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                <title>safety - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>safety RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई: दमकल विभाग को 16 करोड़ की सुरक्षा सामग्री, कर्मियों को मिलेगी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई जैसे महानगर में आग की घटनाओं, इमारत दुर्घटनाओं, रेल हादसों अथवा किसी भी अन्य आपात स्थिति में लोगों की जान-माल बचाने के लिए फायर ब्रिगेड के जवान 24 घंटे तैनात रहते हैं। ऐसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी जान जोखिम में डालने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए मुंबई महानगरपालिका ने अब अत्याधुनिक 'स्व-सुरक्षा उपकरण संच' खरीदने का फैसला किया है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51641/mumbai-fire-department-will-get-relief-of-rs-16-crore"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/images---2026-09-01t125804.246.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>मुंबई जैसे महानगर में आग की घटनाओं, इमारत दुर्घटनाओं, रेल हादसों अथवा किसी भी अन्य आपात स्थिति में लोगों की जान-माल बचाने के लिए फायर ब्रिगेड के जवान 24 घंटे तैनात रहते हैं। ऐसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी जान जोखिम में डालने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए मुंबई महानगरपालिका ने अब अत्याधुनिक 'स्व-सुरक्षा उपकरण संच' खरीदने का फैसला किया है। इसमें अंतरराष्ट्रीय और भारतीय मानकों के अनुरूप कोट, ट्राउजर, हुड और ग्लव्स के 2,176 सेट शामिल हैं। इसके लिए करीब 15 करोड़ 99 लाख 96 हजार 249 रुपये का ठेका देने का प्रस्ताव प्रशासन स्थायी समिति की मंजूरी के लिए जल्द पेश किया जाएगा। </p>
<p> </p>
<p>सामग्री की आपूर्ति से पहले मान्यता प्राप्त तृतीय-पक्ष निरीक्षण संस्था द्वारा सामग्री की जांच की जाएगी। इसके बाद फायर ब्रिगेड द्वारा मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में नमूनों का परीक्षण किया जाएगा। इन सभी प्रक्रियाओं के बाद ही सामग्री जवानों को वितरित की जाएगी। ठेका आदेश मिलने के छह महीने के भीतर पूरा स्टॉक फायर ब्रिगेड को उपलब्ध कराना ठेकेदार के लिए अनिवार्य होगा। समय पर आपूर्ति नहीं होने पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान भी प्रस्ताव में किया गया है।</p>
<p>फायर ब्रिगेड के नियमों के अनुसार, घटनास्थल पर आग बुझाते समय अत्यधिक गर्मी से बचाव के लिए यह विशेष सुरक्षा ड्रेस पहनना अनिवार्य होता है। इससे पहले वर्ष 2017-18 और 2020-21 में यूरोपीय मानकों के अनुसार ऐसे ड्रेस खरीदे गए थे। नियमों के मुताबिक हर दो साल में इस ड्रेस को बदलना जरूरी होता है। इसलिए वर्तमान अवधि के लिए मुंबई मनपा ने करीब 18 करोड़ 11 लाख 60 हजार 704 रुपये का कार्यालयीन अनुमान तैयार कर ई-निविदा प्रक्रिया शुरू की थी। इस निविदा प्रक्रिया में चार नामी कंपनियों ने भाग लिया था।</p>
<p>हालांकि तकनीकी जांच के दौरान निर्धारित समय में जरूरी दस्तावेज जमा नहीं करने के कारण 'मेसर्स जय इंजीनियर्स' की निविदा को गैर-प्रतिक्रियाशील मानते हुए खारिज कर दिया गया। शेष तीन पात्र कंपनियों के व्यावसायिक लिफाफे खोले गए, इसमें 'मेसर्स अमी एंटरप्राइज' ने मनपा के कार्यालयीन अनुमान से 15.08 प्रतिशत कम दर पेश की। इसलिए सबसे कम दर देने वाली इस कंपनी से कोट, ट्राउजर, ग्लव्स और हुड के 2,176-2,176 नग खरीदने की मंजूरी देने की सिफारिश की गई है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 13:08:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : फायर सेफ्टी के नाम पर खानापूर्ति; -३ लाख से ज्यादा इमारतें फायर सेफ्टी से बाहर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई में गगनचुंबी इमारतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन उनकी आग से सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है, इसका जवाब बेहद डरावना है। मुंबई फायर ब्रिगेड के आंकड़ों के मुताबिक, शहर की ३ लाख से ज्यादा इमारतें फायर सेफ्टी के दायरे में पूरी तरह नहीं हैं। जनवरी से जून २०२६ के बीच महज ६,४४८ सोसाइटियों ने फॉर्म बी जमा किया यानी कुल इमारतों का लगभग २ फीसदी! सवाल सीधा है-बाकी ९८ फीसदी इमारतों में रहने वाले लाखों मुंबईकरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51392/khanpurti-in-the-name-of-mumbai-fire-safety-more"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/images---2026-08-16t121413.887.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई में गगनचुंबी इमारतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन उनकी आग से सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है, इसका जवाब बेहद डरावना है। मुंबई फायर ब्रिगेड के आंकड़ों के मुताबिक, शहर की ३ लाख से ज्यादा इमारतें फायर सेफ्टी के दायरे में पूरी तरह नहीं हैं। जनवरी से जून २०२६ के बीच महज ६,४४८ सोसाइटियों ने फॉर्म बी जमा किया यानी कुल इमारतों का लगभग २ फीसदी! सवाल सीधा है-बाकी ९८ फीसदी इमारतों में रहने वाले लाखों मुंबईकरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?</p>
