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                <title>WHO - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title>मुंबई से बॉलीवुड तक था जलवा; कौन था असली मटका किंग? ओटीटी पर धूम </title>
                                    <description><![CDATA[<p>70 के दशक पूरे देश में एक अजीब से सट्टे के लिए पागल हो रहा था. तकरीबन हर कोई सट्टे पर पैसा लगा रहा था. मुंबई का मटका सट्टा. पहले एक ओपन नंबर निकलता था और फिर क्लोज. रकम दांव पर लगाने वालों को एक पर्ची मिलती थी. जिसमें उसके लगाए नंबर और दांव लगाई रकम लिखी होती थी. और कुछ नहीं. जीते तो 9 गुना रकम मिलती थी. देश में जिस जगह लैंडलाइन फोन था, वहां इस सट्टे का जलवा था. इसका किंग था रतन खत्री. बंटवारे में पाकिस्तान से उजड़ कर मुंबई आया एक नौजवान. सच में उसकी कहानी रंक से राजा बनने की जीती जागती मिसाल है. उसने हजारों करोड़ रुपए. बॉलीवुड में उसका जलवा था.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49359/there-was-magic-from-mumbai-to-bollywood-who-was-the"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-21t140448.169.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>70 के दशक पूरे देश में एक अजीब से सट्टे के लिए पागल हो रहा था. तकरीबन हर कोई सट्टे पर पैसा लगा रहा था. मुंबई का मटका सट्टा. पहले एक ओपन नंबर निकलता था और फिर क्लोज. रकम दांव पर लगाने वालों को एक पर्ची मिलती थी. जिसमें उसके लगाए नंबर और दांव लगाई रकम लिखी होती थी. और कुछ नहीं. जीते तो 9 गुना रकम मिलती थी. देश में जिस जगह लैंडलाइन फोन था, वहां इस सट्टे का जलवा था. इसका किंग था रतन खत्री. बंटवारे में पाकिस्तान से उजड़ कर मुंबई आया एक नौजवान. सच में उसकी कहानी रंक से राजा बनने की जीती जागती मिसाल है. उसने हजारों करोड़ रुपए. बॉलीवुड में उसका जलवा था.</p>
<p> </p>
<p>मटका किंग रतन खत्री की कहानी गजब की है. कैसे उसने ये सट्टा शुरू किया, कैसे भारत के सबसे बड़े अवैध जुआ साम्राज्य का संस्थापक बना. रतन खत्री 1960 के दशक में मुंबई में एक कपड़ा व्यापारी के यहां काम करता था. फिर वो एक सट्टा खिलाने वाले से जुड़ा. फिर अलग होकर अपना बड़ा एंपायर बनाया. </p>
<p><strong>बंटवारे में पाकिस्तान से मुंबई आया</strong><br />रतन खत्री का जन्म लगभग 1932 में कराची में एक सिंधी हिंदू परिवार में हुआ था. 1947 के विभाजन के समय वह परिवार के साथ मुंबई आ गया. तब वह किशोर ही था. खत्री ने टेक्सटाइल मिलों और बाजारों में काम शुरू किया. मुंबई में उस समय कपड़ा मिलों, कपास कारोबार का बोलबाला था. न्यू यॉर्क कॉटन एक्सचेंज से आने वाले भावों से रोज बाजार ऊपर नीचे होता था. लोग इन भावों पर भी दांव लगाते थे.   </p>
<p>साधारण जिंदगी के शुरुआती सालों में रतन खत्री मिल वर्करों और छोटे व्यापारियों के बीच घुल-मिल चुका था. वह बेशक कपड़ा बाजार में काम करता लेकिन जल्द ही कॉटन एक्सचेंज के नंबरों पर सट्टा लगाने लगा, तब बांबे में बहुत से लोग ऐसा करते थे. ये आंकड़ा जुआं कहलाता था. रतन की गिनती बुद्धि तेज थी. उन्हीं दिनों वो कल्याणजी भगत के संपर्क में आया, जो वर्ली मटका चलाता था. </p>
