छह लोगों के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी और अदालत की मुहर व दस्तावेजों के दुरुपयोग के आरोप में मामला दर्ज किया है।</p>
<p> </p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला</strong><br />पुलिस के मुताबिक, खंडाला निवासी वाहिदा हुसैन शत्ताफ की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उनके पति हुसैन मोहम्मद शत्ताफ की छवि खराब करने और संपत्ति विवाद में उनका दावा कमजोर करने के लिए आरोपियों ने मुंबई की अदालत का एक फर्जी आदेश तैयार किया। बाद में इसी दस्तावेज को दुबई की अदालत में सबूत के तौर पर पेश किया गया। मामले का खुलासा तब हुआ जब शत्ताफ परिवार को दस्तावेज की प्रामाणिकता पर संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट के निर्देश पर दस्तावेज की जांच कराई गई। </p>
<p><strong>जांच में ऐसे हुआ खुलासा</strong><br />जांच के दौरान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अदालत के रिकॉर्ड की पड़ताल की और करीब एक दर्जन लोगों के बयान दर्ज किए। जांच में पता चला कि जिस मुकदमे का उल्लेख फर्जी आदेश में किया गया था, वैसा कोई मामला कभी अदालत में चला ही नहीं था। दस्तावेज को असली दिखाने के लिए अदालत के डिजिटल हस्ताक्षर, सरकारी वकील और नोटरी की फर्जी मुहर तथा नकली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी आदेश में हुसैन मोहम्मद शत्ताफ को 25 लाख रुपये की धोखाधड़ी, पासपोर्ट जालसाजी और हवाला कारोबार में दोषी बताया गया था। </p>
<p>इतना ही नहीं, उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने का भी झूठा दावा किया गया। जबकि वास्तविकता यह थी कि उस समय अदालत में केवल उनके जब्त दोपहिया वाहन को छुड़ाने की अर्जी पर सुनवाई हुई थी। कुर्ला पुलिस ने इस मामले में हुमैद मोहम्मद शत्ताफ और हलीमा सुल्तान अल ओवैस, (दोनों यूएई निवासी) के अलावा मधुकर रविराज विल्सन, केन रिचर्ड विल्सन, रजी अहमद और नोटरी शिवाजी एन. ढांगे को आरोपी बनाया है। सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनका इस्तेमाल करने के आरोप में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 11:38:01 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मुंबई: पश्चिम रेलवे के 80 फीसदी कोच में नहीं हैं सीसीटीवी, लोकल के डिब्बों में टॉकबैक तो लगे, ज्यादातर हैं खराब</title>
                                    <description><![CDATA[<p>लोकल ट्रेन में हुए मर्डर के बाद यात्री सुरक्षा का विषय एक बार फिर से गरमा गया है। करीब 30 लाख यात्री प्रतिदिन लोकल से यात्रा करते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा आज एक बड़ा विषय बन चुका है। इसी कड़ी में महिलाओं की सुरक्षा को समझने के लिए एनबीटी की प्रतिनिधि ने स्वयं महिलाओं के डिब्बे में यात्रा कर टॉक बैक सिस्टम का जायजा लिया। यह चेकिंग 5 ट्रेनों में की गई, जिनमे से 3 ट्रेनों में कोई रिप्लाई नहीं आया, 1 ट्रेन में रिप्लाई आया पर कुछ मदद नहीं मिली। वही 1 लोकल में रिप्लाई के साथ -साथ मदद भी मिली। इसी के साथ ही करीब 80% लोकल के डिब्बों में (जनरल और महिला) में सीसीटीवी भी नहीं लगे है। </p><p><br /></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50400/80-percent-coaches-of-western-railways-do-not-have-cctv"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/cameras-to-keep-eye-on_d.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई:  </strong>लोकल ट्रेन में हुए मर्डर के बाद यात्री सुरक्षा का विषय एक बार फिर से गरमा गया है। करीब 30 लाख यात्री प्रतिदिन लोकल से यात्रा करते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा आज एक बड़ा विषय बन चुका है। इसी कड़ी में महिलाओं की सुरक्षा को समझने के लिए एनबीटी की प्रतिनिधि ने स्वयं महिलाओं के डिब्बे में यात्रा कर टॉक बैक सिस्टम का जायजा लिया। यह चेकिंग 5 ट्रेनों में की गई, जिनमे से 3 ट्रेनों में कोई रिप्लाई नहीं आया, 1 ट्रेन में रिप्लाई आया पर कुछ मदद नहीं मिली। वही 1 लोकल में रिप्लाई के साथ -साथ मदद भी मिली। इसी के साथ ही करीब 80% लोकल के डिब्बों में (जनरल और महिला) में सीसीटीवी भी नहीं लगे है। <br /><strong></strong></p><p><strong><br /></strong></p><p><strong>1. 