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                <title>WHO - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>WHO RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई: ‘मानसून की पूरी तैयारी’ का दावा करने वाली मेयर के सामने ही खुले गड्ढे में गिरा बीएमसी कर्मचारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>किंग्स सर्कल इलाके में बुधवार (24 जून) को नगर निगम के एक कर्मचारी खुले गड्ढे में गिर गए. यह घटना उस जगह से कुछ ही मीटर की दूरी पर घटित हुई, जहां मेयर रितु तावड़े इलाके में बार-बार होने वाले जल-जमाव की समस्या से निपटने के उपायों का जायजा ले रही थीं. रिपोर्ट के मुताबिक, तावड़े किंग्स सर्कल के पास महात्मा गांधी मार्केट के सामने अधिकारियों से बात कर रही थीं, तभी बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के एक कर्मचारी फुटपाथ के ठीक बगल में बने खुले गड्ढे में गिर गए.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50396/bmc-employee-falls-into-open-pit-in-front-of-mumbai"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/images---2026-06-26t105746.251.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>किंग्स सर्कल इलाके में नगर निगम के एक कर्मचारी खुले गड्ढे में गिर गए. यह घटना उस जगह से कुछ ही मीटर की दूरी पर घटित हुई, जहां मेयर रितु तावड़े इलाके में बार-बार होने वाले जल-जमाव की समस्या से निपटने के उपायों का जायजा ले रही थीं. रिपोर्ट के मुताबिक, तावड़े किंग्स सर्कल के पास महात्मा गांधी मार्केट के सामने अधिकारियों से बात कर रही थीं, तभी बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के एक कर्मचारी फुटपाथ के ठीक बगल में बने खुले गड्ढे में गिर गए.</p>
<p> </p>
<p>डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर रोड के किनारे जमा पानी के अंदर बना एक गड्ढा जो दिखाई नहीं दे रहा था; उसमें कमर तक धंस जाने के बाद उन कर्मचारी को बाहर निकाला गया. यह घटना मेयर के ठीक सामने हुई. इसके बाद तावड़े को मौके पर मौजूद दूसरे अधिकारियों से सख्ती से बात करते हुए देखा गया. उसी मार्केट के पास बने पंपिंग स्टेशनों पर उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई की कैमरा टीम को बताया कि यहां सड़क साफ है और पानी को तेजी से निकालने की व्यवस्था की गई है.</p>
<p>बाद में बीएमसी के एक बयान में उनके हवाले से कहा गया, ‘मुंबई की रोज़मर्रा की ज़िंदगी सुचारू रूप से चल रही है – यह इस बात का सबूत है कि इस साल मानसून से पहले की तैयारियां अच्छे से की गई हैं.’</p>
<p>हालांकि, उनके डिप्टी संजय घाड़ी ने बुधवार शाम को माना कि बीएमसी की तैयारियों में शायद कुछ कमियां रह गई थीं – या कुछ मैनहोल छूट गए थे.</p>
<p>वहीं, बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिड़े को एक ज्ञापन सौंपते हुए घाड़ी ने निगम कर्मचारी के गिरने की घटना का ज़िक्र किया और कहा कि उन्होंने मुंबई में मैनहोल का ‘तत्काल सर्वे’ करने और ‘उन पर मज़बूत और सुरक्षित जाली लगाने’ की मांग की है. उन्होंने कहा कि इस काम में खास तौर पर स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों और पानी भरने वाले इलाकों को शामिल किया जाना चाहिए. तावड़े ने एनडीटीवी को बताया कि किंग सर्कल में कचरा हटाने के लिए मेनटेनेंस होल को खुला छोड़ा गया था. उन्होंने बीएमसी अधिकारी पर दोष मढ़ते हुए कहा कि उन्हें मौके पर लगे बैरिकेड्स पर ध्यान देना चाहिए था.</p>
<p>घटना के वीडियो और संबंधित फुटपाथ की तस्वीरों में ‘हाई वोल्टेज एरिया’ की चेतावनी देने वाले साइनबोर्ड दिखाई दे रहे हैं.</p>