<p><strong>रिफ्यूजी से छोटा सट्टेबाज</strong><br />कल्याणजी ने मटका की शुरुआत की थी. वह मटका में ताश के सारे पत्तों को डालकर नंबर निकालता था. रतन उसके साथ काम करने लगे. अभी उसकी जिंदगी मामूली ही थी. ये कह सकते हैं कि ऱिफ्यूजी से वह छोटा सट्टेबाज बन गया था. <br />यूं शुरू हुआ मटका किंग बनने का सफर<br />1962 के आसपास जीवन में मोड़ आया. रतन के दोस्तों ने उससे अपना सिंडिकेट शुरू करने को कहा. कल्याणजी के साथ थोड़े मतभेद के बाद रतन ने 1964 में अपना ‘रतन मटका’ या ‘मेन बाजार मटका’ शुरू किया. बस यहीं से उसका ‘मटका किंग’ बनना का सफर शुरू हुआ. वह इस मामले में अलग था कि उसने इस खेल को पारदर्शी बनाया. पहले नंबर गुप्त तरीके से निकलते थे, रतन ने सार्वजनिक ड्रॉ शुरू किए. <br />कहा जाता है कि एक बार वो मुंबई पुलिस कमिश्नर के दफ्तर गया. क्राइम रिपोर्टरों को साथ लिया. ज़वेरी बाजार ले गया. वहां मटके में कार्ड डाले गए, तीन नंबर निकाले गए. रिपोर्टरों ने खुद कार्ड निकाले. यह तरीका तुरंत हिट हो गया. लोग विश्वास करने लगे -‘रतन मटका’ में धांधली नहीं होती. उसने दो चीजें जोड़ीं – समय की पाबंदी और भरोसा. सुबह-शाम दो ड्रॉ, फोन से नंबर पूरे मुंबई, गुजरात, यहां तक कि दुबई-लंदन तक पहुंचाए जाते थे. टेलीफोन लाइन जहां जाती, मटका सट्टा कारोबार वहां फैल जाता. </p>
<p><strong>70 के दशक में रोजाना एक करोड़ रु का टर्नओवर</strong><br />1970 के दशक तक रोजाना टर्नओवर एक करोड़ रुपये तक पहुंच गया. गरीब मिल मजदूर से लेकर अमीर व्यापारी, फिल्मी हस्तियां और नेता तक सब दांव लगाते. रतन ने मटका को एलीट क्लब से आम आदमी का खेल बना दिया. <br />रतन ने अपनी निजी जिंदगी को जुए के कारोबार से अलग रखा. इसी वजह से पब्लिक डोमेन में उसके परिवार, शादी और बच्चों का कोई जिक्र नहीं मिलता. रतन की जिंदगी मुख्य तौर पर नंबर्स, कारोबार और मुंबई की अंडरवर्ल्ड की थी. </p>
<p><strong>फिल्म भी बनाई</strong><br />कारोबार फैलने के साथ रतन ने फिल्मों में भी कदम रखा. 1976 में उसने रंगीला रतन फिल्म प्रोड्यूस की, जिसमें ऋषि कपूर, परवीन बाबी और अशोक कुमार थे. रतन ने खुद छोटा रोल किया. ऋषि कपूर ने अपनी आत्मकथा खुल्लम खुल्ला में लिखा कि रतन कभी-कभी उन्हें या अशोक कुमार को फोन करके कार्ड चुनने को कहते. वह नंबर मुंबई में ‘लकी नंबर’ बन जाता. यह उसका बॉलीवुड कनेक्शन था. </p>
<p><strong>क्यों बंद किया मटका सट्टा धंधा</strong><br />1975-77 की इमरजेंसी के दौरान रतन को 19 महीने जेल हुई. जेल से निकलकर वो फिर सक्रिय हुआ. लेकिन 1990 के दशक में पुलिस छापे, राज्य लॉटरी और अन्य सट्टेबाजी के विकल्पों ने मटका को कमजोर किया. 1993 में आखिरी तूफान आया. वो परिवार के साथ लंदन छुट्टी मनाने जा रहा था. जब वो एयरपोर्ट पहुंचा तो पता लगा कि उसका नाम नो-फ्लाई लिस्ट में डाल दिया गया. परिवार और लोगों के सामने उसकी बहुत बेइज्जती हुई. बस इसके बाद उसने मटका बंद करने का फैसला किया. बाद में महालक्ष्मी रेसकोर्स पर घोड़ों पर छोटे-मोटे दांव लगाता रहा. </p>
<p><strong>फिल्म फाइनेंशिंग और डिस्ट्रीब्यूशन</strong><br />1990 के दशक में रतन ने फिल्म फाइनेंशिंग और डिस्ट्रीब्यूशन में हाथ आजमाया, लेकिन मुख्य कारोबार खत्म हो चुका था. 9 मई 2020 को 88 साल की उम्र में मुंबई में घर में हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 14:05:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : 12 साल की बच्ची के पेट से निकला एक किलो बालों का गुच्छा, चार साल से बाल खाने की थी आदत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई के डॉक्टरों ने एक दुर्लभ और जटिल मामले में 12 वर्षीय बच्ची के पेट से 16:14 सेंटीमीटर का बालों का बड़ा गुच्छा (ट्राइकोबेज़ोआर) निकालकर उसकी जान बचाई। यह गुच्छा पेट के करीब 90% हिस्से में फैला हुआ था और छोटी आंत तक पहुंच गया था। नारायणा हेल्थ चिल्ड्रंस हॉस्पिटल से मिली जानकारी के अनुसार, 12 वर्षीय ऋतुजा (परिवर्तित नाम)पिछले डेढ़ महीने से लगातार उल्टी, पेट भरा-भरा लगना और भूख कम लगने की समस्या झेल रही थी। अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों को पेट के ऊपरी हिस्से में गांठ महसूस हुई। इसके बाद किए गए सीटी स्कैन और अपर गैस्ट्रोइटेस्टिनल एंडोस्कोपी में पेट के भीतर बालों का बड़ा गुच्छा होने की पुष्टि हुई। