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                <title>builders - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title>महाराष्ट्र : नासिक में म्हाडा कार्रवाई के बाद निर्माण क्षेत्र की रफ्तार धीमी...  प्रोजेक्ट मंजूरी के लिए इंतजार कर रहे बिल्डर</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">नासिक में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से शहरीकरण हुआ है। आबादी बढ़ने के साथ आवास, व्यावसायिक स्थान और नए आवासीय प्रोजेक्ट की मांग भी बढ़ी है। इसके चलते मनपा के नगररचना विभाग के पास लगातार नए प्रस्ताव आते रहे हैं। लेकिन म्हाडा प्रकरण में कथित फर्जी दस्तावेज, भूखंड विभाजन और 20 प्रतिशत समावेशी आवास योजना के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुई कार्रवाई के बाद निर्माण क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल बना है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51918/maharashtra-after-mhada-action-in-nashik-construction-sector-slows-down"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/8998.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नासिक : </strong>म्हाडा आवास प्रकरण में हुई कार्रवाई के बाद नासिक के निर्माण व्यवसायियों में अब भी आशंका का माहौल बना हुआ है। इसका असर शहर के पूरे निर्माण क्षेत्र पर पड़ता दिखाई दे रहा है। इस प्रकरण के बाद निर्माण व्यवसायियों द्वारा नए प्रोजेक्ट मंजूरी के लिए मनपा के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रमाण तेजी से घटा है। नई परियोजनाओं में निवेश को लेकर भी व्यवसायियों ने सावधानी बरतना शुरू कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">म्हाडा प्रकरण में कार्रवाई शुरू होने के बाद अब तक मंजूरी के लिए दाखिल हुए नए प्रोजेक्ट की संख्या उंगलियों पर गिनने लायक ही होने की जानकारी सामने आ रही है। परिणामस्वरूप निर्माण क्षेत्र में करोड़ों रुपये की आर्थिक गतिविधियां धीमी पड़ने के साथ ही मनपा के राजस्व पर भी असर पड़ने की आशंका है।<br /><br />नासिक में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से शहरीकरण हुआ है। आबादी बढ़ने के साथ आवास, व्यावसायिक स्थान और नए आवासीय प्रोजेक्ट की मांग भी बढ़ी है। इसके चलते मनपा के नगररचना विभाग के पास लगातार नए प्रस्ताव आते रहे हैं। लेकिन म्हाडा प्रकरण में कथित फर्जी दस्तावेज, भूखंड विभाजन और 20 प्रतिशत समावेशी आवास योजना के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुई कार्रवाई के बाद निर्माण क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल बना है।<br /><br />नए प्रोजेक्ट के लिए जमीन खरीदने से लेकर वास्तुरचना, विभिन्न मंजूरियां, विकास शुल्क, टीडीआर-एफएसआई, निर्माण लागत औ०र वित्तीय व्यवस्था तक बड़ी राशि निवेश करनी पड़ती है। ऐसे में आज मंजूर किया गया प्रोजेक्ट कल किसी जांच के दायरे में आएगा या नहीं, दस्तावेजों की दोबारा जांच होगी या नहीं और प्रशासनिक नियमों में फिर कोई बदलाव होगा या नहीं, ऐसे सवाल निर्माण व्यवसायियों के सामने खड़े हैं।<br />म्हाडा प्रकरण में कार्रवाई का दायरा बढ़ने से यह आशंका और गहरी हुई है। मनपा के नगररचना विभाग ने 49 मामलों से संबंधित पक्षों की सुनवाई के बाद लेआउट रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके बाद भी इस प्रकरण में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई जारी है।<br /><br />निर्माण क्षेत्र में मंदी का असर केवल बिल्डर या विकासक तक सीमित नहीं रहेगा। नए प्रोजेक्ट कम होने पर मनपा को मिलने वाला विकास शुल्क, निर्माण अनुमति शुल्क, प्रीमियम, टीडीआर-एफएसआई से संबंधित शुल्क तथा अन्य राजस्व भी घट सकता है। एक ओर शहर के विकास कार्यों के लिए अधिक निधि की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर राजस्व के महत्वपूर्ण स्रोत निर्माण क्षेत्र की गति धीमी होने की स्थिति बन गई है। इसका असर वास्तुविशारद, इंजीनियर, ठेकेदार, निर्माण श्रमिक, स्टील-सिमेंट विक्रेता, हार्डवेयर व्यवसायी, रियल एस्टेट एजेंट तथा निर्माण क्षेत्र से जुड़े अन्य व्यवसायों पर भी पड़ सकता है।