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                <title>tradition - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>tradition RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>नई दिल्ली : रेलवे ने खत्म की 20 साल पुरानी परंपरा, रिटायरमेंट पर नहीं मिलेगा गोल्ड प्लेटेड चांदी का मेडल</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारतीय रेलवे में सामने आए चांदी के नकली सिक्के (मेडल) घोटाले के बाद बड़ा असर देखने को मिला है। रेलवे बोर्ड ने इस मामले में एक अहम फैसला लेते हुए सेवानिवृत्त कर्मचारियों को चांदी के सिक्के देने की 20 साल पुरानी परंपरा को तत्काल प्रभाव से खत्म कर दिया है। रेलवे की ओर से अब रिटायर होने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को विदाई उपहार के रूप में गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल नहीं दिया जाएगा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47336/new-delhi-railways-ends-20-year-old-tradition-will-not"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-01/download---2026-01-29t200434.127.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली :</strong> भारतीय रेलवे में सामने आए चांदी के नकली सिक्के (मेडल) घोटाले के बाद बड़ा असर देखने को मिला है। रेलवे बोर्ड ने इस मामले में एक अहम फैसला लेते हुए सेवानिवृत्त कर्मचारियों को चांदी के सिक्के देने की 20 साल पुरानी परंपरा को तत्काल प्रभाव से खत्म कर दिया है। रेलवे की ओर से अब रिटायर होने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को विदाई उपहार के रूप में गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल नहीं दिया जाएगा।</p>
<p> </p>
<p>रेलवे बोर्ड की प्रधान कार्यकारी निदेशक रेनू शर्मा ने इस संबंध में बुधवार (28 जनवरी 2026) को औपचारिक आदेश जारी किया। आदेश में साफ तौर पर लिखा गया है कि रिटायर होने वाले रेलवे अधिकारियों को सोने की परत वाले चांदी के मेडल देने की प्रथा को बंद करना है। यानी, सेवानिवृत्त रेलवे अधिकारियों को गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल देने की प्रथा को समाप्त किया जाता है।</p>
<p>मामला सामने आने के बाद रेलवे ने संबंधित सप्लायर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है और उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। साथ ही, रेलवे के पास मौजूद मौजूदा मेडल स्टॉक का उपयोग अब रिटायरमेंट उपहार के तौर पर नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें अन्य प्रशासनिक या वैकल्पिक कार्यों में इस्तेमाल किया जाएगा।</p>
<p>रेलवे बोर्ड के आदेश के अनुसार, यह नया नियम 31 जनवरी 2026 को रिटायर होने वाले अधिकारियों पर भी लागू होगा। यानी अब जो कर्मचारी इस तारीख या इसके बाद सेवानिवृत्त होंगे, उन्हें यह गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल नहीं मिलेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Jan 2026 20:05:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : दशहरा पर रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतले जलाने की परंपरा निभाई गई</title>
                                    <description><![CDATA[<p>देशभर में दशहरा का पर्व बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया. इस अवसर पर रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतले जलाने की परंपरा निभाई गई, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानी जाती है. मुंबई में भी कई स्थानों पर इस त्योहार को धूमधाम से मनाया गया, जिसमें श्री सनातन धर्म सभा, एंटॉप हिल का आयोजन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा. श्री सनातन धर्म सभा द्वारा सीमेंट गार्डन, एंटॉप हिल में आयोजित कार्यक्रम में विशाल रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतले स्थापित किए गए थे. सुबह से ही श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या पुतलों को देखने और भव्य कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए इकट्ठा हुई. लोग परिवार और दोस्तों के साथ आए, बच्चों की भीड़ उत्साह और उल्लास से भरी हुई थी. </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/44367/mumbai--the-tradition-of-burning-effigies-of-ravana--meghnath-and-kumbhakarna-was-followed-on-dussehra"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-10/download---2025-10-03t114830.686.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>देशभर में दशहरा का पर्व बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया. इस अवसर पर रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतले जलाने की परंपरा निभाई गई, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानी जाती है. मुंबई में भी कई स्थानों पर इस त्योहार को धूमधाम से मनाया गया, जिसमें श्री सनातन धर्म सभा, एंटॉप हिल का आयोजन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा. श्री सनातन धर्म सभा द्वारा सीमेंट गार्डन, एंटॉप हिल में आयोजित कार्यक्रम में विशाल रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतले स्थापित किए गए थे. सुबह से ही श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या पुतलों को देखने और भव्य कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए इकट्ठा हुई. लोग परिवार और दोस्तों के साथ आए, बच्चों की भीड़ उत्साह और उल्लास से भरी हुई थी. </p>