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48878/mumbai-one-kilo-bunch-of-hair-found-in-the-stomach"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-01t134621.338.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>मुंबई के डॉक्टरों ने एक दुर्लभ और जटिल मामले में 12 वर्षीय बच्ची के पेट से 16:14 सेंटीमीटर का बालों का बड़ा गुच्छा (ट्राइकोबेज़ोआर) निकालकर उसकी जान बचाई। यह गुच्छा पेट के करीब 90% हिस्से में फैला हुआ था और छोटी आंत तक पहुंच गया था। नारायणा हेल्थ चिल्ड्रंस हॉस्पिटल से मिली जानकारी के अनुसार, 12 वर्षीय ऋतुजा (परिवर्तित नाम)पिछले डेढ़ महीने से लगातार उल्टी, पेट भरा-भरा लगना और भूख कम लगने की समस्या झेल रही थी। अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों को पेट के ऊपरी हिस्से में गांठ महसूस हुई। इसके बाद किए गए सीटी स्कैन और अपर गैस्ट्रोइटेस्टिनल एंडोस्कोपी में पेट के भीतर बालों का बड़ा गुच्छा होने की पुष्टि हुई। </p>
<p> </p>
<p>डॉक्टरों ने पहले एंडोस्कोपी के जरिए इसे निकालने की कोशिश की, लेकिन आकार बड़ा और सख्त होने के कारण यह संभव नहीं हो सका। इसके बाद डॉक्टर ने ओपन सर्जरी का निर्णय लिया। तीन घंटे चले ऑपरेशन के बाद बच्ची के पेट से बालों का गुच्छा निकाला गया। बच्ची की हालत तेजी से सुधरी है।</p>
<p><strong>3 से 4 साल से पेट में हो रहे थे जमा</strong><br />अस्पताल के कंसल्टेंट गेस्ट्रोएट्रोलॉजी और हेपेटोलॉजी आदित्य कुलकर्णी ने बताया कि बाल पचता नहीं है। लबे समय तक निगलने पर ये पेट में जमा होकर ठोस गुच्छा बना लेते है। इस मामले में यह समस्या 3 से 4 साल से धीरे-धीरे विकसित हो रही थी। अस्पताल के वरिष्ठ पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. रसिकलाल शाह ने बताया कि इतने बड़े ट्राइकोबेजोआर को एंडोस्कोपी से पूरी तरह निकालना मुश्किल है। ओपन सर्जरी के जरिए ही इसे सुरक्षित तरीके से हटाया जा सकता है। हमारी टीम ने एक ही सत्र में यह प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की। </p>
<p><strong>क्या है ट्राइकोबेज़ोआर?</strong><br />यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक बाल निगलता है, तो वे पेट में जमा होकर एक ठोस गुच्छा बना लेते है, जिसे ट्राइकोबेजोआर कहा जाता है। यह समस्या अक्सर ट्राइकोटिलोमेनिया (बाल तोड़ने की आदत) और ट्राइकोफेजिया ( बाल खाने की आदत ) से जुड़ी होती है, जो मानसिक तनाव या चिंता के कारण विकसित हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 13:47:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पटना : बिहार पुलिस ने मुंबई से मशहूर म्यूजिक कम्पोजर के सौतेले भाई को दबोचा, डॉक्टर से की थी लाखों की ठगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>गांधी मैदान थाने की पुलिस ने मुंबई में छापेमारी कर पटना के डॉक्टर के 70.68 रुपये की ठगी मामले में मुख्य आरोपित स्व. शराफत अली खान के पुत्र जावेद शराफत अली खान को गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें महाराष्ट्र के मालवानी मलाड़ से गिरफ्तार किया गया है। वह खुद को मशहूर म्यूजिक कम्पोजर का सौतेला भाई बताया था। आरोप है कि उसने पीड़ित से खुद को म्यूजिक डायरेक्टर और अपने दो साथियों को रिकॉर्डिंग स्टूडियो का मालिक बताया था। फिर साथ में व्यापार करने के लिए पूंजी लगाने की बात कहकर पीड़ित से तीनों ने अपने अपने खातों में रकम ट्रांसफर करा लिया था।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48765/patna-bihar-police-arrested-the-step-brother-of-a-famous"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/images---2026-03-28t104623.221.