60 % टॉकबैक नहीं किया काम </strong><br />चर्चगेट से विरार जाने वाली ट्रेन शामिल: शाम के समय चर्चगेट से रवाना होने वाली 5: 12 की विरार फ़ास्ट में चढ़ने के बाद जांच के लिए टॉक बैक पर लगातार क्लिक करके मदद मांगी गई। लेकिन गॉर्ड की तरफ से मुंबई सेंट्रल आने तक कोई रिप्लाई नहीं किया गया - ऐसा ही 2 और लोकल में देखा गया। जहां मदद के तौर कोई हेल्प नहीं मिली। यहां तक की 'टॉक' का लाइट भी नहीं जल रहा था।<br /><strong></strong></p><p><strong>2. टॉकबैक पर गार्ड ने किया कनेक्ट</strong><br />रात 9 बजे का समय था। एसी लोकल चर्चगेट से रवाना हुई। इसी दौरान करीब चरनी रोड के एक मेंटली इल औरत ने ट्रेन में दस्तक दी। सभी महिलाओं को परेशान करने लगी। इस दौरान मुंबई सेंट्रल में टॉक बेक सिस्टम पर क्लिक कर जानकारी दी गई। तुरंत किसी का रिप्लाई नहीं आया, लेकिन दादर स्टेशन पर एक गार्ड की आवाज आई, क्या हुआ - उत्तर में सभी जवाब दिए गए। हालांकि मदद के रूप में कोई नहीं आया। यानी 20 फीसदी ऐसे मामले मिले।<br /><strong></strong></p><p><strong>3. 20% टॉक बैक ने किया काम, मिली मदद</strong><br />शाम की मलाड से चर्चगेट आ रही फास्ट लोकल में टॉक बैक ने किया काम साथ ही जरूरी मदद भी मिली। पड़ताल के दौरान प्रतिनिधि ने मुंबई सेंट्रल से यह ट्रेन 5 :22 बजे पकड़ी। टॉक बैक पर मदद के लिए जानकारी दी। वहां से रिप्लाई भी आया। गॉर्ड ने जानकारी ली और उसे कंट्रोल रूम तक पहुंचाया। अगले स्टेशन तक मदद मिल गई।<br /><strong></strong></p><p><strong>कैसे करता है टॉक बैक काम </strong><br />पश्चिम रेलवे के गार्ड (ट्रेन मैनेजर)अशोक अवघाड़े ने बताया कि, जब कोई टॉक बैक सिस्टम पर दिए गए बटन पर क्लिक करता है, तब गौरब केबिन में एक अलार्म बजता है और लाइट दिखती है। गॉर्ड भी अपने सिस्टम से यात्री से कनेक्ट करता है। समस्या जानने के बाद सीधे कंट्रोल रूम से कनेक्ट किया जाता है और जीआरपी और आरपीएफ अगले स्टेशन पर मदद के लिए पहुंचती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 11:04:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नई दिल्ली : 'चुनाव आयोग को नियुक्ति के पूरे अधिकार, नए आदेश की जरूरत नहीं'; टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट से झटका</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ झटका लगा है। चुनाव आयोग द्वारा वोटों की गिनती के लिए मुख्य रूप से केंद्र सरकार और पीएसयू के कर्मचारियों को तैनात करने के निर्देश के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस अहम मुद्दे को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आज टीएमसी की याचिका पर सुनवाई की।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49631/new-delhi-election-commission-has-full-powers-of-appointment-no"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/download---2026-05-02t131314.131.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली :</strong> पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ झटका लगा है। चुनाव आयोग द्वारा वोटों की गिनती के लिए मुख्य रूप से केंद्र सरकार और पीएसयू के कर्मचारियों को तैनात करने के निर्देश के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस अहम मुद्दे को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आज टीएमसी की याचिका पर सुनवाई की। विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई भी नया आदेश पारित करने से साफ इनकार कर दिया है। दरअसल, चुनाव आयोग ने अदालत को आश्वासन दिया है कि वह अपने 13 अप्रैल के परिपत्र (सर्कुलर) का पूरी तरह से पालन करेगा।</p>
<p> </p>