<br /><br />आर्किटेक्ट विजय सानप ने कहा कि पृष्ठभूमि में सरकार द्वारा नासिक म्हाडा से संबंधित नियमों में किए गए बदलावों के कारण भी निर्माण व्यवसायियों में असमंजस की स्थिति है। नए नियमों को लागू करने की प्रक्रिया और उस पर प्राप्त सुझाव एवं आपत्तियों के निपटारे तक कुछ प्रोजेक्ट की मंजूरी प्रक्रिया प्रभावित होने की बात निर्माण क्षेत्र से जुड़े सूत्रों द्वारा कही जा रही है। इसके साथ ही टीडीआर के नियमों में 50:50 की नई व्यवस्था आने से छोटे प्रोजेक्ट की आर्थिक व्यवहार्यता प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। छोटे प्रोजेक्ट कम होने पर इसका असर निर्माण क्षेत्र के साथ-साथ महापालिका को मिलने वाले राजस्व पर भी पड़ सकता है।<br />नगररचना के उपसंचालक रितेश चव्हाण का कहना है कि म्हाडा प्रकरण के बाद मनपा के पास बड़े प्रोजेक्ट मंजूरी के लिए बहुत कम आए थे। हालांकि, अब धीरे-धीरे नए प्रोजेक्ट मंजूरी के लिए आने लगे हैं और इनकी संख्या भी बढ़ रही है। कुछ समय के लिए अंतर जरूर पड़ा था, लेकिन अब नियमित रूप से काम शुरू है।<br /><br />म्हाडा प्रकरण में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। लेकिन इसका असर पूरे निर्माण क्षेत्र पर न पड़े, इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की भी है। नासिक मनपा को नियमों और मंजूरी प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता लाने के साथ ही निर्माण व्यवसायियों की शंकाओं का समाधान करने के लिए प्रभावी संवाद शुरू करना चाहिए। नासिक का तेजी से विस्तार हो रहा है। ऐसे में नए आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट पर लंबे समय तक ब्रेक लगना चिंता की बात है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/51918/maharashtra-after-mhada-action-in-nashik-construction-sector-slows-down</link>
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                <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 15:00:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> बेंगलुरु: बिल्डरों पर कसता शिकंजा, सीबीआई ने की बेंगलुरु, मुंबई और पुणे में 12 स्थानों पर छापेमारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सीबीआई ने गुरुवार को बेंगलुरु, मुंबई और पुणे में 12 जगहों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई बिल्डरों और वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज पांच नए आपराधिक मामलों के सिलसिले में की गई। इन पर घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी और ठगी का आरोप है। सीबीआई ने बताया कि ये पांचों मामले सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दर्ज किए गए थे।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51787/tightening-the-noose-on-bengaluru-builders-cbi-raids-12-places"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/images---2026-09-11t123215.656.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बेंगलुरु: </strong>सीबीआई ने गुरुवार को बेंगलुरु, मुंबई और पुणे में 12 जगहों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई बिल्डरों और वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज पांच नए आपराधिक मामलों के सिलसिले में की गई। इन पर घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी और ठगी का आरोप है। सीबीआई ने बताया कि ये पांचों मामले सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दर्ज किए गए थे। इनमें से चार मामले ओजोन ग्रुप और उससे जुड़ी कंपनियों के बेंगलुरु और मुंबई में चल रहे प्रोजेक्ट से जुड़े हैं, जबकि एक मामला बेंगलुरु में विवांशा बालसम के प्रोजेक्ट से जुड़ा है। </p>
<p> </p>