<p>इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए मुंबई उत्तर-पूर्व से कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने तावड़े को संबोधित एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह घटना ‘कोई दुर्घटना नहीं’ थी, बल्कि मेयर का ‘भ्रष्टाचार रंगे हाथों पकड़े जाने’ का मामला था.</p>
<p>गायकवाड़ ने तावड़े की टिप्पणी का ज़िक्र करते हुए एक्स पर लिखा, ‘विपक्ष से सड़कों पर उतरकर काम करने के लिए कहने से पहले, ज़रा उस व्यक्ति को तो देखिए जो ठीक आपके सामने गड्ढे में गिर गया है. वह व्यक्ति आपकी निष्क्रियता और भ्रष्टाचार के गड्ढे में गिरा है.’</p>
<p>बीएमसी के अनुसार, मुंबई में मानसून की बारिश ने इस बार तय समय से लगभग 12 दिन की देरी से 23 जून को दस्तक दी है.  बीते 24 घंटों के दौरान शहर में 225 mm से 250 mm बारिश हुई. हालांकि, मौसम विभाग के 1991-2020 के आंकड़ों के मुताबिक शहर में जून के महीने में आम तौर पर लगभग 526 mm बारिश होती है.</p>
<p>गौरतलब है कि मंगलवार से मुंबई में लगातार बारिश हो रही है. और इसकी वजह से फिर से मुंबई में जलभराव की समस्या देखने को मिल रही है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 10:58:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई से बॉलीवुड तक था जलवा; कौन था असली मटका किंग? ओटीटी पर धूम </title>
                                    <description><![CDATA[<p>70 के दशक पूरे देश में एक अजीब से सट्टे के लिए पागल हो रहा था. तकरीबन हर कोई सट्टे पर पैसा लगा रहा था. मुंबई का मटका सट्टा. पहले एक ओपन नंबर निकलता था और फिर क्लोज. रकम दांव पर लगाने वालों को एक पर्ची मिलती थी. जिसमें उसके लगाए नंबर और दांव लगाई रकम लिखी होती थी. और कुछ नहीं. जीते तो 9 गुना रकम मिलती थी. देश में जिस जगह लैंडलाइन फोन था, वहां इस सट्टे का जलवा था. इसका किंग था रतन खत्री. बंटवारे में पाकिस्तान से उजड़ कर मुंबई आया एक नौजवान. सच में उसकी कहानी रंक से राजा बनने की जीती जागती मिसाल है. उसने हजारों करोड़ रुपए. बॉलीवुड में उसका जलवा था.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49359/there-was-magic-from-mumbai-to-bollywood-who-was-the"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-21t140448.169.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>70 के दशक पूरे देश में एक अजीब से सट्टे के लिए पागल हो रहा था. तकरीबन हर कोई सट्टे पर पैसा लगा रहा था. मुंबई का मटका सट्टा. पहले एक ओपन नंबर निकलता था और फिर क्लोज. रकम दांव पर लगाने वालों को एक पर्ची मिलती थी. जिसमें उसके लगाए नंबर और दांव लगाई रकम लिखी होती थी. और कुछ नहीं. जीते तो 9 गुना रकम मिलती थी. देश में जिस जगह लैंडलाइन फोन था, वहां इस सट्टे का जलवा था. इसका किंग था रतन खत्री. बंटवारे में पाकिस्तान से उजड़ कर मुंबई आया एक नौजवान. सच में उसकी कहानी रंक से राजा बनने की जीती जागती मिसाल है. उसने हजारों करोड़ रुपए. बॉलीवुड में उसका जलवा था.</p>
<p> </p>
<p>मटका किंग रतन खत्री की कहानी गजब की है. कैसे उसने ये सट्टा शुरू किया, कैसे भारत के सबसे बड़े अवैध जुआ साम्राज्य का संस्थापक बना. रतन खत्री 1960 के दशक में मुंबई में एक कपड़ा व्यापारी के यहां काम करता था. फिर वो एक सट्टा खिलाने वाले से जुड़ा. फिर अलग होकर अपना बड़ा एंपायर बनाया. </p>
<p><strong>बंटवारे में पाकिस्तान से मुंबई आया</strong><br />रतन खत्री का जन्म लगभग 1932 में कराची में एक सिंधी हिंदू परिवार में हुआ था. 1947 के विभाजन के समय वह परिवार के साथ मुंबई आ गया. तब वह किशोर ही था. खत्री ने टेक्सटाइल मिलों और बाजारों में काम शुरू किया. मुंबई में उस समय कपड़ा मिलों, कपास कारोबार का बोलबाला था. न्यू यॉर्क कॉटन एक्सचेंज से आने वाले भावों से रोज बाजार ऊपर नीचे होता था. लोग इन भावों पर भी दांव लगाते थे.   </p>
