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                <title>work - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>मुंबई में भूस्खलन: कांग्रेस नेता ने बीएमसी पर काम में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>कांग्रेस की मुंबई इकाई की अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने आरोप लगाया कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने मानसून से पहले किए गए कार्यों में लापरवाही बरती, जिसके कारण साकीनाका इलाके की एक चॉल भूस्खलन की चपेट में आ गई और सात लोगों की मौत हो गई।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51328/landslide-in-mumbai-congress-leader-accuses-bmc-of-negligence-in"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/varsha-gaikwad-1.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>कांग्रेस की मुंबई इकाई की अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने आरोप लगाया कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने मानसून से पहले किए गए कार्यों में लापरवाही बरती, जिसके कारण साकीनाका इलाके की एक चॉल भूस्खलन की चपेट में आ गई और सात लोगों की मौत हो गई।</p>
<p> </p>
<p>वर्षा ने आरोप लगाया कि बीएमसी प्रशासन ने अप्रैल में उनके अनुरोध पर कोई कार्रवाई नहीं की, जिसमें कुर्ला और घाटकोपर के संवेदनशील क्षेत्रों का सुरक्षा ऑडिट करने और खतरनाक स्थानों पर सुरक्षात्मक दीवारें बनाने की बात कही गई थी।</p>
<p>बुधवार तड़के भारी बारिश के बाद उपनगरीय घाटकोपर के साकीनाका इलाके में एक चॉल भूस्खलन की चपेट में आ गई, जिससे सात लोगों की मौत हो गई और इतने ही लोग घायल हो गए। दो और लोगों के मलबे के नीचे फंसे होने की आशंका के मद्देनजर बचाव अभियान देर शाम तक जारी रहा। वर्षा ने कहा, ‘‘दुर्भाग्य से संवेदनशील क्षेत्रों के ऑडिट और सुरक्षात्मक दीवारों के निर्माण की मेरी मांग पर बहुत कम काम किया गया।’’</p>
<p>उन्होंने भूस्खलन के लिए जिम्मेदारी तय करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। वर्षा ने बीएमसी पर मानसून से पहले पर्याप्त निवारक उपाय न करने और त्रासदी होने के बाद ही कार्रवाई करने का आरोप लगाया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 11:06:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : मनपा की हेरीटेज इमारत में लगे दीमक... घटिया काम करने वाले ठेकेदार पर होगी कार्रवाई!</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">बीएमसी मुख्यालय की विस्तारित इमारत के नवीनीकरण कार्य की जानकारी देते हुए स्थायी समिति अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने बताया कि यह काम 31 अगस्त 2009 को स्थायी समिति के प्रस्ताव के अनुसार शानदार इंटीरियर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को दिया गया था। बाद में कार्य की अवधि बढ़ाई गई और यह काम वर्ष 2023 तक जारी रहा। प्रभाकर शिंदे ने कहा कि संबंधित ठेकेदार ने अब तक किस गुणवत्ता का काम किया है और निर्माण कार्य में कितनी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है, इसकी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि काम में लापरवाही या घटिया गुणवत्ता पाई जाती है तो संबंधित ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। बीएमसी मुख्यालय जैसी ऐतिहासिक इमारत में दीमक और रखरखाव की समस्या सामने आने के बाद अब भवन की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50928/termite-infestation-in-municipal-corporations-heritage-building-action-will-be"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/88998.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई :</strong> बीएमसी के ऐतिहासिक मुख्यालय भवन में दीमक लगने का मामला सामने आया है। भवन के कई कार्यालयों में दीमक के कारण दरवाजे खराब हो गए हैं, वहीं महत्वपूर्ण दस्तावेजों को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। कुछ दिन पहले मुख्यालय में स्लैब गिरने की घटना के बाद अब इस मामले को लेकर बीएमसी की स्थायी समिति में गंभीर नाराजगी व्यक्त की गई। स्थायी समिति की बैठक में भाजपा नगरसेवक मकरंद नार्वेकर ने यह मुद्दा उठाया।