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                <title>WHO - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>WHO RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई: सड़क हादसे में जान गंवाने वाले कारोबारी के परिवार को ₹5.01 करोड़ मुआवजा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने सड़क हादसे में जान गंवाने वाले घाटकोपर निवासी 46 वर्षीय कारोबारी नीरज मेहता के परिवार को ₹5.01 करोड़ का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह हाल के कुछ हफ्तों में मुंबई मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल की ओर से ₹5 करोड़ से अधिक का दिया गया दूसरा बड़ा मुआवजा है। इससे पहले जुलाई में ट्रिब्यूनल ने 2022 के एक सड़क हादसे में 82 प्रतिशत स्थायी रूप से दिव्यांग हुए मुलुंड निवासी 54 वर्षीय व्यक्ति को ₹19.97 करोड़ का मुआवजा देने का आदेश दिया था। </p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51289/%E2%82%B9501-crore-compensation-to-the-family-of-businessman-who-lost"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/images---2026-08-11t112953.846.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने सड़क हादसे में जान गंवाने वाले घाटकोपर निवासी 46 वर्षीय कारोबारी नीरज मेहता के परिवार को ₹5.01 करोड़ का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह हाल के कुछ हफ्तों में मुंबई मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल की ओर से ₹5 करोड़ से अधिक का दिया गया दूसरा बड़ा मुआवजा है। इससे पहले जुलाई में ट्रिब्यूनल ने 2022 के एक सड़क हादसे में 82 प्रतिशत स्थायी रूप से दिव्यांग हुए मुलुंड निवासी 54 वर्षीय व्यक्ति को ₹19.97 करोड़ का मुआवजा देने का आदेश दिया था। </p>
<p> </p>
<p>4 अगस्त को सुनाए गए आदेश में ट्रिब्यूनल के सदस्य एए घनीवाले ने बीमा कंपनी की उस दलील को स्वीकार नहीं किया, जिसमें कहा गया था कि हादसे में शामिल बस के चालक के पास वैध और प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था तथा वाहन के पास वैध परमिट भी नहीं था। <br />ट्रिब्यूनल ने कहा कि बीमा कंपनी अपने दावों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य पेश करने में विफल रही। इतना ही नहीं, कंपनी ने अपने पक्ष में किसी गवाह से पूछताछ नहीं की और न ही चार्जशीट को रिकॉर्ड पर लाया। ऐसे में केवल आरोपों के आधार पर बीमा कंपनी को अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं किया जा सकता।</p>
<p><strong>2024 में महाबलेश्वर जाते समय हुआ था हादसा</strong><br />मामला वर्ष 2024 में हुए उस सड़क हादसे से जुड़ा है, जिसमें घाटकोपर के रहने वाले कारोबारी नीरज मेहता की जान चली गई थी। मेहता अपने परिवार के साथ महाबलेश्वर की यात्रा पर जा रहे थे, तभी उनकी यात्रा एक गंभीर सड़क दुर्घटना में बदल गई। हादसे के बाद परिवार ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के समक्ष मुआवजे के लिए याचिका दायर की। परिवार की ओर से हादसे के कारण हुई आर्थिक और पारिवारिक क्षति को सामने रखा गया। मामले की सुनवाई के दौरान दुर्घटना की परिस्थितियों और बीमा कंपनी की जिम्मेदारी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया।</p>
<p>हालांकि, ट्रिब्यूनल ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। आदेश में कहा गया कि यदि बीमा कंपनी किसी कानूनी बचाव या आरोप के आधार पर मुआवजा देने की जिम्मेदारी से बचना चाहती है, तो उसे अपने दावे के समर्थन में पर्याप्त सबूत भी पेश करने होंगे। ट्रिब्यूनल के मुताबिक, बीमा कंपनी ऐसा करने में विफल रही। उसने अपने आरोपों को साबित करने के लिए न तो कोई गवाह पेश किया और न ही संबंधित चार्जशीट को रिकॉर्ड पर लाया। इस कारण उसके दावे को पर्याप्त आधार नहीं मिला। हाल के दिनों में दूसरा बड़ा मुआवजा यह फैसला ऐसे समय में आया है जब मुंबई एमएसीटी ने हाल के हफ्तों में दूसरा बड़ा मुआवजा दिया है।</p>
<p>जुलाई में ट्रिब्यूनल ने मुलुंड निवासी रासिक बिंदुमाधव जोशी को ₹19.97 करोड़ का मुआवजा देने का आदेश दिया था। जोशी वर्ष 2022 में एक ऑटो-रिक्शा दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए थे और उन्हें 82 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता हुई थी। ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी को मुआवजे के साथ 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी निर्देश दिया था। उस मामले में दुर्घटना 2 जनवरी 2022 को एलबीएस मार्ग पर हुई थी। दावा याचिका के अनुसार, ऑटो-रिक्शा तेज और लापरवाही से चलाया जा रहा था और मुलुंड में कमगार अस्पताल सिग्नल के पास वह बेस्ट बस से टकरा गया था। हादसे में जोशी को गंभीर चोटें आई थीं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/51289/%E2%82%B9501-crore-compensation-to-the-family-of-businessman-who-lost</link>