<p> </p>
<p>विलेपार्ले-पश्चिम की शांता भुवन सोसाइटी में लगी आग ने इस लापरवाही की पोल खोल दी। वरिष्ठ अग्निशमन अधिकारियों के अनुसार, वहां फायर सेफ्टी सिस्टम का कुछ हिस्सा ही काम कर रहा था। ऐसे में सवाल उठता है कि हादसे के बाद दमकल की गाड़ी पहुंच भी जाए तो यदि अलार्म, उपकरण या आपातकालीन व्यवस्था ही न चले तो जान बचाएगा कौन?</p>
<p><strong>नियम हैं, लेकिन कार्रवाई का डंडा कहां?</strong><br />हर छह महीने में सेल्फ-सेफ्टी दाखिल करने की व्यवस्था है, लेकिन नियमों का पालन नहीं करने वालों पर दमकल विभाग सीधे कार्रवाई नहीं कर सकता। स्टाफ की कमी के कारण हर इमारत का नियमित निरीक्षण भी मुश्किल है। न प्रभावी जुर्माना, न कड़ी कार्रवाई और न ही अनुपालन करने वालों के लिए कोई प्रोत्साहन—ऐसे में फायर सेफ्टी भी कागजी खानापूर्ति बनकर रह गई है।</p>
<p>मुंबई जैसे घनी आबादी वाले शहर में यह लापरवाही किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है। सरकार और मनपा को अब चेतना होगा। आग लगने के बाद दमकल भेजना समाधान नहीं; आग लगने से पहले सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। सवाल यह है कि प्रशासन कब जागेगा—हादसे से पहले या फिर लाशें गिनने के बाद?</p>
<p><strong>फायर सेफ्टी बनी कागजी खानापूर्ति!</strong><br />मुंबई में हजारों इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में है। फायर सेफ्टी के लिए जरूरी फॉर्म बी जमा करने वाली सोसाइटियों की संख्या बेहद कम है। स्टाफ की कमी और कमजोर कार्रवाई से नियमों का डर खत्म होता दिख रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक रैंडम जांच, भारी जुर्माना और सख्त कार्रवाई ही हादसों को रोक सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 12:15:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुणे: खाद्य सुरक्षा उल्लंघन पर फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन सख्त, लाइसेंस निलंबित</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और खराब साफ-सफाई व्यवस्था के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। एफडीए की पुणे डिवीजन टीम ने पुणे, सतारा और कोल्हापुर जिलों में जांच अभियान चलाकर 21 फूड एस्टेब्लिशमेंट के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। यह कार्रवाई 'सेफ फूड, सेफ ड्रग, सेफ महाराष्ट्र' अभियान के तहत की गई। अधिकारियों ने बताया कि 23 जुलाई से 28 जुलाई के बीच चलाए गए विशेष निरीक्षण अभियान में कई खाने-पीने की जगहों पर खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाई गई। इसके बाद संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की गई। </p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51066/pune-food-and-drug-administration-suspends-strict-license-over-food"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/lc2rle3s_fda_625x300_24_july_26.webp" alt=""></a><br /><p><strong>पुणे: </strong>महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और खराब साफ-सफाई व्यवस्था के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। एफडीए की पुणे डिवीजन टीम ने पुणे, सतारा और कोल्हापुर जिलों में जांच अभियान चलाकर 21 फूड एस्टेब्लिशमेंट के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। यह कार्रवाई 'सेफ फूड, सेफ ड्रग, सेफ महाराष्ट्र' अभियान के तहत की गई। अधिकारियों ने बताया कि 23 जुलाई से 28 जुलाई के बीच चलाए गए विशेष निरीक्षण अभियान में कई खाने-पीने की जगहों पर खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाई गई। इसके बाद संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की गई। </p>
<p> </p>
<p>एफडीए अधिकारियों के अनुसार, अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना था। इसके लिए होटल, रेस्टोरेंट, बेकरी, फूड डिलीवरी और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच की गई। जांच के दौरान साफ-सफाई की स्थिति, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, स्टोरेज व्यवस्था और खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन की जांच की गई। अधिकारियों ने बताया कि जिन प्रतिष्ठानों में गंभीर कमियां पाई गईं, उनके लाइसेंस को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया है। एफडीए ने स्पष्ट किया है कि जब तक संबंधित प्रतिष्ठान निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करते, तब तक उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।</p>