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि बीएमसी मुख्यालय के कई कार्यालयों के दरवाजे दीमक से पूरी तरह खराब हो रहे हैं और रिकॉर्ड भी सुरक्षित नहीं हैं। इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान कई सदस्यों ने मुख्यालय परिसर में बढ़ती गंदगी, तिलचट्टों और चूहों की समस्या तथा केबिन और शौचालयों की खराब स्थिति पर भी सवाल उठाए। सदस्यों ने प्रशासन से पूछा कि क्या ऐतिहासिक बीएमसी भवन के नवीनीकरण और रखरखाव के लिए कोई ठोस योजना बनाई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">बीएमसी मुख्यालय की विस्तारित इमारत के नवीनीकरण कार्य की जानकारी देते हुए स्थायी समिति अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने बताया कि यह काम 31 अगस्त 2009 को स्थायी समिति के प्रस्ताव के अनुसार शानदार इंटीरियर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को दिया गया था। बाद में कार्य की अवधि बढ़ाई गई और यह काम वर्ष 2023 तक जारी रहा। प्रभाकर शिंदे ने कहा कि संबंधित ठेकेदार ने अब तक किस गुणवत्ता का काम किया है और निर्माण कार्य में कितनी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है, इसकी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि काम में लापरवाही या घटिया गुणवत्ता पाई जाती है तो संबंधित ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। बीएमसी मुख्यालय जैसी ऐतिहासिक इमारत में दीमक और रखरखाव की समस्या सामने आने के बाद अब भवन की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jul 2026 10:19:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का काम तेज, समुद्र के नीचे दूसरी टीबीएम ने भी शुरू की सुरंग की खोदाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p><span style="color:rgb(0,0,0);">मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना पूरी रफ्तार से आगे बढ़ रही है। इस कड़ी में महाराष्ट्र में ठाणे क्रीक (संकरी समुद्री खाड़ी) के नीचे रेल सुरंग बनाने के लिए दूसरी टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) ने खोदाई का काम शुरू कर दिया। इस काम को अंजाम दे रही नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) ने यह जानकारी दी। इसके मुताबिक, टीबीएम ने सावली (घंसोली) से विक्रोली की ओर खोदाई का काम शुरू किया। यह बुलेट ट्रेन परियोजना के 10 किलोमीटर लंबे भूमिगत हिस्से का भाग है, जिसमें सात किलोमीटर का सबसे अहम हिस्सा ठाणे क्रीक के समुद्र तल के नीचे बनेगा। यह किसी भी रेल गलियारे के लिए देश की पहली समुद्र के नीचे बनी सुरंग होगी।</span></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50831/6a5c654ead433"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/bullet-train-news-trains-1779016984914_d-1784395996996_d.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना पूरी रफ्तार से आगे बढ़ रही है। इस कड़ी में महाराष्ट्र में ठाणे क्रीक (संकरी समुद्री खाड़ी) के नीचे रेल सुरंग बनाने के लिए दूसरी टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) ने खोदाई का काम शुरू कर दिया। इस काम को अंजाम दे रही नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) ने यह जानकारी दी। इसके मुताबिक, टीबीएम ने सावली (घंसोली) से विक्रोली की ओर खोदाई का काम शुरू किया। यह बुलेट ट्रेन परियोजना के 10 किलोमीटर लंबे भूमिगत हिस्से का भाग है, जिसमें सात किलोमीटर का सबसे अहम हिस्सा ठाणे क्रीक के समुद्र तल के नीचे बनेगा। यह किसी भी रेल गलियारे के लिए देश की पहली समुद्र के नीचे बनी सुरंग होगी। समुद्र के नीचे वाला यह हिस्सा हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के 21 किलोमीटर लंबे भूमिगत नेटवर्क का हिस्सा है। इसमें से सावली और मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) के बीच 16 किलोमीटर का काम टीबीएम का इस्तेमाल करके किया जा रहा है, जबकि बाकी पांच किलोमीटर का हिस्सा न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड का इस्तेमाल से पहले ही पूरा किया जा चुका है। पहली टीबीएम ने इससे पहले पांच जुलाई को विक्रोली से बीकेसी की तरफ अपनी छह किलोमीटर की खोदाई शुरू की थी। एनएचएसआरसीएल का कहना है कि यह टीबीएम भारत में रेल सुरंग बनाने के लिए इस्तेमाल की गई अब तक की सबसे बड़ी मशीनों में से एक है। इस मशीन में चार मंजिला इमारत की ऊंचाई के बराबर का 13.6 मीटर व्यास वाला कटरहेड है। इसका वजन 500 एशियाई हाथियों के वजन के बराबर 3,200 टन है। पूरी मशीन की लंबाई 96 मीटर है। </p>
<p> </p>
<p><strong>पालघर में पुल गिरा, कटे दो गांव; नागपुर में ट्रेन की टक्कर से छह हिरणों की मौत</strong><br />महाराष्ट्र के पालघर जिले के वसई तालुका में शनिवार शाम एक बड़ा हादसा हुआ। यहां मेढे आंबोडे ग्राम पंचायत इलाके में एक पुल अचानक ढह गया। इस घटना की वजह से वडघर और कलंबोल गांवों का आपस में और बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। गनीमत रही कि हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ। जिला आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि ग्रामीणों की आवाजाही के लिए फिलहाल निर्माणाधीन मुंबई-वडोदरा एक्सप्रेसवे से एक अस्थायी रास्ता (बायपास) तैयार किया गया है। </p>