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>पटना : </strong>गांधी मैदान थाने की पुलिस ने मुंबई में छापेमारी कर पटना के डॉक्टर के 70.68 रुपये की ठगी मामले में मुख्य आरोपित स्व. शराफत अली खान के पुत्र जावेद शराफत अली खान को गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें महाराष्ट्र के मालवानी मलाड़ से गिरफ्तार किया गया है। वह खुद को मशहूर म्यूजिक कम्पोजर का सौतेला भाई बताया था। आरोप है कि उसने पीड़ित से खुद को म्यूजिक डायरेक्टर और अपने दो साथियों को रिकॉर्डिंग स्टूडियो का मालिक बताया था। फिर साथ में व्यापार करने के लिए पूंजी लगाने की बात कहकर पीड़ित से तीनों ने अपने अपने खातों में रकम ट्रांसफर करा लिया था।</p>
<p> </p>
<p><strong>ट्रांजिट रिमांड पर लाएगी पटना</strong><br />अब पटना पुलिस उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर लेकर पटना लायेगी। गांधी मैदान थानेदार ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि जावेद शराफत अली खान के अलावा दो के खिलाफ भी केस किया गया था। पाटलिपुत्र निवासी पीड़ित डॉक्टर प्रोड्सूर का कार्य भी करते है। उन्होंने एक मार्च 2024 में गांधी मैदान में शिकायत की थी कि मुंबई निवासी जावेद शराफत अली खान अपने मित्र प्रकाश भारतद्वाज और राकेश वर्मा से मुलाकात कराया था।</p>
<p>तब जावेद ने बताया था कि वह म्यूजिक डायरेक्टर का कार्य करते हैं। जबकि अन्य दोनों साथियों के बारे में रिकॉर्डिंग स्टूडियो का मालिक बताया था। मुलाकात के दौरान इन लोगों ने विश्वास दिलाया कि अगर आप हम लोगों के साथ काम करना चाहते है तो इस व्यापार में पूंजी लगाना होगा।</p>
<p><strong>70 लाख से ज्यादा का ट्रांसफर</strong><br />वह जावेद शराफत के कहने पर अपने तीन बैंक खातों से गाना रिकॉर्डिंग और प्रमोशन के नाम पर तीनों के बैंक खातों में 70 लाख 68 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिया। इसके बाद वह लगातार उनसे संपर्क कर जिस काम के लिए पैसा दिया गया, वह अब तक पूरा क्यों नहीं किया गया? यह पूछने लगे। जबकि आरोपितों ने भरोसा दिलाया था कि पैसा देते ही काम शुरू हो जाएगा। आरोप है कि इसके बाद जावेद शराफत ने एक और छोटी फिल्म बनाने के लिए 2.25 लाख रुपये लिया। <br />बताया कि फिल्म गाना के प्रमोशन में सहायक होगा, लेकिन उन्होंने कोई फिल्म नहीं बनाई। मिक्सिंग मास्टरिंग के नाम पर भी 80 हजार रुपये लिए गए, जबकि यह काम सिर्फ दो हजार हजार रुपये का था। इसके बाद वह खुद को ठगा महसूस करने लगा। जब अपना पैसा मांगने लगे तो लौटाया नहीं जा रहा था। इसके बाद उन्होंने इसकी शिकायत थाने में की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/48765/patna-bihar-police-arrested-the-step-brother-of-a-famous</link>
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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 10:47:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>मुंबई : कौन हैं आईपीएस तुषार दोशी? जिन्हें सस्पेंड करने के आदेश पर चढ़ा महाराष्ट्र में सियासी पारा, BJP-शिवसेना में ठनी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के चर्चित आईपीएस अधिकारी तुषार दोशी को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के कोटे से फडणवीस सरकार में मंत्री शंभूराज देसाई ने जिला पंचायत चुनावों में सतारा पुलिस की भूमिका और खुद के साथ हुए दुर्व्यवहार के मुद्दे को विधानपरिषद में उठाया तो उस वक्त पर सभापति की कुर्सी पर विराजमान उपसभापति नीलम गोरहे ने एसपी को निलंबित करने का आदेश दिए है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48684/mumbai-who-is-ips-tushar-doshi-who-got-the-order"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-24t192426.734.