<p>साधारण जिंदगी के शुरुआती सालों में रतन खत्री मिल वर्करों और छोटे व्यापारियों के बीच घुल-मिल चुका था. वह बेशक कपड़ा बाजार में काम करता लेकिन जल्द ही कॉटन एक्सचेंज के नंबरों पर सट्टा लगाने लगा, तब बांबे में बहुत से लोग ऐसा करते थे. ये आंकड़ा जुआं कहलाता था. रतन की गिनती बुद्धि तेज थी. उन्हीं दिनों वो कल्याणजी भगत के संपर्क में आया, जो वर्ली मटका चलाता था. </p>
<p><strong>रिफ्यूजी से छोटा सट्टेबाज</strong><br />कल्याणजी ने मटका की शुरुआत की थी. वह मटका में ताश के सारे पत्तों को डालकर नंबर निकालता था. रतन उसके साथ काम करने लगे. अभी उसकी जिंदगी मामूली ही थी. ये कह सकते हैं कि ऱिफ्यूजी से वह छोटा सट्टेबाज बन गया था. <br />यूं शुरू हुआ मटका किंग बनने का सफर<br />1962 के आसपास जीवन में मोड़ आया. रतन के दोस्तों ने उससे अपना सिंडिकेट शुरू करने को कहा. कल्याणजी के साथ थोड़े मतभेद के बाद रतन ने 1964 में अपना ‘रतन मटका’ या ‘मेन बाजार मटका’ शुरू किया. बस यहीं से उसका ‘मटका किंग’ बनना का सफर शुरू हुआ. वह इस मामले में अलग था कि उसने इस खेल को पारदर्शी बनाया. पहले नंबर गुप्त तरीके से निकलते थे, रतन ने सार्वजनिक ड्रॉ शुरू किए. <br />कहा जाता है कि एक बार वो मुंबई पुलिस कमिश्नर के दफ्तर गया. क्राइम रिपोर्टरों को साथ लिया. ज़वेरी बाजार ले गया. वहां मटके में कार्ड डाले गए, तीन नंबर निकाले गए. रिपोर्टरों ने खुद कार्ड निकाले. यह तरीका तुरंत हिट हो गया. लोग विश्वास करने लगे -‘रतन मटका’ में धांधली नहीं होती. उसने दो चीजें जोड़ीं – समय की पाबंदी और भरोसा. सुबह-शाम दो ड्रॉ, फोन से नंबर पूरे मुंबई, गुजरात, यहां तक कि दुबई-लंदन तक पहुंचाए जाते थे. टेलीफोन लाइन जहां जाती, मटका सट्टा कारोबार वहां फैल जाता. </p>
<p><strong>70 के दशक में रोजाना एक करोड़ रु का टर्नओवर</strong><br />1970 के दशक तक रोजाना टर्नओवर एक करोड़ रुपये तक पहुंच गया. गरीब मिल मजदूर से लेकर अमीर व्यापारी, फिल्मी हस्तियां और नेता तक सब दांव लगाते. रतन ने मटका को एलीट क्लब से आम आदमी का खेल बना दिया. <br />रतन ने अपनी निजी जिंदगी को जुए के कारोबार से अलग रखा. इसी वजह से पब्लिक डोमेन में उसके परिवार, शादी और बच्चों का कोई जिक्र नहीं मिलता. रतन की जिंदगी मुख्य तौर पर नंबर्स, कारोबार और मुंबई की अंडरवर्ल्ड की थी. </p>
<p><strong>फिल्म भी बनाई</strong><br />कारोबार फैलने के साथ रतन ने फिल्मों में भी कदम रखा. 1976 में उसने रंगीला रतन फिल्म प्रोड्यूस की, जिसमें ऋषि कपूर, परवीन बाबी और अशोक कुमार थे. रतन ने खुद छोटा रोल किया. ऋषि कपूर ने अपनी आत्मकथा खुल्लम खुल्ला में लिखा कि रतन कभी-कभी उन्हें या अशोक कुमार को फोन करके कार्ड चुनने को कहते. वह नंबर मुंबई में ‘लकी नंबर’ बन जाता. यह उसका बॉलीवुड कनेक्शन था. </p>
<p><strong>क्यों बंद किया मटका सट्टा धंधा</strong><br />1975-77 की इमरजेंसी के दौरान रतन को 19 महीने जेल हुई. जेल से निकलकर वो फिर सक्रिय हुआ. लेकिन 1990 के दशक में पुलिस छापे, राज्य लॉटरी और अन्य सट्टेबाजी के विकल्पों ने मटका को कमजोर किया. 1993 में आखिरी तूफान आया. वो परिवार के साथ लंदन छुट्टी मनाने जा रहा था. जब वो एयरपोर्ट पहुंचा तो पता लगा कि उसका नाम नो-फ्लाई लिस्ट में डाल दिया गया. परिवार और लोगों के सामने उसकी बहुत बेइज्जती हुई. बस इसके बाद उसने मटका बंद करने का फैसला किया. बाद में महालक्ष्मी रेसकोर्स पर घोड़ों पर छोटे-मोटे दांव लगाता रहा. </p>