<p>दूसरी तरफ, नागपुर जिले में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। मुंबई-हावड़ा मुख्य रेल लाइन पर कन्हान रेलवे स्टेशन के पास एक तेज रफ्तार ट्रेन ने हिरणों के झुंड को कुचल दिया। यह हादसा शनिवार तड़के करीब 4 से 5 बजे के बीच हुआ, जब हिरण पटरी पार कर रहे थे। ट्रेन की टक्कर इतनी भीषण थी कि पांच मादा और एक नर हिरण की मौके पर ही मौत हो गई। स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस और वन विभाग की टीम ने शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।</p>
<p><strong>10 साल तक डीसीपी बनकर लाखों ठगे एएसआई गिरफ्तार</strong><br />महाराष्ट्र के मुंबई में पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) का भेष धर कई लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले रेलवे पुलिस के एक सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। अपराध शाखा के एक अधिकारी से शनिवार को मिली जानकारी के मुताबिक, आरोपी एएसआई मोहम्मद गौस इब्राहिम खतीब करीब 10 साल तक डीसीपी डॉ राज खतीबा बनकर ठगी करता रहा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Jul 2026 11:22:36 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में आया एक और रोड़ा, ₹40 हजार करोड़ के एक्स्ट्रा बोझ से रुक सकता है काम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर ने गुजरात हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने 'लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रीसेटलमेंट अथॉरिटी' द्वारा जमीन के मुआवजे में बढ़ोतरी के आदेश के बाद 1.1 लाख करोड़ रुपये के बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की लागत में भारी बढ़ोतरी की आशंका जताई है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50699/another-hurdle-in-mumbai-ahmedabad-bullet-train-project-work-may-stop"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-12t101737.627.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर ने गुजरात हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने 'लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रीसेटलमेंट अथॉरिटी' द्वारा जमीन के मुआवजे में बढ़ोतरी के आदेश के बाद 1.1 लाख करोड़ रुपये के बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की लागत में भारी बढ़ोतरी की आशंका जताई है। एडवोकेट जनरल कमल त्रिवेदी ने हाई कोर्ट को बताया कि बुलेट ट्रेन अथॉरिटी का अनुमान है कि 'लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रीसेटलमेंट अथॉरिटी' द्वारा जनवरी और फरवरी में जारी किए गए ज्यादा मुआवज़े के आदेशों से 40,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है, जिससे प्रोजेक्ट के जारी रहने पर खतरा पैदा हो सकता है। कोर्ट ने सूरत और भरूच जिलों से 'लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रीसेटलमेंट अथॉरिटी' के आदेशों को चुनौती देने वाली तीन अपीलें स्वीकार कर ली हैं।</p>
<p> </p>
<p>ये मामले भरूच जिले के अमोद तालुका के ओछन गांव में जमीन के टुकड़ों से जुड़े हैं। इन्हें 'राइट टू फेयर कंपनसेशन एंड ट्रांसपेरेंसी इन लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रीसेटलमेंट एक्ट' के तहत 2018 की अधिसूचना के बाद अधिग्रहित किया गया था।</p>
<p><strong>2020 में तय हुआ था मुआवजा </strong><br />2020 में, अधिग्रहण अथॉरिटी ने बाजार भाव के आधार पर मुआवज़ा 50 रुपये प्रति वर्ग मीटर तय किया था, जिससे एक मामले में मुआवज़ा 85.86 लाख रुपये बना था। ज़मीन मालिक ने मुआवज़ा बढ़ाने की मांग की, जिसके बाद 'लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रीसेटलमेंट अथॉरिटी' ने उसी जमीन के टुकड़े के लिए 660 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से 8.46 करोड़ रुपये मुआवज़ा देने का आदेश दिया। </p>
<p><strong>वकील ने गुजरात हाई कोर्ट को क्या बताया </strong><br />मुआवजे में लगभग दस गुना बढ़ोतरी को चुनौती देते हुए, एडवोकेट जनरल ने हाई कोर्ट को बताया कि 'लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रीसेटलमेंट अथॉरिटी' ने ओछन के पास के गांवों में जमीन की बिक्री के उदाहरणों को नजरअंदाज किया और इसके बजाय 14 किमी दूर स्थित सिमर्था गांव के आंकड़ों पर भरोसा किया। उन्होंने कहा कि 'लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रीसेटलमेंट अथॉरिटी' ने सिमर्था की 450 रुपये प्रति वर्ग मीटर की 'जंत्री' कीमत और वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़े 2013 के जमीन अधिग्रहण के मामले का इस्तेमाल किया, और फिर चार साल आठ महीने के लिए 10% सालाना बढ़ोतरी लागू करके 660 रुपये प्रति वर्ग मीटर की कीमत तय की। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Jul 2026 10:19:07 +0530</pubDate>
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