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र के चर्चित आईपीएस अधिकारी तुषार दोशी को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के कोटे से फडणवीस सरकार में मंत्री शंभूराज देसाई ने जिला पंचायत चुनावों में सतारा पुलिस की भूमिका और खुद के साथ हुए दुर्व्यवहार के मुद्दे को विधानपरिषद में उठाया तो उस वक्त पर सभापति की कुर्सी पर विराजमान उपसभापति नीलम गोरहे ने एसपी को निलंबित करने का आदेश दिए है। नीलम गोरहे के आदेश पर बीजेपी से मंत्री जयकुमार गोरे ने आपत्ति की और कहा कि सीनियर अधिकारी के खिलाफ बिना जांच के ऐसा आदेश देना गलत है। दरसअल, शिंदे की अगुवाई वाल शिवसेना-एनसीसी (अजित पवार) के साथ गठबंधन के बाद भी बहुमत में थी लेकिन जिला परिषद अध्यक्ष के चुनाव में एक वोट से हार गई। बीजेपी जीती। शिंदे की शिवसेना का आरोप है कि ऐसा पुलिस की तौर-तरीकों से हुआ।</p>
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<p><strong>मराठा आंदोलन में झेल चुके हैं कार्रवाई</strong><br />सातारा के पालक मंत्री शंभूराज देसाई ने आरोप लगाया कि जिला ने उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया। एक सोची समझी रणनीति के तहत मुझे और अन्य नेताओं को मतदान प्रक्रिया में शामिल होने से रोका गया। इसे मुद्दे पर बीजेपी और शिवसेना के आमने-सामने आने पर महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि इस पूरे मामले की उचित जांच कराई जाएगी और जांच के निष्कर्षों के आधार पर जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। गृह विभाग सीएम के पास है।</p>
<p>ऐसे में 2001 में पुलिस सेवा में आए आईपीएस तुषार दोशी सुर्खियों में आ गए हैं। यह पहला मौका नहीं है जब तुषार दोशी चर्चा में आए हैं। महाराष्ट्र में साल 2023 मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान लाठीचार्ज करने के बाद आईपीएस तुषार दोशी सरकार ने लंबी छुट्‌टी पर भेज दिया था। राज्य सरकार ने बाद में तुषार जोशी को वापस ड्यूटी पर लिया था। वह अभी सतारा के पुलिस अधीक्षक का दायित्व संभाल रहे थे। ताजा टकराव ने एक बार फिर से उनके सुर्खियों में ला दिया है।<br />कौन हैं तुषार दोशी ?<br />तुषार दोशी 2001 में महाराष्ट्र पुलिस में शामिल हुए थे। वह अभी तक कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। इनमें नवी मुंबई में पुलिस उपायुक्त (क्राइम) का पद और पुणे, सोलापुर तथा जालना में मिली जिम्मेदारियां शामिल हैं। उन्होंने राज्य के आतंकवाद निरोधक दस्ते  के साथ भी काम किया है। तुषार दोशी करियर की शुरुआत में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों (चंद्रपुर और गढ़चिरौली) में तैनात रह चुके हैं। वह पुलिस सेवा में महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग की परीक्षा पास करके आए थे। इसके बाद आईपीएस पर प्रोन्नत हुए हैं। सतारा के एसपी रहते हुए पिछले साल फलटन महिला डॉक्टर सुसाइड केस की जांच भी तुषार दोशी ने संभाली थी। तुषार दोशी महाराष्ट्र के ही रहने वाले हैं। उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा (चौथी कक्षा तक) रायगढ़ में पूरी की, जिसके बाद वे छात्रवृत्ति पर धुले के एक सरकारी विद्यानिकेतन में पढ़ने चले गए। बाद में, वे उच्च माध्यमिक शिक्षा के लिए पुणे चले गए और उनके पास भौतिकी में स्नातक की डिग्री है। दोशी के पिता रायगढ़ जिला परिषद में कार्यरत थे। तुषार अपने पिता से प्रेरित होकर ही पुलिस बल में आए। उन्होंने एमपीएससी (महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग) की परीक्षा उत्तीर्ण की।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 19:25:45 +0530</pubDate>
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