<p><strong>फिल्म फाइनेंशिंग और डिस्ट्रीब्यूशन</strong><br />1990 के दशक में रतन ने फिल्म फाइनेंशिंग और डिस्ट्रीब्यूशन में हाथ आजमाया, लेकिन मुख्य कारोबार खत्म हो चुका था. 9 मई 2020 को 88 साल की उम्र में मुंबई में घर में हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 14:05:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : 12 साल की बच्ची के पेट से निकला एक किलो बालों का गुच्छा, चार साल से बाल खाने की थी आदत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई के डॉक्टरों ने एक दुर्लभ और जटिल मामले में 12 वर्षीय बच्ची के पेट से 16:14 सेंटीमीटर का बालों का बड़ा गुच्छा (ट्राइकोबेज़ोआर) निकालकर उसकी जान बचाई। यह गुच्छा पेट के करीब 90% हिस्से में फैला हुआ था और छोटी आंत तक पहुंच गया था। नारायणा हेल्थ चिल्ड्रंस हॉस्पिटल से मिली जानकारी के अनुसार, 12 वर्षीय ऋतुजा (परिवर्तित नाम)पिछले डेढ़ महीने से लगातार उल्टी, पेट भरा-भरा लगना और भूख कम लगने की समस्या झेल रही थी। अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों को पेट के ऊपरी हिस्से में गांठ महसूस हुई। इसके बाद किए गए सीटी स्कैन और अपर गैस्ट्रोइटेस्टिनल एंडोस्कोपी में पेट के भीतर बालों का बड़ा गुच्छा होने की पुष्टि हुई। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48878/mumbai-one-kilo-bunch-of-hair-found-in-the-stomach"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-01t134621.338.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>मुंबई के डॉक्टरों ने एक दुर्लभ और जटिल मामले में 12 वर्षीय बच्ची के पेट से 16:14 सेंटीमीटर का बालों का बड़ा गुच्छा (ट्राइकोबेज़ोआर) निकालकर उसकी जान बचाई। यह गुच्छा पेट के करीब 90% हिस्से में फैला हुआ था और छोटी आंत तक पहुंच गया था। नारायणा हेल्थ चिल्ड्रंस हॉस्पिटल से मिली जानकारी के अनुसार, 12 वर्षीय ऋतुजा (परिवर्तित नाम)पिछले डेढ़ महीने से लगातार उल्टी, पेट भरा-भरा लगना और भूख कम लगने की समस्या झेल रही थी। अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों को पेट के ऊपरी हिस्से में गांठ महसूस हुई। इसके बाद किए गए सीटी स्कैन और अपर गैस्ट्रोइटेस्टिनल एंडोस्कोपी में पेट के भीतर बालों का बड़ा गुच्छा होने की पुष्टि हुई। </p>
<p> </p>
<p>डॉक्टरों ने पहले एंडोस्कोपी के जरिए इसे निकालने की कोशिश की, लेकिन आकार बड़ा और सख्त होने के कारण यह संभव नहीं हो सका। इसके बाद डॉक्टर ने ओपन सर्जरी का निर्णय लिया। तीन घंटे चले ऑपरेशन के बाद बच्ची के पेट से बालों का गुच्छा निकाला गया। बच्ची की हालत तेजी से सुधरी है।</p>
<p><strong>3 से 4 साल से पेट में हो रहे थे जमा</strong><br />अस्पताल के कंसल्टेंट गेस्ट्रोएट्रोलॉजी और हेपेटोलॉजी आदित्य कुलकर्णी ने बताया कि बाल पचता नहीं है। लबे समय तक निगलने पर ये पेट में जमा होकर ठोस गुच्छा बना लेते है। इस मामले में यह समस्या 3 से 4 साल से धीरे-धीरे विकसित हो रही थी। अस्पताल के वरिष्ठ पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. रसिकलाल शाह ने बताया कि इतने बड़े ट्राइकोबेजोआर को एंडोस्कोपी से पूरी तरह निकालना मुश्किल है। ओपन सर्जरी के जरिए ही इसे सुरक्षित तरीके से हटाया जा सकता है। हमारी टीम ने एक ही सत्र में यह प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की। </p>
<p><strong>क्या है ट्राइकोबेज़ोआर?</strong><br />यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक बाल निगलता है, तो वे पेट में जमा होकर एक ठोस गुच्छा बना लेते है, जिसे ट्राइकोबेजोआर कहा जाता है। यह समस्या अक्सर ट्राइकोटिलोमेनिया (बाल तोड़ने की आदत) और ट्राइकोफेजिया ( बाल खाने की आदत ) से जुड़ी होती है, जो मानसिक तनाव या चिंता के कारण विकसित हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 13:47:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पटना : बिहार पुलिस ने मुंबई से मशहूर म्यूजिक कम्पोजर के सौतेले भाई को दबोचा, डॉक्टर से की थी लाखों की ठगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>गांधी मैदान थाने की पुलिस ने मुंबई में छापेमारी कर पटना के डॉक्टर के 70.68 रुपये की ठगी मामले में मुख्य आरोपित स्व. शराफत अली खान के पुत्र जावेद शराफत अली खान को गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें महाराष्ट्र के मालवानी मलाड़ से गिरफ्तार किया गया है। वह खुद को मशहूर म्यूजिक कम्पोजर का सौतेला भाई बताया था। आरोप है कि उसने पीड़ित से खुद को म्यूजिक डायरेक्टर और अपने दो साथियों को रिकॉर्डिंग स्टूडियो का मालिक बताया था। फिर साथ में व्यापार करने के लिए पूंजी लगाने की बात कहकर पीड़ित से तीनों ने अपने अपने खातों में रकम ट्रांसफर करा लिया था।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48765/patna-bihar-police-arrested-the-step-brother-of-a-famous"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/images---2026-03-28t104623.221.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>पटना : </strong>गांधी मैदान थाने की पुलिस ने मुंबई में छापेमारी कर पटना के डॉक्टर के 70.68 रुपये की ठगी मामले में मुख्य आरोपित स्व. शराफत अली खान के पुत्र जावेद शराफत अली खान को गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें महाराष्ट्र के मालवानी मलाड़ से गिरफ्तार किया गया है। वह खुद को मशहूर म्यूजिक कम्पोजर का सौतेला भाई बताया था। आरोप है कि उसने पीड़ित से खुद को म्यूजिक डायरेक्टर और अपने दो साथियों को रिकॉर्डिंग स्टूडियो का मालिक बताया था। फिर साथ में व्यापार करने के लिए पूंजी लगाने की बात कहकर पीड़ित से तीनों ने अपने अपने खातों में रकम ट्रांसफर करा लिया था।</p>
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<p><strong>ट्रांजिट रिमांड पर लाएगी पटना</strong><br />अब पटना पुलिस उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर लेकर पटना लायेगी। गांधी मैदान थानेदार ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि जावेद शराफत अली खान के अलावा दो के खिलाफ भी केस किया गया था। पाटलिपुत्र निवासी पीड़ित डॉक्टर प्रोड्सूर का कार्य भी करते है। उन्होंने एक मार्च 2024 में गांधी मैदान में शिकायत की थी कि मुंबई निवासी जावेद शराफत अली खान अपने मित्र प्रकाश भारतद्वाज और राकेश वर्मा से मुलाकात कराया था।</p>
<p>तब जावेद ने बताया था कि वह म्यूजिक डायरेक्टर का कार्य करते हैं। जबकि अन्य दोनों साथियों के बारे में रिकॉर्डिंग स्टूडियो का मालिक बताया था। मुलाकात के दौरान इन लोगों ने विश्वास दिलाया कि अगर आप हम लोगों के साथ काम करना चाहते है तो इस व्यापार में पूंजी लगाना होगा।</p>
<p><strong>70 लाख से ज्यादा का ट्रांसफर</strong><br />वह जावेद शराफत के कहने पर अपने तीन बैंक खातों से गाना रिकॉर्डिंग और प्रमोशन के नाम पर तीनों के बैंक खातों में 70 लाख 68 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिया। इसके बाद वह लगातार उनसे संपर्क कर जिस काम के लिए पैसा दिया गया, वह अब तक पूरा क्यों नहीं किया गया? यह पूछने लगे। जबकि आरोपितों ने भरोसा दिलाया था कि पैसा देते ही काम शुरू हो जाएगा। आरोप है कि इसके बाद जावेद शराफत ने एक और छोटी फिल्म बनाने के लिए 2.25 लाख रुपये लिया। <br />बताया कि फिल्म गाना के प्रमोशन में सहायक होगा, लेकिन उन्होंने कोई फिल्म नहीं बनाई। मिक्सिंग मास्टरिंग के नाम पर भी 80 हजार रुपये लिए गए, जबकि यह काम सिर्फ दो हजार हजार रुपये का था। इसके बाद वह खुद को ठगा महसूस करने लगा। जब अपना पैसा मांगने लगे तो लौटाया नहीं जा रहा था। इसके बाद उन्होंने इसकी शिकायत थाने में की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 10:47:39 +0530</pubDate>
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