<p>इन मामलों में अलग-अलग फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन के अज्ञात अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं। इन पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक कदाचार जैसे आरोप हैं। सीबीआई के अनुसार, ये मामले बिल्डरों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन के अधिकारियों के बीच कथित मिलीभगत से जुड़े हैं। इसके चलते घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी और ठगी हुई। बड़ी संख्या में घर खरीदारों ने बिल्डरों की कथित धोखाधड़ी वाली गतिविधियों से राहत पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।</p>
<p>इन तलाशी अभियानों का उद्देश्य हाउसिंग रियल एस्टेट सेक्टर में फंड के गलत इस्तेमाल, वित्तीय गड़बड़ियों और धोखाधड़ी जैसी साजिश का पर्दाफाश करने के लिए अहम सुबूत जुटाना था। तलाशी के दौरान एजेंसी ने ऐसे दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और दूसरी चीजें जब्त कीं जिनसे गड़बड़ी का पता चलता है। जांच के तहत इनकी पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसी ने बताया कि उसने पहले ही सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत पूरे भारत में अलग-अलग बिल्डरों के खिलाफ 50 मामले दर्ज किए थे। इन पांच नए मामलों के साथ एजेंसी ने अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कुल 55 मामले दर्ज कर लिए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 12:33:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>मुंबई : दो बिल्डरों को पजेशन ना देने की वजह से हो गई जेल </title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के मुंबई से एक मामला सामने आया है, जिसमें दो बिल्डरों को एक फ्लैट का पजेशन ना लौटा पाने की वजह स जेल की सजा काटना पड़ेगी. इतनी ही नहीं इसके साथ दोनों को 10-10 हजार रुपये जुर्माने के रूप में भी देना होगा. </p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51446/mumbai-two-builders-jailed-for-not-giving-possession"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/building.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> महाराष्ट्र के मुंबई से एक मामला सामने आया है, जिसमें दो बिल्डरों को एक फ्लैट का पजेशन ना लौटा पाने की वजह स जेल की सजा काटना पड़ेगी. इतनी ही नहीं इसके साथ दोनों को 10-10 हजार रुपये जुर्माने के रूप में भी देना होगा. </p>
<p> </p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला?</strong><br />दरअसल ये मामला मुंबई के कुर्ला स्थित स्टर्लिंग अपार्टमेंट्स का है. जहां सुनील सदानंद वैती और उनकी पत्नी कीर्ति सुनील वैती ने समीर जियाउद्दीन और सरोश खान की शिकायत कंज्यूमर फोरम में की थी. उनकी शिकायत पर आयोग ने पहले बिल्डरों को फ्लैट ए-701 का काम पूरा करने, जरूरी ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट और बिल्डिंग कंप्लीशन सर्टिफिकेट लेने और इसके बाद खरीदारों को फ्लैट का कानूनी कब्जा देने का आदेश दिया था.</p>
<p>इतना ही नहीं आयोग ने खरीदारों को बाकी 14.50 लाख रुपये और कुछ अन्य शुल्क मिलाकर पूरे 15 लाख रुपये देने को कहा था. साथ ही बिल्डरों को 16.50 लाख रुपये पर 30 अगस्त 2013 से कब्जा मिलने तक 21 प्रतिशत सालाना ब्याज देने और खरीदारों को मानसिक व शारीरिक परेशानी के लिए 1 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया गया था.</p>
<p><strong>बिल्डरों ने नहीं किया आदेश का पालन</strong><br />आयोग के आदेश के कुछ समय के बाद ही खरीदारों ने दोबारा शिकायत की, कि बिल्डरों ने आयोग के आदेश का पालन नहीं किया. जिस पर बिल्डरों ने सफाई दी कि जमीन की सीमा और नियमों में बदलाव के कारण बिल्डिंग का प्लान बदलना पड़ा. उन्होंने नए प्लान और जरूरी मंजूरियों के लिए आवेदन करने की बात भी कही. हालांकि, सुनवाई के दौरान समीर खान ने माना कि फ्लैट का कब्जा खरीदारों को दिया जा चुका था, लेकिन ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट नहीं लिया गया था. </p>