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                <pubDate>Tue, 11 Aug 2026 11:30:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> ठाणे : आपदाओं के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की जिंदगी बचाने वाले एक रेस्क्यू वर्कर की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत </title>
                                    <description><![CDATA[<p>आपदाओं के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की जिंदगी बचाने वाले एक रेस्क्यू वर्कर की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई। ठाणे डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स के स्थायी सदस्य विकास लाहू गोरे (31) की मोटरसाइकिल कथित तौर पर मुंबई-नासिक हाईवे पर एक गड्ढे से टकराने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में गंभीर रूप से घायल विकास गोरे की मौत हो गई। उनकी मौत के बाद परिवार, सहकर्मियों और स्थानीय लोगों में शोक के साथ-साथ सड़क व्यवस्था को लेकर नाराजगी भी देखने को मिल रही है। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51129/a-rescue-worker-who-risked-his-life-to-save-people"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/images---2026-08-04t142236.447.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>ठाणे : </strong> आपदाओं के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की जिंदगी बचाने वाले एक रेस्क्यू वर्कर की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई। ठाणे डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स के स्थायी सदस्य विकास लाहू गोरे (31) की मोटरसाइकिल कथित तौर पर मुंबई-नासिक हाईवे पर एक गड्ढे से टकराने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में गंभीर रूप से घायल विकास गोरे की मौत हो गई। उनकी मौत के बाद परिवार, सहकर्मियों और स्थानीय लोगों में शोक के साथ-साथ सड़क व्यवस्था को लेकर नाराजगी भी देखने को मिल रही है। </p>
<p> </p>
<p>मृतक विकास गोरे ठाणे जिले के शाहपुर तालुका के बामाने गांव के रहने वाले थे। वे टीडीआरएफ में स्थायी सदस्य के रूप में कार्यरत थे और आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। वर्षों से वे बाढ़, दुर्घटनाओं और अन्य आपात परिस्थितियों में लोगों की मदद करते आ रहे थे। उनके साथी उन्हें एक समर्पित और साहसी रेस्क्यू कर्मी के रूप में याद कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, हादसे के समय विकास गोरे ड्यूटी पर जा रहे थे। परिवार के सदस्यों और उनके साथ काम करने वाले लोगों के मुताबिक, वह अपने नियमित कार्य के लिए मोटरसाइकिल से निकले थे। इसी दौरान मुंबई-नासिक हाईवे पर शाहपुर क्षेत्र में भारंगी नदी के पुल के पास उनकी बाइक दुर्घटना का शिकार हो गई।<br />पुलिस और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, विकास गोरे मुंबई-नासिक हाईवे पर ठाणे की दिशा में जा रहे थे। इसी दौरान उनकी मोटरसाइकिल कथित तौर पर सड़क पर बने एक गहरे गड्ढे से टकरा गई। अचानक झटका लगने के कारण बाइक पर उनका नियंत्रण नहीं रहा। इसके बाद वे सड़क पर गिर गए और फिसलते हुए डिवाइडर से जा टकराए। हादसा इतना गंभीर था कि विकास गोरे के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। दुर्घटना के बाद उन्हें तत्काल उपचार के लिए ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार और उनके विभाग के लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। <br />विकास गोरे अपने पीछे पत्नी और सवा साल की जुड़वां बेटियों को छोड़ गए हैं। कम उम्र में परिवार के मुख्य सदस्य की मौत से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिवार के लोगों का कहना है कि विकास ने हमेशा दूसरों की जान बचाने का काम किया, लेकिन सड़क की खराब स्थिति के कारण उनकी खुद की जिंदगी चली गई। परिवार और उनके साथियों ने इस हादसे को लेकर जवाबदेही की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि सड़क पर मौजूद गड्ढों की समय पर मरम्मत की जाती तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से सड़क की स्थिति सुधारने और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Aug 2026 14:23:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई: अटल सेतु पर बाइक दौड़ाने वाले बाइकर पर प्राथमिकी, वायरल वीडियो के बाद पुलिस ने शुरू की तलाश</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई के बहुचर्चित अटल सेतु पर बाइक चलाकर यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले एक बाइकर के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अज्ञात बाइक सवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है और उसकी पहचान कर तलाश शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, अटल सेतु पर दोपहिया वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद एक बाइक सवार ने नियमों की अनदेखी करते हुए समुद्री पुल पर बाइक चलाई।