<p>तृणमूल कांग्रेस के मुताबिक, इस सर्कुलर में मतगणना प्रक्रिया में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के साथ-साथ राज्य सरकार के कर्मचारियों की तैनाती का भी प्रावधान है। चुनाव आयोग के वकील के इस बयान के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने केवल यह दोहराया कि चुनौती दिए गए सर्कुलर को लागू किया जाएगा और मामले में आगे कोई अन्य आदेश देने से मना कर दिया। साथ ही यह भी कहा कि चुनाव आयोग को नियुक्ति के पूरे अधिकार हैं।</p>
<p><strong>फर्क नहीं पड़ता कि अधिकारी केंद्र का है- सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी</strong><br />सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने यह भी कहा कि मतगणना के दौरान वहां हर राजनीतिक दल के चुनाव एजेंट मौजूद रहेंगे। इसलिए, इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता कि पर्यवेक्षक केंद्र सरकार का नामित अधिकारी है या नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों की तैनाती पूरी तरह से चुनाव आयोग की अपनी संतुष्टि पर निर्भर करती है, क्योंकि वहां सभी पार्टियों के एजेंट मौजूद होंगे। <br />क्या है पूरा मामला?<br />यह पूरा मामला वोटों की गिनती करने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़ा हुआ है। चुनाव आयोग ने निर्देश दिया था कि बंगाल में वोटों की गिनती के लिए केंद्रीय कर्मचारियों को मतगणना पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) बनाया जाएगा। टीएमसी इस फैसले का विरोध कर रही है। उनका मानना है कि इस प्रक्रिया में राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी बराबर शामिल किया जाना चाहिए। इसी आदेश को चुनौती देने के लिए टीएमसी ने अर्जी दी थी, जिस पर जस्टिस नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई की। </p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट के जजों ने नियमों को लेकर क्या स्पष्ट किया? </strong><br />मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने नियमों को लेकर स्थिति साफ की।<br />उन्होंने कहा कि नियमों में यह विकल्प पूरी तरह से खुला है कि काउंटिंग सुपरवाइजर और काउंटिंग असिस्टेंट केंद्र सरकार के भी हो सकते हैं और राज्य सरकार के भी।<br />कोर्ट ने कहा कि जब यह विकल्प खुला हुआ है, तो हम यह बिल्कुल नहीं कह सकते कि चुनाव आयोग का यह नोटिफिकेशन नियमों के खिलाफ है।<br />जस्टिस बागची ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के पास यह अधिकार है कि वह कह सकता है कि दोनों अधिकारी केंद्र सरकार के ही होंगे। <br /> कपिल सिब्बल ने कोर्ट में क्या दलील दी? <br />टीएमसी की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग के सर्कुलर (परिपत्र) पर सवाल उठाए।<br />सिब्बल ने कोर्ट में दलील दी कि चुनाव आयोग के सर्कुलर में खुद ऐसा स्पष्ट तौर पर नहीं कहा गया है कि केवल केंद्रीय कर्मचारी ही होंगे।<br />टीएमसी का तर्क है कि चुनाव आयोग का यह कदम जानबूझकर राज्य सरकार के कर्मचारियों को गिनती से दूर रखने के लिए उठाया गया है। <br />सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी की दलीलों पर क्या जवाब दिया?<br />वकील सिब्बल की दलीलों पर जस्टिस बागची ने तुरंत अपना पक्ष रखा। उन्होंने ने कहा कि अगर चुनाव आयोग ने ऐसा कहा भी होता, तब भी हम उन्हें इस बात के लिए गलत नहीं ठहरा सकते थे। इसका मुख्य कारण यह है कि नियम साफ तौर पर कहते हैं कि मगणना के लिए केंद्र सरकार या राज्य सरकार के अधिकारियों को नियुक्त किया जा सकता है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/49631/new-delhi-election-commission-has-full-powers-of-appointment-no</link>