<p>पुणे शहर और आसपास के क्षेत्रों में कई प्रमुख खाद्य प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की गई। इनमें विमान नगर स्थित ब्लिंकइट कॉमर्स प्राइवेट लिमिटेड, प्रभात रोड स्थित होटल लक्ष्मण, मुंधवा स्थित पंजाबी शेफ, भवानी पेठ स्थित मदीना फैमिली रेस्टोरेंट, सिंहगढ़ रोड स्थित हिना बेकरी, मुंधवा स्थित माधव बिरयानी और नर्हे स्थित इंडियन बेकरी शामिल हैं। एफडीए की टीम ने इन प्रतिष्ठानों में निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों के आधार पर लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई की। अधिकारियों ने कहा कि खाद्य कारोबारियों को नियमों का पालन करना अनिवार्य है और किसी भी तरह की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।</p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े शहरों में बाहर खाना खाने और ऑनलाइन फूड डिलीवरी का चलन तेजी से बढ़ा है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा मानकों को बनाए रखना और भी महत्वपूर्ण हो गया है। थोड़ी सी लापरवाही भी लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है। एफडीए ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे खाने-पीने की जगहों पर साफ-सफाई और गुणवत्ता पर ध्यान दें। यदि किसी प्रतिष्ठान में खराब भोजन, गंदगी या खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कोई समस्या नजर आती है तो इसकी शिकायत संबंधित विभाग से करें। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में इस तरह के निरीक्षण अभियान जारी रहेंगे। केवल लाइसेंस निलंबन तक सीमित रहने के बजाय नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों पर आगे भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है। एफडीए की यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विभाग का कहना है कि अभियान का उद्देश्य किसी व्यवसाय को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि लोगों को सुरक्षित और स्वच्छ भोजन मिले। फिलहाल 21 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं और संबंधित संचालकों को खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। एफडीए की जांच और कार्रवाई आगे भी जारी रहने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 10:42:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ठाणे: नागरिकों की सुरक्षा के लिए मेयर का बड़ा निर्देश </title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई में  एक स्कूल बस पर पेड़ गिरने से हुए हादसे के बाद, ठाणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने तुरंत एहतियाती कदम उठाए हैं। मेयर शर्मिला पिंपोलकर ने आज मेयर ऑफिस में वृक्ष प्राधिकरण विभाग (ट्री अथॉरिटी डिपार्टमेंट) की तुरंत मीटिंग की और शहर में खतरनाक पेड़ों का पूरा सर्वे करने का आदेश दिया।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50520/mayors-big-instructions-for-the-safety-of-thane-citizens"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-03t104021.713.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>ठाणे: </strong>मुंबई में  एक स्कूल बस पर पेड़ गिरने से हुए हादसे के बाद, ठाणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने तुरंत एहतियाती कदम उठाए हैं। मेयर शर्मिला पिंपोलकर ने आज मेयर ऑफिस में वृक्ष प्राधिकरण विभाग (ट्री अथॉरिटी डिपार्टमेंट) की तुरंत मीटिंग की और शहर में खतरनाक पेड़ों का पूरा सर्वे करने का आदेश दिया।</p>
<p> </p>
<p>ठाणे मनपा की तरफ से आज बताया गया कि शहर में स्कूलों, कॉलेजों, हाउसिंग सोसाइटी, अस्पतालों, मुख्य ट्रैफिक सड़कों, पब्लिक जगहों और ज़्यादा लोगों वाले इलाकों में पेड़ों का खास इंस्पेक्शन किया जाना चाहिए। मेयर शर्मिला पिंपोलकर ने निर्देश दिया कि जिन जगहों पर पहले पेड़ों की टहनियों की छंटाई की गई है, वहां भी दोबारा सर्वे किया जाए ताकि यह पक्का हो सके कि पेड़ों की हालत ठीक है या नहीं। </p>
<p>खतरनाक, सूखे या मुड़े हुए पेड़ों के साथ-साथ बड़ी टहनियों की तुरंत पहचान की जाए और ज़रूरी कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि संभावित हादसों को रोकने के लिए संबंधित डिपार्टमेंट मिलकर काम करें और बचाव के उपाय तुरंत लागू करें। इस मौके पर, मेयर ने सड़क किनारे काटी गई पेड़ों की टहनियों को तुरंत हटाने का भी आदेश दिया।</p>
<p>मानसून के दौरान, ऐसी टहनियां ट्रैफिक में रुकावट डाल सकती हैं और हादसों का खतरा बढ़ा सकती हैं। इसलिए, संबंधित अधिकारियों को यह पक्का करने का निर्देश दिया गया कि छंटाई के बाद कोई भी टहनियां कहीं पड़ी न रहें। मेयर ने यह भी निर्देश दिया कि वृक्ष प्राधिकरण विभाग ट्री (अथॉरिटी डिपार्टमेंट )मानसून को देखते हुए सतर्क रहे और नागरिकों की सुरक्षा को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता दे। मेयर शर्मिला पिंपोलकर ने यह भी कहा कि नागरिक उन पेड़ों के बारे में तुरंत नगर निगम को बताएं जिन्हें वे खतरनाक मानते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 10:41:32 +0530</pubDate>
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