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51057/mumbai-police-starts-search-after-viral-video-on-biker-riding"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/1-537302799.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई। </strong>मुंबई के बहुचर्चित अटल सेतु पर बाइक चलाकर यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले एक बाइकर के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अज्ञात बाइक सवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है और उसकी पहचान कर तलाश शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, अटल सेतु पर दोपहिया वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद एक बाइक सवार ने नियमों की अनदेखी करते हुए समुद्री पुल पर बाइक चलाई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया।<br />सेवरी पुलिस ने बाइकर के खिलाफ सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने और यातायात नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। पुलिस अब वायरल वीडियो के आधार पर बाइक सवार की पहचान करने की कोशिश कर रही है।</p>
<p> </p>
<p>अधिकारियों के मुताबिक, वीडियो में दिखाई दे रहा है कि बाइक सवार अटल सेतु पर वाहन चला रहा है, जबकि इस पुल पर केवल चार पहिया वाहनों को अनुमति है। सुरक्षा कारणों से दोपहिया वाहनों, पैदल यात्रियों और अन्य प्रतिबंधित वाहनों का प्रवेश यहां वर्जित है। अटल सेतु देश का एक महत्वपूर्ण समुद्री पुल है और इसे आधुनिक परिवहन व्यवस्था का अहम हिस्सा माना जाता है। पुल पर तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही होती है, इसलिए सुरक्षा नियमों का पालन बेहद जरूरी है। ऐसे में दोपहिया वाहन लेकर प्रवेश करना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि अन्य लोगों की सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है।</p>
<p>पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो की जांच की जा रही है। वीडियो में दिख रहे बाइक नंबर, स्थान और अन्य तकनीकी जानकारी के आधार पर आरोपी तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि यदि किसी के पास इस बाइकर से जुड़ी जानकारी हो तो वह पुलिस को उपलब्ध कराए। मुंबई पुलिस लगातार यातायात नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई करती रही है। अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर खतरनाक तरीके से वाहन चलाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे, ताकि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।</p>
<p>पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर नियम तोड़ने की घटनाएं युवाओं में बढ़ती चिंता का विषय बन रही हैं। कई बार लोग लोकप्रियता या सोशल मीडिया पर ध्यान आकर्षित करने के लिए ऐसे स्टंट करते हैं, जिनसे गंभीर दुर्घटनाएं हो सकती हैं। अटल सेतु जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर सुरक्षा नियमों का पालन करना और भी जरूरी हो जाता है। पुल पर किसी भी तरह की लापरवाही से न केवल वाहन चालक बल्कि दूसरे यात्रियों की जान भी खतरे में पड़ सकती है। इस घटना के बाद पुलिस ने एक बार फिर लोगों से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन करें और प्रतिबंधित क्षेत्रों में वाहन न ले जाएं। अधिकारियों ने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।</p>
<p>फिलहाल सेवरी पुलिस वायरल वीडियो की जांच कर रही है और आरोपी बाइक सवार की तलाश में जुटी हुई है। पुलिस को उम्मीद है कि तकनीकी जांच और अन्य माध्यमों से जल्द ही बाइकर की पहचान कर उसे गिरफ्तार किया जा सकेगा। इस घटना ने एक बार फिर सड़क और पुलों पर सुरक्षा नियमों के पालन की जरूरत को उजागर किया है। प्रशासन का कहना है कि अटल सेतु जैसे महत्वपूर्ण मार्गों पर किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 10:22:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : 7 साल तक टीबी और अस्थमा का इलाज करते रहे मुंबई के डॉक्टर, 10 वर्षीय बच्ची के फेफड़े में फंसा मिला पेन का ढक्कन</title>