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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 13:15:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : कौन हैं आईपीएस तुषार दोशी? जिन्हें सस्पेंड करने के आदेश पर चढ़ा महाराष्ट्र में सियासी पारा, BJP-शिवसेना में ठनी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के चर्चित आईपीएस अधिकारी तुषार दोशी को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के कोटे से फडणवीस सरकार में मंत्री शंभूराज देसाई ने जिला पंचायत चुनावों में सतारा पुलिस की भूमिका और खुद के साथ हुए दुर्व्यवहार के मुद्दे को विधानपरिषद में उठाया तो उस वक्त पर सभापति की कुर्सी पर विराजमान उपसभापति नीलम गोरहे ने एसपी को निलंबित करने का आदेश दिए है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48684/mumbai-who-is-ips-tushar-doshi-who-got-the-order"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-24t192426.734.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र के चर्चित आईपीएस अधिकारी तुषार दोशी को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के कोटे से फडणवीस सरकार में मंत्री शंभूराज देसाई ने जिला पंचायत चुनावों में सतारा पुलिस की भूमिका और खुद के साथ हुए दुर्व्यवहार के मुद्दे को विधानपरिषद में उठाया तो उस वक्त पर सभापति की कुर्सी पर विराजमान उपसभापति नीलम गोरहे ने एसपी को निलंबित करने का आदेश दिए है। नीलम गोरहे के आदेश पर बीजेपी से मंत्री जयकुमार गोरे ने आपत्ति की और कहा कि सीनियर अधिकारी के खिलाफ बिना जांच के ऐसा आदेश देना गलत है। दरसअल, शिंदे की अगुवाई वाल शिवसेना-एनसीसी (अजित पवार) के साथ गठबंधन के बाद भी बहुमत में थी लेकिन जिला परिषद अध्यक्ष के चुनाव में एक वोट से हार गई। बीजेपी जीती। शिंदे की शिवसेना का आरोप है कि ऐसा पुलिस की तौर-तरीकों से हुआ।</p>
<p> </p>
<p><strong>मराठा आंदोलन में झेल चुके हैं कार्रवाई</strong><br />सातारा के पालक मंत्री शंभूराज देसाई ने आरोप लगाया कि जिला ने उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया। एक सोची समझी रणनीति के तहत मुझे और अन्य नेताओं को मतदान प्रक्रिया में शामिल होने से रोका गया। इसे मुद्दे पर बीजेपी और शिवसेना के आमने-सामने आने पर महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि इस पूरे मामले की उचित जांच कराई जाएगी और जांच के निष्कर्षों के आधार पर जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। गृह विभाग सीएम के पास है।</p>
<p>ऐसे में 2001 में पुलिस सेवा में आए आईपीएस तुषार दोशी सुर्खियों में आ गए हैं। यह पहला मौका नहीं है जब तुषार दोशी चर्चा में आए हैं। महाराष्ट्र में साल 2023 मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान लाठीचार्ज करने के बाद आईपीएस तुषार दोशी सरकार ने लंबी छुट्‌टी पर भेज दिया था। राज्य सरकार ने बाद में तुषार जोशी को वापस ड्यूटी पर लिया था। वह अभी सतारा के पुलिस अधीक्षक का दायित्व संभाल रहे थे। ताजा टकराव ने एक बार फिर से उनके सुर्खियों में ला दिया है।<br />कौन हैं तुषार दोशी ?<br />तुषार दोशी 2001 में महाराष्ट्र पुलिस में शामिल हुए थे। वह अभी तक कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। इनमें नवी मुंबई में पुलिस उपायुक्त (क्राइम) का पद और पुणे, सोलापुर तथा जालना में मिली जिम्मेदारियां शामिल हैं। उन्होंने राज्य के आतंकवाद निरोधक दस्ते  के साथ भी काम किया है। तुषार दोशी करियर की शुरुआत में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों (चंद्रपुर और गढ़चिरौली) में तैनात रह चुके हैं। वह पुलिस सेवा में महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग की परीक्षा पास करके आए थे। इसके बाद आईपीएस पर प्रोन्नत हुए हैं। सतारा के एसपी रहते हुए पिछले साल फलटन महिला डॉक्टर सुसाइड केस की जांच भी तुषार दोशी ने संभाली थी। तुषार दोशी महाराष्ट्र के ही रहने वाले हैं। उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा (चौथी कक्षा तक) रायगढ़ में पूरी की, जिसके बाद वे छात्रवृत्ति पर धुले के एक सरकारी विद्यानिकेतन में पढ़ने चले गए। बाद में, वे उच्च माध्यमिक शिक्षा के लिए पुणे चले गए और उनके पास भौतिकी में स्नातक की डिग्री है। दोशी के पिता रायगढ़ जिला परिषद में कार्यरत थे। तुषार अपने पिता से प्रेरित होकर ही पुलिस बल में आए। उन्होंने एमपीएससी (महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग) की परीक्षा उत्तीर्ण की।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 19:25:45 +0530</pubDate>
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