<p> </p>
<p>कार्यक्रम में आगंतुकों ने धार्मिक गीतों और भजन-कीर्तन के माध्यम से वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया. आयोजकों ने पुतलों को सजाने के लिए रंग-बिरंगी रोशनी, फूलों और पारंपरिक सजावट का उपयोग किया, जिससे दृश्य अत्यंत आकर्षक बन गया.  रावण का विशाल पुतला आग की लपटों में जलते हुए भक्तों ने उसकी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक समझकर उत्साहपूर्वक नमन किया.  </p>
<p>इस अवसर पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी किए गए थे. पुलिस और स्थानीय सुरक्षा बलों ने आग से जुड़े संभावित हादसों को रोकने के लिए कार्यक्रम स्थल और आसपास के क्षेत्रों में कड़ी निगरानी रखी. इसके साथ ही आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड की टीम भी मौजूद रही. श्रद्धालुओं ने इस पर्व को न केवल धार्मिक आस्था के रूप में मनाया, बल्कि इसे सामाजिक समरसता और भाईचारे के संदेश के रूप में भी देखा. बच्चों और युवाओं ने विशेष रूप से उत्साहपूर्वक रावण दहन के दृश्य का आनंद लिया.   </p>
<p>श्री सनातन धर्म सभा के आयोजकों ने कहा कि यह आयोजन आने वाले वर्षों में भी जारी रहेगा और युवा पीढ़ी को बुराई पर अच्छाई की जीत की सीख दी जाएगी. उन्होंने सभी उपस्थित लोगों को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस तरह के उत्सव समाज में सकारात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक पहचान बनाए रखते हैं. मुंबई में दशहरा का यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि लोगों के बीच भाईचारे, उत्साह और संस्कृति को भी मजबूती प्रदान करने वाला रहा.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Oct 2025 11:49:46 +0530</pubDate>
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                <title>मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री सहित मंत्रियों ने सदन की परंपरा, नियम, कानून की उड़ाई धज्जियां  - अजीत पवार </title>
                                    <description><![CDATA[राज्य में सरकार के मंत्री गाड़ी, बंगला आदि सरकारी सुविधाओं का लुत्फ उठा रहे हैं, लेकिन जनता के प्रति गैर-जिम्मेदार हैं। बजट सत्र २७ फरवरी से शुरू है। कुल १८ दिनों तक सदन का कामकाज चला है। इस दौरान मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री सहित मंत्रियों ने जिस प्रकार से सदन की परंपरा, नियम, कानून की धज्जियां उड़ाई हैं, महाराष्ट्र के इतिहास में अब तक ऐसी घटना नहीं घटी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/19302/ministers-including-chief-minister--deputy-chief-minister-flouted-the-tradition--rules-and-regulations-of-the-house---ajit-pawar"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-03/ajit-pawar-fgs_202303988917.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई :</strong> राज्य में सरकार के मंत्री गाड़ी, बंगला आदि सरकारी सुविधाओं का लुत्फ उठा रहे हैं, लेकिन जनता के प्रति गैर-जिम्मेदार हैं। बजट सत्र २७ फरवरी से शुरू है। कुल १८ दिनों तक सदन का कामकाज चला है। इस दौरान मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री सहित मंत्रियों ने जिस प्रकार से सदन की परंपरा, नियम, कानून की धज्जियां उड़ाई हैं, महाराष्ट्र के इतिहास में अब तक ऐसी घटना नहीं घटी है। सदन में मंत्रियों की अनुपस्थिति की घटनाएं बार-बार घटी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सदन के प्रति मंत्रियों ने जिस प्रकार की अनास्था दिखाई है, यह लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है। ऐसे शब्दों में कल प्रतिपक्ष के नेता अजीत पवार ने सरकार पर हमला बोला। विधि मंडल प्रेस रूम में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि मंत्रियों को पद चाहिए, बंगला चाहिए, लेकिन उन्हें सदन में कामकाज नहीं चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिवेशन को लेकर सरकार गंभीर नहीं थी। ऐसा पहली बार हुआ जब सदन में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों की उपस्थिति बेहद कम रही। कई बार जब ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाए गए तो उनका उत्तर देने के लिए सदन में मंत्री मौजूद नहीं थे, ऐसे में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा को आगे धकेलना पड़ा। सदन में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव ने उच्चांक कायम किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को खतरे में डालनेवाले कई काम हुए। हमने अलग-अलग माध्यम से महत्वपूर्ण सवाल रखने के प्रयास किए।