                                    <description><![CDATA[<p>एक 10 साल की बच्ची के फेफड़े का कुछ हिस्सा निकालना पड़ा क्योंकि सात साल से ज्यादा समय तक उसके बाएं फेफड़े के निचले हिस्से की नली (ब्रोंकस) के पास पेन का ढक्कन फंसा हुआ था। कई डॉक्टरों ने उसके असामान्य एक्स-रे को टीबी या अस्थमा समझकर गलत इलाज किया था।  बच्ची की मां और धारावी की रहने वाली मैमुना शेख ने बताया कि जब लगातार खांसी और अचानक वजन कम होने जैसे लक्षण दिखे, तो कई डॉक्टरों ने संक्रामक बीमारी का शक होने पर उसका इलाज किया और एंटीबायोटिक्स दीं। इसके बाद उसे बीएमसी अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने टीबी का इलाज शुरू कर दिया, जबकि उसका बलगम का सैंपल नेगेटिव आया था। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50971/mumbai-doctors-kept-treating-tb-and-asthma-for-7-years"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-27t122456.725.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>एक 10 साल की बच्ची के फेफड़े का कुछ हिस्सा निकालना पड़ा क्योंकि सात साल से ज्यादा समय तक उसके बाएं फेफड़े के निचले हिस्से की नली (ब्रोंकस) के पास पेन का ढक्कन फंसा हुआ था। कई डॉक्टरों ने उसके असामान्य एक्स-रे को टीबी या अस्थमा समझकर गलत इलाज किया था।  बच्ची की मां और धारावी की रहने वाली मैमुना शेख ने बताया कि जब लगातार खांसी और अचानक वजन कम होने जैसे लक्षण दिखे, तो कई डॉक्टरों ने संक्रामक बीमारी का शक होने पर उसका इलाज किया और एंटीबायोटिक्स दीं। इसके बाद उसे बीएमसी अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने टीबी का इलाज शुरू कर दिया, जबकि उसका बलगम का सैंपल नेगेटिव आया था। </p>
<p> </p>
<p>उस समय अस्पताल में मौजूद और मायशा के केस में शामिल एक रेजिडेंट डॉक्टर ने कहा कि यह शायद उन दुर्लभ मामलों में से एक था जहां चीज की जगह की वजह से सही बीमारी का पता लगाना बहुत मुश्किल था, और इलाज लक्षणों के आधार पर किया गया। डॉक्टर ने कहा कि हम तब तक एंटी-कोच थेरेपी का कोर्स शुरू नहीं कर सकते जब तक कि कोई पक्का संकेत न मिले। नेगेटिव रिज़ल्ट के बावजूद इलाज भविष्य के डॉक्टरों के लिए टीबी की संभावना को खत्म करने में मददगार होता है।</p>
<p><strong>टीबी का इलाज होने के बाद भी हालत नहीं हुई ठीक</strong><br />टीबी का इलाज होने के बाद भी जब मैमुना ने देखा कि उसकी बच्ची की हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा है, तो वह उसे दूसरे प्राइवेट अस्पताल ले गईं। वहाँ डॉक्टरों ने परिवार को बताया कि मायशा को अस्थमा है और राहत के लिए इनहेलर दिया। एसआरसीसी चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल (नारायण हेल्थ) की पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. इंदु खोसला, जो इस केस में शामिल थीं, ने कहा कि ज़्यादातर डॉक्टरों को निमोनिया दिखा जो ठीक नहीं हो रहा था, इसलिए उन्होंने एंटी-टीबी दवाएं लिख दीं। उन्होंने कहा कि फेफड़े के अंदर किसी बाहरी चीज के होने का शक किया जाना चाहिए था, लेकिन यह राय का फर्क है और इसके लिए डॉक्टरों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।</p>
<p><strong>ब्रोंकोस्कोपी में दिखा पेन का ढक्कन</strong><br />डॉ. इंदु ने बताया कि सीटी स्कैन में फेफड़ा सिकुड़ा हुआ (कोलेप्स) दिखा, और क्योंकि बाकी अंग सामान्य लग रहे थे, इसलिए उन्हें बाहरी चीज के होने का शक हुआ। डॉ. खोसला ने कहा, ब्रोंकोस्कोपी के दौरान हमने देखा कि पेन का ढक्कन गहराई में फंसा हुआ था। उसे बाहर निकालने के लिए हमें अपनी ईएनटी टीम की मदद लेनी पड़ी और ज्यादा एनेस्थीसिया देना पड़ा। </p>
<p><strong>प्रोसीजर के बाद ठीक हुआ निमोनिया, पर...</strong><br />इसे निकालते ही मायशा को काफी बेहतर महसूस हुआ। डॉ. खोसला ने कहा कि प्रोसीजर के लगभग दो से तीन हफ्ते बाद, उसका निमोनिया- जो फेफड़े के निचले बाएं हिस्से और बीच वाले हिस्से में फैला था- कम हो गया और सिर्फ निचले हिस्से तक ही सीमित रह गया। फेफड़े का जो हिस्सा खराब नहीं हुआ था, वह खुल गया। </p>
<p>डॉक्टरों ने एक महीने तक इंतजार किया कि क्या फेफड़े का बाकी प्रभावित हिस्सा फिर से फैल पाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गंभीर इन्फेक्शन और टिश्यू को हुए ऐसे नुकसान की वजह से जिसे ठीक नहीं किया जा सकता था, उन्हें आख़िरकार उसके फेफड़े का लगभग एक-तिहाई हिस्सा निकालना पड़ा। उम्मीद है कि मायशा सामान्य जिंदगी जी पाएगी, लेकिन मैमूना ने कहा कि एक मेडिकल चूक की वजह से वह लगभग अपनी बेटी को खो ही बैठी थीं। उन्होंने कहा कि अब तक हुए खर्च का तो हमें हिसाब ही नहीं रहा।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 12:35:28 +0530</pubDate>
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