<p><strong>आयोग ने सुनाई सजा</strong><br />जिस पर आयोग ने कहा कि बिना ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट के दिया गया कब्जा कानूनी कब्जा नहीं माना जा सकता. आयोग ने ये भी माना कि बिल्डरों ने पहले के आदेश का जानबूझकर पालन नहीं किया. तो वहीं आयोग ने ये भी कहा कि बिल्डरों को आदेश का पालन करने के लिए काफी समय मिला था, लेकिन वो इसे पूरा नहीं कर पाए. इसलिए उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत दोनों को दोषी मानते हुए दो साल की जेल की सजा सुनाई गई. अब दोनों बिल्डर दो सालों तक जेल की सलाखों के पीछे रहने वाले हैं.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 12:01:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>मुंबई  : डीपी के अनुसार बिल्डरों से मिलने वाले घरों की बिक्री; बीएमसी को होगी कमाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कमाई के नए स्रोत खोजने के लिए परेशान बीएमसी को नया रास्ता मिल गया है। नए डिवेलपमेंट प्लान (डीपी) के अनुसार, बड़े प्लॉट पर बिल्डरों से मिलने वाले घरों को लॉटरी के जरिए बिक्री करने से बीएमसी को कमाई होगी। बीएमसी जल्द ही 184 घरों के लिए लॉटरी निकालने की प्रक्रिया शुरू करेगी। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, इन घरों की बिक्री से करीब 150 करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा। बीएमसी रेडी रेकनर घरों से कुछ अतिरिक्त कीमत पर ही इन घरों की बिक्री करेगी।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/44393/mumbai--sale-of-houses-received-from-builders-as-per-dp--bmc-to-earn"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-10/download---2025-10-04t122759.353.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई  : </strong>कमाई के नए स्रोत खोजने के लिए परेशान बीएमसी को नया रास्ता मिल गया है। नए डिवेलपमेंट प्लान (डीपी) के अनुसार, बड़े प्लॉट पर बिल्डरों से मिलने वाले घरों को लॉटरी के जरिए बिक्री करने से बीएमसी को कमाई होगी। बीएमसी जल्द ही 184 घरों के लिए लॉटरी निकालने की प्रक्रिया शुरू करेगी। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, इन घरों की बिक्री से करीब 150 करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा। बीएमसी रेडी रेकनर घरों से कुछ अतिरिक्त कीमत पर ही इन घरों की बिक्री करेगी। फिलहाल, बीएमसी को करीब 110 घरों का पजिशन मिल चुका है, बाकी घरों का भी जल्द ही पजिशन मिलेगा। गौरतलब है कि नए डिवेलपमेंट प्लान के मुताबिक, 4000 वर्ग मीटर से ज्यादा बड़े प्लॉट पर निर्माण करते समय बीएमसी को 20 प्रतिशत घरों अत्यल्प और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए बनाकर देना अनिवार्य होता है।</p>
<p> </p>
<p><strong>कहां-कहां होगे घर ?</strong><br />बीएमसी को बिल्डरों से यह घर कांजुरमार्ग, भायखला, बोरिवली, अंधेरी के इलाकों में मिलेंगे। 2018 में नए डिवेलपमेंट प्लान (डीपी) की मंजूरी के बाद के बाद मंजूर हुए यह प्लॉट में बिल्डिंग अब बनकर तैयार हो गई हैं। एक अधिकारी के मुताबिक, मुंबई में सभी को घर देने का सपना पूरा करने के उद्देश्य से हम यह पहल कर रहे हैं। आने वाले कुछ महीनों में हमें 300-400 घर और मिलेंगे। जिसे फिर हम फिर लॉटरी के माध्यम से ही जनता को देंगे। </p>
<p><strong>कैसे निकाली जाएगी घरों की लॉटरी ?</strong><br />बीएमसी ने लॉटरी के माध्यम से घरों की बिक्री के लिए म्हाडा की तर्ज पर ही प्रक्रिया अपनाने का फैसला किया है। एक अधिकारी के मुताबिक, बीएमसी भी म्हाडा की ही तर्ज पर लॉटरी के लिए रजिस्ट्रेशन और अन्य कागजी कार्रवाई पूरी करेगी। जिसके बाद लॉटरी निकलेगी। एक अधिकारी के मुताबिक, हम इन घरों की लॉटरी निकालने के लिए म्हाडा के संपर्क करने का भी विचार कर रहे हैं। म्हाडा के पास लॉटरी निकालने का पूरी व्यवस्था है, जबकि हमारे पास इसे नए सिरे से विकसित करना होगा। </p>
<p>पैसों की जरूरत<br />बीएमसी ने पिछले कुछ साल में कई नए इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट की योजना बनाई है। वर्तमान में बीएमसी के पास करीब 70,000 करोड़ रुपये ही जमा है। जानकारों का कहना है कि इन प्रॉजेक्ट्स को पूरा करने में 2 लाख करोड़ से ज्यादा का खर्च अनुमानित है। इसीलिए, बीएमसी को पैसों की जरूरत है। इसी सिलसिले में बीएमसी हर हाल में अपनी आय बढ़ाने के नए स्रोत खोजने में जुटी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Oct 2025 12:28:54 +0530</pubDate>
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