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिवेशन जनता के सवाल रखने का मंच है, हमने विरोधी दल की भूमिका नहीं अपनाई। हमारी भूमिका सभागृह चलाने की थी, लेकिन सरकार किसी की कोई बात सुनना नहीं चाहती थी। सत्तारूढ़ दल को सभागृह और विधानमंडल की सीढ़ियों पर हंगामा करते देखा गया, यह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। सत्तारूढ़ दल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तस्वीर को जूतों से पीटा, इससे विधानमंडल की पवित्रता भंग हुई।<br />अजीत पवार ने कहा कि पुरानी पेंशन को लेकर कर्मचारियों की हड़ताल हुई, लेकिन कोई ठोस पैâसला नहीं हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">एसटी कामगारों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। एसटी आंदोलन का समर्थन करनेवाले विधायक कहां चले गए? दादर में एक विधायक ने गोली चलाई, लेकिन कहा गया कि विधायक की रिवॉल्वर से गोली चली, लेकिन विधायक ने नहीं चलाई। हमने कई घोटालों का खुलासा किया, लेकिन सरकार ने उत्तर नहीं दिया। महाविकास आघाड़ी सरकार के दौरान मराठवाड़ा मुक्ति संग्राम महोत्सव मनाने का पैâसला हुआ था, लेकिन सरकार की तरफ से कोई हलचल नजर नहीं आई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Mar 2023 16:23:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>केरल में सगे भाई-बहनों की शादी करा देने की परंपरा पर कोर्ट ने लगाई रोक!</title>
                                    <description><![CDATA[केरल में एक ईसाई समुदाय की परंपरा पर वहां की कोट्टायम कोर्ट ने रोक लगा दी है। यह परंपरा है भाई-बहनों की आपस में शादी कराने की। कोर्ट का कहना है कि यह कोई धार्मिक मामला नहीं है इसलिए यह परंपरा बंद करें। यह मामला चचेरे, ममेरे, फुफेरे या दूर की रिश्तेदारी वाले भाई-बहनों से जुड़ा नहीं है, बल्कि सगे भाई-बहनों की शादी करा देने की परंपरा का है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/15408/court-bans-tradition-of-getting-married-of-real-brothers-and-sisters-in-kerala"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2022-11/download-(3)10.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई : </strong>केरल में एक ईसाई समुदाय की परंपरा पर वहां की कोट्टायम कोर्ट ने रोक लगा दी है। यह परंपरा है भाई-बहनों की आपस में शादी कराने की। कोर्ट का कहना है कि यह कोई धार्मिक मामला नहीं है इसलिए यह परंपरा बंद करें। यह मामला चचेरे, ममेरे, फुफेरे या दूर की रिश्तेदारी वाले भाई-बहनों से जुड़ा नहीं है, बल्कि सगे भाई-बहनों की शादी करा देने की परंपरा का है।</p>
<p style="text-align:justify;">सीमित क्षेत्र में सीमित आबादी वाला यह समुदाय इस परंपरा के पीछे का कारण भी अलग ही देता है। भाई-बहन की शादी कराने की परंपरा के पीछे इनका तर्क सबको चौंका सकता है। दरअसल केरल में रहनेवाला यह एक ऐसा ईसाई समुदाय है जो खुद को जातिगत रूप से बहुत शुद्ध मानता है। इस समुदाय में अपनी शुद्धता को बनाए रखने के लिए सगे भाई-बहनों की भी आपस में शादी करा दी जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">कनन्या कैथोलिक समुदाय खुद को उन ७२ यहूदी-ईसाई परिवारों का वंशज मानता है, जो ३४५ ईसवी में थॉमस ऑफ किनाई व्यापारी के साथ मेसोपोटामिया से यहां आए थे। रिपोर्ट में बताया है कि किनाई ही बाद में कनन्या हो गया। केरल के कोट्टायम और इसके पास के जिलों में इस समुदाय के करीब १.६७ लाख लोग हैं। इनमें से २१८ पादरी और नन हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस समुदाय के लोग अपनी जातिगत शुद्धता बनाए रखने के लिए अमूमन समाज से बाहर शादी नहीं करते। अगर कोई समुदाय से बाहर शादी करता है तो उसे समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता है। इतना ही नहीं, उसके चर्च और कब्रिस्तान जाने पर भी पाबंदी लगा दी जाती है। समाज से बाहर शादी करनेवाला व्यक्ति इस समाज की अन्य शादी और आयोजनों, यहां तक कि अपने रिश्तेदारों की शादी में भी नहीं जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">समाज से बहिष्कृत होने के बाद फिर समाज में वापस आने की भी एक अपवाद स्थिति है। इस समुदाय के किसी लड़के ने बाहरी लड़की से शादी कर ली और उस बाहरी की अगर मृत्यु हो जाए तो उसे समाज में वापस लेने का भी प्रावधान है लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें तय हैं। शर्त ये है कि उस लड़के को फिर से अपने समुदाय की किसी लड़की से शादी करनी होगी। दूसरी शर्त ये भी है कि अगर पहली पत्नी (बाहरी लड़की) कोई संतान हुई हो तो उसे समुदाय में नहीं ला सकते।</p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Tue, 15 Nov 2022 11:22:10 +0530</pubDate>
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